सच्चरित्रता पर निबंध | Essay On Truthfulness In Hindi

प्रिय मित्रों (good Character) Essay On Truthfulness In Hindi के इस लेख में आज हम आपके साथ सच्चरित्रता पर निबंध पर निबंध साझा कर रहे हैं. कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के बच्चों के लिए सच्चरित्रता पर उपयोगी निबंध यहाँ सरल भाषा में दिया जा रहा हैं. इस निबंध को पढ़ने के बाद आप जान पाएगे कि जीवन में सच्चरित्रता अर्थात सत्य सच का अर्थ परिभाषा और जीवन में इसका क्या महत्व हैं. चलिए इस निबंध को आरम्भ करते हैं.

Essay On Truthfulness In Hindi

सच्चरित्रता पर निबंध Essay On Truthfulness In Hindi

सच्चरित्रता पर निबंध | Essay On Truthfulness In Hindi

सत + चरित्र इन दो शब्दों के मिलन से सच्चरित्र शब्द बनता हैं एवंम इसमें ता प्रत्यय प्रयुक्त होने  से सच्चरित्रता शब्द की व्युत्पत्ति होती हैं. सत का आशय हैं अच्छा एवं चरित्र का मतलब हैं आचरण, चाल चलन, स्वभाव अथवा गुण धर्म आदि कह सकते है.

इस तरह सच्चरित्रता का अर्थ होता हैं अच्छा चाल चलन, अच्छा स्वभाव और व्यवहार. चूँकि मानव एक सामाजिक प्राणी हैं. जिसके चलते व्यक्ति में बहुत से ऐसे गुणों का होना जरुरी माना गया हैं, जिनके तहत वह सोसायटी में शांतिपूर्वक रहते हुए देश की उन्नति में वह अपनी भूमिका का निर्वहन कर सके.

काम, क्रोध, लोभ, मोह, संताप, निर्दयता एवं इर्ष्या इन अवगुणों को मानव के सामाजिक जीवन में अशांति पैदा करते हैं. इस तरह ऐसे अवगुणों से युक्त मनुष्य को दुराचारी की उपमा दी जाती हैं.

मगर इसके उल्ट निष्ठा, ईमानदारी, लगनशीलता, संयम, सहोपकारिता आदि गुण सच्चरित्रता की निशानी हैं. इन सभी के अलावा उदारता, विनम्रता, सहिष्णुता, सत्यभाषण और उद्यमशीलता सच्चरित्रता की अन्य खासियत हैं.

एक इंसान का सच्चरित्र बनना इस बात पर डिफेंड नहीं करता कि वह कितना शिक्षित हैं. बल्कि एक निरक्षर इन्सान भी अपने मर्यादित व संयमित जीवन शैली  से सच्चरित्र की उपमा पा सकता हैं. इसके विपरीत एक अधिक पढ़ा लिखा व्यक्ति भी यदि भ्रष्टाचार जैसे कर्मों में संलिप्त हो तो उसे दुश्चरित्र ही कहा जाएगा.

अमूमन देखने को मिलता हैं कि कुछ व्यक्ति गरीब का शोषण ही नहीं करते वरन अपने धन, ताकत या प्रभाव के घमंड में चूर होकर उन पर कई प्रकार के अत्याचार भी करने से नहीं बचते. ऐसे ही दुराचारी या दुश्चरित्र की केटेगरी में आते हैं.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने सच्चरित्रता के चलते ही अंग्रेजी हुकुमत को उखाड़ फेकने में सफलता पाई. महापुरुषों का जीवन तथा सच्चरित्रता के चलते ही हमारे लिए प्रेरक और अनुकरण के योग्य होता हैं. एक सदाचारी इन्सान को समाज में सभी जगह सम्मान मिलता हैं. मगर एक दुराचारी इंसान सभी जगह निंदा का पात्र बन जाता हैं.

समाज को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने में सदाचारियों का अहम किरदार होता हैं. कोई भी समाज या देश जिसके नागरिक भ्रष्ट तथा दुराचारी हों, उस स्थिति में उसकी ठीक ढंग से विकास नहीं हो सकता हैं.

इस तरह समाज की सही दिशा में उत्तरोतर विकास के लिए यह जरुरी हैं कि उसके नागरिक सच्चरित्र हों तथा लोगों में सदाचार को प्रोत्साहित करने के लिए यह भी जरुरी हैं कि बच्चों को शुरूआती जीवन से ही नैतिक शिक्षा दी जाए क्योंकि सच्चरित्रता या सदाचार के तहत जो गुण धर्म सम्मिलित हैं उन्हें किसी मनुष्य में एक ही दिन में शामिल नहीं किया जा सकता.

मानव के चरित्र पर न केवल परिस्थिति ही नहीं परन्तु उसके क्षेत्र, समाज एवं परिवेश के अलावा उसकी जीवनशैली का भी असर पड़ता हैं. एक लोकोक्ति है संगत से गुण होत है संगत से गुण जात. इसका अर्थ यह हैं कि मानव के गुणों पर उसकी संगति का असर पड़ता हैं. चूँकि व्यक्ति का चरित्र उसकी आदतों और उसके गुणों का सम्मिलित रूप हैं.

इस तरह यह कहा जा सकता हैं कि मानव का करेक्टर अच्छा या बुरा होना उसकी संगति पर आधारित होता हैं जिस तरह कीचड़ में रहकर स्वच्छ बने रहने की कल्पना नहीं की जा सकती ठीक इसी तरह कदाचारी के संग रहकर सदाचारी बने रहना बेहद कठिन बन जाता हैं.

मनुष्य जिन व्यक्तियों के साथ रहता हैं उनकी आइडियोलॉजी एवं लाइफ स्टाइल का असर उस पर पड़ना ही नेचुरल हैं. इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम नित्य अच्छे लोगों के साथ रहे. इस सम्बन्ध में हमारे संस्कृत ग्रंथों में भी लिखा गया हैं कि

वृतं यत्नेन संरक्षेत वित्तमायाति याति च
अक्षीनो विततः क्षीण वृतस्तु हतो हतः

यानी चरित्र का प्रयत्नपूर्वक बचाव करना चाहिए, क्योंकि धन तो आता जाता रहता है एवं धन से क्षीण मानव को क्षीण मानव की संज्ञा नहीं दी जा सकती मगर चरित्रहीन मानव को हीन मानव ही माना जाता हैं.

सच्चरित्रता की कमी में धन सम्पति अथवा वैभव या अन्य अचीवमेंट निरर्थक साबित होती हैं. उदहारण के रूप में रावण न केवल धनवान व पराक्रमी था मगर बहुत बड़ा ज्ञानी भी था, किन्तु अपने बुरे कार्यों के चलते वह आदर का पात्र नहीं बन सका और आखिर में मारा गया.

इस तरह चारित्रिक निर्बलता के चलते मानव के पारिवारिक ही नहीं सोशियल पतन का भी कारण बनता हैं. इसी कारण जिस समाज के नागरिक सच्चरित्र होते हैं उसकी उन्नति दिन दूनी रात चौगुनी होती है, मगर इसके ठीक उल्ट जहाँ के व्यक्ति दुराचारी होते हैं.

उस जगह अराजकता, अन्याय एवं अत्याचार का बोलबाला के चलते उस समाज की उन्नति की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती. इसी लिए कहा गया है कि समाज की हकीकत में उन्नति के लिए न केवल इसके नागरिकों के साथ साथ नेताओं का भी सच्चरित्र होना जरुरी हैं. अतः यह हमारा दायित्व हैं कि देश के प्रतिनिधि के रूप में सच्चरित्र नेताओं का ही चयन किया जाना चाहिए.

देश की राजनीति की टेडी मेडी पगडंडीयों पर गुजरते हुए अगर संयम न बरता जाए, तो देश को रसातल में जाने से कोई नहीं बचा सकेगा.

सच्चरित्रता से मिले आत्मबल के चलते ही उन्हें विपरीत हालातों  में भी मर्यादापूर्वक जीवन जीने की ताकत प्राप्त होगी. आखिर में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सच्चरित्रता के दम पर ही समूचे संसार में शान्ति की स्थापना जा सकती हैं.

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