दिवाली पर निबंध 2021 Diwali Essay In Hindi And English Language

नमस्कार दोस्तों दिवाली पर निबंध 2021 Diwali Essay In Hindi And English Language आर्टिकल में आपका हार्दिक स्वागत हैं. आज का निबंध दिवाली अथवा दीपावली पर दिया गया हैं. स्कूल स्टूडेंट्स इस निबंध की मदद से इस पर्व पर आसान भाषा में छोटा बड़ा निबंध लिख सकेगे.

दिवाली पर निबंध 2021 Diwali Essay In Hindi And English Language

विषय सूची

दिवाली पर निबंध 2021 Diwali Essay In Hindi And English Language

Lines On Diwali 2021 Essay In Hindi And English Language India is religious loving people country here celebrate festivals every day. but my the favorite festival is Deepawali (mera Priya tyohar Diwali).

this  essay on Diwali in Hindi for class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10. why we celebrate Diwali 10 lines and long length paragraph of the importance of Diwali festival.

at start you will read here Diwali essay in English 100, 150, 200, 250, 300, 400, 500 words. this Diwali essay can translate Marathi and English language also.

Diwali Essay In English

the Hindus celebrate many festivals. dewali is most important to them. it is a festival of light. it comes off in October or November. it is celebrated in honor of Lord Rama’s return to Ayodhya after foutreen years of exile.

for many days preparations are made. people clean their houses. they get them whitewashed. shopkeepers decorate their shop.

the old and the young celebrate the festival alike. they are gay and cheerful. at night there are rows of lights. the candle is lighted. people worship Laxmi, the goddess of wealth.

some people gamble on this day. it is a bad habit. it has ruined many people. it should be stopped. we should enjoy the festival in a good way.

Diwali Essay In Hindi

हिंदू कई त्यौहार मनाते हैं। उनके लिए दीवाली सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह प्रकाश का त्यौहार भी कहलाता है। यह अक्टूबर या नवंबर में आता है। यह निर्वासन के उत्तरार्ध भगवान राम के अयोध्या लौटने के सम्मान में मनाया जाता है।

इस त्यौहार के आने से पूर्व कई दिनों के लिए लोग तैयारी में जुट जाते हैं। लोग अपने घर साफ करते हैं। वे उन्हें रंग रोगन करते  है। दुकानदार अपनी दुकान को दिवाली के अवसर पर दुल्हन की तरह सजाते है।

बड़े बूढ़े और युवा दिवाली के इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन सभी के चेहरे खिले होते है तथा एक दूसरें को इस पर्व की बधाई देते हैं।

रात में रोशनी की लाइनों से सारा शहर/गाँव सज जाता हैं। दीपक व पूजा सामग्री के साथ धन व एश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना की जाती है.

कुछ लोग इस दिन खेलते हैं। यह एक बुरी आदत है। इसने कई लोगों को बर्बाद कर दिया है। इसे रोका जाना चाहिए। तथा हमें दिवाली के त्योहार का आनंद लेना चाहिए।

मेरा प्रिय त्योहार दिवाली 2021 पर निबंध इन हिंदी

भारत में समय समय पर अनेक त्योहार मनाएं जाते है. इन त्योहारों में दिवाली या दीपावली एक प्रमुख त्योहार है. यह त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है, कि इस दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे.

इस ख़ुशी में अयोध्या के लोगो ने घी के दिए जलाए थे. उसी स्मृति में यह त्योहार ख़ुशी के पर्व के रूप में हर साल मनाया जाता है. दीवाली से दस पन्द्रह दिन पहले घरों की साफ़ सफाई और रंग रोगन का कार्य हो जाता है.

धनतेरस के दिन लोग नए बर्तन खरीदते है. चतुर्दशी को छोटी दीपावली होती है. अमावस्या की रात को सभी घरों में दीपक जलाए जाते है, तथा लक्ष्मीजी की पूजा होती है. घरों में अच्छे अच्छे व्यंजन बनते है, मिठाई खायी जाती है, बच्चें फटाखें व फुलझड़ियाँ जलाते है.

लोग आपस में मिलते है, तथा एक दुसरे के प्रति प्रेम प्रकट करते है. व्यापारी लोग इस दिन अपना बही खाता बदलते है. दीपावली या दीवाली का त्योहार खुशियों का त्योहार है.

दिवाली निबंध Essay On Diwali In Hindi Language

प्रस्तावना- हमारे देश में वर्ष भर अनेक पर्व और त्योहार मनाए जाते है. दीपावली भारतीय संस्कृति और धर्म की द्रष्टि से यह मनाया जाता है. दीपों के इस त्यौहार को देश भर के सभी लोग बड़े हर्ष और उल्लाश के दिन मनाया जाता है. इस पर्व से कुछ दिन पूर्व तक सरकार द्वारा दीपावली का राजकीय अवकाश घोषित कर दिया जाता है. जिससे लोग इसकी तैयारियों में जुट जाते है.

मनाने का समय-दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास में मनाया जाता है. धनतेरस से भाईदूज तक यह त्यौहार मनाया जाता है. अमावस्या की रात को लक्ष्मी पूजन के साथ दीपावली का पर्व मनाया जाता है. इस दिन लोग अपने घरों में दीपों व् दीपमालाओ की कतारे लगाकर घर को पूर्ण रूप से सजाते है.

मनाने का कारण-दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है. इस सवाल का उत्तर अलग-अलग तरीकों से दिया जाता है. हिन्दू धर्मावलम्बी इस दिन को भगवान राम से जोड़कर मनाते है. कहते है दिवाली के दिन ही श्रीराम जी रावण को मारकर पिता दशरथ जी द्वारा दिए गये 14 वर्ष के वनवास को पूर्ण कर अयोध्या लौटे थे.

वनवास पूर्ण पर जब वे अयोध्या लौटे तो लोगों ने घी के दिए जलाकर उनका स्वागत किया. इससे दिवाली मनाने की शुरुआत मानी जाती है. एक अन्य कथा के अनुसार इस त्यौहार को मनाने के पीछे भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की कथा को भी मानते है.

जैन धर्म को मानने वाले इस दिन भगवान् महावीर से जुड़ा प्रंसग इसके पीछे बताते है. तो कुछ लोग इन्हे हनुमान जयंती मानते है, चाहे मनाने के पीछे जो भी सर्वमान्य कारण हो हर्ष और उल्लास से मनाए जाने वाले त्यौहार में दीपावली का हमारे त्योहारों में महत्वपूर्ण स्थान है.

इस त्यौहार से कुछ दिन पूर्व से ही पटाखों की गुज शुरू हो जाती है. दीपावली की रात पटाखों की गुज, आतिशबाजी व शौर शराबा आम तौर पर देखा जाता है. दीपावली के दिन सभी लोग सांयकाल से ही अपने घरों में दीपक जलाकर रोशन करते है. शहरों में लोग अपने घरों को बिजली के बल्बों, गुब्बारों व रंग बिरंगी लाइट्स से अपने-अपने घर को सजाते है.

दीपावली के एक दिन पूर्व धनतेरस पर गहने आभूषण व् बर्तन खरीद्ना गृहणिया शुभ मानती है. अगले दिन शाम को मुहूर्त पर माँ लक्ष्मी का पूजन घर-घर किया जाता है. दिवाली के दुसरे दिन गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस दिन बहिने अपने भाई के ललाट पर तिलक लगाती है. इस तरह दीपावली का पर्व धनतेरस से लेकर भाई दूज तक चार दिनों में धूम धाम से मनाया जाता है.

उपसंहार-हिंदुओ के सभी त्योहारों में दीपावली का महत्वपूर्ण स्थान है. जो उत्साह का पर्व होने के साथ साथ लोगों में मंगल कामना की भावना को प्र्जल्वित करता है. इस दिन माँ लक्ष्मी का पूजन कर सबकी उन्नति और सम्रद्धि की मंगलकामना की जाती है.

Essay on Diwali 2021- Short Essay on Diwali in English for Kids

Deepawali also called Diwali, is celebrated in India And many Other countries of the world. Although Diwali is a festival of Hindus, people of all religions have been celebrating it for centuries.

Diwali literally means the line of lamps. On this festival, people decorate the lights in and out of their houses. This festival is celebrated for five days.

Which starts with Dhanteras. Dhanteras is celebrated on the day of Triadshi of the Krishna side of the Kartik month. On the next day, the festival of fourteen and followed by Diwali is celebrated.

The importance

each festival has its social, religious, economic and scientific significance. In this way, Diwali also has its economic importance. From this day the traders start their new book accounts and try to complete the account of the last financial year.

Economic importance

Shopkeepers decorate their shops, and sellers are especially looking forward to this festival. Many companies offer big tempting offers to lure customers on the occasion of Diwali. In the same way before the Festival of Deepawali, there is a lot of initiative in the market.

Scientific importance

Along with social, Diwali has its own scientific significance. Due to the rainy season, our environment is filled with insect kites. And many types of small plants and shrubs grow. Cleanliness is done on the occasion of Deepawali once the whole environment is cleaned.

How to celebrate

In today’s time, Diwali is used more in the use of flowers than the lamp. People in the cities illuminate their homes with various types of electric bulbs.

On the other hand, in the villages, conventional soil diets are still burnt, and on this day people greet each other with sweets.

Diwali is of great importance in the lives of children, from the beginning of the Diwali season, children are prepared to prepare for bursting crackers.

Durga Puja in Bengal

Diwali is celebrated in different ways throughout the country. Durga Puja is celebrated in West Bengal on this day. After the grand panda logo and the idol establishment, there is a program of Durga Puja.

In these states, after celebrating Durga Puja, the festival is celebrated after worshiping Lakshmi. It is believed that Kali Puja of this day, after the release of Mother Kali, all the misery, Laxmiji Ji will give money to all.

Essay epilogue

In this way, the festival and festivities fill new colors of happiness in our lives. It is our tradition to celebrate different festivals, which is an important part of our Indian culture.

This festival is celebrated as a symbol of the end of all evils. To avoid any untoward event on this occasion, we need to take some precautions, because many times we hear listening to many unpleasant incidents of fireworks.

दीपावली पर निबंध Essay on Deepawali in Hindi

दीपावली दो शब्दों दीप और अवली से मिलकर बना हे. दीप का मतलब होता है दीपक और अवली का मतलब होता हे पंक्ति अर्थात दीपों की पंक्तियाँ. हमारे देश में प्रति वर्ष अनेक त्यौहार मनाये जाते है.

हिन्दुओं के त्यौहारों में रक्षाबंधन, होली, दशहरा और दीपावली प्रमुख त्यौहार है. इस त्यौहार पर लोग दीपक को पंक्तियो में रखकर रौशनी करते है. दीपक का त्यौहार होने के कारण इसे दीपावली या दिवाली कहा जाता है.

यह दो शब्दों दीप और अवली से मिलकर बना है. दीप का मतलब होता है दीपक और अवली का मतलब होता हे पंक्ति अर्थात दीपों की पंक्तियाँ.

यह त्यौहार कार्तिक मॉस की अमावस्या को मनाया जाता है. यह त्यौहार अमावस्या के दो दिन पूर्व त्रयोदशी से लेकर इसके दो दिन बाद दूज तक चलता है. इस तरह दीपावली का त्यौहार पांच दिन तक मनाया जाता है.

दीपावली मनाने का कारण (Reason Of Celebration)

इस त्यौहार के साथ हमारी अनेक पौराणिक और धार्मिक कथाएं है. हिन्दुओं की मान्यता है की इस दिन भगवान श्री राम चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे. उनके आने की ख़ुशी में अयोध्यावासियों ने अपने घरों में दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था.

पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन समुंद्रमंथन से धन की देवी लक्ष्मी प्रकट हुयी थी. जैन धर्म वाले भगवान महावीर स्वामी से सम्बधित कथा कहते है. कुछ लोग इस दिन हनुमान जी की जयंती मनाते है. मत चाहे कुछ भी हो लेकिन आनंद-उल्लास की दृष्टि से मनाये जाने वाले त्यौहारों में यह प्रमुख त्यौहार है.

दीपावली मनाने की विधि (Method Of Celebration)

दीपावली से पहले गृहणियां धन तेरस के दिन बर्तन खरीदना शुभ मानती है. रूपचौदस के दिन घरों की सफाई करके छोटी दीपावली मनाई जाती है. अमावस्या के दिन दीपावली का त्यौहार पुरे हर्षो-उल्लास से मनाया जाता है.

इस दिन प्रत्येक घर में लक्ष्मी पूजन होता है. दुसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. लोग गोबर का गोवर्धन बनाकर उसे पूजते है.

कहते है इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर उठाकर मुसलाधार वर्षा से ब्रज की रक्षा की थी. इसके बाद भाई दूज का त्यौहार मनाते है.

बहनें अपने भाइयों के ललाट पर तिलक लगाती है और उन्हें मिठाइयां खिलाती है. दीपावली के दिन लोग ‘दवात पूजन’ भी करते है और अपने बहीखाते भी बदलते है. इस प्रकार यह त्यौहार पांच दिन तक बड़ी-ख़ुशी के साथ मनाया जाता है.

दीपावली का महत्व (Importance Of Deepavali)

हर त्यौहार का अपने विशेष महत्व होता है. जिस प्रकार ईद मुसलमानों में भाईचारे का त्यौहार माना जाता है, उसी प्रकार दीपावली भी स्नेह का त्यौहार है.

इस दिन सभी व्यक्ति अपने मित्रों और रिश्तेदारों से मिलते है तथा उन्हें शुभकामनाओं सहित मिठाइयाँ भेंट करते है. सांस्कृतिक पर्व की दृष्टि से यह त्यौहार पौराणिक परम्पराओं को बनाये रखने वाला है.

आखिर में

हिन्दुओं में मनाये जाने वाले त्योहारों में दीपावली का विशेष महत्व है. यह हमारी सामूहिक स्नेह भावना का प्रतीक है. खुद गरीबी को झेलते हुए भी भारतवासी उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते है, लक्ष्मी पूजन करते है और करते रहेंगे.

इस त्यौहार का लोग बेसर्बी से इन्तजार करते है. बच्चे पटाखें जलाते हे, सारा परिवार एक जगह साथ होता है, लोग साथ में खाना खाते है और अपने सारे गिले-शिकवे भुलाकर गले मिलते है. इसी लिए तो हमारा देश अनेकता में एकता का सिद्दांत लिए चलता है. पूरा बाज़ार इस दिन चकाचौंध से भरा रहता है.

रोशन हो दीपक और सारा जग जगमगाए
लिए साथ सीता मैया को राम जी आये
हर शहर यूँ लगे मानो अयोध्या हो
आओ हर दीवार, हर गली, हर मोड़ पर दीपक जलाये

दिवाली मेरा प्रिय त्योहार दीपों का त्योहार : दीपावली निबंध

प्रस्तावना

भारत कृषि प्रधान देश है हमारे यहाँ त्योहारों एवं उत्सवों का विशेष महत्व हैं जैसे ही ऋतू परिवर्तन होता हैं, खेत में नई फसल पक जाती हैं. तब मानव मन अपनी ख़ुशी को उत्सवों और त्योहारों के रूप में प्रकट करता हैं, दिवाली भी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार हैं यह सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व से भी मनाया जाता हैं.

दिवाली मनाने का कारण

इस त्योहार को मनाने का एक कारण यह है कि इसी दिन भगवान राम लंका के राजा रावण पर विजय प्राप्त करके और चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे.

उनके आने की ख़ुशी में घर घर में दीपक जलाए गये थे. उसी पुण्य दिवस की ख़ुशी में यह त्योहार मनाया जाता हैं. इसके साथ ही इस त्योहार को मनाने के पीछे अन्य कारण भी माने जाते हैं. जैसे भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर राक्षस का वध किसानों की धान की फसल पकना आदि.

उत्सव की शोभा- दिवाली का त्योहार कार्तिक मॉस की अमावस्या को प्रतिवर्ष मनाया जाता हैं. इस त्योहार को मनाने के लिए घरों की सफाई रंगाई पुताई की जाती हैं.

दिवाली के दिन गाँवों शहरों और कस्बों में दीपक जलाये जाते हैं. बिजली की रंग बिरंगी रोशनी से घर बाजार और दुकाने सजाई जाती हैं. सभी लोग लक्ष्मी पूजन करते हैं. मिठाइयाँ खाते हैं. और बच्चे पटाखे छुड़ाकर मन की ख़ुशी को प्रकट करते हैं.

अमावस्या के दो दिन पहले धनतेरस को लोग नयें बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं. चतुर्दशी को छोटी दिवाली मनाई जाती हैं और अमावस्या के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है उसके दूसरे दिन भैया दूज का त्योहार मनाया जाता हैं. इस दिन बहिने अपने भाइयों को तिलक करती हैं और मिठाइयाँ खिलाती हैं.

लाभ हानि- इस त्योहार से सबसे बड़ा लाभ यह है कि घरों की सफाई हो जाती हैं लोगों के घर घर जाकर उनसे मिलने से प्रेम सहयोग की भावना का विकास होता हैं. इस त्योहार पर कुछ लोग जुआ खेलते हैं यह सबसे बड़ी हानि हैं.

उपसंहार- यह हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार हैं यह समाज की सामूहिक मंगलेच्चा का प्रतीक हैं. इस अवसर पर लोग सबकी खुशहाली और सम्रद्धि की मंगल कामना करते हैं, यह भारतीय जनजीवन के आनन्द और उल्लास का त्योहार हैं.

बच्चों के लिए दिवाली का निबंध Diwali Essay In Hindi For Child

इस साल 4 नवम्बर को दिवाली आ रही है. हमने इससे पूर्व के कई आर्टिकल में हैप्पी दिवाली sms, संदेश, शायरी, धनतेरस और लक्ष्मी पूजा के बारे में भी काफी लेख लिखे है.

आज के लेख में हम बात करेगे यह त्यौहार कब क्यों और कैसे मनाया जाता है. इसका इतिहास और महत्व से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बाते आपसे साँझा कर रहा हु.

दीपावली का अर्थ

दीपावली और दिवाली का एक ही अर्थ होता है. कुछ लोग इन्हें दियाली और दिपाबली भी कहते है. मुख्यत ये संस्कृत भाषा का शब्द है.

जिसका अर्थ होता है दीपों की लाइन. अवली को पक्ति श्रेणी या लाइन भी कहा जाता है. इस तरह दीपक की माला या पक्ति को दीपावली कहा जाता है. इसी कारण इसे दीपोत्सव भी कहा जाता है.

जिस तरह मुस्लिम सम्प्रदाय के लिए ईद, ईसाईयों के लिए क्रिसमस और सिख सम्प्रदाय के लिए बैशाखी और लाहोड़ी का महत्व है. ठीक उसी प्रकार यह दीपों का त्यौहार हिन्दू वर्ग के अनुनायियों के लिए बड़ा उत्सव है.

हिन्दू पंचाग के अनुसार इसे कार्तिक अमावस्या को दिवाली जिसे लक्ष्मी पूजा भी कहा जाता है पर्व मनाया जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह नवम्बर माह में पड़ता है.

वैसे दीपावली का उत्सव पांच दिनों तक चलता है, जिनमे धनतेरस और लक्ष्मी पूजन का बड़ा महत्व माना जाता है.

इस पंचदिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है इसके बाद नरक चतुदर्शी और अगले दिन दिवाली इसके बाद के उत्सव गौवर्धन पूजा एवं भाई दूज के रूप में जाने जाते है.

देशभर में धूमधाम से मनाए जाने वाले यह पर्व अन्धकार पर उजाले का प्रतीक माना जाता है.

दीपावली क्यों मनाते हैं कहानी/कथा

पुरा काल में राजा दशरथ जी के घर जन्मे श्रीराम से Diwali Story जुड़ी मानी जाती है. राम जी के पिता दशरथ अयोध्या के शासक थे, जो वर्तमान में उत्तरप्रदेश का बड़ा शहर है.

वृद्धावस्था में दशरथ जी ने अपने उतराधिकारी राम को बनाया, मगर पूर्व वर्षो में किसी घटना में कैकेयी (दशरथ की रानी) को उनके प्राण बचाने के कारण एक वर दिया था.

कैकेयी ने पुत्र मोह में आकर राम की जगह अपने बेटे भरत को अयोध्या का शासक बनाना चाहा, तथा उन्हें वर के उपयोग की तकरीब सूझी.

तभी कैकेयी ने अपने वर के रूप में राम को चौदह साल का वनवास और भरत को राजगद्दी दिलाने का आग्रह किया. अपने पिता के वचन के चलते राम ने वनवास जाना उचित समझा तथा भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वन को गये.

वनवास के 14 वें साल में लंका के शासक रावण की बहिन सूर्पनखा के लक्ष्मण द्वारा नाक काट दिए जाने पर राक्षसराज ने प्रतिशोध के रूप में सीता का अपहरण कर लिया.

सीता हरण की जब राम को खबर मिली तो उन्होंने सीता का पता लगाने के लिए वानर राज सुग्रीव की मदद ली तथा लंका पर चढ़ाई की.

कई महीनों के यत्न के बाद राम और रावण का युद्ध भूमि में सामना हुआ, फलस्वरूप रावण मारा गया तथा राम सीता सहित अपना वनवास पूरा कर अयोध्या आए.

अयोध्या के लोगों ने जब राम के आने की खबर पता चली तो उन्होंने घी के दिए जलाकर पुरुषोतम राम का स्वागत किया. इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए आज भी घी के दिए जलाकर दिवाली का उत्सव मनाया जाता है.

दीपावली पर्व का महत्व

दीपावली के उत्सव पर लोग अपने घरों की मरम्मत, सफ़ेदी आदि का कार्य करवाते हैं| लोग धर्म और आस्था के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा आराधना करते है. तथा लक्ष्मी के स्वागत के लिए अपने घर और दूकान को दुल्हन की तरह सजाते है.

व्यापारियों के लिए इन पांच दिनों में सबसे अधिक खरीददारी होती है. दीपावली से नये वर्ष की शुरुआत होती है तथा नए बही खाते बनाए जाते है.

सरकारी कर्मचारियों को लम्बी छुट्टिया मिलती है जिससे वे अपने स्वजनों के साथ इस पर्व को मना पाते है. चारो ओर घी के दियों की रोशनी से वर्षा ऋतू में पनपे जीवाणु और कीट भी समाप्त होते है. जिससे पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है.

कई दिनों तक घरों की साफ़ सफाई और रंग रोगन से स्वच्छता का माहौल बनता है. जैन धर्म के लोग इसे महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते है. सिख सम्प्रदाय में इसे मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है, इस दिन हरगोबिन्द जी को जेल से मुक्ति मिली थी.

दीपावली पर निबंध Short Essay On Diwali In Hindi

दीपावली भारत में मनाया जाने वाला एक ऐसा त्यौहार है जिसका धार्मिक ही नही बल्कि बड़ा सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व भी है. कहने को तो यह हिन्दू धर्म का त्यौहार माना जाता है, मगर भारत में सभी धर्मो सम्प्रदायों के लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते है.

दीपावली का अर्थ

दीपावली का शाब्दिक अर्थ होता है दीपों की पक्ति . इस दिन लोग दीपों को अपने घर व् बाहर पक्तिबद्ध रुप से सजाते है. इस तरह यह प्रकाश यानि रोशनी का पर्व है.

इसे कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाया जाता है. धन और एश्वर्य की देवी कही जाने वाली देवी माँ लक्ष्मी की इस दिन विशिष्ट पूजा अराधना की जाती है.

दीपावली मनाने का तरीका

आज के समय में लोग इस पर्व पर दियो की बजाय मोमबत्ती का अधिक उपयोग करते है. साथ ही शहरी व नगरीय क्षेत्र में विभिन्न रंगो की रोशनी के बिजली के बल्बों का उपयोग भी बेहद लोकप्रिय है.

इस दिन पूरा देश दियों व लाइट्स से जगमगा उठता है. शहरों में भले ही दिवाली की चकाचौध अधिक हो मगर भारत के गाँवों में आज भी घी के दियों के साथ यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है . जो हमारी ग्रामीण संस्कृति की सुन्दरता का परिचायक है.

इस दिन लोग अपने परिवार जनों व रिश्तेदारों को मिठाइयाँ और उपहार भेट करते है, घर घर में सुंदर रंगोलियाँ बनाई जाती है. अन्य उत्सवो भी भांति दीपावली का त्योंहार भी बच्चों के लिए विशेष महत्व का है.

दिवाली के कुछ दिन पूर्व से ही बच्चें पटाखों और फुलझड़ियो कों चलाने में मग्न रहते है तथा इस उत्सव का पूरा लुफ्त उठाते है.

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी पूजा के पूर्व का एक दिन नर्क चतुर्दशी कहलाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान् श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था. इस दिन को नर्क चतुदर्शी मनाई जाती है.

इससे पूर्व का एक दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है. जिन्हें धन त्रयोदशी भी कहा जाता है. इस दिन सोना चांदी और धातु के बर्तनों की खरीददारी करना शुभ माना जाता है.

लक्ष्मी पूजा यानि दीपावली के दुसरे दिन गौवर्धन पूजा होती है. कहते है इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन देवराज इंद्र को पराजित किया था तथा गौवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाया था.

दीपावली मनाने के पीछे कई कारण जुड़े हुए है रामायण की धार्मिक कथा के अनुसार भगवान श्री राम आज ही दिन चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे.

लम्बे समय बाद राम सीता लक्ष्मण के दर्शन और आगमन की ख़ुशी में अपने घर और पुरे अयोध्या नगर को दीपमालाओं से सजा दिया था. उस दिन से लेकर आज तक हिन्दू धर्मावलम्बी कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन को दीपावली के पर्व के रूप में मनाते आ रहे है.

दीपावली की कथा

लक्ष्मी पूजा और धन तेरस के सम्बन्ध में भी कहा जाता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से लक्ष्मी जी की उत्पति हुई थी. इसी धारणा के चलते दीपावली के दिन धन और एश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा अर्चना की जाती है.

माना जाता है भारतीय चिकित्सा पद्दति के जनक और आयुर्वेद के प्रणेता भगवान धन्वन्तरी भी इस दिन जन्मे थे. इसलिए भी त्रयोदशी को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है.

दीपावली मनाने का अपना सामाजिक महत्व भी है. कार्तिक कृष्ण अमावस्या तक किसान वर्ग खरीफ की फसल ले चुके होते है. अच्छी फसल के उत्पादन की ख़ुशी का इजहार करने का समय माना जाता है.

दीपावली के आगमन से पूर्व लोग स्वच्छ कपड़े खरीदते है, बर्तनों व आभूषणों की खरीददारी भी की जाती है. दिवाली से कुछ दिन पूर्व लोग अपने घरों को साफ़ सुथरा बनाकर सजाते है.

Short Essay On Diwali In Hindi In 600 Words For Students

पश्चिम बंगाल में लोग दीपावली को दुर्गा पूजा (काली पूजा) के रूप में मनाते है. वहां बड़े बड़े पंडालो और मन्दिरों में काली की मूर्ति की स्थापना की जाती है.

इसके पश्चात वहां पर लक्ष्मी की पूजा आराधना होती है. काली पूजा इसलिए की जाती है ताकि वह हमारे जीवन में व्याप्त सम्पूर्ण दुखो का नाश करे व् इसके बाद लक्ष्मी जी हमारे जीवन को सुख सम्रद्धि से परिपूर्ण कर दे.

दीपावली के दिन कई स्थानों पर मेलो का भी आयोजन होता है. दीपावली सामाजिक और धार्मिक महत्व होने के साथ साथ आर्थिक महत्व भी है. इस दिन से पूर्व खासकर व्यापारी वर्ग वर्ष भर के सम्पूर्ण खातों को पूरा कर दीपावली के दिन से नये बही खाते की शुरुआत करते है.

बड़ी संख्या में बाजार में लोगों द्वारा खरीददारी किये जाने के कारण व्यापारी लोग अपनी दुकानों को आकर्षक ढंग से सजाते है. साथ ही कई कम्पनियों द्वारा दीपावली के अवसर पर विभिन्न उत्पादों पर बड़ी छुट और बेस्ट ऑफर प्रदान किये जाते है.

महत्व

दीपावली का अपना वैज्ञानिक महत्व भी है, वर्षा ऋतू की समाप्ति पर हमारे वातावरण में असंख्य संख्या में कीट पतंग उत्पन्न हो जाते है. जो व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते है.

दीपावली से पूर्व घरों में और कृषिजन्य कचरे की सफाई से वातावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है. लिपाई पुताई व दीपावली के दिन दियो की रौशनी से इस प्रकार के कीट पतंग मर जाते है. इस तरह एक उत्सव के रूप में दिवाली प्रत्यक्ष रूप से हमारे वातावरण को स्वच्छ बनाने में मदद करती है.

प्रतीक के रुप में दीपावली का पर्व अँधेरे पर प्रकाश की विजय का त्यौहार है. जो सभी को भाईचारे व प्रेम का संदेश देता है. भले ही दिवाली अमावस्या की अन्धकार भरी रात को मनाई जाती है.

मगर हर घर गली से दीपकों की रोशनी से पूरा विश्व नहला जाता है साथ ही दीपावली का पर्व हमे यह सीख भी देता है कि चाहे कितनी बड़ी विपति हो सामूहिक रूप से उसका सामना कर पार पाया जा सकता है.

संदेश

दीपों का यह त्यौहार हमे जीवन से अज्ञानता रूपी अँधेरे को भगाकर ज्ञान रूपी प्रकाश की ज्योति जलाने की सीख देता है. विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक त्यौहार हमारे दिलों में ख़ुशी और उत्साह का संचार करते है. हमारे देश में त्यौहार मनाने की एक विशेष परम्परा रही है.

जिनमे विभिन्न तिथियों और महीनों में उत्सव मनाए जाते है. दीपावली जैसे त्यौहार हमारे देश की अनेकता में एकता की विशेषता को बढ़ाने में योगदान देते है. हमे आवश्यकता है इस प्रकार के उत्सवो की परम्परा को निरंतर कायम रखने की.

अधिक मात्रा में खतरनाक और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों का दीपावली के अवसर पर उपयोग करना इसकी सुन्दरता को धब्बा लगाने जैसा है, हमे इस प्रकार की बुराइयों को समाप्त करने की पहल करनी चाहिए.

अत्यधिक मात्रा में विस्पोट पदार्थो का उपयोग व आतिशबाजी जैसी चीजों को इस पर्व से निकाल दिया जाए तो वाकई दीपावली अपने वास्तविक उद्देश्यों को पूर्ण करती नजर आती है.

दिवाली पर निबंध Short Essay On Diwali In Hindi In 500 Words With Headings

दीपावली का इतिहास- दीपावली हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है. दीपावली प्रकाश या दीपों का उत्सव हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान राम इसी दिन रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे थे. अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत और उल्लास में सारे नगर में दीपमालाएँ सजाई थी.

जैन धर्मावलम्बियों, आर्यसमाजी, सिखों और कृष्णभक्तों के लिए भी यह उत्सव का दिन हैं. कुछ लोगों के अनुसार यह कृषि उत्सव हैं. नई फसल के आगमन का त्यौहार हैं. दीपावली के त्यौहार का इतिहास बहुत प्राचीन हैं.

इस त्यौहार को मनाना कब आरम्भ हुआ, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता. भारत में ऋतु परिवर्तन पर त्यौहार मनाने की परम्परा रही हैं. दीपावली भी उनमें से एक हैं.

मनाने का समय और स्वरूप- दीपावली का उत्सव कार्तिक मास की अमावस्या की रात को मनाया जाता हैं. इस त्यौहार के पूर्व घरों की सफाई, लिपाई पुताई और सजावट हो जाती हैं. अमावस्या के दिन लक्ष्मी जी का पूजन करके रात में घर, दुकान, बाजार सभी स्थानों पर दीपक जगमगाएं जाते हैं.

आतिशबाजी चलाई जाती हैं. और मिठाई बाटी जाती हैं. व्यापारी लोग इस त्योहार को विशेष उत्सव के रूप में मनाते हैं. बही खाते बदले जाते हैं. उनका पूजन होता है. मित्रों, प्रियजनों और कर्मचारियों को मिठाई वितरित की जाती हैं.

अन्य त्यौहार- दीपावली पांच त्यौहारों का सम्मिलित स्वरूप हैं. दीपावली का मुख्य त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता हैं. पहले दिन धनतेरस मनाई जाती हैं.इस दिन स्वास्थ्य और आरोग्य के प्रवर्तक वैद्य धन्वन्तरि की पूजा की जाती हैं.

नयें बर्तन तथा सोने चांदी के गहने खरीदे जाते है. दूसरे दिन के रूप में चौदस का त्यौहार मनाया जाता हैं. इस दिन स्त्रियाँ सजती संवरती हैं. और रूप सज्जा करती हैं. तीसरे दिन प्रमुख त्यौहार दीपावली मनाया जाता हैं.

चौथे दिन प्रतिपदा को गौवर्धन पूजा होती हैं. इस दिन कृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र का मानमर्दन किया था. इससे क्रोधित होकर इंद्र ने भीषण वर्षा की. ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने गोर्वधन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया था.

गोवर्धन पूजा के बाद भैया दौज का त्यौहार मनाया जाता हैं. बहनें अपने भाइयों के तिलक करती हैं. मिष्ठान भेट करती हैं. तथा उनके दीर्घ जीवन की कामना करती हैं. इसको यम द्वितीया भी कहा जाता हैं. भाई बहिन साथ साथ यमुना में स्नान करते हैं. इससे यमलोक की यातना से मुक्ति मिलती हैं.

महत्व- दीपावली स्वच्छता और साज सज्जा का त्यौहार हैं. इस त्यौहार पर घरों की सफाई और पुताई होने से वर्षा ऋतु में उत्पन्न मच्छर कीट पतंगे नष्ट हो जाते हैं.

यह त्यौहार जीवन में धन के महत्व का स्मरण करवाता हैं. लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं प्रदान करते हैं. इससे सामजिक मेल मिलाप बढ़ता हैं. इस त्यौहार का सम्बन्ध स्वास्थ्य, स्वच्छता, धन की महत्ता, मानवीय सम्बन्धों और सामाजिकता की भावना से हैं.

दीपावली / दीवाली त्यौहार पर निबंध 2021 Essay on Diwali Festival in Hindi 

भारत त्योहारों का देश है, दीपावली हिन्दुओं का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार हैं. यह त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता हैं.

मनाने का कारण-दीपावली के समय हमारे यहाँ पर खरीफ की पैदावार तैयार हो जाती हैं. अतः पूर्वजों ने देवताओं को नया अन्न भेट करने के लिए उत्सव मनाने का प्रचलन किया था.

यह भी कहा जाता है कि भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास के बाद इसी दिन अयोध्या लौटे थे. अतः अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में घी के दीप जलाकर यह उत्सव मनाया था.

मनाने का तरीका-दीपावली का उत्सव कई दिन चलता हैं अर्थात कृष्ण पक्ष की तेरस से शुक्ल पक्ष की दूज तक. धनतेरस के दिन दीपक जलाकर सब लोग अपने द्वार पर रखते हैं. बर्तन खरीदना इस दिन शुभ माना जाता हैं.

दूसरे दिन को छोटी दिवाली कहते हैं. तीसरे दिन लो लक्ष्मीजी का पूजन होता हैं. लोग घरों दुकानों और कार्यालयों को दीपकों रंग बिरंगे बिजली के बल्बों की मालाओं से सजाते हैं. ऐसा विश्वास है कि लक्ष्मीजी इस दिन प्रत्येक घर आती हैं.

और जिस घर की स्वच्छता व सुन्दरता से प्रसन्न हो जाती हैं. उस दिन को अपने निवास के लिए चुन लेती हैं. इस दिन सब लोग नवीन वस्त्र धारण करते हैं तथा अपने इष्ट मित्रों को मिठाइयाँ देते हैं. चौथे दिन गोवर्धन पूजा होती हैं. पांचवा दिन भैया दूज या यम द्वितीया का होता हैं.

दीपावली का महत्व– दीपावली हिन्दुओं का महत्वपूर्ण त्योहार हैं. इस अवसर पर घरों की सफाई, लिपाई, पुताई हो जाती हैं. दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता हैं. बीमारी फ़ैलाने वाले मच्छर, कीड़े और पतंग सब मर जाते हैं.

कुरीतियाँ– दीपावली एक अत्यंत पवित्र त्योहार हैं. परन्तु कुछ कुरीतियों ने इसके स्वरूप को बिगाड़ दिया हैं. कुछ लोग इस दिन जुआ खेलते हैं. हजारों रूपये हार जाते हैं, लाखों रूपये के पटाखे जला दिए जाते हैं, इससे प्रायः भयंकर दुर्घटनाएं हो जाती हैं.

उपसंहार– दीपावली हिन्दुओं का एक पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार हैं. यह हमे प्रसन्नता का संदेश देता हैं.

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