73 वां संविधान संशोधन अधिनियम व्यवस्था व विशेषताएं | 73rd Amendment Act 1992 In Hindi

73 वां संविधान संशोधन अधिनियम व्यवस्था व विशेषताएं | 73rd Amendment Act 1992 In Hindi Panchayati Raj system 73 amendments of Indian constitution: यह संशोधन अधिनियम 1992 में संसद द्वारा पारित किया गया जो 24 अप्रैल 1993 को प्रभाव में आया. इस अधिनियम के लिए जो संयुक्त प्रवर समिति बनी उसके अध्यक्ष राजस्थान से सांसद श्री नाथूराम मिर्धा थे. 24 अप्रैल को इसीलिए पंचायती राज दिवस मनाया जाता हैं.

73 वां संविधान संशोधन अधिनियम व्यवस्था व विशेषताएं

73 वां संविधान संशोधन अधिनियम व्यवस्था व विशेषताएं 73rd Amendment Act 1992 In Hindi

73rd Amendment Act 1992 In Hindi

प्रमुख विशेषताएं (Main Features)

त्रिस्तरीय प्रणाली 73 वाँ संविधान संशोधन अधिनियम सभी राज्यों के लिए त्रिस्तरीय संस्थागत ढांचे का प्रावधान करता हैं. इसी के अनुरूप हमारे राज्य में अपनाया गया ढांचा इस प्रकार हैं.

  • स्तर- ग्राम⇒खंड/ब्लोक⇒जिला
  • निर्वाचित संस्था का नाम– ग्राम पंचायत⇒पंचायत समिति⇒जिला परिषद
  • निर्वाचित पदाधिकारी– सरपंच⇒प्रधान⇒जिला प्रमुख

प्रत्यक्ष निर्वाचन (Direct Election)

ग्राम स्तर पर वार्ड पंच एवं सरपंच, खंड स्तर पर मंडल सदस्य व जिला स्तर पर जिला परिषद के सदस्यों का जनता द्वारा सीधे निर्वाचन का प्रावधान किया गया हैं. साथ ही यह अवस्था भी की गई हैं. साथ ही यह व्यवस्था भी की गई है कि खंड व जिला स्तर के अध्यक्ष जो कि हमारे राज्य में क्रमशः प्रधान व जिला प्रमुख कहलाते हैं, का चुनाव निर्वाचित सदस्यों में से ही किया जाएगा.

आरक्षण की व्यवस्था (Reservation System)

अधिनियम सभी संस्थाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों के आरक्षण की व्यवस्था करता हैं, वहीँ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति हेतु जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान हैं. यह अधिनियम राज्य विधान मंडलों को इसके लिए भी अधिकृत करता है कि वे इन संस्थाओं में पिछड़े वर्गो के लिए भी आरक्षण व्यवस्था कर सके.

पंचायतों का निश्चित कार्यकाल (Tenure)

अधिनियम सभी स्तरों पर संस्थाओं के सदस्यों का कार्यकाल पांच साल निश्चित करता हैं. यदपि समय पूरा होने से पूर्व भी इन्हें विघटित किया जा सकता हैं. इसके बाद अधिनियम में 6 माह की अवधि में नई संस्थाओं का गठन आवश्यक हैं.

राज्य का निर्वाचन आयोग (State Election Commission)

पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव प्रक्रिया के नियमित व निष्पक्ष संचालन हेतु एक निर्वाचन आयोग का गठन किया जाएगा. मतदाता सूचियाँ तैयार करने से लेकर पदाधिकारियों को निर्वाचित घोषित कर शपथ दिलाने तक की प्रक्रिया की निगरानी राज्य निर्वाचन आयोग करता हैं.

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राज्य का राज्यपाल, राज्य निर्वाचन अधिकारी/ आयुक्त भी नियुक्ति करता हैं. इसकी नियुक्ति की अवधि की अवधि एव सेवा कार्य शर्ते भी राज्यपाल द्वारा तय की जाती हैं. सेवाकाल में राज्य निर्वाचन अधिकारी/ आयुक्त को पदमुक्त करने के भी वही तरीकें होंगे जो उच्च न्यायालय के न्यायधीश को हटाने के होंगे.

राज्य वित्त आयोग का गठन (State Finance Commission)

पंचायत राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए प्रत्येक 5 वर्ष पश्चात वित्त आयोग का गठन करेगा. यह आयोग राज्यपाल को इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा आय के स्रोतों, धन के वितरण, राज्य सरकार द्वारा प्राप्त अनुदान, कर चुंगी इत्यादि के बारे में अनुशंसा करता हैं.

लेखा परीक्षण (Auditing)

राज्य सरकार इन संस्थाओं के लेखों का समय समय पर परीक्षण एवं जांच हेतु नियम बना सकती हैं. पंचायती राज की इन संस्थाओं को मजबूती देने के लिए 73 वें संविधान संशोधन के द्वारा संविधान में 11 वीं अनुसूची जोड़ी गई हैं. इसमें २९ कार्य समाहित हैं, जो इन संस्थाओं के क्षेत्राधिकार व शक्ति में वृद्धि करते हैं ये विषय हैं.

  1. कृषि, जिसमें कृषि विस्तार सम्मिलित हैं.
  2. भूमि विकास, भूमि सुधार लागू करना, भूमि संगठन व भू संरक्षण
  3. लघु सिंचाई, जल प्रबन्धन और नदियों के मध्य भूमि का विकास
  4. पशुधन, दुग्ध का व्यवसाय तथा मुर्गीपालन
  5. मछली उद्योग
  6. वनजीवन तथा वनों में कृषि
  7. लघु वन उत्पादन
  8. लघु उद्योग, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी शामिल हैं.
  9. खादी, ग्राम एवं कुटीर उद्योग
  10. ग्रामीण विकास
  11. पेयजल
  12. इंधन व चारा
  13. सड़क, पुल, नदी तट, जलमार्ग तथा संचार के अन्य साधन
  14. ग्रामीण विद्युत् एवं विद्युत् विभाजन
  15. गैर परम्परागत ऊर्जा स्रोत
  16. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
  17. शिक्षा प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा के विद्यालय
  18. तकनीकी परीक्षण व व्यावसायिक शिक्षा
  19. प्रौढ़ व अनौपचारिक शिक्षा
  20. पुस्तकालय एवं वाचनालय
  21. सांस्कृतिक गतिविधियाँ
  22. मेले एवं बाजार
  23. स्वास्थ्य एवं इससे सम्बन्धित संस्थाएं- अस्पताल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि
  24. परिवार कल्याण
  25. महिला एवं बाल विकास
  26. समाज कल्याण, विशेषकर मानसिक विमंदित व दिव्यांगों का कल्याण शामिल हैं.
  27. समाज के कमजोर वर्ग, विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कल्याण व सम्रद्धि के कार्य
  28. सार्वजनिक वितरण प्रणाली
  29. सार्वजनिक संपत्तियों की देखरेख

संविधान का अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों को संगठित कर, उन्हें ऐसी शक्तियाँ, राज्य द्वारा दिए जाने का प्रावधान करता हैं जो उन्हें शक्तिशाली बनाती हैं.

सदस्यों की योग्यताएँ

73वें संविधान संशोधन के अंतर्गत पंचायत का सदस्य बनने के लिए कुछ योग्यताओं को तय किया गया था जिसकी जानकारी निम्नानुसार है।

  1. 73वें संविधान संशोधन में यह कहा गया था कि ऐसे व्यक्ति ही पंचायत का सदस्य बन सकते हैं जिनकी उम्र 21 साल पूरी हो चुकी हो अथवा जिनकी उम्र 21 साल से अधिक हो।
  2. पंचायत का सदस्य निर्वाचित होने के लिए व्यक्ति प्रवृति विधि के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के लिए आयु के अलावा भी अन्य योग्यता रखता हो।
  3. व्यक्ति संबंधित राज्य विधानमंडल के तहत बनाई गई विधि के अंतर्गत पंचायत का सदस्य बनने के लिए पात्रता रखता हो अथवा योग्य हो।

विषयों का हस्तांतरण

तकरीबन 29 ऐसे सब्जेक्ट जो पहले राज्य सूची में मौजूद थे उन्हें पहचान करके उन्हें संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में डाल दिया गया है अर्थात दर्ज कर लिया गया है और इसके पश्चात उन सभी विषयों को पंचायती राज संस्थाओं को ट्रांसफर कर दिया गया है।

अधिकतर मामले में इन विषयों का संबंध लोकल स्तर पर होने वाली डेवलपमेंट और लोक कल्याण के कामकाज के लिए होता है। इन कामों का सही अर्थ में हस्तांतरण प्रदेश के द्वारा बनाए गए कानून पर डिपेंड होता है।

हर राज्य को इस बात का फैसला करने का अधिकार है कि वह इन सभी 29 विषयों में से कितने विषय को स्थानीय निकायो को उपलब्ध करवाना चाहता है। हालांकि पंचायतें 11वीं अनुसूची में दर्ज विषयों और कृषि, भूमि सुधार, भूमि विकास, पेयजल, ग्रामीण बिजली करण, प्रौढ शिक्षा, महिला और बाल विकास, कमजोर और दुर्बल वर्गों का कल्याण इत्यादि के जरिए आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन लाने का प्रयास करने की कोशिश करती हैं।

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