मेक इन इंडिया पर निबंध | Make In India Essay In Hindi

मेक इन इंडिया पर निबंध | Make In India Essay In Hindi प्रिय विद्यार्थियों आपका स्वागत है आज हम मेक इन इंडिया पर निबंध बता रहे हैं. यहाँ आपकों विभिन्न शब्द सीमा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गये मेक इन इंडिया अभियान कार्यक्रम पर Make In India Essay In Hindi को बच्चों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. हिंदी निबंध लेखन के इस नयें अध्याय को स्टूडेंट्स परीक्षा के लिहाज से भी याद कर सकते हैं. तो चलिए आरम्भ करते हैं.

मेक इन इंडिया पर निबंध | Make In India Essay In Hindi

मेक इन इंडिया पर निबंध Make In India Essay In Hindi

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Short Make In India Essay In Hindi In 100 Words

मेक इन इंडिया का अर्थ है भारत का माल भारत में ही बने. इसके लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारत में आगमन एवं निवेश की राह भी खुली हैं. 25 दिसम्बर 2014 को दिन देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया की शुरुआत की थी.

मोदी जी ने इस कार्यक्रम को लौंच करते वक्त कहा कि हम कभी नहीं चाहते कि किसी उद्योग पति को भारत छोड़कर जाना पड़े. भारत में उद्योगों की स्थिति अच्छी हो जिससे विदेशी निवेश को भी आकर्षित किया जा सके. उन्होंने उन पूंजीपतियों को भी विश्वास दिलाया कि उनका पैसा सरकार नहीं डूबने देगी.

इस तरह देश के उद्योगों के लिए मेक इन इंडिया आर्थिक सुरक्षा का भी कार्य करेगा. दूसरे शब्दों में कहे तो यह स्वदेशी अभियान है जिसके द्वारा देश की आवश्यकता का अधिक से अधिक माल भारत में ही बनने से न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि लोगों के रोजगार के अवसर खुलेगे तथा विकास भी तेज गति से आगे बढ़ पाएगा.

Make In India Essay In Hindi Language In 1000 Words

भूमिका-

वस्तुओं पर मेड इन इंडिया की छाप देखकर मन गर्व से भर जाता हैं. यह देश में स्वदेशी उद्योगों के निरंतर विकास का सूचक तो होता ही हैं साथ ही हर भारतीय को आत्मविश्वास से भी भरने वाला होता हैं.

किन्तु हमारे प्रधानमंत्री जी ने इसके साथ साथ मेक इन इंडिया का नारा भी दिया हैं, जिसका आशय है कि विदेशी निवेशकों को भारत में उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रण देना. औद्योगिक प्रगति और सम्पन्नता की दृष्टि से यह एक नई सोच हैं.

सम्पन्नता क्यों-

प्रश्न उठता हैं कि मनुष्य सम्पन्न होना क्यों चाहता हैं? हमारे जीवन में अनेक आवश्यकताएं होती है, उनकी पूर्ति के लिए साधन चाहिए. ये साधन हमकों सम्पन्न होने पर ही प्राप्त होंगे. आवश्यकता की पूर्ति न होने पर हम सुख से नहीं रह सकते हैं. अतः धन कमाना और सम्पन्न होना आवश्यक हैं.

धनोपार्जन और उद्योग-

धन कमाने के लिए कुछ करना होगा, कुछ पैदा भी करना होगा. कृषि और उद्योग उत्पादन के माध्यम हैं. व्यापार भी इसका एक साधन हैं. हम कुछ पैदा करे, कुछ वस्तुओं का उत्पादन करे यह जरुरी हैं.

देश को आगे बढने तथा समृद्धशाली बनाने के लिए हमें अपनी आवश्यकता की ही नहीं, दूसरों की आवश्यकता की वस्तुएं भी बनानी होगी.

मेक इन इंडिया-

मेक इन इंडिया विश्व की वर्तमान स्थितियों को देखा जाए तो यह योजना भारत के लिए न सिर्फ मजबूत आर्थिक भविष्य का आधार है बल्कि समय की जरूरत भी।

दुनिया में चीनी और अमेरिकी बाजार के समक्ष भारतीय बाजार उत्पादकता में काफी पीछे है। तमाम तरह के कच्चे पदार्थों की उपलब्धता के बावजूद भी भारत का निर्यात समान आकार वाली अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी कम है जिसका मुख्य कारण विनिर्माण क्षेत्र की अकुशलता रहा है।

चीन की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण का क्षेत्र जीडीपी में वर्तमान में करीब 26% की हिस्सेदारी रखता है अगर यह योजना सफल रहती है तो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र भी जीडीपी की एक चौथाई हिस्सेदारी प्राप्त कर लेगा, जिससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी बल्कि विश्व बाजार में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर दमन की नीतियों को भी मुंह तोड़ जवाब मिलेगा।

जो भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि क्षेत्र से सीधे सेवा क्षेत्र में परिवर्तित हो चली थी, जिस कारण अर्थव्यवस्था का मॉडल पेचीदा हो चुका था, इस योजना की सफलता भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।

आजकल छोटे छोटे देश अपने यहाँ उत्पादित वस्तुओं का विदेशों में निवेश करके अपनी सम्रद्धि को बढ़ा रहे है. द्वितीय विश्व युद्ध में नष्ट हुआ जापान स्वदेशी के बल पर ही अपने पैरों पर खड़ा हो सका हैं. भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने मेक इन इंडिया का नारा दिया हैं.

इसका उद्देश्य विदेशी पूंजी को भारत में आकर्षित करना तथा उससे यहाँ उद्योगों की स्थापना करना हैं. इन उद्योगों में बनी वस्तुएं भारत में निर्मित होगी. उनकों विश्व के अन्य बाजारों में बेचा जाएगा. इससे धन का प्रवाह भारत की ओर बढ़ेगा और वह एक समृद्ध राष्ट्र बन सकेगा.

विदेशी पूंजी की जरूरत-

उद्योगों की स्थापना तथा उत्पादन करने और उसकी वृद्धि करने के लिए पूंजी की आवश्यकता तो होती ही हैं. अभी भारत के पास इतनी पूंजी नहीं है कि वह अपने साधनों से बड़े बड़े उद्योग स्थापित कर सके तथा उन्हें संचालित कर सके.

हमारे प्रधानमंत्री चाहते है कि विदेशों में रहने वाले सम्पन्न भारतीय तथा अन्य उद्योगपति भारत आए और यहाँ अपनी पूंजी से उद्योग लगाए. उत्पादित माल के लिए उसकों भारतीय बाजार तो प्राप्त होगा ही, वे विदेशी बाजारों में भी अपना उत्पादन बेचकर मुनाफा कमा सकेगे. इससे भारत के साथ ही उनकों भी मुनाफा होगा.

मेक इन इंडिया या स्वदेशिता-

मेक इन इंडिया चूंकि नाम से ही स्पष्ट है, भारत में निर्मित सामान। किसी भी अर्थव्यवस्था के आत्मनिर्भर बनने हेतु और विदेशी ताकतवर बाजारों की दमनकारी नीतियों से बचने के लिए यह जरूरी है कि अर्थव्यवस्था के विनिर्माण क्षेत्र का आधार मजबूत रहे 

और भारत जैसी श्रमिक आधिक्य वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिए विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका दोगुनी हो जाती है। विनिर्माण हेतु कारखानों की संख्या को बढ़ाना पड़ता है जिससे देश के बेरोजगारों को रोजगार मिलता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं शहरी अर्थव्यवस्था दोनों बूस्ट होती है।

चूंकि अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों के चलते लगभग हर तरह का कच्चा पदार्थ भारत में उपलब्ध है। कच्चे पदार्थों की उपलब्धता और श्रमिक आधिक्य वाली अर्थव्यवस्था विनिर्माण के क्षेत्र में स्वयं को बहुत जल्द आत्मनिर्भर बना सकती है।

घरेलू घरेलू कच्चे पदार्थों की उपलब्धता एवं श्रमिकों की सप्लाई विनिर्माण क्षेत्र में बने उत्पादों की कम कीमतों की गारंटी होती है, जिनसे निर्यात के पश्चात भी उत्पादों की कीमत तुलनात्मक रूप से कम रहती है और विदेशी बाजारों में इनकी मांग तुलनात्मक रूप से अधिक होती है। जिससे देश का फॉरेन रिजर्व बढ़ता है और घरेलू करेंसी मजबूत होती है।

कहा जाए तो कच्चे माल की उपलब्धता और सुलभ एवं सस्ते श्रमिकों की सप्लाई न सिर्फ देश की बेरोजगारी को दूर करती है बल्कि विश्व बाजार में भी देश में निर्मित उत्पादों की मांग को बढ़ाती है।

मेक इन इंडिया योजना में शामिल क्षेत्रों की सूची-

इस दूरदर्शी एवं महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था के 25 महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया। जिन को आधार मानकर अर्थव्यवस्था इस योजना के मानकों तक पहुंच सकती है। यह 25 महत्वपूर्ण क्षेत्र विनिर्माण क्षेत्र की एक मजबूत कड़ी है जिनमें क्रांतिकारी बदलाव लाकर भारत अपने इस योजना के निर्धारित आयामों को प्राप्त कर सकती है।

  1. विमानन aviation
  2. जैव प्रौद्योगिकी biotechnology
  3. रक्षा निर्माण defence manufacturing
  4. निर्माण construction
  5. विद्युत electricity  machinery
  6. मशीनरी electronic systems
  7. खाद्य प्रसंस्करण food processing
  8. चमड़ा leather
  9. आईटी और बीपीएम it and BPM
  10. खनिज mining
  11. मीडिया एवं मनोरंजन media and entertainment
  12. तेल और गैस oil and gas
  13. फार्मास्यूटिकल्स pharmaceuticals
  14. रेलवे railways
  15. नवीकरणीय ऊर्जा renewable energy
  16. बंदरगाह ports
  17. सड़कें एवं राजमार्ग roads and highways
  18. अंतरिक्ष space
  19. कपड़ा textiles and garments
  20. रसायन chemicals
  21. ऑटो पार्ट्स automobile components
  22. ऑटोमोबाइल automobiles
  23. तापीय ऊर्जा thermal power
  24. पर्यटन और आतिथ्य tourism and hospitality
  25. कल्याण wellness

मेक इन इंडिया योजना के मुख्य उद्देश्य-

प्राचीन भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह से व्यापार आधारित अर्थव्यवस्था थी। अर्थात भारतीय अर्थव्यवस्था निर्यात के क्षेत्र में संपूर्ण विश्व में सभी अर्थव्यवस्थाओं से कई गुना मजबूती थी।

विश्व बाजार में भारतीय अर्थव्यवस्था की भागीदारी करीब 44% हुआ करती थी। इससे निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को पुनः निर्यात के क्षेत्र में मजबूत करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री द्वारा मेक इन इंडिया योजना का शुभारंभ किया गया।

इसका मूल उद्देश्य भारत में निर्माताओं को आमंत्रित करना था। इसके लिए भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में 100% एफडीआई की अनुमति दी। इस योजना ने मीडिया (26%), अंतरिक्ष (74%) और रक्षा (49%) को पूरी तरह से शामिल नहीं किया गया।

अर्थव्यवस्था को लेकर मुख्य उद्देश्य इस प्रकार है

  1. भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनाना।
  2. भारतीय अर्थव्यवस्था के विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाकर 12 से 14% प्रति वर्ष तक करना।
  3. भारत की जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 2025 (संशोधित) तक बढ़ाकर 25% तक करना।

makeinindia.com

योजना के अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि एवं विकास को लेकर भारत सरकार ने एक बड़ा प्रयास करते हुए इस योजना हेतु एक विशिष्ट वेब पोर्टल भी तैयार किया है। जिस पर निवेशक की किसी भी प्रकार की समस्या 72 घंटे के अंदर निवारित करने का प्रयास रहेगा, जिसके लिए एक बैक एंड सपोर्ट टीम भी तैयार की गई है

चुनौतियां-

चूंकि इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया है परंतु भारत की आधी से ज्यादा आबादी आधारित, कृषि क्षेत्र पर बल नहीं दिया गया जिस कारण इस योजना का सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ा।

  • श्रमिक कानूनों की जटिलता एक मुख्य वजह रही है और अभी भी है जिसकी वजह से फॉरेन इन्वेस्टमेंट को अधिक बढ़ावा नहीं मिल पाता। इसको लेकर भी भारत सरकार के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया जोकि योजना के समक्ष एक बड़ी चुनौती बन कर उभरा।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था को विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था बनाने हेतु सबसे पहली शर्त थी, बड़े पैमाने पर कारखानों का निर्माण। चूंकि भारत सरकार योजना को लेकर बहुत सक्रिय रही लेकिन बुनियादी जरूरतों, जैसे कारखानों का निर्माण, इत्यादि पूरी नहीं कर पाई।
  • हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट का एक बड़ा हिस्सा सेल कंपनीयों से आता है। जिस कारण योजना का मूल्यांकन बहुत सूक्ष्म पैमाने पर करना पड़ेगा।
  • योजना को लेकर सरकार के द्वारा अत्यधिक महत्व काशी आंकड़े निर्धारित कर लिए गए जिनको लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों तक पहुंचना मुश्किल है। जैसे 12-14% की वार्षिक वृद्धि औद्योगिक क्षेत्र की क्षमता से बाहर है।
  • विदेशी निवेश को भारतीय अर्थव्यवस्था के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि का आधार मान लेना एक बड़ी भूल साबित हुई क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था सेल कंपनियों पर ज्यादा आधारित है

पूंजी के साथ तकनीक का आगमन-

प्रधानमंत्री जानते है कि भारत को पूंजी की ही नहीं नवीन तकनीक की भी आवश्यकता हैं. वह विदेशी उद्योगपतियों को भारत में उत्पादन के लिए आमंत्रित करके पूंजी के साथ नवीन तकनीक प्राप्ति के द्वार भी खोलना चाहते हैं.

यह सोच उनकी दूरदृष्टि को प्रकट करने वाली हैं. बच्चा चलना सीखता है, तो उसको किसी की अंगुली पकड़ने की आवश्यकता होती हैं. फिर तो वह सरपट दौड़ने लगता हैं. भारत भी कुशल उद्योगपतियों के अनुभव का लाभ उठाकर एक शक्तिशाली औद्योगिक देश बन सकता हैं.

उपसंहार-

मेक इन इंडिया की सफलता के लिए हमें अनेक प्रबंध करने और कदम उठाने होंगे. देश में ऐसा औद्योगिक वातावरण बनाना होगा जिससे विदेशी निवेशक यहाँ अपने उद्योग लगाने के लिए प्रेरित हो.

सड़क, बिजली, परिवहन के क्षेत्र में सुधार करना होगा. उद्योग स्थापना में कानूनी जटिलताएँ दूर हो और विभागीय अनुभूतियाँ सरलता तथा शीघ्रता से प्राप्त हो, ऐसा प्रबंध करना होगा. भारत सरकार इस दिशा में निरंतर समुचित कदम उठा रही हैं.

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