भारत में विज्ञान का इतिहास | History Of Science In India In Hindi

नमस्कार आज हम भारत में विज्ञान का इतिहास History Of Science In India In Hindi के बारे में जानेगे. प्राचीन भारतीय विज्ञान की उपलब्धियाँ तथा भारतीय समाज में विज्ञान के प्रति नजरिये और दृष्टिकोण के बारे में जानेगे. उम्मीद करते है आपको एसेंट इंडिया की वैज्ञानिक प्रगति के बारे में दी जानकारी पसंद आएगी.

भारत में विज्ञान का इतिहास History Of Science In India In Hindi

भारत में विज्ञान का इतिहास History Of Science In India In Hindi

ऐसे प्रमाण मिले है कि ३००० वर्ष ईसा पूर्व भी भारतीय उपमहाद्वीप में विज्ञान ने बहुत उन्नति की थी. सिन्धु घाटी सभ्यता के नगर हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के अवशेषों से पता चलता है

कि ये शहर सुनियोजित थे और वहां जल आपूर्ति, जल मल निकास प्रणाली बहुत ही विकसित थी. खेती बाड़ी, ईट निर्माण, उद्योग व दस्तकारी में उनकी कुशलता बड़े उच्च स्तर की थी. उनके कपड़े रुई के बने होते थे.

ईसा से २००० वर्ष पूर्व के ऐसे प्रमाण है जिसमें आर्यों की अनेक मनोवृत्तियाँ वैज्ञानिक थी. ऐसा समझा जाता था कि ब्रह्मांड का नियंत्रण एक प्राकृतिक नियम द्वारा होता था. प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान ग्रहों की स्थति के अनुसार शुभ लग्न में विशेष रूप से निर्मित मन्दिरों में किया जाता था.

इस तरह से वे खगोल विज्ञानी (ज्योतिषी) एवं गणित और ज्यामिति के ज्ञाता थें. उनकें पंचाग का आधार सूर्य और चन्द्रमा दोनों की गतियां थी. उन्होंने कई नक्षत्रों को जान लिया था और महीने के नाम उनके आधार पर रखे थे.

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ऋतुओं के परिवर्तन से अति सूक्ष्म जीवाणुओं और वशांनुवंशिक कारणों से बिमारी होती है का सिद्धांत स्वीकार किया गया है. आयुर्वेद में शल्यचिकित्सा की प्रणाली अत्यंत विकसित थी. बाद में अरबवासियों और यूनानियों ने भी आयुर्वेद को अपनाया. रोमन सम्राज्य के क्षेत्र में भारतीय दवाइयों का भी काफी मांग थी.

भारत में विज्ञान का विकास एवं योगदान (development of science in india, india’s contribution)

18 वीं शताब्दी में नयें नयें तत्वों की खोज का सिलसिला प्रारंभ हुआ इससें पूर्व केवल सात धातुओं का ज्ञान था. ये स्वर्ण, रजत, ताँबा, लोहा, टिन, शीशा और पारद (पारा) इन सभी धातुओं का उल्लेख प्राचीनतम संस्कृत साहित्य में उपलब्ध है, जिनमें ऋग्वेद, यजुर्वेद एवं अथर्ववेद भी सम्मिलित है.

वेदों की प्राचीनता ईसा से हजारों वर्ष पूर्व निर्धारित की गईं है. अतः हम भारत में रसायन शास्त्र का प्रारंभ ईसा से हजारों वर्ष पूर्व कह सकते है. पुरातात्विक प्रमाण में लोहा, ताँबा, रजत, सीसा आदि धातुओं की शुद्धता 95% से 99% तक मापी गईं एवं पीतल, ताँबा जैसी मिश्र धातुएँ पाई गईं जो इस बात की परिचायक है, कि भारत में उच्च कोटि के धातुकर्म की प्राचीन परम्परा रही है.

ईसा से 400 वर्ष पूर्व नालंदा, वाराणसी एवं तक्षशिला विश्वविद्यालय बहुत विख्यात थे. गणित, खगोल विज्ञानऔर चिकित्सा विज्ञान में अभूतपूर्व प्रगति हुई. सुश्रुत ने 26 शताब्दी पहले रोगी की कटी हुई नाक ठीक की थी. इन्हें प्लास्टिक सर्जरी का जनक कहते है. इनकी सुश्रुत संहिता का अरबी में अनुवाद किया गया है. ‘किताब-शाशून-ऐ-हिन्दी और किताबे-सुसुरद.

20 शताब्दी पहले चरक ने चरक संहिता में कहा ”जो चिकित्सक अपने ज्ञान और समझ का दीपक लेकर बीमार के शरीर को नही समझता वह बीमारी को कैसे ठीक कर सकता है

उसे सबसे पहले उन सब कारणों का अध्ययन करना चाहिए जो रोगी को प्रभावित करते है, फिर उनका ईलाज करना चाहिए, ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि बीमारी से बचा जाए न कि इलाज किया जाए”

ईसा से ५०० वर्ष पूर्व ही कणाद ऋषि ने परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत कर दिया था. ईसा से २०० वर्ष पूर्व पतंजलि ऋषि ने बताया कि मनुष्य के शरीर में नाड़ियां और ऐसे केंद्र है, जिन्हें चक्र कहते है. मूलाधार, सवादिष्ठान, मणिपुर, ह्रदय, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्त्रार आदि कुल आठ चक्र है.

इन्हें सक्रिय बनाएं रखने के लिए आठ चरण या स्थ्तियाँ दी गयी है. यम (सार्वजनीन नैतिक धर्मादेश), नियम (अनुशासन से अपने को शुद्ध करने का तरीका), आसन, प्राणायाम (सांस पर नियंत्रण), प्रत्याहार (मन को बाहरी चीजों से हटाना), धारणा (संकेन्द्रण), भावना (मनन या चिन्तन) और समाधि (अचेतन की स्थति). यह आखिरी चरण सबसे कठिन है. इससे व्यक्ति ऊर्जावान, आत्मनियंत्रित एवं क्षमताओं से परिपूर्ण अनुभव करता है.

विज्ञान के विकास में भारत का योगदान (india’s contribution in the field of science and technology)

आर्यभट्ट प्रथम व्यक्ति थे, जिन्होंने कहा कि प्रथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घुमती है जिससे दिन और रात बनते है. चन्द्रमा सूर्य के प्रकाश से चमकता है.

ब्रह्मगुप्त वह गणितज्ञ था, जिसने सबसे पहले शून्य के कार्य करने के नियम बनाए. इन्हें भास्कर जैसे प्रसिद्ध गणितज्ञ ने गणक चक्र चूड़ामणि की उपाधि दी. इन्होने गणित की दो भिन्न शाखाएं बताई बीजगणित और गणित.

संसार को नयें विकिरण (न्यू रेडिएशन) देने वाले वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकटरमन की इस खोज को रमन इफेक्ट कहा गया. 28 फरवरी 1930 को इन्हें भौतिकी में नोबल पुरस्कार मिला था.

इस दिवस को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है. रमण इफेक्ट वह अद्भुत प्रभाव है जिससे प्रकाश की प्रकृति और स्वभाव में तब परिवर्तन होता है, जब किसी पारदर्शी माध्यम से निकलता है.

वह माध्यम ठोस, द्रव और गैसीय कुछ भी हो सकता है. लेंसर के अविष्कार के पश्चात् उसके शक्तिशाली प्रकाश विकिरण के कारण रमन इफेक्ट वैज्ञानिकों के लिए एक और महत्वपूर्ण साधन प्रमाणित हुआ है.

होमी जहाँगीर भाभा ने नया कण मेसोन खोजा. इन्ही के निर्देशन में अप्सरा, सिरस व जरलीना नामक तीन परमाणु रिएक्टर की स्थापना की गईं.

पहले भारतीय खगोलयज्ञ एम. के. वेणु बप्पू (मनाली कल्लर वेणु बप्पू) के नाम से एक पुच्छल तारा (कामेंट) का नाम बप्पू बोक न्युककर रखा गया. जगदीश चन्द्र बोस ने पौधों में संवेदनाओं की खोज की.

भारत में केमिकल उद्योग के प्रवर्तक प्रफुल्ल चंद्र रे ने 1896 में मरक्युरस नाइट्रेट की खोज की. उनकी पुस्तक ‘द हिस्ट्री ऑफ हिंदु केमेस्ट्री’ को बहुत ख्याति मिली.

विज्ञान तकनीक व समाज तथा धर्म, कला व विज्ञान Science Technology and Society Religion Art Science In Hindi

आज का दौर विज्ञान का दौर है, क्योंकि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को विज्ञान की उपलब्धियां प्रभावित कर रही है. मानव के उद्भव से लेकर वर्तमान युग तक विज्ञान की अहम भूमिका रही  है .

यूं तो विज्ञान को वरदान तथा अभिशाप कहा जाता है तथा डिबेट होती रहती है, परंतु हमें विज्ञान को जीवन के महत्वपूर्ण अंग के रूप में स्वीकार करना चाहिए.

विज्ञान का ही कमाल है , प्रकृति की गोद से मनुष्य को इतना सामर्थ्यवान बना दिया है कि अब मनुष्य स्वयं सर्जनकर्ता के रूप में सामने आया है. उसे अभी किसी चीज का भय नहीं है ,लंबी लंबी दूरियों ने अपनी विशालता  खो दी है ,

दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली हलचल से आज कोई भी व्यक्ति अनजान नहीं है, ताज्जुब की बात तो यह है कि मनुष्य ने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को मात देते हुए अपना सफर चांद तक भी तय कर लिया है.

विज्ञान व तकनीक

विज्ञान व तकनीक में गहरा संबंध है, एक दूसरे के बिना पूर्ण नहीं है ,यानी विज्ञान और तकनीक एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. विज्ञान विचार है तो तकनीक उसका व्यवहारिक रूप.

विज्ञान जहां पढ़े लिखे लोगों का व्यवसाय है विज्ञान का स्थानांतरण कागजों के माध्यम से होता है परंतु ,तकनीक परंपरागत रूप से गतिशील रहती  हैं.

विज्ञान तथा समाज

विज्ञान के मूल्य का निर्णायक अथवा मूल्य प्रदाता जनता होती है. मानव जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति विज्ञान के अस्तित्व का आधार बनी है.

कुछ विद्वान कहते हैं कि ऐसा नहीं है उनके अनुसार विज्ञान विशुद्ध मननशील प्रकाश है, विज्ञान के लिए विज्ञान है ,यह किसी सामाजिक हित के लिए नहीं है, विज्ञान से मानव जाति का भला हुआ तो यह संयोग मात्र है.

उपरोक्त मत के समर्थक  विद्वानों के अनुसार विज्ञान का उद्देश्य ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा मनुष्य के जीवन मृत्यु संबंधी गूढ़ रहस्यों को उजागर करना है इन विद्वानों ने तकनीक तथा समाज का सीधा संपर्क बताया है.

दूसरी ओर, पहले मत का खंडन करने वाले विद्वानों के अनुसार विज्ञान और समाज का प्रत्यक्ष संबंध है. इस दृष्टिकोण के अनुसार विज्ञान की सार्थकता मानव  गतिविधियों से पूर्ण होती है पाषाण काल से लेकर आज तक विभिन्न कालों में मानव ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार आविष्कारों को संभव बनाया.

धर्म ,कला तथा विज्ञान

धर्म तथा कला का उद्भव विज्ञान की तरह मानव के आदिम इतिहास से आरंभ होता है ,जिस तरह विज्ञान का इतिहास है उसी प्रकार धर्म व कला का भी इतिहास है.

विज्ञान वह इमारत है जिसमें बदलते समय के साथ सुधार होते रहते हैं ,नवीन खोजें तथा अविष्कार पूर्ववर्ती व्याख्या किया तो पुष्टि करते हैं या उसे नकार देते हैं.

धर्म में नई व्याख्या तो होती है लेकिन धर्म का प्रमुख लक्ष्य यूनिवर्सल ट्रुथ को बनाए रखना होता है वही विज्ञान शाश्वत सत्य को बदलने की कोशिश करता है. कला में व्यक्तिगत उपलब्धियां महत्वपूर्ण होती है.

कला के विभिन्न रूपों यथा साहित्य संगीत इत्यादि का जन सामान्य में व्यापक प्रचलन होता है. विज्ञान मानव को निर्देश दे सकती हैं कि किसी कार्य को सर्वोत्तम तरीके से कैसे किया जाए परंतु कला यह बताती है कि दिया गया निर्देश या मार्गदर्शन कितना सही है ,क्या अच्छा है.

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