जल संरक्षण पर निबंध Save Water Essay In Hindi

जल संरक्षण पर निबंध Save Water Essay In Hindi स्रष्टि के पंचभौतिक पदार्थो में जल का सर्वाधिक महत्व है. और यही जीवन का आधार है. इस धरती पर जल संरक्षण के कारण ही पेड़-पौधों, बाग-बगीचों आदि के साथ प्राणियों का जीवन सुरक्षित है. जीवन संरक्षण का मूल तत्वहोने से कहा गया है ‘ जल है तो जीवन है’ या ‘जल ही अमृत है’ धरती पर जलाभाव की समस्या उतरोतर बढ़ रही है. अतएवं धरती पर जल संरक्षण का महत्व मानकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने सनः 1992 में विश्व जल दिवस मनाने की घोषणा की, जो प्रतिवर्ष 22 मार्च के दिन मनाया जाता है.

Save Water Essay In Hindi जल संरक्षण पर निबंध

जल संरक्षण पर निबंध Save Water Essay In Hindi

जल चेतना हमारा दायित्व- Save Water Save Life Essay

हमारी प्राचीन संस्कृति में जल वर्षण उचित समय पर चाहने के लिए वर्षा के देवता इंद्र और जल देवता वरुण का पूजन किया जाता था. इसी प्रकार हिमालय के साथ गंगा, यमुना, सरस्वती आदि नदियों का स्तुवन किया जाता था. फलस्वरूप धरती पर जल संकट नही था.

प्राचीन एतिहासिक साक्ष्यो से विदित होता है कि हमारे राजा तथा समाजसेवी श्रेष्टिवर्ग पेयजल हेतु कुओ, तालाबों, पोखरों आदि का निर्माण कर पर्याप्त धन व्यय करते थे. वे जल संचय का महत्व जानते थे.

किन्तु वर्तमान काल में मानव की स्वार्थी प्रवृति, भौतिकवादी चिंतन एवं अनास्थावादी द्रष्टिकोण के कारण उपलब्ध जल का ऐसा विदोहन किया जा रहा है.

जिससे अनेक क्षेत्रों में अब पेयजल का संकट पैदा हो गया है. इसलिए हमारा दायित्व है कि हम जल को जीवन रक्षक तत्व के रूप में संरक्षण प्रदान करे और न केवल वर्तमान को आपितु भविष्य को भी निरापद बनावे.

जल संकट का प्रभाव (Water Conservation In Hindi)

हमारे देश में औद्योगीकरण, शहरीकरण और खनिज संपदा का बड़ी मात्रा में विदोहन, भूजल का अतिशय दोहन तथा कल कारखानों के विषैले रासायनिक अपशिष्टों का उत्सर्जन होने से जल संकट (Water Crisis) निरंतर बढ़ रहा है. इससे न तो खेती बाड़ी के लिए पर्याप्त पानी मिल रहा है. और न ही पेयजल की उचित आपूर्ति हो रही है.

जल संकट के कारण पुराने तालाब, सरोवर, एवं कुँए सूख रहे है. नदियों का जल स्तर घट रहा है और जमीन के अंदर का जल स्तर भी लगातार कम हो रहा है.

इस तरह जल संकट के कारण अनेक जीव जंतुओ एवं पादपों का अस्तित्व मिट गया है. खेतों की उपज घट रही है. और वनभूमि सूख रही है.धरती का तापमान निरंतर बढ़ रहा है. इस तरह जलसंकट के भयानक दुष्प्रभाव सामने आ रहे है.

जल संरक्षण के उपाय (Ways To Conserve Water)

जिन कारणों से जल संकट बढ़ रहा है, उनका निवारण करने से यह समस्या कुछ हल हो सकती है.इसके लिए भूगर्भीय जल का विदोहन रोका जावे और खानों खदानों पर नियंत्रण रखा जावे. वर्षा के जल का संचय कर भूगर्भ में डाला जावे. बरसाती नालों पर बाँध या एनिकट बनाए जावे.

तालाबों पोखरों कुओं को अधिक गहरा व चौड़ा किया जावे और बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने का प्रयास किया जावे. जल चेतना में जल संरक्षण के प्रति जागृति लायी जावे. इस तरह के उपायों से जल संकट का समाधान हो सकता है.

उपसंहार (save water essay)

जल को जीवन का आधार मानकर समाज में नई जागृति लाने का प्रयास किया जावे. अमृत जलम जैसे जनजागरण किये जावे. इससे जनचेतना की जागृति लाने से जल संचय एवं जल संरक्षण की भावना का प्रसार होगा तथा इससे धरती का जीवन सुरक्षित रहेगा.

save water essay in hindi wikipedia & जल संकट व जल संरक्षण पर निबंध

जल एक एक नाम जीवन भी हैं. सचमुच इस भूमंडल पर जल ही जीवन का आधार हैं. जल नही तो जीवन भी नही. प्रकृति ने मानव को भूमि वायु, प्रकाश आदि भी भांति जल भी बड़ी उदारता से प्रदान किया हैं. लेकिन मनुष्य ने अपनी मुर्खता और स्वार्थ के कारण प्रकृति के इस वरदान को भी दूषित और दुर्लभ बना दिया हैं.

जल संरक्षण का अर्थ- जल संरक्षण का तात्पर्य हैं जल का अपव्यय रोकना और वर्षा के समय बह जाने वाले जल को भविष्य के लिए सुरक्षित कर रखना. बताया जाता है कि धरती की तीन चौथाई भाग जल से ढका हुआ हैं.

किन्तु पीने योग्य या उपयोगी जल बहुत ही सिमित हैं. हम प्रायः धरती के भीतर स्थित जल को उपयोग में लाते हैं. कुँए हैंडपंप नलकूप, सबसिम्बिल पम्प आदि से यह जल प्राप्त होता हैं.

धरती के ऊपर नदी तालाब झील झरने आदि का जल उपयोग में आता हैं. किन्तु प्रदूषण के चलते ये जल स्रोत अनुपयोगी होते जा रहे हैं. धरती के भीतर उपस्थित जल को अंधाधुंध खिचाई के कारण जल का स्तर निरंतर नीचे जा रहा हैं. यह भविष्य में जल के घोर संकट का संकेत हैं. अतः जल का संरक्षण करना अनिवार्य हो गया हैं.

राजस्थान में जल संरक्षण- राजस्थान में धरती के अंदर जल का स्तर निरंतर गिर रहा हैं. भू गर्भ के जल का यहाँ जल संरक्षण बहुत जरुरी हैं. संतुलन वर्षा के जल से होता हैं.

जो राजस्थान में अत्यंत कम होती हैं. अतः धरती का पानी वापस नही मिल पाता, अब जल संरक्षण की चेतना जागृत हो रही हैं. लोग परम्परागत रीतियों से जल का भंडारण कर रहे हैं,.

सरकार भी इस दिशा में कार्य कर रही हैं. खेत में जल की बर्बादी रोकने के लिए सिंचाई की फव्वारा पद्धति पाइप लाइन से आपूर्ति, हौज पद्धति, खेत में ही तालाब बनाने आदि को अपनाया जा रहा हैं. मैग्सेस पुरस्कार प्राप्त श्री राजेन्द्र सिंह का तरुण भारत संघ तथा अन्य स्वयंसेवी संगठन भी सहयोग कर रहे हैं.

जल संरक्षण के अन्य उपाय- उपर्युक्त उपायों के अतिरिक्त जल संरक्षण के अन्य उपायों का अपनाया जाना भी परम आवश्यक हैं. शीतल पेय बनाने वाली कम्पनियां तथा बोतल बंद, जल बेचने वाले संस्थानों पर नियंत्रण किया जाना आवश्यक हैं.

वर्षा के जल को संग्रह करके रखने के लिए तालाब पोखर आदि अधिक से अधिक बनाये जाने चाहिए. नगरों में पानी का अपव्यय बहुत हो रहा हैं.

अतः जल के अपव्यय पर कठोर नियंत्रण हो तथा सबमसिबिल पम्प के साथ एक रिचार्ज बोरिंग अनिवार्य कर दी जानी चाहिए.

जल संरक्षण सभी का दायित्व- धरती के अंदर जल स्तर का गिरते जाना आने वाले जल संकट की चेतावनी हैं. भूमंडल का वातावरण गर्म हो रहा हैं. इससे नदियों के जन्म स्थल ग्लेशियर पिघल रहे हैं.

कही ऐसा न हो कि हमारी प्रसिद्ध नदियों के नाम ही मात्र शेष रह जाये. यदि जल संकट इसी तरह बढ़ता गया तो निकट भविष्य में यह संघर्ष का कारण बन सकता हैं.

कुछ विचारकों का कहना है कि अगर तीसरा विश्वयुद्ध हुआ तो वह जल पर अधिकार को लेकर होगा. अतः हम सभी का दायित्व हैं कि जल संरक्षण में तन मन और धन से योगदान देवे.

Save Water Essay In Hindi | जल संरक्षण पर निबंध

जल मनुष्य के लिए जीवन का प्रमुख साधन है. इसके बिना जीवन की कल्पना नही हो सकती, सभी प्राकृतिक वस्तुओं में जल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. राजस्थान का अधिक भाग मरुस्थल हैं. जहाँ जल नाम मात्र को भी नही हैं. इसी कारण यहाँ कभी कभी भीषण अकाल पड़ता हैं.

जल संकट के कारण- राजस्थान के पूर्वी भाग में चम्बल, दक्षिणी भाग में माही के अतिरिक्त कोई विशेष जल स्रोत नही हैं. जो जल की आवश्यकताओं को पूरा कर सके. पश्चिमी भाग तो पूरे रेतीले टीलों से भरा हुआ निर्जल परदेश हैं. जहाँ केवल इंदिरा गाँधी नहर ही एकमात्र आश्रय हैं. राजस्थान में जल संकट के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं.

भूगर्भ के जल का तीव्र गति से दोहन हो रहा हैं. इससे जल स्तर कम होता जा रहा हैं. पेयजल के स्रोतों का सिंचाई में उपयोग होने से जल संकट बढ़ता जा रहा हैं. उद्योगों में जलापूर्ति भी आम लोगों को संकट में डाल रही हैं.

पंजाब हरियाणा आदि पड़ोसी राज्यों का असहयोगात्मक रवैया भी राजस्थान में जल संकट का बड़ा कारण हैं. राजस्थान की प्राकृतिक संरचना ही ऐसी है कि वर्षा की कमी रहती हैं और यदि वर्षा हो भी जाए तो उसकी रेतीली जमीन में जल का संग्रह नही हो पाता.

जल संकट के निवारण के उपाय- राजस्थान में जल संकट के निवारण हेतु युद्ध स्तर पर प्रयास होने चाहिए अन्यथा यहाँ घोर संकट उपस्थित हो जाएगा. कुछ प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं.

भूगर्भ के जल का असीमित दोहन रोका जाना चाहिए. पेयजल के जो स्रोत है उनका सिंचाई हेतु उपयोग न किया जाए. मानव की मूलभूत आवश्यकता को पहले ध्यान में रखा जाए.

वर्षा के जल को रोकने हेतु छोटे बांधों का निर्माण किया जाए ताकि वर्षा का जल जमीन में प्रवेश करे और जल स्तर में वृद्धि हो. पंजाब हरियाणा, मध्यप्रदेश की सरकारों से मित्रतापूर्वक व्यवहार रखकर आवश्यक मात्रा में जल प्राप्त किया जाए.

उपसंहार- भारत में भूगर्भ जल का स्तर निरंतर गिर रहा हैं. देश के सर्वाधिक उपजाऊ प्रदेश इस संकट के शिकार हो रहे हैं. फिर राजस्थान जैसे मरूभूमि प्रधान प्रदेशों के भावी जल संकट की कल्पना ही सिहरा देने वाली हैं. अतः जल प्रबंधन हेतु शीघ्र सचेत और सक्रिय हो जाने में ही हमारा कल्याण निहित हैं.

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