Of Studies By Francis Bacon In Hindi फ्रांसिस बेकन के अध्ययन निबंध सत्य के बारे में

Of Studies By Francis Bacon In Hindi फ्रांसिस बेकन के अध्ययन निबंध सत्य: नमस्कार दोस्तों सत्य के बारे हम अलग अलग विचार रखते हैं. अलग अलग विद्वानों ने अपनी truth summary पेश की जाती हैं. आज francis bacon इतिहास, बायोग्राफी तथा Of Studies निबंध के बारे में विस्तार से बताएगे. फ्रांसिस बेकन ने पढ़ाई के अध्ययन में लिखा है कि अधिकतर लोग सत्य का सामना नहीं करना चाहते हैं, वे अक्सर अपने सपनों की दुनियां में ही रहना चाहते हैं. उनके विचारों को पढ़ेगे ही थोडा इन महाशय के बारे में भी जान लेते हैं.

Of Studies By Francis Bacon In Hindi

Of Studies By Francis Bacon In Hindi

फ्रांसिस बेकन पुनर्जागरण युग के एक महान लेखक, एक महान दार्शनिक और वैज्ञानिक विचारों वाले महान शोधकर्ता थे. 22 जनवरी 1561 को इनका जन्म स्ट्रैंड, लंडन, इंग्लैंड में होता हैं. ब्रिटेन के राजपरिवार से इनके नजदीकी तालुकात होते हैं. इनकें जीवन के तीन मूल उद्देश्य थे.

अपने देश की सेवा करना, दूसरा है चर्च की सेवा करना और दूसरा है सत्य को सीखना. कैंब्रिज और ग्रेज़ इन पढ़ाई करने के बाद ये फ़्रांस के दूतावास में सेवा देते हैं तथा बाद में वकालत के लिए कानून की पढाई करते हैं. इनकी बालपन से सक्रिय राजनीति के प्रति गहरी रूचि भी थी. 

फ्रांसिस बेकन लम्बे समय तक ब्रिटिश अपर हाउस के सदस्य भी रहते हैं. विज्ञान और तर्क और दर्शनशास्त्र पर ये अपने शोध एवं विचारों को प्रकाशित करते रहते थे. राजनीति और कानून के निजी कार्यों के बीच वक्त निकालकर ये राजनीति और दर्शन के विषयों पर लिखते रहे. २८ वर्ष की आयु में इन्होने ५६ निबंधों (Essays) के नाम से प्रकाशन करवाया.

फ्रांसिस बेकन की मुख्य रचनाओं में डि सैपिएंशिया वेटेरम” (1609), द विज़डम ऑव् द एंशिएंट्स (1619), और हिस्ट्री ऑव् द रेन ऑव् हेनरी सेवेन्थ (1622), दि एडवांसमेंट आव लर्निग, इंस्टोरेशियो मैग्ना, नोवम आर्गैनम, डि आगमैंटिस साइंशिएरम मुख्य हैं.

बेकन के लेखन की अपनी एक विशिष्ट शैली थी, वे वाक्यों की संक्षिप्तता में व्यापक अर्थ देने वाले निबंध की रचना करते हैं हिंदी में जिसे गागर में सागर भरना कहते हैं यह उनके लेखन की मुख्य विशेषता थी.

भूमिका

फ्रांसिस बेकन एलिज़ाबेथ के राज्यकाल के समय के एक प्रसिद्ध दार्शनिक और लेखक थे। फ्रांसिस बेकन ने विज्ञान संबंधित विचारों के शोधकर्ता के रूप में विस्तृत अध्ययन किया था। फ्रांसिस बेकन अपने अध्ययन स्वरूप लिखने, पढ़ने और सीखने पर ज़ोर देते थे।

दोस्तों प्रस्तुत निबंध में फ्रांसिस बेकन के अध्ययन के बारे में जानेगें। इस निबंध में फ्रांसिस बेकन के जीवन संबंधी बातें और उनके अध्ययन की विस्तृत जानकारी व संबंधित संदर्भ के बारे में लिखा गया है जो फ्रांसिस बेकन के अध्ययन की विशेषता से परिचय कराता है।

फ्रांसिस बेकन का जीवन काल

फ्रांसिस बेकन का जन्म वर्ष 1561 में 22 जनवरी को इंग्लैंड में हुआ था। इनके संपर्क राज परिवार एलिज़ाबेथ से संबंधित थे। जिनका फ्रांसिस बेकन पर काफी प्रभाव पड़ा था । फ्रांसिस बेकन ने अपनी पढ़ाई कैंब्रिज एवं ग्रेज़इन से पूरी की थी। तत्पश्चात वर्ष 1577 में वह एक अंग्रेजी दूतावास में नियुक्त किए गए थे। पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की थी। 

फ्रांसिस बेकन की राजनीति में भी काफी रुचि थी। जिस वजह से वह वर्ष 2019 में ब्रिटिश सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित भी किए गए थे। वर्ष 1614 में संसद के कार्यकाल में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। उनकी सलाह विशेष मानी जाती थी जो राजनीतिक मामलों को सुलझाने में सहायक सिद्ध होती थी। वर्ष 1592 में वह अर्ल आव एसेक्स के राजनीतिक सलाहकार के रूप में वह अपने भाई एंथोनी के साथ नियुक्त किए गए थे।

फ्रांसिस बेकन ब्रिटिश अपर हाउस में सदस्य रूप में कार्यरत भी थे। इन्होंने अपने शोध स्वरूप विज्ञान एवं तर्क और अर्थशास्त्र संबंधित विचारों को प्रकाशित किया था। इसके साथ ही फ्रांसिस बेकन की राजनीति और दर्शन में भी रुचि थी जिसके लिए समय निकालकर वे  इनसे संबंधित विषयों पर लिखते थे। फ्रांसिस बेकन अपने लेखन कार्य में काफी दक्ष थे जिसके स्वरूप उन्होंने 28 साल की उम्र में लगभग अलग-अलग विषयों पर 58 निबंध लिखें और प्रकाशित भी करवाएँ थे।

फ्रांसिस बेकन के कई संग्रह मिलते हैं जिनमें कुछ प्रमुख रचनाएँं हैं जैसे – नोवम आगैंनम, वर्ष 1622 में हिस्ट्री ऑव द रेन ऑव हेनरी सेवेंध, वर्ष 1609 में डि सैपिएंशिया वेटेरम, इंस्टोरेशियो मैग्ना, वर्ष 1619 में द विज़डम ऑव द एशिएंट्स, द एड वांसमेंट ऑव लर्निंग, डि आगमेंटिस साइंशिएरम आदि।

फ्रांसिस बेकन की रचनाओं में एक विशिष्ट शैली के दर्शन होते हैं जो उनकी रचना के महत्व को बताते हैं। अन्य रचनाकारों से अलग एक विशेष रूप देते हैं। उनके निबंधों में विशिष्टता देखने को मिलती है जो संक्षिप्त संदर्भ में विस्तृत अर्थ बताते हैं। बेकन के अध्ययन निबंध अपनी विशेष रचना कौशल से महत्वपूर्ण माने जाते हैं एवम् लोकप्रिय हैं। उनके निबंधों में विषयों के अर्थों की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है। और थोड़े में अधिक समझ वाले निबंध की रूपरेखा दिखाई पड़ती है।

फ्रांसिस बेकन के अध्ययन

फ्रांसिस बेकन के अध्ययन स्वरूप समझ की शैली प्रधान मानी जाती है। उनका अध्ययन अनुभव के रूप में चित्र की प्रस्तुति कर ज्ञान में बढ़ोत्तरी करता है। लिखने के स्वरूप में विशिष्ट शैली प्रदर्शित करना उनके अध्ययन का एक रूप है। पढ़ने की शैली स्वरूप लेखन ऐसा हो कि जो खुशी प्रदान करे एवम् सफलता की ओर उन्मुख करे। सीखने के संदर्भ में फ्रांसिस बेकन के अध्ययन में विभिन्न क्षेत्रों के विस्तृत रूप दिखाई पड़ते हैं। जैसे भाषा की स्पष्टता महत्वपूर्ण मानी जाती है उसी प्रकार कविता के अध्ययन में भी स्पष्टता की जरूरत होती है।

फ्रांसिस बेकन के अध्ययन निबंध विशेष रूप से समझ को ध्यान में रखकर एक ऐसा ज्ञान उपलब्ध कराते हैं जो चरित्र और अनुभव का विकास करते हैं। पढ़ना जहाँ एक ओर आनंद देता है वहीं दूसरी ओर आकर्षित करता है और सफल होने में मदद करता है। फ्रांसिस बेकन ने अध्ययन के अलग-अलग क्षेत्रों को विस्तृत रूप से संयोजित किया है जैसे भाषा की स्पष्टता आदि।

अध्ययन के अंश स्वरूप आभूषण, आनंद, क्षमता को बेकन ने सूचीबद्ध किया है। भाषा को आभूषण स्वरूप उन्होंने भाषण में प्रयोग किया। तो आनन्द को गोपनीय बनाए रखा व सेवानिवृति में प्रयोग किया। क्षमता को अपने व्यवसाय में सही गलत निर्णय के लिए इस्तेमाल किया और स्वभाव से भी जोड़कर उपयोग में लाया। फ्रांसिस बेकन ने सीख के अंतर्गत विशेष परामर्श के संदर्भ को अनेक मामलों से जोड़ा और मनुष्य द्वारा अच्छे परिणाम का समर्थन किया जो सीख से प्राप्त होते हैं।

उदाहरण स्वरुप अध्ययन के द्वारा ही पता चलता है कि प्राकृतिक सम्पदा को देख रेख की ज़रूरत होती है। एक बड़े पैमाने के रूप में दिशा निर्देश दिए जाते हैं जो अध्ययन स्वरूप ही पता चलते हैं। अध्ययन की महत्ता को बुद्धिमान मनुष्य ही समझ सकता है। बेकन के हिसाब से कुछ किताबें सामान्य रूप से पढ़ी जाती हैं। कुछ किताबें गहराई से पढ़ी जाती हैं तो कुछ तथ्यों के स्वरूप को समझकर पढ़ी जाती हैं।

अध्ययन के द्वारा ही पता चलता है कि हर विषय की अपनी अलग विशेषता होती है। बच्चों को अध्ययन से ही ज्ञान प्राप्ति होती है। उदाहरण स्वरूप एक वकील को अपनी वकालत की स्पष्टता के लिए अध्ययन की ज़रूरत होती है। एक डॉक्टर को शरीर के अंगों को समझने के लिए अध्ययन की ज़रूरत पड़ती है।

अध्ययन स्वरूप बेकन ने अपने निबंध के तीन संस्करण पहला वर्ष 1597 में व दूसरा वर्ष 1612 और तीसरा वर्ष 1625 में प्रकाशित कर विस्तृत जानकारी दी। मुख्य रूप से पहले संस्करण में अध्ययन की विस्तृत जानकारी को उदाहरण के साथ समझाया है। उन्होंने अपने कई निबंधों में अध्ययन के पक्ष को उजागर किया है।

फ्रांसिस बेकन ने अपने निबंध में अध्ययन को सीखने, आनंद, आभूषण और क्षमता से जोड़ा है। विद्यार्थी सीखने के लिए अध्ययन करते हैं। कुछ लोग आनंद के लिए अध्ययन करते हैं। कई लोग आभूषण की तरह दूसरों को दिखाने के लिए अध्ययन करते हैं। कई लोग अपने को बेहतर बनाने के लिए अध्ययन करते हैं। उनके द्वारा लिखा गया निबंध ‘ स्टडीज़ ‘ अध्ययन के लाभ बताता है। पढ़े हुए को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए अध्ययन की ज़रूरत पड़ती है।

दोस्तों इस निबंध में फ्रांसिस बेकन की जानकारी के साथ फ्रांसिस बेकन के अध्ययन के स्वरूप के बारे में भी लिखा गया है जो उसके महत्व को दर्शाते हैं।

Francis Bacon: Of Truth, Essay in Hindi

यहाँ आपकों फ्रांसिस बेकन के सत्य निबंध हिंदी एनालिसिस और समरी के बारें में बता रहे हैं. आप इस विडियो में उनके सत्य के बारे में दिए विचारों को अधिक स्पष्टता से समझ सकते हैं.

बेकन अपने सत्य के निबंध की शुरुआत इसी वाक्य से करता हैं कि सत्य क्या हैं फिर वह ईसा मसीह और रोमन साम्राज्य के गवर्नर पिलाटे का उदाहरण देता है. वह यह स्पष्ट करना चाहता है कि लोग जान बूझकर सत्य से बेपरवाह रहना चाहते हैं.

वह समस्त पद्य एवं साहित्य रचनाओं को कपोल कल्पनाएँ मानते हुए सत्य से इनके दूर दूर सम्बन्ध न होते हुए बात कहता हैं. फ्रांसिस बेकन के विचारों में लोग स्वयं सत्य को पसंद नहीं करते हैं. वह इसके तीन कारण भी गिनाता हैं प्रथम संसार में बिना मेहनत के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता, अतः इन्सान मेहनत करने से बचना चाहता हैं. दूसरा सच्चाई का पता चलने पर लोग एक सिमित दायरे में बंधकर रह जाते हैं. इस कारण वह सच्चाई से दूर रहकर अपनी स्वतन्त्रता का पूरा लुफ्त उठाना चाहते हैं.

बेकन के अनुसार सत्य एक उज्ज्वल दिन की तरह होता हैं, जो सच्चाई के दर्शन करवाता हैं. वह स्वयं के प्रदर्शन के लिए किसी झूठ या प्रपंच का सहारा न लेकर स्वतः स्पष्ट हो जाता हैं.

summary of Francis Bacon’s Of Studies

बेकन ने 1500 के दशक के अंत में 1600 के दशक के शुरू में निबंधों की एक श्रृंखला लिखी थी. उन निबंधों में से एक को “Of Studies” कहा जाता था। इस निबंध में बेकन ने शिक्षा और सीखने के अपने चित्रण को बताया। उन्होंने कहा कि, “अध्ययन आनंद के लिए , आभूषण के लिए और क्षमता के लिए सेवा करता है ।”

बेकन को लगा कि कुछ लोग शुद्ध आनंद के लिए ज्ञान प्राप्त करते हैं । लोग, जो आनंद के लिए ज्ञान प्राप्त करते हैं, ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि वे इसका आनंद लेते हैं। उदाहरण के लिए, जो लोग खेल अभ्यास करते हैं और अपने खेल के बारे में सीखते हैं क्योंकि वे चाहते हैं, क्योंकि वे नहीं चाहते हैं।

हालांकि, कुछ लोग हैं, जो मात्र आभूषण के लिए ज्ञान प्राप्त करते हैं । ये लोग केवल दूसरों की नजरों में खुद को सुधारना चाहते हैं। वे वे हैं जो दूसरों के साथ बातचीत में अपनी उपलब्धियों और उपलब्धियों के बारे में डींग मारकर खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

फिर ऐसे लोग हैं जो क्षमता के लिए ज्ञान प्राप्त करते हैं। वे दिखाना चाहते हैं कि वे कुछ करने में सक्षम हैं। वे अपने खाली समय में खुद के लिए सीखते हैं। व्यवसाय के क्षेत्र में योग्यता का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, जो उन लोगों के बजाय अच्छी तरह से शिक्षित होते हैं जो बेहतर तरीके से एक कंपनी नहीं चलाते हैं।

बेकन ने यह भी कहा कि “पढ़ाई में बहुत अधिक समय बिताना आलस्य (आलस्य) है; आभूषण के लिए उन्हें बहुत अधिक उपयोग करने के लिए, प्रभाव है; उनके नियमों से पूरी तरह निर्णय लेना, एक विद्वान का हास्य है ”।

सर फ्रांसिस बेकन का निबंध “स्टडीज” अध्ययन के लाभों पर चर्चा करता है। इसका उद्देश्य हमें अध्ययन करने के लिए प्रेरित करना है और साथ ही हमें यह भी निर्देश देना है कि यदि हम जो पढ़ते हैं उसका सबसे अच्छा बनाने के लिए कैसे अध्ययन करें । अपने तर्कों को साबित करने के लिए वह कई बयानबाजी के उपकरणों और सिद्धांतों का उपयोग करता है।

सर फ्रांसिस अध्ययन के लिए किसी विषय को सीखने और समझने के लिए दिमाग लगा रहा है, विशेष रूप से पढ़ने के माध्यम से, जिसके लिए वह ज्यादातर संदर्भित करता है। अपने लघु निबंध में, वह हमें अध्ययन करने के लिए राजी करने का प्रयास करता है, और हमें बताता है कि यदि हम जो पढ़ते हैं, उसे सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए हमें अध्ययन कैसे करना है।

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बेकन ने महसूस किया कि तीन प्रकार के पुरुष हैं: “चालाक पुरुष चिंतन करते हैं (अवमानना ​​के साथ व्यवहार करते हैं), सरल पुरुष उनकी प्रशंसा करते हैं, और बुद्धिमान पुरुष उनका उपयोग करते हैं।”

शिक्षा पर बेकन के विचार

  • पढ़ाई में अत्यधिक समय खर्च करके शिक्षा को चरम पर ले जाया जा सकता है। समझदार पुरुष वे होते हैं जो पढ़े-लिखे होते हैं और अपने जीवन में जो सीखते हैं उसे लागू करते हैं। सरल पुरुष वे हैं जो अशिक्षित हैं, लेकिन जो लोग हैं उनके लिए एक उच्च संबंध है। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से सफलता हासिल करने वालों को पीछे छोड़ दिया.
  • शिक्षा वास्तविक दुनिया के लिए तैयारी करने के लिए होती है:
  • उदाहरण के लिए, पुस्तक पढ़ने के अलावा, लोगों को क्लिफ के नोट्स पढ़ने या फिल्म देखने की आवश्यकता हो सकती है। अक्सर किताबों के कुछ हिस्सों की तुलना में अधिक लोग होंगे जो कुछ लोगों को समझ सकते हैं। इन पुस्तकों को अंकित मूल्य पर पढ़ा जाता है और उनके बिंदुओं पर अक्सर सवाल नहीं उठाया जाता है।
  • बेकन को लगता है कि लोगों को पर्याप्त रूप से शिक्षित निर्णय लेना चाहिए कि कौन सी पुस्तकों में जानकारी है जो उन्हें अपने जीवन के अनुभवों में लाभान्वित करेगी।
  • लोग सब कुछ वे पढ़ने पर भरोसा नहीं करना चाहिए, वे अपने स्वयं के अनुभवों के माध्यम से जानकारी फिल्टर चाहिए सूचना हमेशा नहीं हो सकता। सच है, लोगों को सवाल पूछने और यह तय करने की आवश्यकता है कि क्या उनका स्रोत विश्वसनीय है।
  • सर फ्रांसिस बेकन ने हमें यह साबित करने का प्रयास किया कि “पढ़ाई आनंद के लिए, आभूषण के लिए और प्रवचन के लिए” हमें दिखाती है कि शिक्षा का उपयोग कैसे किया जाता है और हमारे जीवन में इसका उपयोग किया जा सकता है

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दोस्तों उम्मीद करता हूँ Of Studies By Francis Bacon In Hindi का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. फ्रांसिस बेकन के Of Studies निबंध का सार और निष्कर्ष यहाँ हिंदी भाषा में बताया गया हैं.

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