कैलाश पर्वत की कहानी इतिहास व रहस्य | Kailash Parvat Mystery Story History In Hindi

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कैलाश पर्वत की कहानी इतिहास व रहस्य | Kailash Parvat Mystery Story History In Hindi :- कैलाश पर्वत को भगवान शिव का घर माना जाता है. शिव के इस निवास स्थल से जुड़े अनेक रहस्य है. जिन्हें आज तक कोई नहीं जान पाया है. ये पर्वत दुनिया का सबसे पवित्र पर्वत है. मान्यताओ के अनुसार ये पर्वत अभी भी अजय है. आज के आर्टिकल में हम कैलाश पर्वत की कहानी इतिहास व रहस्य  के बारे में विस्तार से पढेंगे.

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कैलाश पर्वत की कहानी इतिहास व रहस्य Kailash Parvat In Hindi

कैलाश पर्वत की कहानी इतिहास व रहस्य Kailash Parvat Mystery Story History In Hindi

कैलाश पर्वत भारत के उत्तरी पडोसी देश तिब्बत की पर्वतीय श्रंखला है. कैलाश पर्वत अपने आप में अद्धुत रहा है.इस पर्वत को लेकर अनेक कथाए प्रचलित है.जिनके मान्यता है.कि कैलाश पर्वत पर भगवान् शिव का वास है.पर इसके कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं है.

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कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6638 मीटर है. वही माउन्ट एवरेस्ट की लम्बाई कैलाश की तुलना में लगभग 2 किमी अधिक है. और आज तक माउन्ट एवरेस्ट जो कि दुनिया की सबसे ऊँची छोटी है. एवरेस्ट पर आज तक लगभग 7 हजार से अधिक लोग सफल चढ़ाई कर चुके है. पर एवरेस्ट से 2000 मीटर छोटे कैलाश पर अभी तक कोई नहीं पंहुचा है. ये एक अद्धुत रहस्य है.

इस पर्वत में 100 से अधिक छोटे परमिंड है. जिनके जुड़ने से इस पर्वत का निर्माण हुआ है. इस पर्वत के चारो और शिल्पकला से जानवरों के मुंह की आकृति बनाई गई है. चारो तरह अलग-अलग जानवरों की आकृति है. और इन प्रतिमाओ से चार नदिया निकलती है. जो इस पर्वत को चार भागो में बांटती है.

मानसरोवर तथा राक्षस झील कैलाश पर्वत पर स्थित है. कैलाश पर्वत अनेक नदियों का उद्गम स्थल भी है. जिसमे-ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज तथा घाघर प्रमुख है. कैलाश पर्वत को हिन्दू,बौद्ध तथा जैन धर्मो में इसे पवित्र स्थान माना गया है.

दुनिया की सबसे ऊँची मीठे पानी की झील मानसरोवर झील इस पर्वत पर है. माना जाता है.कि सुबह ब्रह्म महूर्त के समय इस झील में भगवान् स्वय स्नान करने के लिए आते है.तथा इसमे एक बार स्नान कर लेने वाले व्यक्ति का मोक्ष हो जाता है.

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मानसरोवर झील में कल्पवृक्ष है. जो हर मनोकामना पूरी करता है. इस वृक्ष के फल के सेवन से जीवन सफल बन जाता है. पर इस वृक्ष तक एक पवित्र आत्मा वाला इंशान ही पहुँच सकता है.

मानसरोवर के विपरीत दिशा में राक्षस झील है. मान्यता है. कि इस झील का निर्माण राक्षसों के राजा रावण ने किया था. तथा इसी नदी के किनारे रावण ने भगवान् शिव की कठोर तपस्या की थी. राक्षसताल झील दुनिया की सबसे ऊँची खारे पानी की झील है.

कैलाश पर्वत की चोटियों पर स्थिति मानसरोवर झील की लम्बाई 320 मीटर है. तथा मानसरोवर झील का आकर सुर्यकार है. तथा राक्षसताल झील की लम्बाई 225 मीटर है. और इसका आकार चंद्राकार है.

कैलाश पर्वत को इस संसार का मध्यम भाग माना जाता है. माना जाता है. कि इस पर्वत से ही दिशाओ को ज्ञान किया जाता है. तथा इसका आकार ही चुराभुजा है. जिससे दिशाओ को ज्ञान करना आसान हो जाता है. इस पर्वत का उपरी भाग बर्फ से ढका रहता है, जिस कारण ये सफ़ेद दिखाई देता है.

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इस पर्वत की यात्रा के दौरान यमराज नामक चोटी आती है. इस चोटी से कैलाश पर्वत की परिक्रमा प्रारंभ की जाती है. और लगभग 50 किलोमीटर लम्बी यात्रा तय करने के बाद वापस यमराज के पास पहुंचते है. यानि एक परिक्रमा पूर्ण होती है.

इस स्थान का नाम यमराज इसलिए दिया गया क्योकि इस जगह पर यमराज रहते थे. और कई लोग दावा करते है. कि आज भी इस स्थान पर यमराज विराजित है.

जैन धर्म के धर्मग्रन्थ के अनुसार जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देव तथा बौध धर्मग्रथ के अनुसार भगवान् बुद्ध का निवास स्थल है. माना जाता है, कि इस पर्वत पर पवित्र आत्माएं ही जा सकती है. ये पर्वत पर अनेक ऋषि मुनियों की तपभूमि है.

तिब्बत चीन का अधीन है. इसलिए चीन ने इस पर्वत को फतह करने के लिए अनेको प्रयास किये पर आज तक इस पर्वत पर कोई नहीं चढ़ पाया है.पर्वतारोहियों का मानना है.कि इस पर्वत की चढ़ाई चढ़ने पर व्यक्ति दिशा का ज्ञान भूल जाता है. तथा भावनात्मक रूप से क्षीण जाता है.

कई यात्रियों का मानना है. कि इस पर्वत पर अलौकिक शक्तियों का वास है. जिस कारण ये शक्तियां इस पर्वत पर चढ़ने से रोकती है. अलौकिक शक्तियों के कारण कई बार आश्चर्यजनक घटनाए घटित हुई है. तो कई बार साफ मौसम में एकदम तेज बर्फ़बारी हुई, तो कभी रास्ता ही गायब हो गया.

कैलाश पर्वत की ऊपरी चोटी का आकार शिवलिंग के समान है. माना जाता है, कि इस पर्वत पर भगवान शिव की शिवलिंग स्थित है. पर इस पर कोई भी वैज्ञानिक तर्क नहीं है. इस पर्वत की एक परिक्रमा से सभी पाप धुल जाते है. माना जाता है, कि मानसरोवर में कल्प वृक्ष स्थित है, इसलिए इस झील के 12 परिक्रम लगाने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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माना जाता है, कि इस पर्वत के भीतरी भाग से डमरू तथा ओउम की ध्वनियाँ उत्पन्न होती है.जहाँ भगवान शिव इस पर्वत में मौजूद है, और वे डमरू बजा रहे है. पर वैज्ञानिको के आधार पर ये ध्वनियाँ बर्फ के पिघलने से उत्पन्न होती है.

कैलाश पर्वत पर समय बहुत तेजी से घटता है. पर्वतारोहियो का मानना है, कि यहाँ पर बाल और नाख़ून बहुत तेजी से बढ़ते है. तथा सामान्य समय में 7 दिन में नाखुनो की लम्बाई वहा मात्र 12 घंटो में बढ़ जाती है. ये सच्चाई है, पर इसके कारण के बारे में कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं दिया गया है.

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पर्वत की इन अद्धुत शक्तियों से कारण कोई यात्री इस पर्वत को विजय नहीं कर पाया इसलिए चीन के सरकार से 2001 में अपने अंतिम प्रयास के बाद इस पर्वत की चढ़ाई को प्रतिबंधित कर दिया और आज इसकी चढ़ाई करना गैरकानूनी अपराध है.

कैलाश पर्वत दुनिया के दुर्गम पर्वतो में से एक है. हिमालय जैसे पर्वत पर भी कई बार सफल चढ़ाई की जा चुकी है, पर कैलाश अभी भी अजेय है. और शायद अजेय ही रहेगा, पर एक अपवाद के रूप में माना जाता है, कि 1927 में एक यात्री ने सफलता पूर्वक कैलाश पर्वत की यात्रा की थी.

इस पर्वत पर भगवान शिव की शिवशक्ति मूर्ति भी है. कैलाश और भगवन शिव की स्थिति पर अनेक काव्य रचे गए है, जिसमे माघ रचित शिशुपालवधम् काव्य प्रमुख है, कैलाश के रहस्यों को लेकर हिन्दू धर्म के कई ग्रंथो में काफी कुछ लिखा गया है.

माना जाता है, कि कभी कभी इस पर्वत पर 7 लाइट जलती है. पर इस पर वैज्ञानिको ने इसे अन्तरिक्षीय संपर्क को इसका प्रमुख कारण बताया है तथा शिवलिंग को प्रकृति रूपी स्वरूप बताया है, पर इसकी सच्चाई सामने नहीं आ सकी है.

कैलाश पर्वत की कहानी Kailash Parvat Story In Hindi

कैलाश पर्वत ये वह पर्वत है. जिस पर भगवान शिव (पार्वती, गणेश तथा कार्तिकेय) के साथ रहा करते थे. और आज भी कई मान्यताओ के अनुसार शिवजी का वास कैलाश ही है. इस पर्वत पर कई अनेक देवता विराजित थे. जिसमे भगवान विष्णु भी शामिल थे.

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कैलाश पर्वत पर ही लंकाधिश रावण ने भगवान शिव की आराधना की थी. और भगवान शिव से वरदान की प्राप्ति की थी. इस पर्वत पर भगवान शिव की सबसे बड़ी शिवलिंग स्थापित है.

इस शिवलिंग का आकार बहुत विशाल है. कैलाश पर्वत को इस संसार का स्वर्ग माना जाता है. इस पर्वत की परिक्रमा लगाने से हमारा जीवन की सिद्धि होती है.

हिन्दू धर्म के लोग इस पर्वत को भगवान शिव का घर मनाकर इसकी पूजा करते है. इसलिए शिव जी को कैलाशपति कहते है. तथा कैलाश पर्वत को जैन धर्म के अनुनायी ऋषभ देव तथा बौध धर्म के लोग महात्मा बुध का निवास स्थान मानते है.

एक बार रावण ने अपने अहंकार में डूबकर कैलाश पर्वत को उठाने के लिए इत्सुक हुआ. भगवान शिव को कैलाश से आने को कहा पर शिवजी ने रावण की नहीं सुनी और अपने स्थान पर ही विराजित रहे. रावण ने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया पर वह इसमे असफल रहा.

आख़िरकार रावण अपने अहंकार से हार गया. और ब्रह्मा जी से अपनी इस गलती की क्षमा मांगने लगा. पर ब्रह्मा जी ने शिवजी से कहा और शिवजी ने कहा यहाँ केवल सच्चाई और सदाचार चलता है.ये पर्वत अहंकारियो के अहंकार का विनास करने वाला स्थान है. इसी कारण इस स्थान पर पवित्र आत्माएं ही पहुँच सकती है.

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कैलाश पर्वत का इतिहास Kailash Parvat History In Hindi

कैलाश पर्वत एकमात्र अजेय पर्वत है. इस पर्वत का कुछ हिस्सा भारत में भी हुआ करता था. इस पर्वत की लम्बाई 600 किलोमीटर है. तथा इस पर्वत पर कही ढलान तो कही चढ़ान है.

कैलाश पर्वत उबड़ खाबड़ है, पर तिब्बत में ये वर्ग का आकर धारण कर लेता है. जिस कारण इस पर चढ़ाना मुश्किल हो जाता है.

17 शताब्दी के समय में मुग़ल शासनों ने इस पर्वत पर अपना अधिकार किया था . और चाइना से इस क्षेत्र को छीन लिया. और हमारे देश का भाग भाग बना लिया. पर आज हमारे देश में ये पर्वत नहीं है.

कैलाश पर्वत इस संसार की शुरुआत से ही स्थापित है. भगवान शिव को चार युगों का देवता माना जाता है. और शिवजी का ये घर है. इसी से अनुमान लगाया जा सकता है. कि ये पर्वत काफी प्राचीन समय से स्थापित है.

कई मान्यताओ के अनुसार शिव जी ने इस पर्वत को स्थापित किया था. और कई मान्यताओ के अनुसार आधुनिका कैलाश पर्वत भगवन शिव की शिवलिंग हुआ करती थी. और इस पर्वत का आकार भी शिवलिंग के जैसा ही है.

ये पर्वत 6638 मीटर ऊँचा है.  इस पर्वत पर अनेक देवताओ का वास है. इस पर्वत की बनावट वर्गाकार है. इस पर्वत में चार धातुए मौजूद है. जिसमे सोना भी शामिल है. इसलिए सूर्य की किरण पड़ने पर ये सोने की भांति चमकता है.

कैलाश पर्वत पर स्थित मानसरोवर झील पर भगवान विष्णु निवास करते है. मानसरोवर को ग्रंथो में क्षीर सागर के नाम से जानते है. क्योकि इसका जल बहुत मीठा होता है. और इसका जल भगवन स्वय पीने आते है.

मानसरोवर के केंद्र में एक कल्पवृक्ष भी है. जो मुंह मांगी वस्तुए देता है. तथा इस वृक्ष के फल खाने से जीवन की सभी क्रीड़ा तथा रोग मुक्त हो जाते है.इसी कारण मानव इस पर्वत पर नहीं जा सकती है. इस पर्वत पर एक पवित्र आत्मा ही जा सकती है.

जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव तथा बौध धर्म के संसथापक महात्मा बुध दोनों पवित्र आत्माओ का निर्वाण कैलाश पर्वत पर हुआ था. माना जाता है., कि आज भी वे इस पर्वत पर निवास करते है, पर इसका कोई प्रमाण नहीं है.

मान्यता के अनुसार आज भी भगवान से संपर्क करने का सीधा साधन कैलाश पर्वत पर भगवान को याद करना है. इस पर्वत के चारो और भगवान की शक्तिया है. जो कि किसी भी भक्त से संपर्क साधने के लिए है.

कई वैज्ञानिको का मानना है. कि इस पर्वत पर हिम मानव निवास करते है. जो अन्य लोगो को ऊपर जाने पर मार गिराते है. तथा कई लोगो का मानना है. कि मानव का बड़ा रूप यति इस पर्वत पर रहता है.

इस पर्वत पर एक स्थान का नाम यमराज भी है. माना जाता है, कि इस स्थान पर यमराज रहते थे. और आज भी यही पर विराजित है. यमराज चोटी से कैलाश पर्वत की परिक्रमा की शुरुआत होती है. और वापस इसी जगह पर आने पर एक परिक्रमा पूर्ण होती है.

कैलाश की एक परिक्रमा में लगभग 60 किलोमटर की दुरी तय करनी पड़ती है. और इस दौरान 3 से चार दिन का समय भी लगता है. पर इस पर्वत की 12 परिक्रमा लगाने वाले इन्शान का जीवन सफल हो जाता है.

इस पर्वत के चारो और अनेक शक्तिया विद्यमान है. इन शक्तियों से व्यक्ति अपना मोक्ष बहुत कम समय में कर सकता है. इसलिए कई लोग कैलाश पर्वत के पास भक्ति करते है. ये भक्तो के लिए सबसे श्रेष्ठ स्थान है.

कैलाश पर्वत की यात्रा Kailash mountain tour

कैलाश पर्वत के लिए यात्रा करने के लिए कई लोग उत्सुक रहते है. इस पर्वत की यात्रा करना स्वर्ग में जाने के समान है. पर अपनी सुरक्षा तथा खुद की आत्मनिर्भरता पर ही ये यात्रा करें. क्योकि इस यात्रा के दौरान अनेक बाधाओ का सामना करना पड़ता है.

कैलाश पर्वत की यात्रा के लिए दो रास्ते है. जिसमे एक उतराखंड से होकर गुजरता है. जो कि बहुत दुर्गम रास्ता होने के कारण इस रास्ते का से यात्री नहीं जाना चाहते है, तथा दूसरा रास्ता नेपाल से होकर गुजरता है. इस रास्ते से हवाई जहाज द्वारा जाना पड़ता है.

कैलाश पर्वत की यात्रा के दौरान प्रतिव्यक्ति लगभग 2 लाख रुपये की आर्थिक जरुरत होगी. और इस यात्रा के दौरान आपको भारत से तिब्बत तक किसी हवाई वाहन की सहयता से जाना होगा. और तिब्बत से आगे आप किसी भी सड़क वाहन की सहायता से जा सकते है.

इस यात्रा के दौरान अपनी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. इस यात्रा में खुद पर नियंत्रण बनाए रखना आसान काम नहीं है. इस यात्रा में अनेक बाधाए आती है. जिनका सामना कर पाना काफी मुश्किल होता है.

इस पर्वत की यात्रा तिब्बत से शुरू हो जाती है. पर हमें इस यात्रा के दौरान पैदल चलना पड़ सकता है. इस यात्रा में कई जगहों पर बर्फ़बारी होती है. और कई जगहों पर तेज हवा इसलिए हमें हर परस्थिति में अनुकूल रहना पड़ता है.

इस पर्वत की सम्पूर्ण यात्रा में लगभग दो महीने का समय लगता है. कैलाश यात्रा का श्रेष्ठ समय सर्दी का मौसम होता है. सर्दी के मौसम में पर्वत की बर्फ जमी रहती है, जिससे बर्फीलो स्थानों पर सफ़र आसान हो जाता है.सर्दी में पर्वत पर तेज ठंड पड़ती है.

हमारे देश से आपको किसी हवाई वाहन द्वारा तिब्बत जाना होगा. क्योकि स्थलीय वाहनों से तिब्बत जाने पर प्रतिबंध लगा है. तिब्बत जाने के बाद आप स्थलीय वाहनों से पर्वत तक जा सकते है.

तिब्बत से पर्वत की यात्रा हवाई वाहनों से भी कर सकते है. आपको इस यात्रा में कम से कम 15-20 किलोमटर की पैदल यात्रा करनी ही पड़ेगी. और इस यात्रा में खुद को सुरक्षा का जिम्मा स्वयं के पास होता है.

Facts Information History Mystery Of Kailash Parvat

आप सभी ने कैलाश पर्वत का नाम सुना होगा. इसके बारे में एक ख़ास बात यह भी है की एक बार रावण ने तपस्या करके कैलाश पर्वत को भी हिला दिया था.

कैलाश पर्वत शिवजी का निवास स्थान है, जहां भगवान भोलेनाथ अपनी पत्नी पार्वती और बेटे गणेश तथा कार्तिक के साथ रहते थे.

कैलाश पर्वत इस दुनिया का सबसे रहस्यमयी पर्वत है. इसके बारे में आप सिर्फ इतना जानते है की यह शिव भगवान का स्थान हे, लेकिन आप इसके कुछ रहस्य नहीं जानते है. आज की इस पोस्ट में, हम आपको कैलाश पर्वत से जुड़े रहस्य से रूबरू कराएँगे.

कैलाश पर्वत से जुड़े रहस्य Mystery Of Kailash Parvat
  1. यह आकाश और धरती के बीच का ऐसा बिंदु है जहां चारों दिशाएं मिल जाती है. इसके बारे में कहा जाता हैकी यहां बहुत सारी शक्तियाँ रहती है.
  2. इस पर्वत की उंचाई 6714 मीटर है. इसकी जो आकृति बनी हुयी है वह शिवलिंग के आकार की है. यह पर्वत हमेशा बर्फ से ढका रहता है.
  3. कैलाश पर्वत चार महान नदियों सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, सतलज और कर्णाली से घिरा है. कैलाश पर्वत पहला ऐसा मानसरोवर है जो शुद्द पानी की झीलों में से एक है.
  4. कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित है और तिब्बत चीन के अधीन है, इसलिए कैलाश पर्वत चीन में आता है. इसकी सुन्दरता और इसके बारे में कथाओं के आधार पर कहा जा सकता है की ‘ईश्वर ही सत्य है और सत्य ही शिव है.’
  5. इसके बारे में कहा जाता है की यह भगवान भोलेनाथ का स्थान होने के कारण सभी ज्योतिर्लिंगों में से सर्वश्रेष्ठ है यहाँ पर अक्सर ‘ओं’ की ध्वनी सुनाई देती है.
  6. इसके बारे में यह धारणा भी है की यहां देवी सती का दायाँ हाथ गिरा था. इसलिए यहाँ एक पत्थर की शिला को उसका रूप मानकर पूजा जाता है.
  7. यहां सिक्खों के प्रथम देव गुरु नानक देव रुके थे, इसलिए सिक्ख इसे पवित्र स्थान मानते है.
  8. कैलाश पर्वत में एक जगह सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला कल्प वृक्ष लगा हुआ है.
  9. यहाँ के लोगों का मानना है की अगर कोई श्रदालु मानसरोवर में डुबकी लगा ले तो वह ‘रूद्रलोक’ पहुँच जाता है. रूद्र भगवान शिव का ही एक नाम है.
  10. कैलाश पर्वत को देखने पर ऐसा लगता हैकी जैसे भगवान शिव खुद बर्फ के रूप में यहां विराजमान है यहाँ देश और विदेशों से लाखों श्रदालु आते है.
  11. इसी कैलाश पर्वत पर माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की थी.
  12. मानसरोवर संस्कृत के मानस जिसका मतलब है मस्तिष्क और दूसरा सरोवर जिसका अर्थ है झील से बना है इसका अर्थ है ‘मन का सरोवर.’ इसके बारे में यह भी मान्यता है की यहाँ सुबह ब्रह्ममुहूर्त में देवतागण स्नान करने आते है.

कैलाश पर्वत देवो के देव महादेव का सबसे पसंदीदा स्थान था, जहाँ वे अपने परिवार के साथ रहते थे. कैलाश पर्वत देखने में सबसे सुंदर स्थान है और यहाँ लाखों की संख्या में श्रदालु आते है. कहते है कि भगवान शिव के जन्मदिन के अवसर पर यहाँ बर्फ का शिवलिंग बनता है और इसी का दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते है.

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