भारत नेपाल संबंध इतिहास पर निबंध | essay On India Nepal Relations In Hindi

भारत नेपाल संबंध इतिहास पर निबंध essay On India Nepal Relations In Hindi भारत और नेपाल दोनों धरात लीय क्षेत्र से जुड़े महज दो पड़ोसी देश ही नहीं बल्कि एक संस्कृति धर्म एवं परम्परा के देश हैं.

दोनों देशों के मध्य युगों युगों से सांस्कृतिक सम्बन्ध रहे हैं. माता सीता नेपाल के काठमांडू की रहने वाली थी तभी से भारत व नेपाल के मध्य रोटी बेटी का सम्बन्ध रहा हैं.

2023 चीन के बहकाने पर अवश्य दोनों देशों के मधुर रिश्तों में कड़वाहट आई हैं मगर ये जल्द ही ठीक होकर हमारे रिश्ते पुनः अच्छे होंगे.

आज का यह निबंध,  भाषण अनुच्छेद लेख आर्टिकल वर्तमान भारत नेपाल रिश्तों पर दिया गया हैं.

भारत नेपाल संबंध इतिहास पर निबंध essay On India Nepal Relations In Hindi

भारत नेपाल संबंध इतिहास पर निबंध essay On India Nepal Relations In Hindi

भारत नेपाल संबंध की आरम्भिक अवस्था (Initial Phase Of India Nepal Relations)

नेपाल भारत की उत्तरी सीमा पर हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा देश हैं. कुछ वर्ष पूर्व तक यह औपचारिक रूप से विश्व का पहला एवं एकमात्र हिन्दू देश था.

भारत एवं चीन के मध्य तलहटी में बसे नेपाल में वर्तमान में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को अपनाए हुए हैं. यहाँ सरकार में कम्युनिस्ट हैं जो प्रो चीन तथा एंटी इंडिया स्टेड लिए हुए जिसके चलते सदियों से चले आ रहे भारत नेपाल के सम्बंधो में एक कटु अध्याय जुड़ गया हैं.

आधुनिक नेपाल के निर्माता पृथ्वी नारायण शाह ने नेपाल के सन्दर्भ में कहा था ये दो विशालकाय चट्टानों के मध्य में खिले फूल की भांति हैं. शाह के अनुसार हमारे सम्बन्ध चीन के साथ भी अच्छे होने चाहिए तथा भारत के साथ भी. विगत दो सदियों से चीन की विदेश नीति बेहद संतुलित रही हैं तथा दोनों देशों के साथ उसके मधुर सम्बन्ध रहे हैं.

इसके उपरान्त भी चीन सदैव भारत से स्वयं को असुरक्षित मानता हैं. जबकि आज तक के इतिहास में इस तरह की कोई घटना नहीं देखी गई जब भारत ने नेपाल के साथ गलत बर्ताव किया हो.

चीन द्वारा तिब्बत पर अतिक्रमण के बाद राजनितिक रूप से नेपाल का महत्व कई गुणा बढ़ गया हैं. एक तरफ ड्रेगन अपनी कुटिल चालों से वियतनाम, तिब्बत, होनकोंग की तरह नेपाल पर भी अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता हैं. वही भारत की सुरक्षा आज भी चीन पर निर्भर करती हैं.

दोनों देशों के बॉर्डर पूरी तरह खुले हैं. नेपाल की सुरक्षा का जिम्मा भी भारतीय सेना के हाथ में हैं ऐसे में उत्तरी सीमा पर नेपाल द्वारा चीन का पक्ष लेने से दोनों देशों के रिश्ते बेहद विकट स्थिति में जा सकते हैं.

दोनों देशों के बीच कई ऐसे मैत्री समझौते हैं जो एक दुसरे पर विश्वास करने तथा मिलकर चलने की प्रेरणा देने के लिए पर्याप्त हैं. सदैव से ही भारत ने नेपाल की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझा हैं.

इस सम्बन्ध ने पंडित नेहरु द्वारा १९५० में दिया गया वक्तव्य महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा था नेपाल पर होने वाला बाहरी आक्रमण भारतीय संप्रभुता पर आक्रमण माना जाएगा.

१९५५ में राजेन्द्र प्रसाद ने भी कहा था जो नेपाल की शान्ति सुरक्षा और अखंडता को तोड़ने की कोशिश करेगा वह नेपाल और भारत दोनों का दुश्मन होगा, जो नेपाल के मित्र है वे हमारे मित्र है तथा जो शत्रु है वे हमारे भी शत्रु हैं.

ब्रिटिश काल में नेपाल (Nepal During British Period)

अंतर्राष्ट्रीय लो के मुताबिक़ ऐसा कहा जाता हैं कि नेपाल विश्व का एकमात्र वह देश है जो कभी किसी देश का गुलाम नहीं रहा हैं, मगर भारत में अंग्रेजी उपनिवेश के चलते नेपाल नरेश की सम्प्रभुता भी ब्रिटिश सरकार के अधीन ही थी.

भारत के अन्य देशी रजवाडो की भांति नेपाल नरेश को भी अपने दरबार में ब्रिटिश प्रेजिडेंसी रखनी पडती थी. साथ ही वैदेशिक मामलों की देखरेख भी ब्रिटिश भारत सरकार द्वारा की जाती थी.

अंग्रेजों के जो आदेश भारतीय प्रदेशों पर लागू होते थे उनकी अवमानना नेपाल भी नहीं कर सकता था. नेपाल के वास्तविक शासन की शक्ति भी नरेश के हाथों में न होकर वहां के राणा के प्रधानमंत्रीयों के हाथ में थी,

वहां जो भी नया सेनाध्यक्ष होता था उसका राणा वंश के साथ पारिवारिक रिश्ता होता था कई बार भारतीय रजवाड़ों के साथ भी उनके वैवाहिक सम्बन्ध हुआ करते थे.

भारत नेपाल सीमा जुड़ाव (India Nepal Border Connectivity)

दोनों देशों के बीच सीमाओं का निर्धारण हैं मगर बोर्डर जैसी कोई स्थिति नहीं हैं. एक आम आदमी के लिए भारत से नेपाल जाना और नेपाल से भारत आना ठीक वैसा ही हैं, जैसा भारत के एक राज्य से दुसरे राज्य में जाना हैं.

हाल ही में नेपाल द्वारा जारी नये राजनीतिक मानचित्र में कई भारतीय क्षेत्रों को अपना बताया हैं. चीन के कहने पर नेपाल की राजनीतिक सत्ता द्वारा ऐसा करना दोनों देशों के रिश्तों को खराब करने वाली हरकत से कम नहीं हैं.

भारत और नेपाल की सीमा का पश्चिमी छोर महाकाली अंचल के बेताड़ी करनाली वाला से होकर बिहार में सैकड़ों किमी तक हैं. दोनों देशों के लोग एक दुसरे को अपने परिवार के सदस्य की भांति समझते हैं.

ख़ुशी ख़ुशी एक दुसरे के यहाँ आते जाते रहते हैं. धार्मिक समानता एवं साझे इतिहास मूल्यों ने दोनों को आपस में जोड़े रखा हैं. आज भी बड़ी संख्या में नेपाली भारतीय सुरक्षा बलों में सेवा देते हैं तथा भारतीय नेपाल की सेना में सर्व कर रहे हैं.

भारत नेपाल सम्बन्ध 2023 (India Nepal Relations In Hindi)

दोनों देशो के बीच लम्बे समय से एतिहासिक रिश्ते रहे हैं. मगर विगत कुछ वर्षों से कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्रो के भारतीय मानचित्र को लेकर नेपाल की ओली सरकार ने भारत विरोधी पक्ष बनाया.

नेपाल ने भारत पर दवाब बनाने के लिए चीन के साथ भी रिश्ते कायम किये और भगवान राम सीता और अयोध्या को लेकर भी प्रधानमंत्री ओली द्वारा आपत्तिजनक बयान दिए गये.

भारत ने अपनी नेबर फर्स्ट की नीति के तहत नेपाल को फ्री में कोरोना वैक्सीन भी उपलब्ध कराई हैं. नेपाल में बढ़ते कोरोना के प्रभाव के बाद भारत ने विवादों को भुलाते हुए नेपाल की हर तमाम सहायता की. अपेक्षा है दोनों देशों के रिश्ते सुधार की ओर लौटेगे.

निष्कर्ष

भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक विनिमय, यातायात, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग होता है।

नेपाल भारत के लिए प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन करने में मदद करता है और भारत नेपाल के प्रमुख वाणिज्यिक सामानों का मुख्य आपूर्ति स्रोत है।

इनके अलावा, दोनों देशों के बीच खास धार्मिक और सांस्कृतिक सम्बंध हैं। पशुपतिनाथ मंदिर, मनकामना मंदिर, लुम्बिनी, जनकपुर, इत्यादि भारतीय यात्रियों के लिए प्रमुख स्थल हैं और यहां कई भारतीय पर्यटक आते हैं।

भारत और नेपाल के सम्बंध अपने उच्च स्तरीय संचार और समर्थन के लिए जाने जाते हैं। नेपाल ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा दिया है और भारत ने नेपाल को विभिन्न क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है, जैसे कि विकास सहयोग, यातायात नेटवर्क, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाएं।

भारत और नेपाल के सम्बंधों का महत्व रखते हुए, दोनों देश नियमित रूप से मिलकर अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए समर्थन करते रहते हैं।

2023 में भारत और नेपाल के बीच सम्बंधों का विस्तार होने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के लोगों को और फायदा हो सके और उनके बीच और अधिक सहयोग और संबंध बढ़े।

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