शतरंज पर निबंध | Essay on chess in hindi

शतरंज पर निबंध Essay on chess in hindi: नमस्कार दोस्तों आज हम शतरंज के खेल पर निबंध बता रहे हैं. १४०० वर्ष प्राचीन इस भारतीय खेल के बारें में विद्यार्थीयों के लिए खेल के सामान्य परिचय, इतिहास और खेलने के तरीके के बारें में संक्षिप्त जानकारी chess Essay in hindi में दी गई हैं. इस आर्टिकल की मदद से आप मेरा प्रिय खेल शतरंज पर भी निबंध रचना कर सकते हैं.

शतरंज पर निबंध | Essay on chess in hindi

शतरंज पर निबंध Essay on chess in hindi

हम खेलों की एक विशाल दुनियां में जी रहे हैं जहाँ शारीरिक क्षमता मानसिक स्फूर्ति और क्रियाशीलता व मनोरंजन के विविध खेल हैं. क्रिकेट, कुश्ती, टेनिस आदि कुछ लोकप्रिय गेम्स हैं. मगर एक ऐसा भी खेल है जिसे वही खेल और समझ सकता है जिसे इसमें महारथ हासिल हैं हाँ हम बात कर रहे शतरंज के खेल की.

सबसे जटिल खेलों में इसकी गिनती की जाती हैं. आज के निबंध, भाषण, लेख, अनुच्छेद, पैराग्राफ में हम जानेगे कि शतरंज का खेल क्या है इसका इतिहास, नियम और खेलने का तरीका व लाभ क्या हैं.

300 शब्द निबंध

शतरंज एक प्राचीन खेल है जिसका जिक्र महाभारत में भी है। महाभारत में कौरव और पांडव के बीच जो खेल खेला गया था उसे शतरंज का खेल ही कहते हैं। आज के आधुनिक जमाने में शतरंज का खेल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्रकार से खेला जा रहा है।

ऑनलाइन शतरंज खेलने के लिए ऐप का इस्तेमाल होता है और ऑफलाइन शतरंज खेलने के लिए शतरंज बोर्ड का इस्तेमाल होता है। पहले शतरंज को चतुरंग का नाम दिया गया था बाद में नाम बदलकर शतरंज रखा गया।

अंग्रेजी में शतरंज खेल को चेस का खेल कहा जाता है। दुनिया भर में आज के समय में शतरंज की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होता है। हमारे देश के प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद है जिन्होंने कई शतरंज की प्रतियोगिता जीती हुई है।

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शतरंज के खेल की शुरुआत की कहानी के अनुसार रावण जब युद्ध में व्यस्त रहता था तो उन्हें अपनी पत्नी मंदोदरी के साथ समय व्यतीत करने का मौका नहीं मिलता था। ऐसे में मंदोदरी के द्वारा शतरंज का खेल बनाया गया था और यह खेल वह अपने पति रावण के साथ खेलती थी और इसी खेल की वजह से मंदोदरी ने वापस से रावण को प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी।

आज शतरंज का खेल बड़े, बूढ़े और बच्चे सभी खेलते हैं। यह एक दिमागी खेल होता है। इसलिए इस खेल को खेलने से हमारे दिमागी स्वास्थ्य का विकास होता है और हमारे दिमाग के सोचने समझने की क्षमता में भी तेजी से बढ़ोतरी होती है।

शतरंज का खेल कार्ड बोर्ड पर खेला जाता है जिसमें कुछ खाने काले रंग के और कुछ खाने सफेद रंग के होते हैं और इसमें मुख्य तौर पर दो रंग की गोटिया होती हैं जिनमें निश्चित संख्या में सफेद रंग की गोटियां और निश्चित संख्या में काले रंग की गोटियां होती हैं।

शतरंज के कार्ड बोर्ड पर टोटल 64 खाने बने हुए होते हैं। इस खेल में मुख्य गोटी के तौर पर राजा रानी की गोटी को जाना जाता है। इसके अलावा खेल में सिपाही,घोड़े और हाथी तथा वजीर जैसी गोटिया भी होती है जो निश्चित दिशा में और निश्चित कदम पर चलते हैं।

शतरंज के खेल में मुख्य लक्ष्य सामने वाले खिलाड़ी के राजा को खत्म करना होता है। जिस खिलाड़ी के द्वारा सामने वाले खिलाड़ी के राजा को पहले खत्म कर दिया जाता है, वह खिलाड़ी शतरंज के खेल का विजेता बन जाता है।

शतरंज पर निबंध | Essay on chess in hindi 700 शब्द

खेल केवल बाहुबल से ही नहीं खेले जाते हैं बल्कि ये कौशल और दिमाग से भी खेलने पड़ते हैं इसका सबसे अच्छा उदाहरण शतरंज का खेल हैं. यह एक भारतीय भूमि से उत्पन्न प्राचीन खेल हैं जो व्यक्ति के मानसिक विकास में बेहद कारगर साबित होता हैं. किसी अनजान व्यक्ति के लिए शतरंज खेल खेलना तो दूर की बात है पास बैठकर देखने से भी कुछ भी हासिल नहीं होता हैं. इसकी वजह इसकी दुरुहता एवं समझ हैं.

शतरंज का इतिहास (history of chess game in hindi)

पुराने जमाने में राजा महाराजाओं द्वारा ही शतरंज खेला जाता हैं. इसे श्रेष्ठ अमीर और उच्च वर्ग के लोगों का खेल कहा जाता हैं. शतरंज को अंग्रेजी में chess कहा जाता हैं यह अंग्रेजी शब्द पर्शियन भाषा के शाह से निकला हैं जिसका अर्थ होता हैं राजा.

और राजा को ही बादशाह कहा जाता है जो हिंदी के महाराजा के तुल्य शब्द हैं. शतरंज की जन्म स्थली भारत की पावन धरा रही हैं. रावण की पत्नी मन्दोदरी को इस खेल की कुशल खिलाड़ी कहते हैं खाली मस्तिष्क शैतान का घर होता हैं. बस यही कुछ था लंका में निष्काम बैठे राक्षस आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे. मंदोदरी ने सुझबुझ से उन्हें सीखा दिया.

भारत में शतरंज छठी सातवीं सदी से खेला जाता रहा हैं. भारत समेत आस पास के देशों में खुदाई में मिली शतरंज की मोहरों से इसकी प्राचीनता ज्ञानत होती हैं. महाभारत में चतुरंग का विवरण मिलता है जो चार खिलाड़ियों के साथ खेला जाता था. पश्चिम भारत में यह बेहद लोकप्रिय था कालान्तर में इस खेल ने शतरंज का रूप ले लिया था.

बीसवीं सदी में शतरंज के खेल का पुनर्जन्म हुआ यह नयें विधानों के साथ फिर से अस्तित्व में आया. फेडरेशन इन्टरनेशनल दि एचेस (फिडे) द्वारा खेल की समस्त प्रतियोगिताओं एवं नियमावलियों का निर्धारण किया जाता हैं. संघ द्वारा खेल के उत्कृष्ट स्तर पाने वाले खिलाड़ी को ग्रेंड स्लैम का खिताब दिया जाता हैं.

भारत में आज भी शतरंज खेल ख़ासा जनप्रिय हैं. देश के लाडले विश्वनाथन आनंद ने शतरंज की दुनियां में भारत का लोहा मनवाया हैं. इस खेल की रोचक बात आप शायद नहीं जानते होंगे भारत में जन्मे इस खेल को जितना हमने नहीं अपनाया उससे ज्यादा लोकप्रियता दूसरे देशों में मिली सोवियत रूस का राष्ट्रीय खेल शतरंज भी हैं. इस खेल की पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन 1851 में लंदन में हुआ था.

शतरंज खेल खेलने का तरीका व सामान्य जानकारी (How to play chess and general information)

शतरंज (चैस) जिसका प्राचीन नाम चतुरंग था, बेहतरीन बौद्धिक एवं मनोरंजक खेलों में से एक शतरंज दो खिलाड़ियों के मध्य खेला जाता है दोनों एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी होते हैं. इसे एक बोर्ड पर खेला जाता हैं जिसे चौपाट कहा जाता हैं इसमें समान आकार के 64 खाने अर्थात वर्ग बने होते हैं.

32 वर्ग काले एवं 32 अन्य रंगों के वर्ग होते हैं. प्रतिस्पर्धी द्वारा काला या सफेद रंग चुना जाता हैं. दोनों खिलाड़ियों के पास समान संख्या में एक राजा, वजीर, दो ऊँट, दो घोडे, दो हाथी और आठ सैनिक रहते हैं. चौपाट के मध्य में राजा एवं वजीर रहते हैं कोनो पर ऊंट और अंतिम लाइन में हाथी रहते हैं उनकी अगली पंक्ति में सैनिकों को व्यवस्थित किया जाता हैं. खेल का आरम्भ सफेद खिलाड़ी द्वारा ही किया जाता हैं.

शतरंज अन्य खेलों में इसलिए भी भिन्न है क्योंकि इसके खेल की कोई अवधि निर्धारित नहीं हैं. एक मैच एक घंटे में भी पूरा हो सकता है और छः सात घंटे भी ले सकता हैं. खेल के प्रति रूचि रखने वालों के लिए इससे बढ़कर कोई ख़ुशी देने वाली चीज नहीं हैं एक जीत व्यक्ति के मस्तिष्क को बेहद ताजगी का अनुभव देता हैं.

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