नकदी फसल कौन सी होती है Cash Crops Information In Hindi

नकदी फसल कौन सी होती है Cash Crops Information In Hindi: नकदी फसल को व्यापारिक अथवा वाणिज्यिक फसल के नाम से भी जानते हैं. अंग्रेजी में इन्हें कैश क्रॉप्स कहा जाता हैं. ये वो फसल हैं जिन्हें किसान केवल बेचने के लिए ही उगाता हैं अथवा वह स्वयं उसका उपयोग न करने केवल आमदनी के लिए फसल उगाता हैं. आज हम जानेगे कि निम्न में से नकदी फसल है, रोपण फसल/ नकदी फसल का अर्थ, नकदी फसल in english, रोपण फसल किसे कहते हैं, नकदी फसल कौन है आदि के बारें में हम Cash Crops Information In Hindi में इन्हें विस्तार से जानेगे.

Cash Crops Information In Hindi

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नकदी फसल कौन सी होती है – Cash Crops Information Hindi

भारत एक कृषि प्रधान देश हैं. यहाँ कुल भूमि के एक चौथाई भाग पर मुद्रादायिनी/ नकदी फसलों का उत्पादन किया जाता हैं. ऐसी व्यवसायिक फसलों में मुख्यतः गन्ना, कपास, तिलहन, जूट व तम्बाकू को शामिल किया जाता हैं. इन फसलों में से मुख्य वाणिज्यिक फसलों का वर्णन इस प्रकार हैं.

गन्ना- गन्ना भारतीय मूल का पौधा व बाँस वनस्पति का वंशज हैं. यह देश की व्यवसायिक/ नकदी फसलों में प्रथम स्थान रखता हैं. गन्ना उत्पादन तथा उत्पादक क्षेत्र की दृष्टि से भारत विश्व में पहला स्थान रखता हैं. भारत विश्व के 50 प्रतिशत गन्ने का उत्पादन करता हैं. भारत में गन्ने का उत्पादन उष्ण कटिबंधीय भागों में किया जाता हैं.

गन्ने के उत्पादन क्षेत्र के दृष्टिकोण से सर्वाधिक उत्तर भारत जबकि उत्पादन या पैदावार की दृष्टि से दक्षिण भारत अग्रणी हैं. क्योंकि दक्षिण भारत की आद्र जलवायु गन्ने में रस की मात्रा बढ़ाती हैं. जिससे उत्पादन अधिक होता हैं. भारत में गन्ने के प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश व गुजरात प्रमुख हैं.

राजस्थान में गन्ना उदयपुर, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व बूंदी में पैदा किया जाता हैं. भारत में गन्ने का उपयोग गुड़, चीनी व एल्कोहल बनाने के लिए किया जाता हैं.

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कपास- भारत की कुल कृषि भूमि के 6.7 प्रतिशत भाग पर कपास की फसल पैदा की जाती हैं. भारत में कपास खरीफ के मौसम में बोया जाता हैं. भारत में कपास की तीन किस्में बोई जाती हैं.

  • लम्बे व महीन रेशे वाली अमेरिकन कपास जो कि कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत हैं. जिसका पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में उत्पादन होता हैं.
  • मध्यम रेशे वाली कपास जो कि कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत हैं जिसका गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में उत्पादन होता हैं.
  • छोटे रेशे वाली कपास जो कुल उत्पादन का 10 प्रतिशत हैं जिसे देश के सभी राज्यों में अल्प मात्रा में बोया जाता हैं.

देश में कपास उत्पादन व उत्पादन क्षेत्र की दृष्टि से गुजरात प्रथम स्थान पर, महाराष्ट्र द्वितीय स्थान पर व तीसरे स्थान पर आंध्रप्रदेश हैं. राजस्थान में कपास का उत्पादन श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, कोटा बूंदी व झालावाड में किया जाता हैं.

तिलहन- भारत में विश्व के 10 प्रतिशत तिलहन का उत्पादन किया जाता हैं. तिलहन फसलें खरीफ तथा रबी दोनों मौसम में उत्पादित की जाती हैं. भारत में तिलहन की मुख्य फसलों के रूप में मूंगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी, अलसी, अरंडी, सोयाबीन हैं. मूंगफली एवं सरसों दोनों फसलें कुल तिलहन उत्पादन का 80 प्रतिशत भाग रखती हैं.

मूंगफली- यह ब्राजील मूल की फसल हैं विश्व का 30 प्रतिशत भाग भारत में ही उत्पादित किया जाता हैं जो भारत में खरीफ के मौसम में बोई जाती हैं. देश की कुल तिलहन फसल का 45 प्रतिशत भाग मूंगफली से प्राप्त किया जाता हैं. देश में मूंगफली की 85 प्रतिशत पैदावार गुजरात, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक राज्यों से होती हैं. राजस्थान में चित्तौड़गढ़, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा, जयपुर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़ तथा इंदिरा गांधी नहर के सिचाई क्षेत्रों में उत्पादित की जाती हैं.

सरसों- विश्व की 70 सरसों भारत में उत्पादित की जाती हैं तथा देश की कुल तिलहन फसल का 35 प्रतिशत भाग सरसों से प्राप्त किया जाता हैं. देश की 85 प्रतिशत सरसों उत्तरी भारत में उत्पादित की जाती हैं. उत्पादन की दृष्टि से राजस्थान देश का ४१ प्रतिशत भाग रखने के कारण प्रथम स्थान पर हैं. उत्तरप्रदेश द्वितीय, मध्यप्रदेश तृतीय, गुजरात चतुर्थ तथा पंजाब व हरियाणा में भी सरसों पैदा की जाती हैं. राजस्थान में अलवर, भरतपुर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा, जयपुर, बीकानेर तथा इंदिरा गांधी नहर के सिंचाई क्षेत्रों में सरसों उत्पादित की जाती हैं.

अन्य तिलहन फसलें- इनमें अरंडी जो मशीनों में स्नेहक, साबुन बनाने तथा चमड़ा शोधन के काम में ली जाती हैं. अरंडी उत्पादन का 65 प्रतिशत गुजरात तथा 25 प्रतिशत राजस्थान में किया जाता हैं. देश में सोयाबीन उत्पादन का ७० प्रतिशत मध्यप्रदेश 20 प्रतिशत महाराष्ट्र तथा 10 प्रतिशत भाग राजस्थान में पैदा होता हैं.

नकदी फसल का मतलब क्या है?

नकदी फसल मोटे अनाज वाली फसल होती है और इसे पारंपरिक खेती से हटकर किया जाता है। नकदी फसल की खेती करके काफी कम टाइम में ही किसानों को बढ़िया बेनिफिट हासिल होता है। बात करें अगर नगदी फसल की तो गन्ना एक मुख्य नकदी फसल है। इसके अलावा दाल, सरसों, आलू और सब्जियों को भी नकदी फसल में शामिल किया जाता है।

हमारे हिंदुस्तान देश में तेजी से नकदी फसल की पैदावार में बढ़ोतरी हो रही है और सामान्य फसलों के मुकाबले में इसकी खेती करने में किसान भी ज्यादा इंटरेस्ट ले रहे हैं और यही वजह है कि इनकी पैदावार में बढ़ोतरी होने से वैश्विक लेवल पर भी नकदी फसलों की खेती का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि नकदी फसलों की खेती होने की वजह से वैश्विक लेवल पर खाद संकट भी उत्पन्न हो रहा है।

भारत में नकदी फसल

हमारे इंडिया में नकदी फसलों की प्रति एकड़ पैदावार में पिछले 5 सालों में तकरीबन 50% की बढ़ोतरी देखी गई है। दुनिया में जितने भी देश है वहां पर अलग-अलग नगदी फसलों की खेती होती है। 

जो इलाके हैं वहां पर कोको, गन्ना, केला, संतरा, कॉफी, जूट और कपास जैसी नकदी फसलों की खेती होती है। अमेरिका जैसे देश में सोयाबीन, गेहूं, मक्का इत्यादि की गिनती प्रमुख फसलों में होती है। वही नकदी फसलों की लिस्ट में तंबाकू भी आती है।

नकदी फसलों की लिस्ट

1: रबड़ 

यह मुख्य तौर पर अमेजॉन नदी की घाटी का पौधा है और ब्राजील देश में दुनिया में सबसे ज्यादा रबड़ का प्रोडक्शन होता है। हमारे भारत देश में भी रबड़ का प्रोडक्शन होता है परंतु हमारे भारत देश का नंबर रबड़ प्रोडक्शन में चौथे नंबर पर है। 

इंडिया में सबसे अधिक केरल राज्य में रबड़ पैदा होती है और रबड़ में सबसे बेस्ट क्वालिटी का रबड़ पारा माना जाता है। रबड़ के पेड़ के पत्ते के दूध से लैटेक्स नाम का तत्व प्राप्त होता है।

 2: चाय 

भारत के असम की घाटी में सबसे पहली बार साल 1834 में बिजनेस के तौर पर चाय की खेती अंग्रेजो के द्वारा करना स्टार्ट किया गया था। जिस जगह पर 250 सेंटीमीटर सालाना बारिश होती है वहां पर अच्छी तरह से चाय की खेती हो जाती है। इसके अलावा इसकी खेती के लिए अधिक टेंपरेचर की भी जरूरत होती है, साथ ही पहाड़ी जमीन पर इसकी खेती अच्छे प्रकार से हो जाती है।

भारत में सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन असम राज्य में होता है। उसके पश्चात पश्चिम बंगाल और फिर तमिलनाडु राज्य का नंबर आता है। असम राज्य में सुरमा नदी और ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी पर चाय की खेती की जाती है और दुनिया में सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन चाइना उसके बाद हिंदुस्तान और उसके बाद केन्या देश में होता है।

3: कॉफी 

भारत में कॉफी की खेती की स्टार्टिंग 17वीं शताब्दी के आसपास हुई थी। इंडिया में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु यह कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती होती है। कर्नाटक राज्य में सबसे ज्यादा 68 परसेंट कॉफी की खेती होती है। उसके पश्चात केरल राज्य का नंबर आता है। 

कॉफी की टोटल 5 वैरायटी मौजूद है परंतु भारत में सिर्फ कॉफी की अरेबिका और रॉबस्टा वैरायटी की खेती होती है। दुनिया में सबसे ज्यादा कॉफी का प्रोडक्शन ब्राजील उसके बाद वियतनाम और उसके बाद इंडोनेशिया देश में होता है।

4: तम्बाकू 

तम्बाकू की टोटल 2 वैरायटी होती है, जिसमें से निकोटियाना टोबैकम को भारत में पैदा किया जाता है। इसके अलावा रस्टिका नाम की वैरायटी को सबसे पहली बार जहांगीर के काल में पुर्तगालियों के द्वारा 17 वी शताब्दी में भारत लाया गया था।

भारत में आंध्र प्रदेश और गुजरात यह कुछ ऐसे राज्य हैं जहां पर बड़े पैमाने पर किसानों के द्वारा तंबाकू की खेती होती है। इस दुनिया में तंबाकू प्रोडक्शन के मामले में पहले चाइना और फिर भारत का नाम आता है।

5: जूट

यह एक रेशेदार फसल होती है और भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में 70% जूट पैदा किया जाता है। इसके अलावा दुनिया में सबसे ज्यादा जूट का प्रोडक्शन भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में होता है।

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