जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध Essay On Population Growth In Hindi

जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध Essay On Population Growth In Hindi दुनिया की आधी से अधिक आबादी दक्षिण एशिया में बसती हैं विश्व की कुल जनसंख्या का 1/6 वाँ भाग हम भारतीय हैं. तेजी से हो रहे जनसंख्या के विस्फोट के चलते नित्य नई समस्याएं हमारे सामने आ रही हैं. अधिकतर समस्याओं का मूल कारण तेज जनसंख्या वृद्धि  ही हैं. आज हम भारत की Population Explosion पर निबंध (Essay) यहाँ साझा कर रहे हैं.

जनसंख्या वृद्धि पर निबंध Essay On Population Growth In Hindi

जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध Essay On Population Growth In Hindi

Overpopulation In India In Hindi प्रिय विद्यार्थियों आज हम आपके साथ जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध साझा कर रहे हैं कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के बच्चों के लिए सरल भाषा में छोटा बड़ा हिंदी निबंध 100, 200, 250, 300, 400, 500 शब्दों में Essay On Problem Of Population Growth In Hindi का निबंध बता रहे हैं.

जनसंख्या वृद्धि की समस्या पर निबंध Population Problem in India in Hindi

प्रस्तावना– आज भारत की जनसंख्या एक अरब पच्चीस करोड़ से ऊपर जा पहुची हैं. महान भारत की इस उपलब्धि पर भी इतराने वाले कुछ विचार विमूढ़ हो सकते हैं.

हर बुद्धिमान व्यक्ति जानता हैं कि जनसंख्या का यह दैत्याकार रथ विकास के सारे कीर्तिमानों को रौदता हुआ देश के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रहा हैं.

बढ़ती जनसंख्या की समस्या– भारत की जनसंख्या में अनियंत्रित वृद्धि सारी समस्याओं का मूल कारण बनी हुई हैं. गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, अपराध वृद्धि, तनाव, असुरक्षा सभी जनसंख्या वृद्धि के ही परिणाम हैं.

भारत के विश्व की महाशक्ति बनने के सपने जनसंख्या के प्रहार से ध्वस्त होते दिखाई दे रहे हैं. एक अनार सौ बीमार यह कहावत चरितार्थ हो रही हैं.

जनसंख्या वृद्धि के महा अश्वमेध का घोडा शेयर बाजार के उफान, मुद्रा कोष की ठसक, विदेशी निवेश की दमक सबको अंगूठा दिखाता आगे आगे दौड़ रहा हैं.

जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणाम– जनसंख्या और उत्पादन दर में चोर सिपाही का खेल होता रहता हैं. जनसंख्या वृद्धि आगे आगे दौड़ती हैं और पीछे पीछे उत्पादन वृद्धि, वास्तविकता यह हैं कि उत्पादन वृद्धि के सारे लाभ जनसंख्या की वृद्धि व्यर्थ कर देती हैं.

आज हमारे देश में यही हो रहा हैं. जनसंख्या वृद्धि सारी समस्याओं की जननी हैं. बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, कृषि भूमि की कमी, उपभोक्ता वस्तुओं का अभाव, यातायात की कठिनाई सबके मूल में यही बढ़ती जनसंख्या हैं.

नियंत्रण के उपाय– आज के विश्व में जनसंख्या पर नियंत्रित रखना प्रगति और समृद्धि के लिए अनिवार्यत आवश्यकत हैं. भारत जैसे विकासशील देश के लिए जनसंख्या नियंत्रण परम आवश्यक हैं.

जनसंख्या पर नियंत्रण के अनेक उपाय  हैं.  वैवाहिक आयु में वृद्धि करना एक सहज उपाय हैं. बाल विवाहों पर कठोर नियंत्रण होना चाहिए.

दूसरा उपाय संतति निग्रह अर्थात छोटा परिवार हैं. परिवार नियोजन के अनेक उपाय आज उपलब्ध हैं. तीसरा उपाय राजकीय सुविधाएं उपलब्ध कराना हैं.

परिवार नियोजन अपनाने वाले व्यक्तियों को वेतन वृद्धि देकर पुरस्कृत करके तथा नौकरियों में प्राथमिकता देकर भी जनसंख्या नियंत्रण को प्रभावी बनाया जा सकता हैं.

इनके अतिरिक्त शिक्षा के प्रसार द्वारा तथा धार्मिक और सामजिक नेताओं का सहयोग भी जनसंख्या नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं.

ये सभी तो प्रोत्साहन और पुरस्कार से संबंधित हैं किन्तु कठोर दंड के भय के बिना विशेष सफलता नहीं मिल सकती, धर्म जाति के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवस्था के रहते हुए जनसंख्या पर नियंत्रण असम्भव हैं.

उपसंहार– आज देश के सामने जितनी समस्याएं हैं. प्रायः सभी के मूल में जनसंख्या वृद्धि ही मुख्य कारण दिखाई देता हैं जनता और सरकार दोनों ने ही इस भयावह समस्या से आँखें बंद कर रखी हैं.

इस खतरे की घंटी की आवाज को अनसुना किया जा रहा हैं कहीं ऐसा न हो कि यह सुप्त ज्वालामुखी एक दिन अपने विकट विस्फोट से राष्ट्र के कुशल क्षेम को जलाकर राख कर दे.

जनसंख्या वृद्धि पर निबंध समस्या और समाधान सहित (Essay on Population problem in Hindi)

यदि यह कहा जाय कि बढ़ती जनसंख्या देश की सारी समस्याओ की जड़ है तो यह बात बहुत कुछ सच माननी पड़ेगी. बाजारों में चलना दुश्वार है, रेलों और बसों में मारामार है, मंहगाई से हाहाकार है,

राशन पानी, नोकरी के लिए लम्बी कतार है, एक खली जगह के लिए प्रार्थना पत्र हजारों हजार हैं. सिर्फ जनसंख्या वृद्धि के कारण सारे विकास कार्यो का बंटाढार है संक्षेप कहें तो ‘सौ बीमार हैं. और एक अनार है.

यह देश लगभग एक जनसंख्या व्रद्धी के कारण जनसंख्या में व्रद्धी के अनेक कारण है. धार्मिक अंधविश्वास इसका एक प्रमुख कारण हैं. सन्तान को इश्वर का वरदान मानने वाले लोग इसके लिए जिमेदार हैं. चाहे खिलाने के लिए रोटी, पहनाने के लिए वस्त्र पढाने को धन और रहने को छप्पर न हो.

लेकिन ये मूढ़ लोग भूखे, अधनंगे, अनपढ बच्चों की कतारे खड़ी करने में नही शरमाते. पुत्र को पुत्री से अधिक महत्व देना, गरीबी, बाल विवाह, असुरक्षा की भावना आदि अन्य कारण भी जनसंख्या को बढ़ाने वाले हैं.

बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम

जनसंख्या की अबाध वृद्धि ने संदेस में अनेक समस्याएँ खड़ी कर दी हैं. विकट बेरोजगारी, हाहाकार मचाती मंहगाई, गरीबी, अशिक्षा, बढ़ते अपराध, कुपोषण, बढ़ता प्रदूषण आदि जनसंख्या वृद्धि के ही कुपरिणाम हैं. बिजली, पानी, सड़क एंव स्वास्थ्य सेवाएँ दुर्लभ होते जा रहे है.

जनसख्या का यह विकराल देत्य सारे विकास कार्यो और प्रगति को हजम कर जाता है राजनेता भी इसके लिए कम जिमेदार नही है इस राष्ट्रीय समस्या पर भी उनका द्रष्टिकोण सम्प्रदायवादी हैं.

नियत्रण के उपाय

जनसख्या पर नियत्रण किया जाना अत्यंत आवश्यक है इस समस्या के हल के लिए विवाह की न्युन्तम आयु में वृद्धि को सीमित रखने के उपायों का समुचित प्रसार होना चाहिए सरकार की और से छोटे परिवार वालो को प्रोत्साहन और विशेष सुविधाए मिलनी चाहिए मनोवेग्यानिक प्रसार भी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है

किन्तु वह आज कल टीवी पर दिखाई जाने वाले भोंडे और अश्लील विज्ञापनों जैसा न हो. इसके अतिरिक्त कुछ कठोर उपाय भी अपनाने होगे.

दो बच्चों से अधिक पैदा करने वालो को रसं की सुविधा से वंचित किया जाए आरक्षण या छुट केवल दो या तीन बच्चों तक ही सीमित रहे धर्माचार्यो को भी अधवीश्वासो पर प्रहार करते हुए लोगों को सही मार्गदर्शन करना चाहिए.

बढ़ती जनसंख्या पूरी मानव जाती के लिए खतरे की घटीं हैं. यदि हम इसी तरह आखं बंद करके जनसंख्या बढ़ाते रहे तो हमारी धरती एक दिन भूखी –नंगी, उजाड़ और हिसक मनुष्यों की निवास स्थली बनकर रह जायेगी.

जनसंख्या वृद्धि समस्या पर निबंध | Population Problems Essay In Hindi

वर्तमान शताब्दी में विश्व अनेक समस्याओं से घिरा हुआ है. कही कही अकाल एवं जलाभाव की समस्या है, तो कही कुपोषण की समस्या, कही पड़ोसी देशों की कलह से अशांति का वातावरण विद्यमान है.

परन्तु इन सभी से प्रबल समस्या है, जनसंख्या की समस्या. जनसंख्या की असीमित वृद्धि से न केवल भारत, अपितु अन्य देश भी आक्रांत है. नवविकसित एवं विकासशील देशों में तो यह मुख्य समस्या बन गई है.

जनसंख्या वृद्धि एक समस्या (essay on population)

जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो उस समय हमारे देश की कुल जनसंख्या लगभग तैतीस करोड़ थी परन्तु आज यह एक अरब से अधिक हो गई है जनसंख्या की इस असीमित वृध्दि से रोजगार के अवसर कम हुए है इस कारण बेरोजगारी बढ़ी है इसी समस्या के कारण खाद्यान्न की कमी हो रही है.

शहरों के समीप की उपजाऊ भूमि पर औद्योगिक उपनगर बस रहे है चारागाह भी उजाड़ रहे है वन काटे जा रहे है अधिक यातायात की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सड़को का निर्माण हो रहा है बाँध बनाये जा रहे है.

नये उद्योघ एव शिक्षण संस्थान खड़े किये जा रहे है इन सब पर देश का अपार धन व्यय हो रहा है इस प्रकार वर्तमान में हमारे देश में जीतनी भी अन्य समस्याएं है. उनके मूल में जनसंख्या वृद्धि ही समस्या है.

जनसंख्या वृद्धि के कारण (problems due to population growth)

जनसंख्या वृद्धि के अनेक कारण है. हमारे देश में स्वतंत्रता मिलने के तुरंत बाद जनसंख्या वृद्धि पर कोई नियन्त्रण नही था. उस समय परिवार नियोजन के साधन भी नही थे. अंधविश्वास और धार्मिक कट्टरता के कारण कुछ लोग अधिक सन्तान पैदा करने में ही अपना गौरव समझते थे.

निम्न वर्ग के लोग सोचते थे कि अधिक सन्तान होने से घर में कमाने वाले अधिक सदस्य हो जाएगे. कुछ लोग अधिक सन्तान का होना ईश्वरीय कृपा मानते है. इन सभी कारणों से नव स्वतंत्र भारत में जनसंख्या की विस्फोट वृद्धि हुई है.

जनसंख्या नियंत्रण के उपाय (population control measures in india)

जनसंख्या की तीव्रगति से वृद्धि को देखकर सरकार ने अनेक कदम उठाए है. प्रारम्भ में परिवार नियोजन के साधनों का प्रसार किया गया, फिर पुरुष एवं स्त्री नसबंदी कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया. जनता में परिवार नियोजन की चेतना जागृत की गई.

सरकारी नौकरियों में दो सन्तान से अधिक पर स्वैच्छिक प्रतिबंध लगाया गया है. कम उम्र में युवक युवतियों के विवाह को रोकने का भी कानून बनाया गया है. परिवार नियोजन के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी गई है. इस तरह के उपाय करने से जनसंख्या वृद्धि पर कुछ हद तक अंकुश लगा है.

जनसंख्या एक समस्या और इसका समाधान (population problem of india and its solution)

जनसंख्या की असीमित वृद्धि से हमारे देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है. विकास की तीव्रगति भी लाभकारी दिखाई नही दे रही है.

जब प्रत्येक व्यक्ति परिवार नियोजन को प्राथमिकता देगा, तभी जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश लग सकेगा. अपने समाज तथा देश की खुशहाली के लिए अब यह नियंत्रण जरुरी है.

जनसंख्या वृद्धि का पर्यावरण पर प्रभाव Impact Of Population Growth On Environment Essay In Hindi

भारत की भूमि का क्षेत्रफल विश्व की धरती का कुल 2.4% ही है. जबकि यहाँ की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का पांचवां भाग है. यहाँ हर वर्ष एक नया ऑस्ट्रेलिया बन जाता है. अतः यहाँ कृषी भूमि के लिए अभाव पैदा हो गया है.

इसके परिणामस्वरूप हजारों वर्षो से हमारी सुख सम्रद्धि में योगदान कर रहे वनों को काटा जा रहा है. आवास की बढ़ती हुई समस्या के कारण यहाँ हरे भरे वनों के स्थान पर कंक्रीट के जंगल बन गये है. इससे हमकों दोहरा नुक्सान हो रहा है.

एक तो खेती के लिए भूमि का अभाव हो रहा है. दूसरा जंगलो के काटने से प्रदूषण सुरसा की तरह मुँह फैला रहा है. हमारी अमूल्य वन संपदा का विनाश, दुर्लभ वनस्पतियों का अभाव, वर्षा पर घातक प्रभाव और दुर्लभ जंगली जंगलो के लोप का भय पैदा हो गया है.

जंगलो के काटने से हमारी प्राकृतिक आपदाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. हस्त शिल्प और कुटीर उद्योगों के चौपट होने के कारण ग्रामवासी आजीविका की खोज में गाँव छोड़कर शहरों में बसते जा रहे है.

इससे शहरों में कुपोषण अपराध और आवास की विकट समस्या खड़ी हो गई है. नगरो में भीषण गंदगी और अवैध बस्तियां का निर्माण हो रहा है. प्रदूषण रोगों में असाधारण वृद्धि, कमरतोड़ महंगाई तथा समुचित चिकित्सा सुविधाओं की कमी ने शहरी जीवन को नरकीय बना दिया है.

अधिक जनसंख्या के लिए अधिक मात्रा में खाद्यान की आवश्यकता होती है. धरती से अधिक उपज के लोभ में रासायनिक खादों का उपयोग किया जाता है. इस खादों के प्रयोग से एक ओर तो जहाँ अनाज और सब्जियों का जहाँ स्वाभाविक स्वाद खत्म हो गया है दूसरी तरफ खादों के रूप में विष पेट में जा रहा है.

यह विष नाना प्रकार के रोगों को जन्म देता है भारत में जनसंख्या वर्द्धि के अनेक कारण है. अज्ञानता शिक्षा की कमी तथा भाग्यवाद जनसंख्या वृद्धि के मुख्य कारण है. जनसंख्या की वृद्दि के लिए सरकार की गलत नीतियाँ भी जिम्मेदार है.

भारत में इस समय 2 करोड़ बांग्लादेशी शरणार्थी डेरा डाले हुए है. ये विदेशी तस्करी और नशीले पदार्थो की तस्करी करते है. भारत सरकार की नीतियाँ वास्तव में उदार है. किन्तु उदार का मलतब विदेशियों के हित में सलग्न रहना तो नही है.

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