जोधा अकबर की कहानी Jodha Akbar Story Jeevan Parichay Essay History In Hindi

जोधा अकबर की कहानी Jodha Akbar Story Biography Essay History In Hindi: मुग़ल शासक अकबर और जोधा की प्रेम कहानी एक बड़ी ही रोचक कहानी है क्योंकि इसमें हिन्दू और मुस्लिम संस्कृति के मिलाप को दिखाया गया है। हालाँकि इस बात के प्रमाण ना होने के कारण इसे ज़्यादा लोग सच नहीं मानते लेकिन अगर यह काल्पनिक कहानी भी है तो इसकी रोचकता से लेखक की महानता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

रानी जोधा अकबर की कहानी Jodha Akbar Story In Hindi

जोधा अकबर की कहानी Jodha Akbar Story In Hindi

जोधा अकबर पर बने सीरियल और फिल्मों से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इतिहास में जोधा अकबर की प्रेम कहानी कितनी अहमियत रखती है। जोधा अकबर की शादी पूरी तरह से राजनितिक थी परंतु फिर भी इन दोनों में काफी प्रेम था। आज हम आपके समक्ष अकबर और जोधा बाई की इतिहास से जुड़ी कई लोकप्रिय और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर रहे हैं।

अकबर की कहानी Jodha Akbar Biography In Hindi

नाममोहम्मद जलाल्लुद्दीन अकबर
जन्म1542
पितामुग़ल सम्राट हुमायूँ
माताहमीदा बानो बेगम
पत्नियांसलीमा सुल्तान रुकैया बेगमजोधा बाई
शासनकाल1556 से 1605 तक
मृत्यु1605
संतानजहांगीर

जलालुद्दीन अकबर भारत के तीसरे और मुग़ल साम्राज्य के पहले सम्राट थे। अकबर की महानता  के कारण उन्हें अकबर महान के नाम से भी जाना जाता है। पहले से ही भारत में मुग़ल साम्राज्य का विस्तार कर चुके हुमायूँ के बेटे अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542 को हुआ था।

हुमायुँ  की मृत्यु के बाद अकबर की उम्र छोटी होने के कारण अकबर ने बैरम खान की मदद से हिंदुस्तान पर शासन किया। मुग़लों की ताकतवर, निडर और बहादुर फ़ौज होने के कारण अकबर ने पुरे भारत पर कब्ज़ा कर लिया था।

 अकबर की कला में रूचि होने की वजह से  देश की संस्कृति पर भी प्रभाव पड़ा। अकबर ने देश में चित्रकला का विकास किया। उसने अपने दरबार में भी कई चित्र लगवाए हुए थे।

बचपन से ही अकबर ने युद्ध कला को सीखने पर ध्यान दिया जिससे ये एक बहादुर शासक के रूप में लोगों के सामने आए।  साथ ही साथ अकबर की साहित्य में ख़ास रूचि थी। उसने एक पुस्तकालय का भी निर्माण किया था जिसमें 24000 से भी ज़्यादा पुस्तकें रखी हुई थी।

अकबर के दरबार में दुनिया के विभिन्न देशों से वास्तुकार, शिल्पकार और कवि इकट्ठा होते थे जो तरह तरह के विषयों पर चर्चा करते थे। अकबर ने खुद फतेहपुर सीकरी में महिलाओं के लिए पुस्तकालय का निर्माण किया जिससे अकबर की साहित्य में रूचि का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

अकबर एक सफल मुग़ल शासक थे जिसके शासन में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मो के लोगों का समान दर्जे से आदर किया जाता था। परन्तु समय के जलालुद्दीन साथ अकबर ने खुद को बदला और बाद में दूसरे धर्मों में भी अपनी रूचि दिखाई।  

लोग अकबर के शासन में ख़ुशी और शांति से रहते थे। अकबर भी खुद हिन्दू संस्कृति का आदर करता था। कहा जाता है की मध्यकालीन समय पर अकबर ही एकमात्र शासक रहा है जिसने हिन्दू मुस्लिम एकता को समझा।

जोधा बाई की जीवनी Jodha Bai story In Hindi

नामजोधा बाई/ हरका बाई/हीर कुंवर
जन्म मृत्युकोई जानकारी उपलब्ध नहीं
पतिअकबर
धर्महिन्दू (राजपुत)
संतानजहांगीर
माता राजा भारमल
पितामानवती साहिबा

जोधा बाई राजा भारमल की बेटी थी और इनकी माता का नाम मानवती साहिबा था। बचपन में इन्हें हीर कुंवारी के नाम से भी जाना जाता था। अकबर जब 20 वर्ष का था तभी इनकी शादी हो गई। जोधा बाई हिन्दू धर्म से संबंध रखती थी। जोधा बाई ही वह महिला हिन्दू मुग़ल हैं जिहोने सबसे ज़्यादा समय तक शाशन किया। इनका कार्यकाल लगभग 43 वर्षों तक रहा।

राजा भारमल ने जोधा बाई की शादी अकबर के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए की थी। लेकिन फिर भी इसे प्रेम कहानी के रूप में जाना जाता है। जोधा बाई को बाद में मरियम-उज-जमानी के नाम से जाना जाने लगा जिसका अर्थ है विश्व के लिए दयालु।

ऐसा कहा जाता है कि जोधा बाई व्यापर में एक कुशल महिला थी और उन्होंने मुग़ल शासन में मसले ओर  रेशम की भी देख रेख की। उनके बेटे जहांगीर के शासन काल में जोधा बाई को हिंदुस्तान की रानी माँ की उपाधि से नवाज़ा गया। ऐसा माना जाता है कि जोधा बाई की मृत्यु वर्ष 1623 में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी और जोधा बाई का मकबरा अकबर की कब्र के पास ही है क्योंकि यह जोधा बाई की आखरी इच्छा थी।

अकबर का पहला और आखरी प्यार जोधा बाई को माना जाता है। फिल्मों और टी.वि सीरियलों में जोधा अकबर की प्रेम कहानी को देख कर लोगों के मन में इसके बारे में अधिक जानने की उत्सुकता और बढ़ गयी है। हालांकि  काफी लोगों का मानना है कि  यह मात्र एक काल्पनिक कहानी है।

जोधा अकबर की प्रेम कहानी Love Story

अकबर शुरू से ही एक निडर और बहादुर योद्धा था और वह पुरे हिंदुस्तान में अपना कब्ज़ा जमाना चाहता था। यह कब्ज़ा वह अपनी रणनीति के तहत करता था जिसमें युद्ध और समझौता शामिल था। उस दौर में अकबर के सबसे बड़े दुश्मन राजपूत माने जाते थे जिसे आज हम अकबर और प्रताप के युद्ध के नाम से भी जानते हैं।

समझौते की रणनीति के अनुसार अकबर अन्य राजाओं की बेटियों के साथ शादी कर लेता था और वह बिना कोई नुकसान किये दूसरे राज्यों को अपने अधीन कर लेता था। अकबर के सबसे बड़े शत्रु राजपूत होने के कारण वह दोनों में से किसी एक तरीके से उन्हें अपने अधीन करना चाहता था।

इसके बाद अकबर का युद्ध जब राजा भारमल के साथ हुआ तब उसने राजा भारमल के बेटों को बंधी बना लिया जिसके बाद  डर से राजा भारमल ने अकबर की और समझौते का हाथ बढ़ाया। इस तरह राजा भारमल की बेटी जोधा बाई का विवाह अकबर के साथ किया गया।

पुरानी परंपरा के अनुसार जोधा को मुग़लों का धर्म यानि इस्लाम को अपनाना था। लेकिन अकबर ने जोधा बाई के साथ किसी भी प्रकार की ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं की जिससे प्रभावित होकर जोधा के मन में अकबर के लिए प्रेम की भावना जागी।

वहीं दूसरी तरफ अकबर के इस अच्छे व्यवहार से जोधा के मन में भी अकबर के प्रति प्रेम भाव जागा और उसे हिन्दू संस्कृति के बारे में परिचित करवाया। शायद यहीं अकबर और जोधा की प्रेम कहानी का आधार है।

अकबर की और भी कई रानीयां थीं लेकिन उसे जोधा का निडर और बहादुर स्वभाव पसंद था। अकबर ने जोधा बाई को किले में मंदिर बनाने की अनुमति भी दी हुई थी जिस से हमें इन दोनों का प्रेम देखने को मिलता है। जोधा बाई ने हमेशा अकबर को सही रास्ता दिखाया जिससे अकबर को एक काबिल और प्रिय राजा बनने में मदद मिली।

अकबर को पहले ही हिन्दू संस्कृति के बारे में जानकारी थी क्योंकि जब हुमायूँ युद्ध पर था तब उसे अज्ञातवास में रहना पड़ा और उस समय वह एक हिन्दू परिवार में रहे। लेकिन जब अकबर का विवाह मरियम उज़-ज़मानी (जोधा बाई) के साथ हुआ तब उसका हिन्दू संस्कृति के प्रति आदर और बढ़ गया।

हालाँकि कई इतिहासकार जोधा का किसी भी किताब में कोई प्रमाण ना होने के कारण इसे मात्र किसी लेखक द्वारा लिखी गयी काल्पनिक कहानी बताते हैं और कुछ राजस्थानी भी मानते हैं कि अकबर का विवाह किसी राजपूत से नहीं हुआ था और कुछ लोगों का मानना है कि जोधा बाई जहांगीर की पत्नी थी। इसी प्रकार से जोधा अकबर के नाम से कई कहानियां मशहूर हैं।

जोधा अकबर की संतान – जहांगीर

जोधा बाई के पहले भी दो पुत्र हसन और हुसैन हुए थे लेकिन किसी कारण से उनकी मृत्यु हो चुकी थी। 1569 में अकबर ने खबर सुनी की जोधा बाई गर्भ से है। अकबर की कामना थी की उसका बेटा भी उसकी तरह नाम प्राप्त करे। इस बार शेख सलीम चिश्ती ने घोषणा की थी कि  बच्चे का जन्म सकुशल होगा जिसके कारण जोधा बाई ने अपना गर्भ का समय फतेहपुर सीकरी में ही बिताया।

आख़िरकार 30 अगस्त 1569 को जोधा बाई ने पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम जहांगीर रखा गया। लेकिन जोधा बाई हिन्दू बनी रहीं। इस ख़ुशी में अकबर ने जोधा को मरियम-उज-जमानी की उपाधि से सम्मानित किया। अकबर की कामना पूरी करते हुए जहांगीर को सलीम नाम प्राप्त हुआ और अकबर के बाद उसने प्रजा पर शासन किया।

जहांगीर ने भी कई कानूनों में सुधार किया। उसने नशा हमलावर वस्तुओं का हकमा बंद करवाया और नाक एवं हाथ काटने की सज़ा देश में रद्द करवाई। जहांगीर को चित्र कला से बेहद प्यार था। इसके अलावा उसे शिकार पर जाना भी काफी पसंद था। अफीम और शराब की लत की वजह से वह अंतिम दिनों में बीमार ही रहता था। आख़िरकार 28 अक्टूबर 1627 ई को कश्मीर से वापिस आते समय रस्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई।

जोधा के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

प्रश्न: जोधा बाई का जन्म किस वर्ष में हुआ था?

उत्तर: जोधा बाई का जन्म वर्ष 1542 में हुआ था। 

प्रश्न: जोधा की मृत्यु कब हुई?

उत्तर: जोधा की मृत्यु 19 मई 1623 को आगरा हुई। 

प्रश्न: जोधा बाई की कब्र कहाँ है?

उत्तर: जोधा बाई की कब्र अकबर की कब्र के पास ही है। 

प्रश्न: जोधा बाई की मृत्यु का कारण क्या था?

उत्तर: जोधा बाई की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुई थी। 

प्रश्न: जोधा बाई के और कौन कौनसे नाम हैं?

उत्तर: जोधा बाई को तीन नामों से जाना जाता था जो कि हैं (1)हीर कुंवर  (2) जोधा बाई (3) हरका।

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