हिंदी दिवस 2021 पर कविता Hindi Diwas Poem In Hindi

Hindi Diwas Poem In Hindi हिंदी दिवस 2021 पर कविता: सभी पाठकों को 14 सितम्बर 2021 हिंदी दिवस की शुभकामनाएं. राष्ट्रीय हिंदी दिवस को हिंदी के राजभाषा के रूप में मान्यता मिलने के उपलक्ष्य में मनाया जाता हैं. हिंदी दिवस पर कविता- Hindi Diwas Poem  उन स्टूडेंट्स के लिए मददगार हो सकती हैं, जो हिंदी दिवस 2021 के अवसर पर भाषण निबंध शायरी आदि बोलना चाहते हैं. आप भारत की सबसे अधिक  बोली  जाने वाली भाषा हिंदी की इन कविता के जरियें श्रोताओं के दिल में अपनी मातृभाषा के प्रति गहरी छाप छोड़ सकते हैं. उम्मीद करते है आपकों हमारा ये आर्टिकल पसंद आएगा.

Hindi Diwas Poem In Hindi | हिंदी दिवस 2021 पर कविता

Hindi Diwas Poem In Hindi हिंदी दिवस 2021 पर कविता

जन जन की भाषा हैं हिंदी
भारत की आशा हैं हिंदी
जिसने पूरे देश को जोड़ रखा हैं
वों मजबूत धागा हैं हिंदी
हिन्दुस्थान की गौरवगाथा है हिंदी
एकता की अनुपम परम्परा है हिंदी
जिसके गर्भ से रोज नई कोपलें फूटती है
ऐसी कामधेनु धरा है हिंदी
जिसने गुलामी में क्रांति की आग जलाई
ऐसे वीरों की प्रसूता है हिंदी
जिसके बिना हिन्द थम जाए
ऐसी जीवनरेखा है हिंदी
जिसने काल को जीत लिया है
ऐसी कालजयी भाषा है हिंदी
सरल शब्दों में कहा जाए तो
जीवन की परिभाषा है हिंदी

Hindi Diwas par Kavita – “हिन्दी भाषा पर कविता”

सोचा माँ की पीर बटा दूँ
आप तक हिंदी पंहुचा दूँ
ये अंग्रेजी पैर पसार रही है
जनता इसे स्वीकार नही
रोको इस घुसपैठ को
तोड़ो इसकी ऐठ को
संस्कृति की पहचान बता दूँ
आप तक हिंदी पहुचा दूँ

सोचा माँ की पीर बटा दूँ
हिंदी हमारी आवाज है
हिंदी पर हमें नाज है
माँ भारती का ताज है
क्यों हिंदी दिवस की मोहताज है

अधरों पर मुस्कान सजा दूँ
सोचा माँ की पीर बटा दूँ
आप तक हिंदी पंहुचा दूँ
ये हिन्दुस्तान की शान है
हिंदी से हिंदुस्तान है

ये राज तुम्हे आज बता दूँ
आप तक हिंदी पहुचा दूँ
सोचा माँ की पीर बटा दूँ
परहेज न कर तू हिंदी से
कहती हूँ मै विनती से
दिल में इसे बसा के रखना
भारत माँ का यह गहना
गैरों से परिचय करवा दूँ
आप तक हिंदी पहुचा दूँ
सोचा माँ की पीर बटा दूँ

तुलसी की मनुहार है
कबीर की फटकार है
मीरा का श्रृंगार है
संस्कृति है संस्कार है
वैज्ञानिक भाषा है समझा दूँ
आप तक हिंदी पंहुचा दूँ
सोचा माँ की पीर बटा दूँ
संगीता बेनीवाल द्वारा लिखित

Hindi Diwas Kavita 2018

हिंदुस्थानी है हम गर्व करों हिंदी पर
सम्मान देना दिलाना कर्तव्य है हम पर
खत्म हुआ विदेशी शासन
अब तोड़ो बेड़ियों को
तहे दिल से अपनाओं खुले आसमा को
पर ना छोड़ो धरती के प्यार को
हिंदी है मातृतुल्य हमारी
इस पर न्यौछावर करो जिन्दगी सारी

Poem On Hindi Diwas In Hindi Language 

ए मेरे भारत वालों मिलकर एक प्रहार करो
हिन्दुस्थान की धरती है हिंदी का गुणगान करो
मिले हमकों आजादी हो रहा 70 साल है
फिर कैसा सबके जेहन में उठ रहा ये सवाल है
क्या हम आज आजाद है
या आज भी बर्बाद है
खुद सोच कर देखों यारों
हम हो रहे बदनाम है
पहले अंग्रेजों के गुलाम थे
आज अंग्रेजी के गुलाम है
हिंदुस्तान को इंडिया में बदल दिया
और हम आजादी का जश्न मनाते है
अंग्रेजी अपनी छोड़ गये वो लोग
और हम वही भाषा अपनाते है
सभ्यता उनकी हम पकड़ रहे है
अंग्रेजी में हम जकड़ रहे है
हिंदुस्तान का बंटवारा हुआ
कोई शरीफ कोई आवारा हुआ
क्या होगा आगे इससे सब अनजान है
हिंदुस्तान की धरती पर ही हिंदी गुमनाम है
पहल करो बदलाव करो
फिर से एक प्रहार करो
हटा फेको दूसरी भाषा को
हिंदी का गुणगान करो
जात पांत के फेर में
न हमकों बांटा करो
हिंदुस्तान के वासी हो
हिंदी को आजाद करो

Short Hindi Diwas Poem In Hindi

पर्चा लिखों हिंदी का
हर चिट्टी अखबार में
खीच लाओ हिंदी को, खुशनुमा इस बहार में
यौद्धा हो तुम इस देश के
मिलकर एक प्रहार करो
हिंदुस्तान की धरती है
हिंदी का गुणगान करो
हे मेरे भारत वालो
मेरा यही पैगाम है
हिंदी को लाओ यारों
जो हो रही गुमनाम है
बदलाव की चिंगारी को
सीने में आज जलाओं यारो
हिंदुस्तान की धरती है
हिंदी को अपनाओ यारो

हिंदी दिवस कविता (Hindi Diwas 2021 Kavita In Hindi)

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
फिर नही बजेगा डंका, ढोल और नगाड़ा
सुन लो, जान लो, समझ लो इत्मिनान से

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
हम सबका है ये सम्मान, इसे न झुकने देना
चश्मदीद ये रही है, कितनी ही सदी की
दामन पर कभी इसके, धब्बा लगने न देना

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
आजादी मिली हैं, हमें इसी फूल की बदौलत
इस फूल को जीते जी, कभी मुरझाने न देना

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
इसने ही सिखाया, पाठ प्रेम और मौहब्बत का
लालच की खातिर इसको, नयनों से गिरने न देना
हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,

Short Hindi Day Poem Kavita In Hindi

हिन्दुस्तानी हैं हम गर्व करो हिंदी पर
सम्मान देना,दिलाना कर्तव्य हैं हम पर
खत्म हुआ विदेशी शासन
अब तोड़ो बेड़ियों को
तह दिल से अपनाओ खुले आसमां को
पर ना छोड़ो धरती के प्यार को
हिंदी हैं मातृतुल्य हमारी
इस पर न्यौछावर करो जिन्दगी सारी

हिंदी दिवस पर कविता (Poem On Hindi Language)

जो सोचूं हिंदी में सोचूं

जो सोचूं हिंदी में सोचूं
JO बोलू हिंदी में बोलू.

जन्म मिला हैं हिंदी के घर में
हिन्दी द्रश्य अद्र्शय दिखाए.
जैसे माँ अपने बच्चो को
अग-जग की पहचान कराये.
ओझल-ओझल भीतर का सच
जब खोलू हिंदी में खोलू.

निपट मूढ़ था पर हिंदी ने
मुझसे नये गीत रचवाए.
जैसे स्वय शारदा माता
गूंगे से गायन करवाएं.
आत्मा के आंसू का अमृत
जब घोलू हिंदी में घोलू.

शब्दों की दुनियाँ में मैंने
हिंदी के बल अलख जगाएं.
जैसे दीप शिखा के बिरवे
कोई ठंडी रात बताएं.
जो कुछ हु हिंदी से हु मै
जो हो लूं हिंदी से हो लूं.

हिंदी सहज क्रांति की भाषा
यह विप्लव की अकथ कहानी.
मैकालें पर भारतेंदु की
अमर विजय की अमिट निशानी.
शेष गुलामी के दागों को
जब धो लू हिंदी में धो लूं.

हिंदी के घर फिर-फिर जन्मू
जनमो का क्रम चलता जाए.
हिंदी का इतना ऋण मुझ पर
सांसो सांसो तक चुकता जाएं
जब जागूँ हिंदी में जांगू
जब सो लू हिंदी में सो लू.
-डॉक्टर ताराप्रकाश जोशी

हिंदी दिवस पर कविता (Poem On Hindi Diwas 2021 In Hindi Language)

जैसे सजती है दुल्हन के माथे पर बिंदी,
ऐसी है भाषाओं में भाषा, हमारी राष्ट्रभाषा
हिंदी.
जैसे हाथों पर, खिलती हैं सुंदर मेहँदी,
खुलकर दर्शाती हैं, हमारे विचारों को हिंदी.
मधुर,कोमल और अमृत जैसे, शब्दों का है
यह मेल,
सीख जाते है सब, इन शब्दों का महा खेल.
जीवन में निरंतर रूप से देती है,
उन्नति के पथ पर बढ़ने की आशा,
भावों, संवादों की यह देवी,
हिंदी, हमारी राष्ट्रभाषा.
-सुमेधा

हिन्दी दिवस पर कविता (Poem On Hindi Language Diwas 2021)

ये जो स्ट्रेचर पर लेटी हे
मेरी एकलौती बेटी है
दरिंदों ने गहरे घाव दिए हैं
ममतामयी छाती पर
सवालिया निशान किये हैं
गनीमत हे
अभी तक जिन्दी हे
कुदरत का तमाशा हे
ये मेरी भाषा है
पहचान है मेरी
इसका नाम हिंदी हे
-ओम साहू

हिंदी भाषा पर कविता (Short Hindi Poems On Hindi Day)

खुद तो अंग्रेजियत के जूते चाटता
मुझसे कहता
हिंदी बोलो,
दोस्त ! बोलना भी चाहता
तो कहता
तुम जबान लड़ाते,
और दबाता है पूरी ताकत से
अपने जूते से मेरी जीभ
फिर कहता हिंदी बोलो,
छि :तेरी हुकूमत और तू,
चल मंजूर है तेरा हिंदी दिवस
अब तो दे रोटी
आज पेट भर के,
और अंत में
इस सरकार से – जो
हाथ उठाकर मौत मांग रहे
सिर्फ़ रोने के आलावा
वे कोई भाषा नहीं बोलना चाहते
तुम क्या कहोगे उनके लिये

भाषा पर कविता (Hindi Diwas Poem)

हिंदी है देश के माथे की बिंदी।
आओ मिल कर बोले हिंदी हिंदी।।
विंध्‍य हिमांचल युमुना और गंगा।
द्राविण उत्‍कल और बंग।।
सिर मौर्य हिमालय पर चढ।
बतलाओं भातर है हिंदी का गढ।।
तुलसी और मीरा की जागिर है हिंदी।
भातर के माथे की श्रंगार है हिंदी।।
इकबाल का इंकलाबी नारा है हिंदी।
रसखान ने जिसे दलारा वह हिंदी।।
गालिब ने इसकाे जिया है।
मुंशी ने तो इसको सिया है।।
राम कष्‍ण का बचन है हिंदी।
गीता का प्रवचन है हिंदी।।
सागर की आगाज है हिंदी।
हिंदुस्‍तान की आवाज है हिंदी।।
-प्रभुनाथ्‍ा शुक्‍ल

Hindi Diwas Poem In Hindi : हिंदी है संगम

लिखों हिंदी पढ़ो हिंदी
यही है देश की भाषा
हमारी आन की भाषा
बसी है एकता इसमे
यही है शान की भाषा,

कि चमके बस यही चमके गगन के शीर्ष पर बिंदी.
यही है घाट संगम का
सभी भाषा हुई शामिल,
कि हिन्दी प्राण, उर्दू, आंग्ल-
सिन्धी फारसी है दिल,

हजारों वर्षो से साक्षी रही गंगा व् कालिंदी.
हुआ है डेड अब बापू
बनी है मोम, माँ जो थी,
कि अंग्रजो की पढाई कर
रही है नस्ल को थोथी,
कही यह पश्चिमी आँधी न कर दे आबरू चिन्दी.
-रजनी मोरवाल जी.

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