शिक्षा का व्यवसायीकरण पर निबंध | Essay on the commercialization of education In Hindi

शिक्षा का व्यवसायीकरण पर निबंध Essay on the commercialization of education In Hindi : आज के भारत में जन जन तक शिक्षा का पहुचना एक महत्वपूर्ण मुद्दा हैं. एक तरफ राज्यों द्वारा संचालित सरकारी स्कूल है जिनमें गरीबो के बच्चों ही पढ़ने के लिए आते हैं. दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूल शिक्षा के  व्यवसायीकरण निजीकरण के चलते शिक्षा न सिर्फ महंगी हुई है बल्कि एक धंधा बन चूका हैं. शिक्षा का व्यवसायीकरण निबंध भाषण परिभाषा अर्थ प्रभाव दुष्प्रभाव आदि के बारे में जानेगे.

Essay on the commercialization of education In Hindi

शिक्षा का व्यवसायीकरण पर निबंध Essay on the commercialization of education In Hindi

यहाँ हम article on commercialisation of education शिक्षा का व्यवसायीकरण अनुच्छेद निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के बच्चों के लिए छोटा बड़ा निबंध साझा कर रहे हैं.

शिक्षा का व्यवसायीकरण पर निबंध (250 शब्द)

हमारे भारतीय संविधान के द्वारा सभी धर्मों के लोगों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की गई है और इसके पीछे इस तर्क को प्रस्तुत किया गया है कि ऐसा करने से शैक्षिक संतुलन बना रहेगा, साथ ही गरीब वर्ग और अमीर वर्ग की जो दूरी है उसमें भी कमी आएगी।

हालांकि दुर्भाग्य की बात यह है कि यह समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। गवर्नमेंट स्कूल में कंडीशन इतनी खराब है कि वहां पर न तो पर्याप्त मात्रा में टीचर है और ना ही गवर्नमेंट के द्वारा प्रैक्टिकल तौर पर इस समस्या को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षा के व्यवसायीकरण की वजह से विभिन्न घोटाले भी सामने आ रहे हैं। विद्यार्थियों को मिलने वाली स्कॉलरशिप में भी घोटाला हो रहा है साथ ही लैपटॉप वितरण में भी घोटाला हो रहा है। 

इसके अलावा विभिन्न स्कूलों के द्वारा विद्यार्थियों के अभिभावकों से मनमर्जी की अधिक फीस वसूली जा रही है, जिसकी वजह से विद्यार्थियों के अभिभावकों पर विद्यार्थियों की पढ़ाई का काफी ज्यादा बोझ हो जा रहा है।

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इसलिए यह आवश्यक है कि सेंट्रल गवर्नमेंट और स्टेट गवर्नमेंट के द्वारा इस दिशा में ठोस कदम उठाया जाए। एजुकेशन के निजीकरण की वजह से ही उच्च शिक्षा में व्यवसायिक प्रवृत्ति काफी तेज हो गई है। ऐसे बहुत सारे इंस्टिट्यूट है, जो विद्यार्थियों से लुभावने वादे करके पैसे लेते हैं जिसकी वजह से विद्यार्थी तो परेशान होते ही हैं साथ ही उनके अभिभावक भी परेशान होते हैं।

हमारे देश के नेताओं में भी इतनी कम राजनीतिक इच्छा है कि उसकी वजह से एजुकेशन पर जो सब्सिडी मिलती है वह भी लगातार कम होती जा रही है और इसकी वजह से यूनिवर्सिटी, कॉलेज और हाई लेवल इंस्टीट्यूट की फीस काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है जिसके कारण ऐसे लोग जो आर्थिक तौर पर पिछड़ गए हैं उनकी दशा काफी दयनीय होती जा रही है। 

इसलिए यह आवश्यक है कि शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोका जाए और गवर्नमेंट स्कूल, यूनिवर्सिटी को सुविधा भी दी जाए साथ ही उनकी क्वालिटी पर भी ध्यान दिया जाए।

शिक्षा का व्यवसायीकरण पर निबंध (500 शब्द)

सृष्टि में जितने भी देश हैं उनका यही प्रयास होता है कि उनके देश में एजुकेशन का स्ट्रक्चर उन्नत हो ताकि वह सभी व्यक्तियों की जरूरतों को और उनकी डिमांड को पूरा कर सकें। इसलिए देश में एक स्पेशल प्रकार की एजुकेशन की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि यह विशेष शिक्षा अर्थात व्यवसायीकरण शिक्षा कई प्रकार से देश की जरूरतों को पूरा कर सकती है।

भारत देश में सुंदरता, शक्ति और ताकत तीनों ही मौजूद है परंतु इतना सब कुछ होने के बावजूद हमारा देश आर्थिक तौर पर उतना मजबूत नहीं है जितना कि देश को होना चाहिए था, जिसके पीछे एक मुख्य वजह है ट्रेनिंग प्राप्त मानवीय शक्ति का होना। 

यह भी सच है कि जनसंख्या के तौर पर हमारा भारत देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है परंतु हमारे यहां पर मौजूद अयोग्य शिक्षा प्रणाली से देश की तरक्की में काफी बाधाएं उत्पन्न हो रही है।

परंतु अब वह भी समय आ गया है जब गवर्नमेंट को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए कि भारत के छात्र और छात्राओं को व्यवसायिक तथा व्यावहारिक रूप से कुशल बनाया जाए ताकि वह इंडस्ट्रियल और टेक्निकल उन्नति की योजनाओं में अपना योगदान दे सके, साथ ही देश की तरक्की में भी अपना योगदान दे सकें और इन सब चीजों के लिए शिक्षा का व्यवसायीकरण होना काफी जरूरी माना गया है।

शिक्षा के व्यवसायीकरण की इसलिए भी आवश्यकता है क्योंकि दिन-ब-दिन भारत में जो बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है, उसका अंत शिक्षा के व्यवसायीकरण के द्वारा किया जा सकता है क्योंकि शिक्षा के व्यवसायीकरण से स्टूडेंट को किसी एक बिजनेस में निपुणता हासिल होगी। 

इसके अलावा शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से स्टूडेंट अपनी-अपनी पसंद के हिसाब से ट्रेनिंग ले सकेंगे और यह उनके लिए रोजगार के अवसर मुहैया कराने के साथ ही उनके अंदर छुपी हुई कैपेसिटी को भी डेवलप करेगा।

शिक्षा के व्यवसायीकरण के जहां कई फायदे हैं तो वहीं पर इसके कुछ नुकसान भी है। शिक्षा का व्यवसायीकरण होने से खासतौर पर ऐसे विद्यार्थियों को काफी समस्याएं होंगी, जो आरक्षण की कैटेगरी में नहीं आते हैं, क्योंकि उन्हें सामान्य से अधिक फीस भरनी पड़ेगी, साथ ही शिक्षा के व्यवसायीकरण से प्राइवेट कॉलेज कोर्स में एडमिशन देने के लिए कोर्स की फीस अपने मन के हिसाब से कर देते हैं, जिसकी वजह से आर्थिक तौर पर संपन्न विद्यार्थियों को ही कोर्स में एडमिशन मिल पाता है और होनहार विद्यार्थियों को कोर्स की फीस न भर पाने की वजह से एडमिशन प्राप्त नहीं हो पाता है। ऐसे में उन्हें अपने मन को मार कर किसी दूसरे कोर्स में एडमिशन लेना पड़ता है।

इसके अलावा अभिभावकों पर स्कूल की मनमर्जी को सहने का दबाव होता है जो शिक्षा के व्यवसायीकरण की वजह से ही होता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह शिक्षा के व्यवसायीकरण पर एक ठोस नीति बनाएं और इसके लाभ और हानि के ऊपर विशेष तौर पर चर्चा करें।

1000 words Essay on the commercialization of education In Hindi

short article on commercialization of education:

भारत की जनसंख्या 130 करोड़ पार कर गई हैं. इतनी बड़ी आबादी के लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था करना सिर्फ सरकार के भरोसे संभव नहीं हैं इस समस्या के निपटान हेतु सरकार ने निजी क्षेत्रों की भागीदारी भी इस क्षेत्र में सुनिश्चित की हैं. इस प्रकार शिक्षा के निजीकरण का अर्थ हैं शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के अतिरिक्त गैर सरकारी भागीदारी. वैसे तो ब्रिटिश काल से ही निजी संस्थाएं शिक्षण कार्य में संलग्न थी.

किन्तु स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए अनुदान एवं सरकारी सहायता के फलस्वरूप भारत में निजी शिक्षण संस्थाओं की बाढ़ सी आ गई हैं. स्थिति अब ऐसी हो चुकी हैं कि इस पर अंकुश लगाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी हैं. क्योकि अधिकतर निजी शिक्षण संस्थाएं धन कमाने का केंद्र बनती जा रही हैं. एवं इनके द्वारा छात्रों एवं अभिभावकों का शोषण हो रहा हैं. शिक्षा के निजीकरण के यदि कुछ गलत परिणाम सामने आए हैं. तो इससे लाभ भी निश्चित तौर पर हुआ हैं.

भारत में शिक्षा का निजीकरण/ व्यावसायीकरण भाषण (speech on commercialization of education)

शिक्षा के निजीकरण के कारण तेजी से शिक्षा का प्रचार हो रहा है. जिन लोगों को प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल रहने के कारण किसी व्यावसायिक या अन्य पाठ्यक्रम में प्रवेश नहीं मिल पाता, वे अधिक धन खर्च करके मनोवांछित शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं, इस तरह शिक्षा के निजीकरण के कारण देश का धन सकारात्मक कार्यों में लग रहा हैं.

नई शिक्षण संस्थानों की स्थापना के कारण नवयुवकों को रोजगार नयें अवसर उपलब्ध हो रहे शिक्षण से सम्बन्धित व्यवसायो को भी गति मिल रही हैं. निजी शिक्षण संस्थाओं में प्रतिभावान छात्रों को ही अवसर  मिलता  हैं  पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई हैं.

शिक्षा का निजीकरण आर्टिकल (write an article on commercialisation of education)

इतनी अधिक संख्या में प्रति वर्ष सरकारी नौकरियों का स्रजन कर पाना संभव नहीं हैं. निजी संस्थाओं की अधिकता के कारण इन लोगों को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं. इस तरह शिक्षा के व्यावसायीकरण/निजीकरण के कारण देश के आर्थिक विकास को गति मिल रही हैं.

यही नहीं शिक्षा के क्षेत्र में निजी भागीदारी से उत्पन्न प्रतिस्पर्धा के फलस्वरूप शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा हैं. निजी शिक्षण संस्थानों में योग्य शिक्षको को बेहतर वेतनमान पर भर्ती किये जाने से शिक्षकों की दशा में सुधार के साथ साथ शिक्षित लोगों के लिए रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं. इस तरह शिक्षित लोगों के जरियें रोजगार के साधन उपलब्ध कराने एवं शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा देना उचित हैं.

शिक्षा में निजीकरण के लाभ (commercialisation of education and its impact in india)

शिक्षा में निजीकरण से यदि कुछ लाभ हुए हैं तो इसके नुकसान भी कम नहीं हैं. शिक्षा में निजीकरण के कारण स्थिति अब ऐसी हो चुकी हैं कि अब इस पर अंकुश लगाए जाने की आवश्यकता महसूस की जाने लगी हैंक्योंकि अधिकतर निजी शिक्षण संस्थाएं रेवड़ियों की भांति डिग्रियां बाँट रही हैं. जगह जगह डीम्ड विश्वविद्यालय खुल रहे हैं.शिक्षा आज व्यापार का रूप धारण कर चुकी हैं.

शिक्षा के निजीकरण का लाभ निर्धन लोगों को नहीं मिल पा रहा हैं. कारण, शिक्षा महंगी हो गई हैं. शहरों के निजी विद्यालयों में प्राथमिक स्तर की कक्षाओं के बच्चों से भी एक हजार से लेकर पांच हजार रूपये तक मासिक शुल्क लिया जाता हैं. आम आदमी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए इतने शुल्क को वहन करने में अक्षम हैं.

निजीकरण के नुकसान (disadvantages of commercialisation)

शिक्षा के निजीकरण के कारण कोचिंग एवं ट्यूशन संस्कृति को बढ़ावा मिला हैं. बड़े बड़े उद्योगपति भी शिक्षा में धन का निवेश कर रहे हैं. शिक्षा में धन के निवेश को अच्छा कहा जा सकता हैं किन्तु उनका उद्देश्य शिक्षा का विकास नहीं बल्कि धन कमाना होता है, जिसके कारण कई अन्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं. उद्योगपति धन का निवेश करने के बाद धन कमाना चाहते हैं, इसके लिए वे शिक्षकों एवं अभिभावकों का शोषण करते हैं.

शिक्षा के व्यावसायीकरण से भारत में निजी शिक्षण संस्थाओं की बाढ़ सी आ गई हैं किन्तु लाखों की संख्या में मौजूद इन निजी शिक्षण संस्थाओं में से नब्बे प्रतिशत संस्थान या तो शिक्षण की गुणवत्ता पैमाने पर खरे नहीं उतरते या फिर उनके पास पर्याप्त मात्रा में शैक्षिक संसाधन नहीं हैं. इन सबके अतिरिक्त निजीकरण के कारण फर्जी शिक्षण संस्थानों की संख्या भी निरंतर बढ़ती जा रही हैं. जो चिंता का विषय हैं.

शिक्षा के व्यावसायीकरण के प्रभाव (commercialisation of education in india and its impact)

इस तरह निजी क्षेत्र में प्रबंधन की अक्षमता एवं मनमानी के कारण न तो शिक्षा के उद्देश्यों की प्राप्ति हो पा रही हैं और न ही गुणवत्ता के पैमाने पर ये खरे उतर पा रहे हैं. इसके साथ ही निजी क्षेत्र के शैक्षिक संस्थानों द्वारा शोषण एवं गलत मार्गदर्शन के कारण लाखों छात्र का भविष्य अंधकारमय हो रहा हैं. यही कारण हैं कि शिक्षा के निजीकरण के औचित्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

पहले धनी व्यक्तियों द्वारा शिक्षण संस्थाओं की स्थापना सामाजिक सहयोग एवं उत्तरदायित्व निभाने के लिए की जाती थी. अब इसका उद्देश्य सामाजिक सहयोग न होकर धनार्जन हो गया है. इसलिए शिक्षा के निजीकरण से जो लाभ होना चाहिए, वह समुचित मात्रा में समाज को प्राप्त नहीं हो रहा हैं. यदि शिक्षा के निजीकरण में मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए एवं शिक्षकों की सेवा शर्तों का संरक्षण सरकार द्वारा हो, तो शिक्षा के निजीकरण के लाभ वास्तविक रूप में मिल पाएगे.

शिक्षा की अनिवार्यता के दृष्टिकोण से इसके सार्वभौमीकरण की बात की जा रही हैं. इस कार्य में निजी सहभागिता अनिवार्य हैं. इसलिए शिक्षा के उद्देश्य निजीकरण तो अनिवार्य हैं, किन्तु इसमें इस बात का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि शिक्षा के उद्देश्य बाधित न होने पाएं.

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