kuldeep yadav biography in hindi | चायनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव का जीवन परिचय

kuldeep yadav biography in hindi-भारतीय क्रिकेट टीम के पहले चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव उत्तरप्रदेश राज्य से बिलोंग करते हैं| जिन्होंने वर्ष 2017 में टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में डेब्यू किया हैं| यादव इससे पूर्व मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाईट राइडर्स के लिए खेल चूके हैं 22 वर्षीय kuldeep yadav घरेलू क्रिकेट उत्तरप्रदेश राज्य की ओर से खेलते हैं| भारत-वेस्टइंडीज क्रिकेट सीरिज 2017 में इन्होने अपना पहला मैच खेला| आज के इस लेख में yadav history in hindi में अब तक के कुलदीप यादव के क्रिकेट करियर उनके बचपन और प्रष्टभूमि के बारे में विस्तार से जानकारी हिंदी में दी जा रही हैं|

kuldeep yadav biography in hindi

क्रमांक जीवन परिचय बिंदु  कुलदीप यादव जीवन परिचय
1. पूरा नाम  कुलदीप यादव
2. धर्म  यादव, हिन्दू
3. जन्म 14 दिसंबर 1994
4. जन्म स्थान कानपुर यूपी
5. माता-पिता राम सिंह यादव,उषा यादव
6. विवाह
7. भाई बहिन 1. मधु यादव

2. अनीता यादव

3. अनुष्का यादव

8. व्यवसाय क्रिकेटर

चायनामैन गेंदबाज के नाम से विख्यात kuldeep yadav का जन्म 14 दिसम्बर 1994 को उत्तरप्रदेश के कानपूर शहर में हुआ था| इनकी वर्तमान आयु ( kuldeep yadav age) 22 वर्ष हैं| बचपन से ही पढ़ाई की बजाय इनका ध्यान क्रिकेट में था| ये बड़ा खिलाड़ी बनना चाहते थे| अपने बेटे का सपना पूरा करने में इनके पिताजी रामसिंह यादव ने भरपूर योगदान दिया| ईट के भट्टे का बिजनेस करने वाले रामसिंह ने अपने बेटे को क्रिकेट में आगे बढाने के लिए अपना भट्टा तक बेच दिया|

इन्हे घर में भी चाइनामैन गेदबाज के नाम से बुलाते हैं| बचपन में पढ़ाई की बजाय खेलकूद में ज्यादा रूचि रखने के कारण माँ इन्हे पढने का जोर देती थी| फिर इन्हें लगा kuldeep yadav का मन तो खेल में ही हैं, फिर उन्होंने भी टोकना बंद कर दिया|

kuldeep yadav family

कुलदीप रामसिंह यादव की तीसरी सन्तान हैं एकलोते बेटे हैं| इनसे दो बड़ी और एक छोटी बहिन हैं| kuldeep yadav की बड़ी बहिनों के नाम अनीता यादव और मधु यादव हैं इनकी शादी हो चुकी हैं छोटी बहिन का नाम अनुष्का यादव हैं जो अभी पढ़ाई कर रही हैं| इनके पापा पहले मजदूरी का काम करते थे| जबकि माँ घर का काम करती हैं|

बता दे kuldeep yadav की शादी अभी तक नही हुई हैं| न ही उनके कोई गर्लफ्रेंड हैं न इन्हे दोस्त बनाना अच्छा लगता हैं| शर्मीले स्वभाव के यादव अकेला रहना पसंद करते हैं| इनके दोस्तों की सूचि बेहद सकीर्ण हैं| कहते हैं जो स्कुल के साथी थे अभी भी वही हैं इस सूचि में नए नाम जुड़े ही नही| kuldeep yadav इधर उधर की बातो में ध्यान नही देते हैं, अर्जुन के निशाने की तरह बस क्रिकेट ही उनके जीवन का पर्याय हैं| 23 जून को वो सपना पूरा हो गया| जो रामसिंह यादव ने देखा था| आज उनका बेटा क्रिकेटर हैं| देश के लिए खेल रहा हैं जिन पर हमे गर्व हैं|

kuldeep yadav Early Life & Childhood

कुलदीप यादव की बचपन में दिनचर्या खेल के साथ ही गुजरती थी|

ये अपने दोस्तों के साथ गली में पुरे दिन क्रिकेट खेला करते थे|

अब तक माता-पिता ने इनकी रूचि पर कोई ख़ास ध्यान नही दिया|

मगर 10 वर्ष तक आते-आते क्रिकेट के प्रति kuldeep yadav की बढती लग्न देखकर उसे एक अच्छे की तलाश में जुट गये|

रामसिंह बताते हैं उन्होंने कपिल यादव को कुलदीप के कोच बनाया और बेटे के खेलने के लिए अपने इट का भट्टा बेचकर एक बेहतरीन मैदान बनवाया| जब गुरु शिष्य पहली बार मिले तो उन्होंने कुलदीप से पूछा बेटा बॉल लोगे या बैट| kuldeep yadav ने बॉल को ही चुना| उन्हें तेज गेदबाजी करने को कहा मगर कोई ख़ास प्रभावशाली नही थी|इस पर कपिल यादव ने कुलदीप को स्पिन गेदबाजी करने को कहा- कोच ने जब नजारा देखा तो हक्के बक्के रह गये| जिस काम के लिए उन्हें लगाया वो तो पहले ही सिख चूका था| यादव को बारह बॉल डालने को कहा गया| लगातार चार गेद में चारों बार बल्लेबाज बोल्ड आउट|

बस यही से kuldeep yadav  को चाइनामैन कहा जाने लगा|

Kuldeep Yadav’s cricket starts

शहर का नामी बोलर होने के बावजूद इन्हें उपरी स्तर में चयन बड़ी मुशिकल से मिला|

Kuldeep Yadav को अच्छा खिलाड़ी बनाने के लिए पिता ने सब-कुछ किया जितना वो कर सकते थे|

उनका जूनून इतना था कि ये बॉल और बैट के साथ ही सोया करते थे|

उस समय कमला देवी क्लब जो 10 वर्ष से कम आयु के लिए था|

Kuldeep Yadav का चयन नही हुआ पिता और कोच ने हार नही मानी|

उनकी मेहनत आखिर फल लाई और दो वर्ष बाद अंडर 12 में Kuldeep Yadav का चयन हो गया|

अगले वर्ष इन्हे करमा देवी मेमोरियल क्रिकेट क्लब में दाखिला दिलाया|

अच्छी क्रिकेट ट्रेनिग और हुनर के बल पर कुलदीप का चयन अंडर 15,16,17,18,19 में होता चला गया|

कुछ ही वर्षो में kuldeep yadav ने उत्तरप्रदेश की राज्य टीम की ओर से खेलना शुरू कर दिया|

डोमेस्टिक सीजन में अच्छा खेलने के बाद इन्हे भारतीय टीम और आईपीएल टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला|

इस युवा क्रिकेटर के क्रिकेट करियर में अभी तक ज्यादा आकड़े नही बने हैं|

Kuldeep Yadav’s cricket career

आपकों एक रोचक जानकारी बता दे kuldeep yadav भारत के पहले और एशिया महाद्वीप के दुसरे चाइनामैन गेदबाज बन चुके हैं|

kuldeep yadav के डेब्यू से पहले श्रीलंका के लक्ष्ण रन्गिका ने पिछले साथ अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था|

कुलदीप यादव ने 23 जून 2017 को वेस्टइंडीज की धरती पर अंतराष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में डेब्यू किया था|

इसके साथ ही भारतीय एकादश में जगह पाने वाले 217 वें खिलाड़ी बन गये हैं|

कुलदीप यादव ने आईपीएल 10 में कोलकाता की ओर से खेले इन्होने सभी 12 मैच में 12 विकेट चटकाए हैं|

इसी वर्ष ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धर्मशाला में खेले गये टेस्ट मैच में यादव ने टेस्ट में पर्दापण किया था|

अपने पहले ही टेस्ट मैच में चाइनामैन kuldeep yadav ने चार विकेट चटकाए थे|

कुलदीप यादव को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले एकदिवसीय मैच में मैदान में उतरने का अवसर तो मिला मगर मैच के रद्द हो जाने के कारण उन्हें न तो बैटिंग मिली न बोल्लिंग| भारत ने इस मैच में पहले खेलते हुए 3 विकेट खोकर 199 रन बना लिए थे| तभी बारिश आ गयी थी| जिसकी वजह से मैच को आगे तक जारी नही रख सके और इसे रद्द कर दिया गया|

चाइनामैन बॉलिंग क्या हैं?

बहुत से लोगों के जेहन में ये सवाल आया होगा| ये चायनामैन बोलिंग क्या होती हैं| चायनामैन एक स्पिनर ही होता हैं इस शब्द को सबसे पहली बार 1933 में गढ़ा गया| यह एक गेदबाजी की शैली हैं| अक्सर आपने गौर किया हो तो स्पिनर बॉल को अगुलियो के सहारे घुमाते हैं | और यही से उन्हें पर्याप्त टर्न मिलता हैं|

मगर चायनामैन गेदबाज बॉल को अगुलियो का हथेली की बजाय कलाई के सहारे स्पिन करवाता हैं| बाल टर्न लेंने के बाद ऑफ स्टाम्प की तरफ आती हैं| यह बोलिंग की सबसे रहस्य मयी कला हैं| वैसे भी स्पिनर को समझना और पढ़ना बेहद मुश्किल रहता हैं कि वो क्या और कैसी गेद डालने वाला हैं|

फिर यदि कोई कलाई से गेद करे तो बाद आने के बाद ही पता चलता हैं यह कैसी हैं|

चायनामैन की गुगली बॉल सबसे खतरनाक होती हैं|

बल्लेबाज को इसका अंदाजा नही होता कि गुगली आने वाली हैं

और बॉल स्टाम्प उखाड़ जाती हैं ऐसे ही हैं kuldeep yadav.

इस नाम के उदभव के पीछे एक रोचक कहानी हैं|

इंडीज इंग्लैंड मैच के दोरान रॉबिन्स बल्लेबाजी कर रहे थे|

बोलिंग अटैक पर एलिस एचोंग आए जो कलाई से गेद डालते थे| इस पर रॉबिन्स आउट हो गये|

जब रॉबिन्स पवैलियन गये तो बोले ‘यह एक निर्दयी चायनामैन ने आउट कर दिया|

एलिस एचोंग चीनी वंश के थे तभी से इस शैली के गेदबाजों को चाइनामेन के नाम से बुलाने लग गये|

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