कबूतर पर निबंध Essay On Pigeon In Hindi

कबूतर पर निबंध Essay On Pigeon In Hindi : कबूतर बहुत ही प्यारा पक्षी होता है. जिसकी गुटरगूं का संगीत दुनियां का अनूठा सरगम बनाता हैं. लगभग हर मानव बस्ती में कबूतर पाए जाते है. पिजन पर निबंध में हम आपकों छोटे बच्चों के लिए निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं. छोटी कक्षाओं के स्टूडेंट्स को पशु पक्षियों पर निबंध लिखने को कहा जाता है. पिजन निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के स्तर को ध्यान में रखते हुए विभिन्न शब्द सीमा यथा 5 लाइन, 10 लाइन, 100, 200, 250, 500 शब्दों में कबूतर का निबंध हिंदी में यहाँ पर बता रहे हैं.

कबूतर पर निबंध| Essay On Pigeon In Hindi

कबूतर पर निबंध Essay On Pigeon In Hindi

यह देखने बहुत ही सुंदर और प्यारा पक्षी है, जो दुनिया के हर कोने में पाया जाता है, अलग अलग क्षेत्रों में इसकी विविध प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

नियततापी उड़ने वाले पक्षियों में इसकी गिनती की जाती हैं. पंखों से इसका पूरा शरीर ढका रहता हैं. नुकीली चोंच वाले कबूतर के सिर से चोंच तक एक गहरी झिल्ली बनी होती हैं.

यह खाने में अनाज के दाने, बीज, फल आदि का उपयोग करता हैं. प्राचीन समय में कबूतर का उपयोग पत्र व्यवहार के लिए बड़े स्तर पर काम लिया जाता था.

भारत में कई भांति के कबूतर देखने को मिलते है. प्रमुखता से इनका रंग सफेद और स्लेटी ही होता हैं. यह धार्मिक महत्व का पक्षी भी हैं. कबूतर को शांति का दूत अथवा प्रतीक भी माना जाता हैं.

एक लम्बी चोंच तथा दो आँखों के इस पक्षी को बेहद बुद्धिमान पक्षियों में गिना जाता हैं. यह मनुष्य की भाषा को समझ सकता है इसलिए इसे प्रशिक्षित भी किया जाता हैं.

पुराने जमाने में लोग इन्हें पाला करते थे. तथा जब भी उन्हें कोई संदेश अथवा डाक पहुचानी होती थी, तो वे इसका उपयोग किया करते थे.

कबूतर काफी तेज रफ़्तार के साथ हवा में उड़ता है यह 30 मील प्रति घंटे के हिसाब से दूरी तय कर सकता था. यही वजह थी कि जहाँ भी डाक पहचानी होती थी कबूतर का उपयोग किया करते थे.

आज अन्य पक्षियों की तरह इनका अस्तित्व भी खतरे में है. हमने इतने प्यारे जीवों से दूरी बना ली है अपने घरों में इसके प्रवेश को पूरी तरह निषेध कर दिए जाने के कारण कई स्थानों पर कबूतर गायब हो गये हैं.

एक समय हुआ करता था, जब दिन की शुरुआत पंछियों को दाना चुगाने से हुआ करती थी. मोर, तोता, कबुतर, घरेलू चिड़ियाँ आदि अपने चोच में उन दोनों को भरकर अपने बच्चों को खिलाते समय का नजारा देखने को आज आँखे तरस आती हैं.

कबूतर जैसे पक्षियों ने हमेशा मानव के साथ कभी बुरा नहीं किया तथा उनके सहजीवी बनकर रहे हैं. हमें जीवों के प्रति दया भाव रखते हुए इन अमूल्य पक्षियों को बचाने के प्रयत्न करने चाहिए.

कबूतर निबंध 2

कबूतर हम सभी का एक चिरपरिचित और संदेश सेवा मनोहर पक्षी है। कबूतर एक घरों में पाला जाने पालतू पक्षी भी हैं। इसका रंग स्लेटी और कुछ सफेद होता है। इसकीकी चोंच छोटी एवं दो छोटी छोटी मनमोहक लाल आँखें होती हैं।

यह गुटुर-गूं की धुन में आवाज करते हुए कानों को सुकून देने वाली ध्वनि पैदा करता है। कबूतर हमेशा मानव बस्तियों के आसपास पेड़ों और घर के रोशनदानों में रहते है।

रात्रि के समय यह घर की छत या छज्जे के नीचे सोते है। खाने में अनाज के दाने इन्हें बेहद प्रिय होते है, इन्ही से कबूतर से निर्वहन होता हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान कबूतरों को दाना डालते है और यह पुण्य का कार्य माना जाता है।

प्राचीन समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर संदेश भेजने का कोई साधन नहीं होते थे, उस समय कबूतर के द्वारा अपना संदेश चिट्टी के रूप में गले में बांधकर भेजा जाता था। कबूतर एक सरल, सौम्य, सुंदर एवं शांत स्वभाव का पक्षी है, इसे शांति का प्रतीक पक्षी भी माना जाता हैं।

आजकल इनकी आबादी में बड़ी कमी देखी जा रही है हमें ऐसे पक्षियों की रक्षा करनी चाहिए, जो सदैव मानव के एक सच्चे दूत के रूप में सदियों से एक ही घर में रहते आए है।

हम अपने घर में कबूतर दिखने पर उनको दाना पानी देकर इस प्रजाति को लुप्त होने से संरक्षित कर सकते हैं। जिस तरह हम अपने स्वजनों के प्रति चिंतित रहते है ठीक यही चिंता जब इन जीवों के प्रति हमारे दिलों में जगेगी तभी मानव प्रकृति के साथ बेहतर सामजस्य स्थापित कर सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है।

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