सौर मंडल के बारे में जानकारी Solar System in Hindi

नमस्कार सौर मंडल के बारे में जानकारी Solar System in Hindi में हम के सभी ग्रहों तथा सौर मंडल की अवधारणा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. Saur Mandal का अर्थ मीनिंग ग्रहों के नाम और इनके बारे में शोर्ट जानकारी इस आर्टिकल में जानेगे. उम्मीद करते है सोलर सिस्टम के बारे में इस लेख में आप सब कुछ जान पाएगे.

सौर मंडल के बारे में जानकारी Solar System in Hindi

सौर मंडल के बारे में जानकारी Solar System in Hindi

सूर्य के चारों ओर केवल ग्रह ही भ्रमण नही करते अपितु अनेक धूमकेतु, ग्रह कणिकाएँ और उल्काएं भी परिक्रमण करते है. सूर्य, ग्रह, उपग्रह, धूमकेतु, उल्का आदि सम्मिलित रूप से एक विशाल खगोलीय समूह है जिसे सौर परिवार अथवा सौर मंडल (Solar system) कहा जाता है.

सौर परिवार के ग्रहों (nine planets) में सूर्य सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए सूर्य को सौर परिवार का पिता या जनक कहा जाता है.

सौर मंडल के सभी खगोलीय पिंड एक निश्चित पथ पर सूर्य का चक्कर लगाते है जिसे कक्ष कहा जाता है. सौर मंडल के बारे में 1543 ई. में सर्वप्रथम निकोलस कॉपरनिकस ने बताया कि सूर्य सौर मंडल के केंद्र में है और सभी ग्रह उसके चारों ओर चक्कर लगाते है.

आधुनिक वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे सौर मंडल की आयु (Age of solar system) 460 करोड़ वर्ष है. सूर्य हमारी आकाशगंगा क लगभग सौ अरब तारों में से एक है.

सूर्य, जलती हुई गैसों का एक विराट पिंड है. इसकी सतह सदैव अस्थिर व अशांत रहती है. सूर्य में सबसे अधिक हाइड्रोजन व हीलियम है.

सौर मंडल के लिए सूर्य प्रकाश एवं ऊष्मा का एकमात्र स्रोत है. इसका गुरुत्वाकर्षण सौरमंडल को बांधे रखता है. सूर्य की पृथ्वी से अधिक दूरी होने के कारण सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुचने में लगभग 8 मिनट 20 सैकंड का समय लगता है.

हमारे सौर मंडल में कुल आठ ग्रह (Eight planets) है, जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते है. सूर्य से विभिन्न दूरी पर स्थित इन ग्रहों का आपस में टकराना संभव नही है.

सौर मंडल के आठ ग्रह (8 Planets of Solar System in Hindi PDF)

इन ग्रहों का अपना प्रकाश नही होता है, ये सूर्य से ऊष्मा व प्रकाश प्राप्त करते है. सूर्य से दूर जाने पर क्रमशः Eight planet name बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, ब्रहस्पति, शनि, अरुण, वरुण ग्रह है.

सन 2006 तक प्लूटो को भी एक ग्रह माना जाता था, लेकिन नये प्रमाणों के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संगठन ने प्लूटो को बोने ग्रह का दर्जा दिया है.

सूर्य के पास स्थित बुध, शुक्र, पृथ्वी एवं मंगल ग्रह को आंतरिक या धरातलीय ग्रह भी कहा जाता है. ये छोटे और अधिक घनत्व वाले है और चट्टानों से बने है. ब्रहस्पति, शनि, अरुण और वरुण ग्रह आकार में बड़े व कम घनत्व वाले है, इन्हें बाह्य या गैसीय ग्रह भी कहा जाता है.

सौर मंडल के ग्रहों की विशेषताएं (solar system planets in hindi)

Solar System Planets Name In Hindi And English

आंतरिक ग्रह (Inner planet) बाह्य ग्रह (Outer planets)
इनका निर्माण चट्टानों से हुआ इनका घनत्व अधिक है इनका निर्माण गैस और तरल पदार्थों से हुआ इनका घनत्व कम है.
1. बुध (Mercury)-
  1. सूर्य की परिक्रमा-88 दिन
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन-59 दिन
  3. उपग्रह की संख्या- 0
5. बृहस्पति (Jupiter)- 
  1. सूर्य की परिक्रमा – 11 वर्ष 11 माह
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 9 घंटे 56 मिनट
  3. उपग्रहों की संख्या- लगभग 16
2. शुक्र (Venus)
  1. सूर्य की एक परिक्रमा- 225 दिन
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 243 दिन
  3. उपग्रह संख्या- 0
6. शनि (Saturn)
  1. सूर्य की परिक्रमा- 29 वर्ष 5 माह
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 10 घंटे 40 मिनट
  3. उपग्रह की संख्या- 18 लगभग
3. पृथ्वी (Earth)
  1. सूर्य की परिक्रमा- 365 दिन
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 1 दिन
  3. उपग्रहों की संख्या- 1
7. अरुण (Arun)
  1. सूर्य की परिक्रमा- 84 वर्ष
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 17 घंटे, 14 मिनट
  3. उपग्रहों की संख्या- 17 लगभग
4. मंगल (Mars)
  1. सूर्य की परिक्रमा- 687 दिन
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 1 दिन
  3. उपग्रहों की संख्या- 02
8. वरुण (Varun)
  1. सूर्य की परिक्रमा- 164 वर्ष लगभग
  2. अपने अक्ष पर घूर्णन- 16 घंटे 7 मिनट
  3. उपग्रहों की संख्या- 08

खगोल वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के सभी पिंडो के अलग अलग वर्ग बनार है. ग्रह, उपग्रह, बौने ग्रह और लघु पिंड. उपग्रह ऐसे आकाशीय पिंड को कहते है जो किसी ग्रह के चारो ओर चक्कर लगाता है. ऐसा पिंड को सूर्य की परिक्रमा करता है और दूसरें पिंडों का भी रास्ता काटता है, बौना ग्रह कहलाता है.

प्लूटो, एरिस, सेरिस आदि बौने ग्रह के उदाहरण है. सूर्य की परिक्रमा करने वाले सौरमंडल के बाकी सभी छोटे छोटे क्षुद्र, ग्रह, उल्कापिंड और वरुण के पार पाए जाने वाले अनजान पिंड और सौर मंडल में आने वाले धूमकेतुओं आदि को लघु पिंड कहा गया है.

सौर मंडल का जन्म कैसे हुआ

सौर मंडल का जन्म कैसे हुआ

सौर मंडल का अर्थ क्या है What Is Solar System Meaning In Hindi Wikipedia

Information On Solar System In Hindi: हमारा सौरमंडल सूर्य, 8 ग्रहों उपग्रहों एवं क्षुद्र ग्रहों से मिलकर बना हैं. यह आकाश गंगा निहारिका की ओरियन भुजा में स्थित हैं. सूर्य अपने समस्त सौरमंडल परिवार सहित आकाश गंगा के केंद्र के चारों ओर चक्कर लगाता हैं.

आकाश गंगा का स्वरूप सर्पिलाकार हैं. सौर मंडल के पहले चार ग्रहों का आमाप पृथ्वी जैसा हैं, इसलिए इन्हें पार्थिव ग्रह कहते हैं. अगले ग्रहों का आमाप पृथ्वी की तुलना में अधिक है अतः इन्हें ब्रहस्पतिय ग्रह कहते हैं.

पार्थिव ग्रह अधिकतर शिला और धातु के बने है और इनका औसत धनत्व 4 से 5 g cm−3 हैं जबकि ब्रह्स्पतिय ग्रह अधिकतर गैस और हिम के बने हैं और उनका औसत घनत्व 1 या 2 g cm−3 हैं.

Our Solar System In Hindi

Our Solar System In Hindi

हमारे सौर मंडल के ही ग्रह दीर्घ वृत्तीय कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते है. अतः सूर्य को सौर मंडल का मुखिया कहते हैं. सौर मंडल का 98.87 प्रतिशत द्रव्यमान सूर्य में स्थित हैं. ग्रहों में वृहस्पति और शनि का द्रव्यमान सबसे अधिक हैं. इन दोनों ग्रहों का सम्मिलित द्रव्यमान, सभी ग्रहों के द्रव्यमान का लगभग 92 प्रतिशत हैं.

  • सौर मंडल का लगभग सारा द्रव्यमान सूर्य में निहित हैं.
  • बुध ग्रह और प्लूटो क्षुद्र ग्रह को छोड़कर बाकी सभी ग्रहों की कक्षाएं लगभग एक ही तल में हैं.
  • सौर मंडल को ऊपर से देखने पर सभी ग्रह सूर्य की वामावर्त दिशा में परिक्रमा करते दिखाई पड़ते हैं. यह दिशा वही है जिस दिशा में सूर्य स्वयं भी घूर्णन करता हैं, अतः सूर्य की घूर्णन दिशा वही है जो ग्रहों की परिक्रमण दिशा हैं.
  • शुक्र यूरेनस और प्लूटो को छोड़कर बाकी सभी ग्रह उसी दिशा में परिक्रमा करते है जिस दिशा में वे घूर्णन करते हैं.
  • सभी ग्रहों के कोणीय संवेगों का योग सूर्य के कोणीय संवेग से अधिक हैं.
  • पार्थिव ग्रह अधिकांश चट्टानों से बने है जबकि बृहस्पतिय ग्रह मुख्य रूप से गैसीय पदार्थों से बने हैं.

सौर मंडल के सदस्य ग्रहों के नाम Planet In Hindi Solar System

हमारे सौर मंडल में स्थित ऐसे अदिप्त पिंड जो अपनी निर्धारित कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं, ग्रह कहलाते हैं. सभी ग्रह अपने अक्ष पर घूमते हुए सूर्य की परिक्रमा करते हैं.

सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर पश्चिम से पूर्व की ओर परिभ्रमण करते हैं, केवल शुक्र और अरुण इसके अपवाद हैं क्योंकि ये पूर्व से पश्चिम की दिशा में घूमते हैं.

  • आकार के अनुसार ग्रहों का क्रम (छोटे से बड़ा) – बुध, मंगल, शुक्र, पृथ्वी, वरुण, यूरेनस, शनि और वृहस्पति.
  • पृथ्वी से दूरी के अनुसार ग्रहों का क्रम– शुक्र, मंगल, बुध, वृहस्पति, शनि, यूरेनस एवं नेपच्यून

हमारे सौरमंडल में कुल आठ सदस्य ग्रह है इसके बारे में (Solar System Planets Name In Hindi) संक्षिप्त विवरण और उनके नाम नीचे दिए गये हैं.

बुध (Mercury Solar Planet)

यह सूर्य का सबसे निकटवर्ती ग्रह हैं. बुध ग्रह पर वायुमंडल का लगभग अभाव है जिस कारण यहाँ अत्यधिक गर्म दिन और रात ठंडी होती हैं. बुध की अन्य ग्रहों की तुलना में परिक्रमा गति सर्वाधिक हैं, यह महज 88 दिन में सूर्य का एक चक्कर निकाल लेता हैं.

इस ग्रह को सूर्यास्त और सूर्योदय के समय क्षितिज के निकट देखा जा सकता हैं. चन्द्रमा की तरह बुध का भी कोई वायुमंडल नहीं हैं और इसकी सतह क्रेटरों से भरी हैं.

बुध ग्रह का आधा भाग काफी उच्च तापमान पर होता है तथा दूसरा भाग काफी न्यून तापमान पर. ऐसा इसलिए होता हैं क्योंकि इसके घूर्णन और परिक्रमण काल लगभग समान हैं. इस कारण इसका एक भाग ही सदैव सूर्य की ओर रहता हैं. बुध की सतह का तापमान _340 डिग्री सेल्सियस और -270 डिग्री सेल्सियस के मध्य रहता हैं.

शुक्र (Venus Solar Planet)

यह सौर मंडल परिवार का सबसे चमकीला और बादलों से घिरा ग्रह हैं, जिसका कारण इसके चारों ओर गंधक व सल्फ्यूरिक एसिड के बादलों का घेरा हैं जो सूर्य के अधिकांश प्रकाश को परावर्तित कर देता हैं.

शुक्र को भोर का तारा (Morning Star) एवं सांझ का तारा (Evening Star) भी कहा जाता हैं. शुक्र के वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस की अधिकता हैं इस कारण यह सर्वाधिक गर्म ग्रह हैं. 

शुक्र का एक दिन इसके एक वर्ष से बड़ा होता हैं. अपने अक्ष पर घूमने में सर्वाधिक समय 243 दिन लगते हैं, जबकि सूर्य की परिक्रमा में 225 दिन लगते हैं.

अक्ष पर घूर्णन की दिशा पूर्व से पश्चिम अन्य ग्रहों से विपरीत हैं. शुक्र की सतह सूखी तप्त और ज्वालामुखीय हैं. इसके वायुमंडल में 96 प्रतिशत कार्बनडाई ऑक्साइड 3.5 प्रतिशत नाइट्रोजन और शेष अन्य गैसें विद्यमान हैं. 

शुक्र ग्रह बादलों से ढका हैं जिसमें अधिकतर H2SO4 की छोटी बूंदे हैं. इसकी सतह का तापमान उच्च हैं. सम्भवतः यह ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण हैं. ग्रह द्वारा विकिरित अवरक्त विकिरण इसके वायुमंडल में कार्बनडाई ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण ग्रह के बाहर नहीं जा सकती. अतः सूर्य से प्राप्त ऊष्मा रोक ली जाती हैं और ग्रह का तापमान बढ़ जाता हैं.

चार करोड़ किमी की दूरी पर स्थित शुक्र ग्रह हमारी पृथ्वी का निकटतम पड़ौसी ग्रह (nearest planet) हैं. सूर्य और चंद्रमा के बाद शुक्र आकाश में तीसरा बड़ा चमकीला पिंड हैं. शुक्र चमकीला इसलिए दीखता हैं क्योंकि एक तो यह पृथ्वी के निकट हैं और दूसरा उस पर स्थित सफेद बादल उस पर गिरने वाले प्रकाश के लगभग 76 प्रतिशत भाग को परावर्तित कर देते हैं.

सौर मंडल के शुक्र ग्रह को सूर्यास्त के लगभग तीन घंटे बाद बहुत अच्छी तरह से देख सकते हैं. अगर वह सायंकालीन ग्रह हो, यदि वह प्रातकालीन ग्रह हो तो चन्द्रमा की तरह शुक्र की भी कलाएं होती हैं. यदि शुक्र की सभी कलाएं देखनी हो तो इसके लिए लगभग 20 माह लगेगे.

शुक्र ग्रह पर वायुमंडल का दाब पृथ्वी के वायुमंडल दाब से 90 गुणा ज्यादा हैं. इस ग्रह पर सबसे अधिक ग्रीन हाउस गैस का प्रभाव होता हैं. अतः इस ग्रह को ग्रीन हाउस ग्रह भी कहा जाता हैं, इसे पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह (twin planets) भी कहा जाता हैं.

पृथ्वी (Earth Solar Planet)

हमारी पृथ्वी सौर मंडल का एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन और पानी मौजूद है पृथ्वी का उपग्रह चन्द्रमा हैं. पानी की मौजूदगी के कारण अंतरिक्ष से नीली दिखाई देने के कारण इसे नीला ग्रह भी कहते हैं. आकार व बनावट में पृथ्वी शुक्र ग्रह के समान हैं.

इसका घूर्णन अपने अक्ष पर 23½ डिग्री पर झुका है जिसके कारण मौसम बदलते हैं और ध्रुवीय टोपिया बनती हैं. इसका वायु मंडल कई परतों में विभाजित हैं इन्हें क्षोभमंडल, समतापमंडल और आयनमंडल कहते हैं. क्षोभमंडल में लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और 21 प्रतिशत ऑक्सीजन हैं.

समतापमंडल में ओजोन गैस होती हैं जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैगनी विकिरण का अवशोषण करती हैं. प्राचीन यूनानी विद्वानों पाईथागोरस, अरस्तु, एराटास्थेनिस आदि ने कहा कि पृथ्वी गोल हैं. 250 ई पू में एराटास्थेनिस ने पृथ्वी के गोल होने की कल्पना का उपयोग करके इसकी परिधि का प्रथम बार परिकलन किया था.

पृथ्वी का असली आकार– पृथ्वी सम्पूर्ण रूप से गोल नहीं हैं. भूमध्य रेखा पर यह उभरी हुई हैं तथा ध्रुवों पर कुछ चपटी हैं. इस आकार को चपटा गोलाभ या जीआइड कहा जाता हैं. चपटे गोलाभ का आकार इन दो कारणों का परिणाम हैं.

  1. पृथ्वी का अपने अक्ष पर तेजी से परिक्रमण करना
  2. ध्रुवों की तुलना में भूमध्य रेखा पर अधिक तेज गति से परिक्रमण करना
  3. यह सुझाव देने वाले प्रथम व्यक्ति सर आईजैक न्यूटन थे.

मंगल (Mars Solar Planet)

यह लाल ग्रह के नाम से प्रसिद्ध हैं. मंगल के धरातल पर रेगिस्तान और ज्वालामुखिओं का बाहुल्य हैं. सौर मंडल का सबसे बड़ा ज्वालामुखी ओल्मप्स मोन्स यही हैं. इसके वायुमंडल में मुख्यत कार्बन डाई ऑक्साइड नाइट्रोजन और आर्गन मुख्य गैसें हैं.

मंगल के दो उपग्रह जिनके नाम फोबोस और डेमोस हैं. इसके दोनों ध्रुवों पर बर्फ की परते हैं जिनके पास सर्दी में ठोस कार्बन डाई ऑक्साइड की परत बन जाती हैं. यह आमाप में पृथ्वी से आधा हैं फिर भी पृथ्वी के साथ मंगल की बहुत सी समानताएं हैं.

मंगल पर एक दिन में 24 घंटे 37 मिनट का है और एक वर्ष पृथ्वी वर्ष का 1.88 गुणा हैं. इसका घूर्णन अक्ष से 25 डिग्री से झुका हैं. और इस पर भी ऋतुएँ और ध्रुवीय टोपियाँ बनती हैं. मंगल ग्रह के बारे में जानकारी प्राप्त करने की सबसे अधिक कोशिश हुई हैं. 

इसके वायुमंडल और भू विज्ञान पृथ्वी के वायुमंडल और भू विज्ञान से मिलते जुलते हैं. इसकी सतह विभिन्न आमापों वाली क्रेटरों और ज्वालामुखियों से भरी हैं. पृथ्वी की तरह मंगल पर भी मिट्टी मुख्यतः सिलिकेट से बनी हुई हैं. 

परन्तु इसकी मिट्टी में 16 प्रतिशत लौह ऑक्साइड होने के कारण इसका रंग लाल हैं, इसलिए इसे लाल ग्रह भी कहते हैं. मंगल पर गर्मी और जाड़े का मौसम भी होता हैं जिनमें से प्रत्येक की अवधि पृथ्वी के समान ही लगभग छः माह की होती हैं. लेकिन इस ग्रह के सूर्य से अधिक दूरी होने के कारण वहां जाड़ा पृथ्वी के जाड़े के मुकाबले अधिक तीव्र होता हैं.

मंगल पर वायुमंडलीय दवाब काफी कम हैं. यह समुद्र तल की सतह से 32 किमी की ऊंचाई पर पृथ्वी के वायुमंडलीय दवाब के बराबर हैं. मंगल का वायुमंडल 95 प्रतिशत कार्बनडाई ऑक्साइड से बना हैं. मंगल एक ठंडा ग्रह हैं उसकी सतह का तापमान दिन में उसकी भूमध्य रेखा के आसपास 21 डिग्री सेंटीग्रेड से 27 सेंटीग्रेड तक बढ़ सकता हैं लेकिन रात में वह -84 डिग्री सेंटीग्रेड तक घट जाता हैं.

मंगल की वर्तमान परिस्थतियाँ ठंड, अत्यधिक शुष्कता, तीव्र पैराबैगनी प्रकाश और थोड़ी ऑक्सीजन जीवन के प्रतिकूल हैं. मंगल ग्रह के वर्ष और ऋतुओं की अवधि हमारे वर्ष और हमारी ऋतुओं की अवधि से दुगुनी हैं. मंगल ग्रह बंसत ऋतु में हरित रंग का होता है और शरद ऋतु में भूरे रंग का होता हैं.

बृहस्पति ग्रह (Jupiter Solar Planet)

यह हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह हैं. इसके वायुमंडल में हाइड्रोजन और हीलियम गैसों की प्रधानता हैं. अन्य ग्रहों की तुलना में बृहस्पति ग्रह पर दिन की अवधि सबसे कम (9 घंटे 56 मिनट) की हैं. इसका व्यास पृथ्वी से लगभग 11 गुणा है जबकि धनत्व पृथ्वी के ¼ से भी कम हैं.

पृथ्वी पर दिखने वाले सूर्य, चन्द्रमा एवं शुक्र के बाद बृहस्पति ही सबसे चमकीला आकाशीय पिंड हैं. ग्रह पर ठोस सतह का अभाव हैं तथा यह अत्यधिक घनी गैसों का गोला हैं. इस ग्रह का द्रव्यमान सौर मंडल में सबसे अधिक हैं. 

यह गैस और द्रव का घूमता गोला हैं इस सन्दर्भ में यह सूर्य से मिलता जुलता हैं. इसके कई उपग्रह हैं. यह प्रक्षुब्ध गैसीय वायु मंडल से ढका हैं. इसके वायुमंडल में हाइड्रोजन, हीलियम और कम मात्रा में जलवाष्प, अमोनिया, मिथेन इत्यादि गैसे हैं.

बृहस्पति ग्रह की सतह पर अंडे के आकार का एक भीमकाय लाल धब्बा हैं, जिसमें दो पृथ्वी समा जाएं. वैज्ञानिकों का मानना हैं कि यह लाल धब्बा वायुमंडल में बड़ा चक्रवात आने के कारण हैं. इसकी संरचना, आमाप और उपग्रहों की संख्या को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता हैं कि यह एक तारे की तरह है जिसका अपना सौर मंडल हैं.

इस ग्रह के परित अनेक वलय दिखाई देते हैं और यह ग्रह रेडियों तरंगे विकिरित करता हैं. बृहस्पति के चार बड़े उपग्रह आयो, युरोपा, गेनीमीड और कैलिस्टो हैं. इनकी खोज गैलीलियो ने की थी, जिनके नाम पर ये गैलीलियन उपग्रह कहलाते हैं. बृहस्पति के बादलों में लगातार बिजली चमकती रहती हैं.

शनि (Saturn Solar Planet)

वलयों से घिरा ग्रह हैं. शनि के चारो ओर वलय है जिनसे यह सर्वाधिक सुंदर ग्रह माना जाता हैं. इसके उपग्रहों की संख्या सर्वाधिक (82 उपग्रह) हैं. शनि के वायुमंडल में हाइड्रोजन और हीलियम की प्रधानता हैं. यह सौर मंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह हैं. इसका द्रव्यमान और आमाप केवल ब्रहस्पति से छोटा हैं.

ब्रहस्पति की तरह शनि भी मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम से बना हैं. इसके बड़े सुंदर वलय हैं. जो छोटी दूरबीन से भी देखे जा सकते हैं. इनका औसत घनत्व पानी के घनत्व से भी कम हैं. इसमें अधिकांशतः द्रव पदार्थ होने और इसके तेज घूमने के कारण इस ग्रह का आकार कुछ चपटा हैं.

वलयों के किनारे पर परिक्रमा करने वाले इसके कई उपग्रह हैं. वे उपग्रह शैल और हिम से बने है और इनकी सतह पर क्रेटर हैं. इसका मुख्य उपग्रह टाइटन काफी बड़ा हैं. सौर मंडल का छठा ग्रह शनि बिना किसी सहायता के आँख से दिखने वाला अंतिम ग्रह हैं.

यह बहुत ठंडा ग्रह हैं, जिसकी सतह का तापमान माइनस 184 डिग्री c हैं. शनि का वायुमंडल 90 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस और कार्बनिक यौगिकों से बना हैं. शनि का प्रमुख उपग्रह टाइटन सौरमंडल का एकमात्र उपग्रह हैं जिसका वायुमंडल पृथ्वी के वायुमंडल के जितना घना हैं.

अरुण ग्रह (Uranus Solar Planet)

यह सौर मंडल का सातवाँ ग्रह हैं. इसके वायुमंडल में हाइड्रोजन हीलियम और मीथेन गैसों की प्रधानता हैं. अरुण के चारो ओर भी हल्के वलय हैं. इसकी कक्षा में तल से 98 डिग्री का झुकाव लिए हुए घूर्णन करता हैं. ब्रहस्पति की तुलना में यह काफी छोटा ग्रह हैं और ब्रहस्पति की तुलना में सूर्य से चार गुणा दूरी पर हैं. 

दूरबीन में यह हरी डिस्क की तरह दिखाई देता हैं जिसके ऊपर कुछ अस्पष्ट चिह्न हैं. अरुण का हरा रंग इसके बाहरी वायु मंडल में बिखरी हुई मीथेन और अमोनिया के बादलों के कारण हैं. अमोनिया के इन बादलों का तापमान माइनस 217 सेंटीग्रेड हैं.

अरुण का घूर्णन इसकी कक्षा के लम्ब से 97.9 डिग्री के कोण पर झुका हैं. इस कारण इसके ध्रुव सीधे सूर्य की ओर संकेत करते हैं. ऐसा लगता है जैसे एक पहिये की तरह अपनी कक्षा में घूम रहा हैं. इसके वलयों की खोज वर्ष 1977 में हुई थी. यह कोयले की तरह काले पदार्थ से बने हैं. अरुण ग्रह के कई उपग्रह हैं.

वरुण ग्रह ( Neptune Solar Planet)

यह सौर मंडल का सबसे आखिरी बाहरी ग्रह हैं. वरुण के वातावरण में मीथेन गैस की अधिकता हैं. इसका परिक्रमा पथ गोलाकार हैं. इसका प्रमुख उपग्रह ट्राइटोन (सौर मंडल का सबसे ठंडा स्थान) हैं. प्लूटो अपनी परिक्रमा के दौरान कुछ अवधि के लिए वरुण के परिक्रमा पथ के अंदर आ जाता हैं.

वरुण सर्वाधिक दूरी पर स्थित ग्रह हैं. यूरेनस और नेपच्यून के वायुमंडल में मीथेन गैस की बहुलता होने के करण ये क्रमश नीले और हरे रंग के नजर आते हैं. इस ग्रह की खोज 1846 में महान वैज्ञानिक योहान ग्रोटफ्रीड गाल्ल ने की. यह इतनी दूरी पर स्थित हैं कि वहां से नेप्ट्यून को देखने पर सूर्य एक चमकदार चित्ती नजर आएगा.

वरुण का रंग हल्का नीला हैं इसके वायुमंडल में काफी अधिक मात्रा में उपस्थित मीथेन के कारण हैं. इसके बादलों का तापमान माइनस 237 डिग्री सेंटीग्रेड हैं. अन्य ब्रहस्पतिय ग्रहों की तरह इसके भी वलय हैं. पृथ्वी से इसके दो उपग्रह दिखाई देते हैं.

इसका सबसे बड़ा उपग्रह ट्राईटोन है जो दक्षिणावर्त दिशा में घूमता है यह दिशा ग्रह के घूमने की दिशा के विपरीत हैं. ट्राईटोन का अपना वायुमंडल हैं. इसमें नाइट्रोजन और मीथेन हैं. यह एक तूफानी ग्रह है जिसकी तेज हवाएं 2400 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं.

यम (Pluto)

पूर्व में यह सौर मंडल का एक ग्रह था परन्तु अब इसके ग्रह का दर्जा समाप्त कर दिया गया हैं. अब यह एक क्षुद्र ग्रह (Asteroid) हैं. 1930 में प्लूटो की खोज की गई थी.

क्षुद्र ग्रह (Asteroides)

  • मंगल और ब्रहस्पति के मध्य– छोटे छोटे आकाशीय पिंडों की एक पट्टी, जो सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं. क्षुद्र ग्रह या ग्रहिकाएँ वे पिंड हैं जो सौर मंडल में विचर रहे थे और कक्षाओं में आबद्ध हो गये. क्षुद्र ग्रहों की यह पट्टी सभी ग्रहों को दो वर्गों आंतरिक एवं बाह्य ग्रहों में विभाजित करती हैं.
  • बुध, शुक्र, पृथ्वी एवं मंगल आतंरिक ग्रह है एवं शेष बाह्य. आंतरिक ग्रह छोटे है एवं मुख्यतः चट्टानों एवं लोहे से बने हैं जबकि बाह्य ग्रह बड़े है एवं मुख्यतः हाइड्रोजन हीलियम आदि गैसों से बने हैं.
  • सबसे पहले क्षुद्र ग्रह या ग्रहिका की खोज 1801 में जिस्सेपी पियाजी नाम के खगोल वैज्ञानिक ने की, जिन्होंने इसका नाम सिरिस रखा. अधिकांश ग्रहिकाओं के आकार विषम हैं. अंतरिक्ष में यात्रा करते हुए वे अलग अलग मात्राओं में प्रकाश परिवर्तित करती हैं. इनके आकारों से महसूस होता है कि वे किसी टक्कर या विस्फोट से बने होंगे.

अतिरिक्त सौर ग्रह (Extra Solar Planet)

सौर मंडल के बाहर भी ग्रह हैं. इन ग्रहों को अतिरिक्त सौर ग्रह कहते हैं. 4 अगस्त 1997 को हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने पहली बार एक अतिरिक्त सौर ग्रह का चित्र लिया. इसकी दूरी पृथ्वी से लगभग 450 प्रकाश वर्ष हैं. यह तारा वृष राशि की दिशा में हैं, यह एक युगल तारा था.

सूर्य (Solar System Only Star Sun In Hindi)

सौर मंडल का केंद्र बिंदु एवं ऊर्जा व प्रकाश का स्रोत सूर्य हमारे सबसे निकट और सौरमंडल का एकमात्र ग्रह तारा हैं. सूर्य की संरचना में 71 प्रतिशत हाइड्रोजन गैस 27 हीलियम गैस एवं 2 प्रतिशत अन्य भारी गैसे हैं.

परमाणु संलयन की प्रक्रिया जिसमें उच्च ताप पर हाइड्रोजन के परमाणुओं के संलयन से हीलियम गैस बनती है एवं अपार ऊर व प्रकाश विसर्जित होता हैं. सूर्य एक सामान्य तारा हैं.

हमारे लिए सूर्य का विशेष महत्व हैं क्योंकि यह पृथ्वी से निकटतम और हमारे सौर मंडल में अकेला तारा हैं तथा यह हमारी समस्त ऊर्जा का स्रोत हैं. सूर्य एक तप्त और चमकीला गैस का गोला हैं. पृथ्वी की तरह इसकी कोई पूर्णतया परिभाषित सतह नहीं हैं.

सौर मंडल में यह सबसे अधिक द्रव्यमान वाला पिंड हैं और सौरमंडल के सभी ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं. वास्तव में सूर्य का द्रव्यमान स्थिर नहीं हैं, क्योंकि सूर्य से लगातार विकिरण और कण निर्गत होते रहते हैं जो अपने साथ कुछ द्रव्यमान ले जाते हैं.

परिणामस्वरूप सूर्य का द्रव्यमान लगातार घटता रहता हैं यह पृथ्वी के द्रव्यमान का 332946 गुणा हैं. सूर्य का तापमान 15 मिलियन डिग्री सेल्सियस हैं. इसकी सतह का तापमान इसके आंतरिक तापमान से भिन्न हैं. सूर्य की सतह का तापमान लगभग 6000 k हैं. इसे प्रभावी प्रष्टीय तापमान कहते हैं.

सूर्य की सतह की जिस परत का यह तापमान हैं उसे प्रकाश मंडल कहते हैं. सूर्य की इसी परत से कुल विकिरण उत्सर्जित होता हैं. सूर्य की ऊर्जा के बाहर निकलने के बावजूद भी सतह का तापमान कम नहीं होता हैं क्योंकि सूर्य के क्रोड से ऊर्जा लगातार सतह की ओर आती रहती हैं.

सौर प्रकाश मंडल– सूर्य की दृश्य सतह को प्रकाश मंडल कहते हैं. सूर्य से प्राप्त कुल प्रकाश वास्तव में प्रकाश मंडल से ही आता हैं. पृथ्वी पर हमारे आस पास के वायुमंडल की तुलना में प्रकाश मंडल का घनत्व 3400 गुना कम हैं. प्रकाश मंडल की मोटाई 500 km हैं. और उसके सबसे नीचे की सतह का तापमान लगभग 6500 k हैं. प्रकाश मंडल में ऊपर जाने पर तापमान घटता हैं और शिखर पर इसका तापमान 4400 k रह जाता हैं.

प्रकाश मंडल एक शांत क्षेत्र नहीं हैं. प्रकाश मंडल की संरचना कणिकामय हैं जिसका कारण इस सतह के नीचे से आने वाली तप्त गैस हैं.

सौर वायु मंडल: यद्यपि सूर्य के चित्र से ऐसा लगता हैं कि इसका स्पष्ट किनारा हैं परन्तु इस प्रकार का स्पष्ट किनारा वास्तव में नहीं हैं. ऐसे आभासी किनारे के बाहर सूर्य की बाहरी परते हैं जिन्हें सामूहिक तौर पर सूर्य का वायुमंडल कहते हैं.

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