रामकृष्ण मिशन निबंध | Essay On Ramakrishna Mission In Hindi

नमस्कार आज का निबंध, रामकृष्ण मिशन निबंध Essay On Ramakrishna Mission In Hindi पर दिया गया हैं. सरल भाषा में स्टूडेंट्स के लिए स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन पर यह निबंध दिया गया हैं. उम्मीद करते है आपको ये निबंध और इसमें दी गई जानकारी पसंद आई हो तो अपने फ्रेड्स के साथ भी शेयर करें.

रामकृष्ण मिशन निबंध Essay On Ramakrishna Mission In Hindi

रामकृष्ण मिशन निबंध Essay On Ramakrishna Mission In Hindi

स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय संस्कृति, धर्म एवं समाज की अच्छाईयों को विश्व के सामने रखा. राम कृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 ई को बंगाल के विश्वनाथ दत्त के परिवार में हुआ था. इनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत था.

विवेकानंद जी पर अपनी माता भुवनेश्वरी देवी का विशेष प्रभाव था. भारतीय दर्शन के अध्ययन के साथ ही उन्होंने पश्चिमी विचारों का भी अध्ययन किया. प्रारम्भ से ही आध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रूचि थी.

सन 1881 में विवेकानंदजी की दक्षिणेश्वर में उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस से भेट हुई, जिन्होंने उनकों ईश्वर की अनुभूति करवाई तभी से स्वामीजी रामकृष्ण परमहंस के भक्त हो गये थे.

स्वामी विवेकानंद के कार्य (works of swami vivekananda in hindi)

विवेकानंद के समक्ष तीन प्रमुख कार्य थे.

  1. उनका पहला कार्य था, धर्म की ऐसी व्याख्या करना, जो सर्वमान्य हो.
  2. पाश्चात्य शिक्षा के कारण भारतियों के प्रति श्रद्धा कम हो गई थी. इस दृष्टि से हिन्दू धर्म के प्रति हिन्दुओं की श्रद्धा को पुनर्स्थापित करना.
  3. हिन्दुओं में आत्म गौरव की भावना विकसित करना.

स्वामी विवेकानंद के अनुसार धर्म (Religion according to Swami Vivekananda)

स्वामीजी ने जो धर्म की व्याख्या की उसका सार था.

”धर्म मनुष्य के भीतर निहित देवत्व का विकास है, धर्म न तो पुस्तकों में है और न ही धार्मिक सिद्धांतो में, वह तो केवल अनुभूति में निवास करता है.

स्वामीजी ने सन 1891 से भारत के विभिन्न स्थानों पर भ्रमण किया तथा भारतीयों की निर्धनता एवं दयनीय दशा का प्रत्यक्ष अनुभव किया. आपकों 1893 ई में शिकागो अमेरिका में विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने का भी अवसर मिला.

विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda at the World Religious Conference)

कई बाधाओं को पार करते हुए स्वामी विवेकानन्द धर्म सम्मेलन में पहुचे. स्वामीजी ने अपने भाषण से विश्व को अवगत करवाया कि विश्व का कोई भी कार्य भारत के सामर्थ्य से बाहर नही है.

बौद्धिक, धार्मिक, चारित्रिक, आध्यात्मिक एवं दार्शनिक दृष्टि से भारत जितना समर्द्ध है उतना विश्व का कोई अन्य देश नही.

स्वामीजी ने अपने आत्मीय उद्बोधन से लोगों का मन मोह लिया, अगले दिन वहां के समाचार पत्र हैरल्ड में उनके बारे में लिखा ”धर्म की इस महान संसद में विवेकानंद ही सबसे महान है.

उनका भाषण सुनने के बाद लगता है कि ऐसें ज्ञानी देश को सुधारने के लिए विदेशी धर्म प्रसारकों को भेजना कितनी मुर्खता की बात है.

स्वामी विवेकानंद के विचार (thoughts of swami vivekananda in hindi)

स्वामीजी वेदांत दर्शन के अध्येता थे. उनकी मान्यता थी कि वेदांत हमारे आत्मबल को जाग्रत करता है. स्वामी जी ने अज्ञानता तथा गरीबी को दूर करने तथा अनाथों की सहायता करने पर जोर दिया.

उन्होंने भारत की राष्ट्रीयता का भी पोषण किया और भारत माँ की पूजा के लिए प्रेरित किया. युवकों को देश के प्रति समर्पण भाव रखने की प्रेरणा दी.

राम कृष्ण मिशन की स्थापना (Establishment of Ramakrishna Mission)

स्वामी विवेकानंदजी ने अपने गुरु रामकृष्ण की शिक्षाओं के व्यापक प्रसार के लिए कोलकाता के बेल्लूर के पास 5 मई 1897 में ‘राम कृष्ण मिशन’ की स्थापना की. इसकी शाखाएँ देश विदेश में फैली हुई है. इससे पूर्व 1887 में तारानगर में राम कृष्ण मिशन की स्थापना की गई थी.

मठों के माध्यम से राम कृष्ण मिशन का संगठन तथा प्रचार कार्य स्वामीजी ने प्रारम्भ कर दिया था. लेकिन राम कृष्ण मिशन का वैधानिक स्वरूप उनकी मृत्यु के बाद 1903 में अस्तित्व में आया, जब इन्हें एक समुदाय के रूप में पंजीकृत करा लिया गया.

राम कृष्ण मिशन भारत के विभिन्न प्रान्तों तथा अमेरिका, फिजी, मारीशस आदि देशों में शाखाएं है. राम कृष्ण मिशन ऐसे आदर्शों एवं सिद्धांतो का प्रचार करता है जिसे सभी धर्म एवं संस्कृतियों के लोग अपना सके. इस मिशन के माध्यम से उपदेश, शिक्षा, चिकित्सा, अकाल, बाढ़, भूकम्प व सक्रामक रोगों से पीड़ितो की सहायता का कार्य भी किया जाता है.

स्वामी विवेकानंद का मानव सेवा में महत्वपूर्ण स्थान है. वे रूढ़िवादिता, अंधविश्वास, निर्धनता के कटु आलोचक थे. छुआछुत एव वर्गभेद को नही मानते थे. “राम कृष्ण मिशन” के माध्यम से इन्होने जन कल्याण की भावना को प्रोत्साहित किया.

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