पेट्रोलियम संरक्षण पर निबंध Essay on petroleum conservation in hindi

पेट्रोलियम संरक्षण पर निबंध Essay on petroleum conservation in hindi: नमस्कार दोस्तों आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ, आज हम पेट्रोल संरक्षण बचाओं पर निबंध बता रहे हैं. हम सभी जानते है पेट्रोलियम एक परम्परागत व अनवीकरण योग्य ऊर्जा स्रोत हैं जिनके बेहद सीमित भंडार बचे हैं अतः समय रहते हमें इनके संरक्षण की ओर बढ़ना चाहिए ताकि हमारी आगामी पीढियां भी इनका उपयोग कर पाए.

Essay on petroleum conservation in hindi

Essay on petroleum conservation in hindi

pcra essay in hindi: आज के समय में पेट्रोलियम संरक्षण हमारे देश की आवश्यकता बन गया हैं. इस कदम से देश की आर्थिक स्थिति को अधिक मजबूत करने में मदद मिल सकती हैं. साथ ही पेट्रोलियम संरक्षण से पर्यावरण को भी लाभ मिल सकेगा. हमारे देश के एक बड़े शहर में डीजल एवं पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की संख्या लाखों में हैं इस तरह से हम पेट्रोलियम संरक्षण से हम व्यापक स्तर पर हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोक सकते हैं.

आज प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में पेट्रोल अभिन्न अंग व मूलभूत आवश्यकता बन गया हैं. सड़क पर हम जितने भी वाहन देखते है वे सब पेट्रोल और डीजल से ही चलते हैं. इससे प्रदूषण भी बढ़ रहा हैं तथा ईराक जैसे तेल निर्यातक देशों पर हमारी निर्भरता बढ़ रही हैं. पेट्रोलियम के कच्छे माल के लिए हमें बेशुमार धन एवं शक्तिशाली राष्ट्रों की शर्तों का पालन भी करना पड़ रहा हैं सरकार एवं जनभागीदारी के प्रयासों से हमारे देश में पेट्रोलियम संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये जा सकते हैं.

पेट्रोल तथा डीजल से चलने वाली इन मशीनों का सबसे बड़ा दुष्परिणाम हम प्रदूषण के रूप में भुगत रहे हैं. सर्दियों के मौसम में दिल्ली जैसे शहर की वायु में इस विषैले धुएँ के जहर को महसूस किया जा सकता हैं. ग्रीन एनर्जी की ओर आज समूचा संसार चल पड़ा हैं भारत समेत सभी पर्यावरण हितैषी राष्ट्र पेट्रोलियम संरक्षण की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं. कई देशों में अधिक धुआं देने वाले पुराने वाहनों पर प्रतिबन्ध भी लगाया गया हैं. अब विश्व तेजी से पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनों के विकल्प की तलाश में जुटे हैं. अब सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों की संख्या निरंतर बढ़ रही हैं. ऐसा करके हम मानव व प्रकृति हित में अपना योगदान भी कर सकते हैं.

इस कारण पेट्रोल का संरक्षण किया जाना चाहिए. जहाँ तक हम देखते है हर ओर मशीने सरपट दौड़ रही हैं इससे निकलने वाला धुआं काले जहर की तरह हमारे वायुमंडल में फैलता ही जा रहा हैं. जिससे वायु विषाक्त हो गई हैं, लोग तरह तरह की श्वास, चर्म एवं मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारियों के शिकार होते जा रहे हैं. हमें इस प्रदूषण के खात्मे के लिए पेट्रोल का नियंत्रित उपयोग करना होगा, ऐसा करके न सिर्फ अपने पर्यावरण को बचा सकते हैं बल्कि देश की पूंजी भी दूसरे देशों में जाने से रोक सकते हैं.

यदि इसी बेहताशा तरीके से हम पेट्रोलियम संसाधनों का दोहन करते रहे तो वह समय दूर नहीं जब यह पूर्ण रूप से खत्म हो जाएगा. इसी बात को मध्यनजर रखते हुए हमें पेट्रोल के बचत की आदत डालनी होगी. हम निश्चय करे कि हमारे जितने भी व्यक्तिगत कार्य हो हम गाड़ी ले जाने की बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधनों के जरिये ही सफर करेगे. भले ही ऐसा करने से हमारा थोडा समय अधिक खर्च हो जाए मगर मानवता के लिए यह हमारा बड़ा बलिदान होगा.

पेट्रोलियम संरक्षण क्या है What is petroleum conservation

सरल शब्दों में पेट्रोलियम संरक्षण को समझे तो इसका अर्थ यह है कि पेट्रोल डीजल गैस आदि की बचत करना या इसके उपयोग को सीमित करना. हम रिन्युब्ल एनर्जी जैसे सौर, जल, बायो ऊर्जा का उपयोग अधिक से अधिक करके परिवहन तथा घरेलू उपयोग में पेट्रोल को बचा सकते हैं. घर में केरोसिन की जगह एलपीजी का उपयोग करके पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि ये दोनों ही प्रदूषण फैलाते है और इनके सीमित भंडार हैं फिर भी केरोसीन एलपीजी के मुकाबले बड़ी मात्रा में विषैली गैसें छोड़ता हैं.

देश भर में एक समान कानून बनाकर भी पेट्रोलियम संरक्षण एवं इससे चलने वाले वाहनों में कटौती की जा सकती हैं. हमें पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की संख्या कम से कम करनी होगी, ऐसा करके ही प्रदूषण में कमी की जा सकती हैं. देश के बजट का बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी के तेल निर्यातक देशों को जाता हैं यदि हम इसकी खपत को कम देगे तो निश्चय ही यह धन अन्य क्षेत्रों में उपयोग किया जाने लगेगा.

इस तरह पेट्रोल का संरक्षण हमारे देश की विकास में अहम योगदान दे सकता हैं. सभी नागरिकों का यह दायित्व हैं कि हम भारत की इकोनोमिक स्थिति में सुधार के लिए पेट्रोलियम का कम से कम उपयोग करे. कच्चे तेल के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए हम अपने दैनिक कार्यों में वाहनों की भूमिका को कम करे , इस तरह थोड़ी थोड़ी बचत के जरिये हम राष्ट्र निर्माण में बड़ा योगदान कर सकते हैं.

पेट्रोल संरक्षण पर निबंध Essay on Petrol Conservation In Hindi

जमीन से निकलने वाले पदार्थों में पेट्रोलियम का प्रमुख स्थान होता है और हमारा भारत देश पेट्रोलियम का भारी मात्रा में इस्तेमाल भी करता है। क्योंकि जनसंख्या अधिक होने के कारण इंडिया में पेट्रोलियम की मांग हमेशा बनी रहती है, हालांकि हमारे देश में पेट्रोलियम की पैदावार काफी कम है। इसलिए पेट्रोलियम प्राप्त करने के लिए भारत को सऊदी अरेबिया, अमेरिका, रशिया, वेनेजुएला, ईरान, इराक तथा अन्य कई देशों से पेट्रोल को आयात करना पड़ता है। 

पेट्रोलियम एक ऐसा पदार्थ होता है, जिसका इस्तेमाल मशीनों को और गाड़ियों को चलाने के लिए हम ऊर्जा ईधन के तौर पर करते हैं। जिस प्रकार खाना खाने पर हम इंसानों को एनर्जी मिलती है, उसी प्रकार मशीनों को काम करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थ के जरिए एनर्जी मिलती है और इन्हें जमीन के अंदर से खनन करके क्रूड ऑयल के तौर पर निकाला जाता है और इसके प्रमुख प्रोडक्ट पेट्रोल या फिर गैसोलीन, डीजल, केरोसिन, प्राकृतिक गैस, एलपीजी है।

एक अंदाज के तहत अगर हम पेट्रोलियम का लगातार ऐसे ही इस्तेमाल करते जाएंगे, जैसा वर्तमान में कर रहे हैं तो आने वाले कुछ दशक में पेट्रोलियम की भारी किल्लत हो जाएगी। इसलिए हमें पेट्रोलियम को अधिक से अधिक बचाने का प्रयास करना चाहिए और इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

हमारे इंडिया में मुख्य तौर पर कृषि, उद्योग, परिवहन और घरेलू कार्यों में भारी मात्रा में पेट्रोलियम के पदार्थों का यूज़ होता है और अगर इन संसाधनों की कमी हो जाती है या फिर यह संसाधन कम पड़ जाते हैं तो इन क्षेत्रों पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ेगा। पेट्रोलियम की खपत को कम करने के लिए तकनीक में सुधार करना पड़ेगा, साथ ही वित्तीय प्रोत्साहन भी देना पड़ेगा।

आंकड़ों के जरिए अगर हम बात करें तो हमारे इंडिया में ट्रांसपोर्ट की फील्ड में पेट्रोलियम की खपत सबसे ज्यादा है जो कि तकरीबन 50 परसेंट के आसपास है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट के अंतर्गत ऐसे वाहन भारी मात्रा में है, जो डीजल या फिर पेट्रोल से चलते हैं। वही एग्रीकल्चर की फील्ड में हल्के डीजल तेल का इस्तेमाल होता है। सिंचाई टेक्निक, पंप और सौर ऊर्जा जैसे ऑप्शन की ओर ध्यान दे करके हम पेट्रोलियम को बचा सकते हैं।

पेट्रोलियम पदार्थ एक ही दिन में नहीं बन जाते हैं। इन्हें बनने में लाखों और करोड़ों साल का समय लगता है और इनका जब एक बार इस्तेमाल कर लिया जाता है तो इन्हें दोबारा से पैदा नहीं किया जा सकता। इसलिए पेट्रोलियम को अनवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत कहा जाता है।

इंडिया के अलावा कई इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट भी पेट्रोलियम को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं, जिनमें पीसीआरए पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ भी एक है। इसे साल 1978 में बनाया गया था, जो पेट्रोलियम पर इंसानों की निर्भरता को कम करने के लिए लगातार काम कर रहा है और गवर्नमेंट को पेट्रोलियम संरक्षण की नीतियों के बारे में अवगत करवा रहा है। इसमें चाहे तो सामान्य नागरिक भी अपना सपोर्ट दे सकते हैं। 

एक नागरिक के तौर पर हम कुछ काम करके पेट्रोलियम संरक्षण को बढ़ावा दे सकते हैं। जैसे कि हमें संभव हो तो निजी कार्यों को करने के लिए प्राइवेट वाहन की जगह पर पब्लिक वाहन का इस्तेमाल करना चाहिए। हमें अधिक देर गाड़ियों के इंजन को चालू करके नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा हमें सीएनजी का उपयोग ज्यादा करने पर फोकस करना चाहिए, साथ ही हमें गाड़ियों के टायर में उचित प्रेशर का इस्तेमाल करना चाहिए। 

इसके अलावा अगर घर के आस पास जाना हो तो साइकिल का इस्तेमाल करना चाहिए और अगर किसी व्यक्ति के पास साइकल उपलब्ध नहीं है तो वह पैदल भी जा सकता है या फिर कोई दूसरा व्यक्ति अगर उसी स्थान पर जा रहा है, तो उसके साथ वह जा सकता है। इस प्रकार अगर हर नागरिक अपने अपने कर्तव्य को समझता है और वह पेट्रोल संरक्षण के प्रति अपना योगदान देता है, तो निश्चित है कि पेट्रोल संरक्षण को दुनिया भर में काफी बढ़ावा मिलेगा।

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