सिकन्दर का भारत पर आक्रमण | Alexander Invasion Of India In Hindi

सिकन्दर का भारत पर आक्रमण Alexander Invasion Of India In Hindi history विश्वविजेता कहे जाने वाले अलेक्जेंडर सिंकन्दर ने भारत को भी अपने विजयी अभियान में शामिल किया था. उसका यह सपना पूरा न हो सका था. आज के आर्टिकल में हम सिकंदर महान के भारत पर आक्रमण के अभियान के इतिहास को जानेगे.

Alexander Invasion Of India In Hindi- सिकन्दर का आक्रमण

Alexander Invasion Of India In Hindi- सिकन्दर का आक्रमण

भारत पर विदेशी आक्रान्ताओं के आक्रमण की लम्बी श्रंखला रही हैं. इन आक्रान्ताओं में यूनान का शासक सिकंदर भी था, जिसे हमने इतिहास में सिकन्दर महान के रूप में पढ़ा है.

उस पर एक लोकप्रिय किवदन्ती भी प्रचलन में है कि जीता वो सिकन्दर. 326 ईस्वी पूर्व में सिकन्दर ने पश्चिमी भारत पर आक्रमण किया, जहाँ वर्तमान में पाकिस्तान हैं, वहां के शासक पोरस ने वीरतापूर्वक उसका मुकाबला किया परन्तु पराजय का सामना करना पड़ा.

हार के बाद पोरस को सिकन्दर ने बंदी बना लिया और पूछा कि बताओ पोरस तुम्हारे साथ क्या व्यवहार किया जाए, तब पोरस ने कहा वही जो एक शासक को दूसरे शासक के साथ करना चाहिए. कहते हैं कि पोरस के इस कथन से प्रसन्न होकर सिकन्दर ने उनका राज्य लौटा दिया और अपने सैनिको की थकावट के कारण वह भारत और विश्व विजय के अधूरे सपने को लेकर लौट गया.

जिस समय उत्तरी भारत में मगध साम्राज्य का उत्कर्ष हो रहा था, भारत का सम्पूर्ण क्षेत्र छोटे छोटे राज्यों में विभक्त था. ये राज्य सदैव एक दूसरे से संघर्षरत रहते थे. इस राजनितिक कमजोरी का फायदा सिकन्दर (मकदूनिया के शासन फिलिप का पुत्र तथा अरस्तु का शिष्य) ने उठाया तथा ३२६ ई पू में भारत पर सिकन्दर ने आक्रमण कर दिया.

भारत पर सर्वप्रथम विदेशी आक्रमण ईरानियों द्वारा किया गया. इरानी शासक दारयवहु (डेरियस) ५१६ ईसा पूर्व में पश्चिमो त्तर भारत में घुस गया और उसने पंजाब सिंध नदी के पश्चिमी इलाके और सिंध को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया.

भारतीय प्रजा को भी ईरानी फौज में शामिल किया जाने लगा. दारयवहु के उत्तराधिकारी क्षयार्ष (जरसिस) ने यूनानियों के खिलाफ लम्बी लड़ाई में भारतीयों को अपनी फौज में शामिल किया.

Indian campaign of Alexander the Great सिकन्दर का भारत पर आक्रमण का इतिहास हिस्ट्री

सिकन्दर के इतिहास को दो रूप में बताया जाता हैं एक उसका वास्तविक इतिहास जो बहुत कम उपलब्ध हैं दूसरा उसे महान बनाने की मानसिकता के साथ लिखा गया मनगढ़ंत अतीत, जिसे हमने मानकर जो जीता वही सिकन्दर, सिकन्दर दी ग्रेट, उस के जीवन पर हमने झूठी, कहानियां गाने यहाँ तक फ़िल्में भी बनाकर प्रस्तुत की हैं.

प्रसिद्ध इतिहासकार प्लूटार्क सिकन्दर के सम्बन्ध में कहते हैं. वह पुरु (इन्हें यूनानी इतिहासकारों ने पोरस कहा) की मात्र बीस हजारी सेना के समक्ष नहीं टिक पाया, उसे आगे मगध की साढ़े तीन लाख की सेना से मुकाबला करना था.

मगध की सेना के क्रूर सैनिक उसे गाजर मूली की तरह काटते यदि वह भारत आक्रमण के समय आगे अपने कदम बढ़ाता तो यही कारण था कि वह सिन्धु नदी के तट से ही वापिस लौट गया था.

कहते है पोरस को हराने के बाद सिकन्दर एक रात के लिए उसी नगर में ठहरा जहाँ उसने बुद्धिमान ब्राह्मणों एवं विद्वानों से चर्चा भी की थी. जिस गाँव में सिकन्दर की सेना ठहरी थी, वह उग्र मालियों का गाँव था.

लड़ाकू कबीले के इन लोगों ने सिकंदर पर आक्रमण कर दिया, जिसमें एक तीर सिकन्दर के कवच को चीरते हुए उसकी पचलियों में जा घुसा. किसी तरह उसकी सेना ने वहां से निकलने में सफलता प्राप्त की ओर सिन्धु नदी होते हुए वह चला गया.

सिकंदर के पिता की मौत के बाद उसने राजनितिक षड्यंत्र चलाकर अपने सौतेले और चचेरे भाइयों का कत्ल कर दिया और स्वयं शासक बन गया था.

अपनी अत्यधिक महत्वकांक्षा को संतुष्ट करने के लिए वह विश्व विजय के अभियान पर निकला, चरित्र से सिकन्दर क्रूर, अत्याचारी और शराब का नशेड़ी था.

कुछ इतिहासकार कहते है कि उसने कभी भी उदारता नहीं दिखाई, उसने अपने सहयोगियों को भी नहीं बक्शा, छोटी छोटी त्रुटियों के कारण उन्हें दर्दनाक मौत दी थी.

सिकंदर अपने पिता की मृत्यु के पश्चात अपने सौतेले व चचेरे भाइयों का कत्ल करने के बाद मेसेडोनिया के सिन्हासन पर बैठा था। अपनी महत्वाकांक्षा के कारण वह विश्व विजय को निकला।

यूनान के मकदूनिया का यह राजा सिकंदर कभी भी महान नहीं रहा। यूनानी योद्धा सिकंदर एक क्रूर, अत्याचारी और शराब पीने वाला व्यक्ति था।

हमें इतिहास में यही पढाया गया कि सिकन्दर ने पोरस को पराजित किया था, जबकि वाकई में ऐसा होता तो दुनिया विजय के सपने को लेकर चला सिकन्दर पश्चिम भारत से आगे क्यों नहीं बढ़ा. क्योंकि उसे पोरस के हाथों पराजय मिली थी.

उसके बाद भी उन्हें मगध जैसे विशाल साम्राज्य से युद्ध करना पड़ता, इस कारण वह भारत छोडकर चला गया था. यूनानी लेखकों प्रपंच और झूठे इतिहास ने एक पराजित कायर शासक को महान बताकर पेश किया. जिसका हम भी अनुसरण करते गये. जबकि हकीकत इसके कही उल्ट थी.

यूनानी इतिहासकारों के इस महाझूठ को साबित करने के लिए समकालीन चीनी एतिहासिक विवरण एवं भारतीय इतिहास के विवरण को भी पढ़ा जाना चाहिए था.

पंडित जवाहरलाल नेहरु भी अपनी पुस्तक ‘ग्लिम्पसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री’ में सिकन्दर को एक अहंकारी, हिंसक और क्रूर शासक का दर्जा देते हैं.

जो स्वयं को ईश्वर से बड़ा मानता था, सत्ता के लालच में उसने अपने सभी सगे सम्बन्धियों और सहयोगियों की हत्या कर दी थी, साथ ही उसने अनेक नगरों को भी ध्वस्त कर दिया था.

सिकन्दर का भारत पर आक्रमण के कारण (Causes of alexander invasion of india Hindi)

सिकन्दर द्वारा भारत पर आक्रमण करने के कारणों में विश्वविजेता बनने की अभिलाषा, धन प्राप्त करने की इच्छा, नयें प्रदेशों की जानकारी की इच्छा तथा कुछ भारतीय शासकों के सहयोग का आश्वासन प्रमुख था. 

३२६ ई पू में सिकन्दर ने सिन्धु नदी पार कर तक्षशिला की तरफ बढ़ा. वहां के शासकों ने उसके समर्पण कर दिया. पंजाब के राजा पोरस ने सिकन्दर के साथ झेलम नदी के किनारे हाइडेस्पीज का युद्ध (वितस्ता का युद्ध) लड़ा परन्तु हार गया. 

पोरस के साहस से प्रभावित होकर सिकन्दर ने उसका राज्य वापिस कर दिया तथा पोरस सिकन्दर का सहयोगी बन गया. व्यास नदी पर पहुचकर सिकन्दर के सिपाहियों ने आगे बढने से इनकार कर दिया. 

इनकार करने के प्रमुख कारणों में सैनिकों द्वारा लगातार युद्धों से उत्पन्न हताशा, नंदों की विशाल सेना सीमान्त प्रदेश की कष्टदायक जलवायु, घर लौटने की व्यग्रता आदि कारण थे.

नवम्बर ३२६ ई पू में झेलम नदी के मार्ग से सिकन्दर की वापसी की यात्रा आरम्भ हुई. वह भारत भूमि छोड़कर बेबीलोन चला गया, जहाँ ३२३ ई पू में सिकन्दर की मृत्यु हो गई.

सिकन्दर के भारत आक्रमण का प्रभाव (What are the effects of Alexander’s invasion on India Hindi)

  • भारत में अनेक यवन या यूनानी बस्तियों की स्थापना हुई.
  • भारत तथा यूनान के मध्य एक जल मार्ग एवं तीन स्थल मार्ग खुलने से प्रत्यक्ष सम्पर्क स्थापित हुआ.
  • जल मार्गों की खोज से पश्चिम एशिया के साथ व्यापार वाणिज्य में वृद्धि हुई.
  • सिकन्दर के आक्रमण का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह निकला की भारतीयों में राजनीतिक एकता स्थापित करने की प्रवृति का उदय हुआ, सीमान्त प्रदेश के राज्य इतने कमजोर हो गये कि चन्द्रगुप्त मौर्य ने इसे आसानी से अपने अधिकार में लेकर भारत में प्रथम साम्राज्य की स्थापना की.

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