ईंधन संरक्षण पर निबंध Save Fuel Essay In Hindi

नमस्कार आज हम ईंधन संरक्षण पर निबंध Short Save Fuel Essay In Hindi Language पढ़ेगे. हमारे दैनिक जीवन में ईंधन की महत्वपूर्ण भूमिका हैं. सिमित मात्रा में उपलब्ध होने के कारण ईंधन की बचत/ संरक्षण (Fuel Conservation) न केवल भावी पीढ़ी के लिए संसाधन बचाएगा बल्कि यह हमारे पर्यावरण और स्वास्थ्य (environment and health) के लिए भी जरुरी हैं.

ईंधन संरक्षण पर निबंध Save Fuel Essay In Hindi

ईंधन संरक्षण पर निबंध Save Fuel Essay In Hindi

आज के ईंधन संरक्षण निबंध को 10 लाइन, 100,200, 250, 500 और 700 शब्दों में यहाँ कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 वीं क्लास के स्टूडेंट्स के लिए ईंधन बचाओ के इन निबंध में उक्त बिन्दुओं को शामिल किया गया हैं.

  1. क्या हैं ईंधन संरक्षण
  2. अर्थ परिभाषा व आकंडे
  3. ईंधन संरक्षण की आवश्यकता व महत्व
  4. उपाय और प्रयास
  5. पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए
  6. निष्कर्ष

ईंधन संरक्षण पर दस वाक्य Ten Sentences On Fuel Conservation In Hindi

  1. ईंधन एक प्राकृतिक संसाधन है जो सिमित मात्रा में पृथ्वी पर उपलब्ध हैं.
  2. कोयला, लकड़ी, तेल, पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस मुख्य ईंधन के स्त्रोत हैं.
  3. हम अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ईंधन का उपयोग करते हैं.
  4. इसको जलाने, वाहनों में उपयोग करने से पर्यावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती हैं.
  5. जीवाश्म ईंधन के अतिशय दोहन के कारण ओजोन परत में निरंतर क्षय जारी हैं.
  6. वायु प्रदूषण की समस्या में सर्वाधिक योगदान जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाले धुंए का हैं.
  7. प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए ईंधन की बचत बेहद जरूरी हैं.
  8. इसके दुरूपयोग को कम नहीं किया गया तो मनुष्य फिर से पाषाणयुग में पहुच जाएगा.
  9. हमारे विकास में ईंधन की महत्ती भूमिका हैं.
  10. व्यक्तिगत स्तर पर छोटे छोटे प्रयासों की मदद से ईंधन की बचत की जा सकती हैं.

ईंधन संरक्षण निबंध 1 Short Essay Save Fuel In Hindi In 250 Words

प्रस्तावना

प्रकृति ने मानव को ढेरों वस्तुएं तोफ्हे में दी हैं, सभी ग्रहों में से सुंदर हमारी पृथ्वी को बनाया. धरती पर हमारा जीवन एक दूसरे जीवों और वस्तुओं पर आधारित हैं. उन्ही में से एक हैं ईंधन. हमारी ऊर्जा की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति ईंधन के द्वारा ही होती हैं.

जीवित रहने तथा गति करने के लिए हमें भोजन की जरूरत पड़ती हैं जो ईंधन की मदद से ही पकाया जाता हैं. हमारे जीवन को आसान और सुखी बनाने वाले सभी साधन और यंत्र इसी से संचालित होते हैं.

अगर यूँ कहे जीवन की गति का आधार ऊर्जा हैं और यह हमें प्राकृतिक ईंधन के जरिये मिलती हैं तो अधिक सार्थक होगा. जिस तरह हमारे शरीर को भोजन गति देता हैं उसी तरह हमारे समाज, देश और सभ्यता को चलाने में ईंधन उपयोगी हैं.

ईंधन का अर्थ

सरल भाषा में ईंधन अथवा फ्यूल वे मेटेरियल हैं जो हमें ऊर्जा प्रदान करते हैं. उसी ऊर्जा से हमें गति और शक्ति मिलती हैं. आज के समय के प्रमुख ईंधन के स्रोत कोयला, लकड़ी, तेल या गैस हैं जिनको जलाने से ऊष्मा प्राप्त होती हैं.

अन्य प्रकार के गैसीय ईंधनो में मेथनॉल, गैसोलीन, डीजल, प्रोपेन, प्राकृतिक गैस, हाइड्रोजन और प्लूटोनियम शामिल हैं. एक स्थान से दुसरे स्थान की यात्रा में ऊर्जा की खपत को प्रतिकिलोमीटर लीटर की क्षमता में मापा जाता हैं.

विगत चार दशकों में विद्युत् और विद्युत् जनित उपकरणों में भारी बढ़ोतरी हुई हैं जिससे ईंधन की खपत में इजाफा हुआ हैं. ईंधन की अधिक खपत हमारी सेहत और स्वच्छ वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं.

निष्कर्ष/ उपसंहार

जिस गति से आबादी बढ़ रही हैं उसी अनुपात में तेजी से ईंधन की मांग भी बढ़ती जा रही हैं. बढ़ती मांग के फलस्वरूप इसके दोहन की तीव्र गति वैश्विक चिंता का विषय हैं.

ईंधन के नवीन स्रोतों जैसे सौर ऊर्जा आदि विकल्पों पर अधिक काम कर उन्नत बनाएं जाने की जरूरत हैं. अन्यथा जिस गति से पेट्रोल डीजल और गैस का दुरूपयोग हो रहा हैं, वो दिन भी दूर नहीं हैं जब ईंधन के ये भंडार पूरी तरह से खत्म हो जाएगे.

ईंधन सरंक्षण निबंध 2 ( 300 words ) Essay On Save Fuel For Better Environment And Health In Hindi

हमारे रोजमर्रा के जीवन में ईंधन के साधनों का प्रत्यक्ष रूप में उपयोग होता हैं. वे संसाधन जो वाहनों, भोजन पकाने अथवा कल कारखानों को चलाने के लिए ऊर्जा के विकल्प के रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं ईंधन के अंतर्गत आते हैं.

जीवाश्म ईंधन एक प्राकृतिक संसाधन हैं इनके निर्माण की प्रक्रिया में लाखों वर्ष लगते हैं. लाखों वर्ष पूर्व मृत इंसान पेड़ पौधे और वनस्पति के दबने गलने और सड़ने के बाद जीवाश्म ईंधन बनता हैं.

पेट्रोलियम और कोयला मुख्य जीवाश्म ईंधन हैं. हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र (भोजन पकाने, बिजली, विद्युत् उपकरण चलाने, वाहन चालन, वस्तुओं को बनाने वाले कल कारखाने में) इन संसाधनों का उपयोग किया जाता हैं.

जीवाश्म ईंधन को दोबारा उपयोग में नहीं लाया जा सकता हैं. इनके सिमित भंडार उपलब्ध होने के कारण उपयोग को सोच समझकर किये जाने की जरूरत हैं.

बेहतर पर्यावरण के लिए ईंधन संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं. सामूहिक चेतना के जरिये जीवन में छोटे छोटे तरीके अपना कर फ्यूल की खपत को सिमित किया जा सकता हैं.

अपने दैनिक जीवन में व्यक्तिगत दुपहिया अथवा चौपहिया वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देकर, घर में चूल्हे और विद्युत् के दुरूपयोग को रोककर ईंधन के सदुपयोग के जरिये इनके संरक्षण में अहम योगदान दे सकते हैं.

विद्युतीय निर्भरता को कम करके इसके वैकल्पिक स्रोत सौर ऊर्जा, बायो गैस आदि को बढ़ावा देकर कोयले की खपत कम की जा सकती हैं. साथ ही वैश्विक समुदाय को न खत्म होने वाले और बार बार प्रयोग किये जा सकने वाले ऊर्जा के स्रोतों के विषयों में अधिक रिसर्च और उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

विभिन्न स्तरों पर सरकारे भी कानूनों का निर्माण करके या प्रतिबंधों को लगाकर ईंधन संरक्षण की दिशा में काम कर सकती हैं. जीवाश्म ईंधन पर अधिक टैक्स लगाकर इनके उपयोग को हतोत्साहित कर सौर, पवन और बायोगैस पर सब्सिडी और अन्य उपायों को अपनाकर बढ़ावा दे सकती हैं.

ईंधन की बचत समय की मांग है इस विषय पर निबंध Essay On Save Fuel For Better Environment And Health In 700 Words In Hindi

प्रस्तावना:

मानव और प्रकृति के बीच घनिष्ठ रिश्ता हैं. प्रकृति हमें भिन्न भिन्न प्रकार की वस्तुएं देती हैं, जिनका उपयोग हम अपने जीवन को अधिक आरामदायक बनाने के लिए करते हैं.

प्रकृति से हमें भोजन, फल, फूल, स्वच्छ वायु, जल और ऊर्जा मिलती हैं. ऊर्जा का बड़ा प्राकृतिक स्रोत जीवाश्म ईंधन हैं. जिनका उपयोग हम अपने दैनिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में करते हैं.

जीवाश्म ईंधन क्या हैं?

लाखों वर्षों की जटिल प्रक्रिया से जीवाश्म ईंधन हमारी धरती की सतह में बनता हैं. ये अनवीकरणीय और गैर अक्षय ऊर्जा के बड़े स्रोत हैं. सदियों पूर्व पृथ्वी पर हुए महाप्रलय के दौरान जीव जन्तुओं और वनस्पति के दबने से जीवाश्म ईंधन का निर्माण हुआ.

मूल रूप से तीन प्रकार के जीवाश्म ईंधन हैं, पहला ठोस जीवाश्म जिसके अंतर्गत कोयला आता हैं. इसका उपयोग बिजली बनाने में तथा प्राचीन समय में ईंजन चलाने में किया जाता था. दूसरे प्रकार के द्रवीय ईंधन जिनमें पेट्रोल और डीजल शामिल हैं.

इनसे वाहन आदि चलते हैं. तीसरा ईंधन प्राकृतिक गैस हैं, इसमें एलपीजी, सीएनजी और अन्य उपयोगी गैस शामिल हैं. इनका उपयोग वाहनों और घर में चूल्हा जलाने में प्रयुक्त किया जाता हैं. इन स्रोतों की मदद से हम अपने जीवन की आवश्यकताओं को पूरा कर पाते हैं.

इन स्रोतों के विषय में चिंता का तथ्य यह है कि ये सिमित मात्रा में उपलब्ध हैं तथा इनकी मांग आए दिन बढ़ती ही जा रही हैं. इस कारण इनकी कीमते भी बढ़ती जाती हैं. इनके बनने की प्रक्रिया इतनी धीमी है जिससे उपलब्ध भंडार समाप्त हो जाने की स्थिति पुनः निर्माण सम्भव नहीं हैं.

ऊर्जा के इन स्रोतों को जलाने से कार्बनडाई ऑक्साइड के उत्सर्जन से पर्यावरण में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता हैं. ग्लोबल वार्मिंग जीवाश्म ईंधन के अधिकाधिक प्रयोग का नतीजा हैं. चीन, सऊदी अरब, अमेरिका, रूस, कनाडा और इंडोनेशिया इन देशों द्वारा सर्वाधिक मात्रा में जीवाश्म ईंधन का उत्पादन किया जा रहा हैं.

हमारे दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले ईंधन

हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कई प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल अपनी ऊर्जा की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं, इनमें से कुछ का विवरण इस प्रकार हैं.

पेट्रोल/डीजल/सीएनजी

ये नेचुरल गैस से प्राप्त होने वाला सेकेंडरी फ्यूल हैं. इनके निर्माण उत्पादन और परिशोधन की एक जटिल प्रक्रिया है तथा मांग बहुत अधिक हैं, जिसके चलते इसकी लागत अधिक आती है और काफी महंगे उपलब्ध होते हैं.

हम अपने दैनिक जीवन में कार, ​​बस, स्कूटर या बाइक का उपयोग अमूमन करते हैं. इन साधनों में पेट्रोल, डीजल या सीएनजी प्रयुक्त होती हैं, इनके जलने से वायु प्रदूषण बढ़ता है.

रसोई गैस/ एलपीजी

हमारे घर की रसोई में खाना पकाने के लिए प्रयुक्त तरलीकृत पेट्रोलियम गैस अथवा एलपीजी प्राकृतिक गैस का अंग हैं. खाना पकाने के अलावा पानी गर्म करने और कई अन्य घरेलू उपयोग शामिल हैं. यह गैस ठोस और तरल ईंधनों की तुलना में कम प्रदूषण और अधिक मात्रा में ऊर्जा प्रदान करती हैं.

भारत में ईंधन का उत्पादन

ईंधन के उत्पादन से आशय उसका भूतल से खनन और परिशोधन हैं. भारत में बड़े स्तर पर फ्यूल के लिए उत्खनन का कार्य किया जा रहा हैं. कई प्रकार के फ्यूल भंडार अपार मात्रा में हमारे देश में हैं जिनका हम निर्यात करते है, जबकि कुछ बेहद अल्प मात्रा में हैं जिनका आयात करना पड़ता हैं.

असम का डिगबोई, पश्चिम भारत में बाड़मेर और तटीय क्षेत्र भारत के प्रमुख तेल भंडार क्षेत्र हैं. असम में खनिज तेल के साथ साथ नेचुरल गैस के अथाह भंडार हैं.

गुजरात के कई क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस उपलब्ध हैं. कच्चे पेट्रोलियम और गैस के भंडार वाले प्रमुख राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, नागालैंड, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा शामिल हैं.

ईंधन का उपयोग

हमारे दैनिक जीवन में कोयला, प्राकृतिक तेल व गैस इन तीन नेचुरल फ्यूल का उपयोग सबसे ज्यादा हैं. जिस गति से आबादी बढ़ रही है इसकी मांग में उत्तरोतर वृद्धि ही देखी जा रही है जबकि इसके भंडार सिमित ही हैं.

अगर इसी रफ्तार से इनका दोहन जारी रहा तो निश्चय ही एक दिन ये खत्म हो जाएगे. ईंधन के बिना हमारा जीवन कैसा होगा, यह कल्पना करना भी दुष्कर हैं.

पेट्रोल और डिजल

एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा या माल के परिवहन के लिए हमें पेट्रोल और डीजल की खपत करनी पडती हैं. अधिकतर वाहनों में इन्हें प्रयुक्त किया जाता हैं. धीरे धीरे सीएनजी चालित वाहन भी बढ़ रहे हैं. जो पेट्रोल और डीजल के मुकाबले कम प्रदूषक हैं.

तेजी से बढ़ रही वाहनों की संख्या और उनसे निकलने वाले धुंए का नकारात्मक प्रभाव ग्रीन हाउस के रूप में प्रकृति को भुगतना पड़ रहा हैं. वैश्विक तापमान में वृद्धि, वायु की गुणवत्ता में कमी और ओजोन परत के क्षय के जिम्मेवार ये फ्यूल ही हैं.

ईंधन संरक्षण

बेहतर पर्यावरण और सुखद भविष्य के लिए हमें फ्यूल की बचत करनी चाहिए. इसे बचाकर व कम उपयोग करके हम सिमित भंडारों को संरक्षित कर सकते हैं.

विकास में फ्यूल की अहम भूमिका होती हैं, अर्थतन्त्र के समुचित चालन में ये बड़ी भूमिका निभाते हैं. अतः व्यक्तिगत स्तर पर हमें इनके संरक्षण की दिशा में कदम उठाने चाहिए.

यह भी पढ़े

उम्मीद करता हूँ दोस्तों ईंधन संरक्षण पर निबंध Save Fuel Essay In Hindi का यह निबंध आपको पसंद आया होगा. यदि आपको बेहतर पर्यावरण के लिए ईंधन संरक्षण जरूरी पर दिया निबंध पसंद आया हो तो अपने फ्रेड्स के साथ इसे जरुर शेयर करें.

अपने विचार यहाँ लिखे