चिटफंड कंपनी क्या है | What Is Chit Fund Company In Hindi

चिटफंड कंपनी क्या है What Is Chit Fund Company In Hindi: भारत में बचत बचत प्रवृति को बढ़ावा देने तथा ऋण उपलब्ध करवाने की दृष्टि से चिटफंड कम्पनियों की विशिष्ठ भूमिका है. वह कम्पनी को चिट योजना प्रबंधन, संचालन एवं निर्देशन करती है, चिटफंड कम्पनी कहलाती हैं. chit fund kya hai में हम चिटफंड कंपनी क्या है और कैसे काम करती है इसकी पूरी जानकारी प्राप्त करेगे.

चिटफंड कंपनी क्या है What Is Chit Fund Company In Hindi

चिटफंड कंपनी क्या है What Is Chit Fund Company In Hindi

चिटफंड भारत में चलने वाली विशेष बचत और ऋण योजना है. यह पारस्परिक लाभ की एक योजना है, इसके अंतर्गत योजना के सभी सदस्य एक अनुबंध का हिस्सा होते है जिसमें अपना निर्धारित अंश जमा करते है. इसमें कुल जमा राशि निविदा निकाल कर या नीलामी द्वारा योजना के किसी एक सदस्य को प्रदान कर दी जाती है.

निविदा या नीलामी में सभी सदस्य भाग लेते है तथा जो सदस्य सबसे ज्यादा बट्टा कटवाकर राशि लेने को तैयार हो उसे पुरस्कृत क्रेता घोषित किया जाता है.

यदि कोई भी सदस्य राशि लेने के लिए निविदा या नीलामी में भाग नहीं लेता है तो एक न्यूनतम राशि बट्टा काटकर लोटरी से चिट निकालकर विजेता का नाम तय किया जाता है. 

प्रत्येक माह एक सदस्य को विजेता के रूप में पुरस्कार राशि मिलती है. जो सदस्य योजना में एक बार विजेता हो जाता है या उसे निविदा या नीलामी में पुनः शामिल नहीं किया जाता है. अर्थात निविदा या नीलामी में योजना के गैर पुरस्कृत सदस्य ही भाग ले सकते है. बट्टे की राशि ही लाभांश होती है. 

जिसे सभी सदस्यों में समान रूप से बाट दिया जाता है. लाभांश की राशि को घटाकर अगली किश्त की राशि निर्धारित की जाती है. चिटफंड कंपनी योजना के संचालन, प्रबंधन एवं निर्देशन के लिए योजना के सदस्यों से अनुबंध में निर्धारित कमिशन प्राप्त करती है.

योजना में विजेता को भी चिटफंड योजना की निधारित अवधि में प्रत्येक माह अपनी किश्त जमा करवानी होती है. चिटफंड योजनाएं संगठित वित्तीय संस्थाओं के अतिरिक्त मित्रों एवं रिश्तेदारों आदि असंगठित समूहों द्वारा भी चलाई जाती है.

चिटफंड कम्पनी का अर्थ (meaning of chit fund company in hindi)

वह कम्पनी जो चिट योजना का प्रबंध, पालन व निर्देशन करती है, चिटफंड कंपनी कहलाती है. सरल शब्दों में कहे तो चिटफंड एक ऐसी स्कीम हैं जिसमें कुछ लोग मिलकर एक निश्चित समय में मिलकर धन की पूलिंग करते हैं. ये व्यवस्था कैसे काम करती हैं एक उदाहरण के जरिये समझने का प्रयास करते हैं.

अगर चार दोस्त या रिश्तेदार मिलकर 10-10 हजार रूपये जमा करते हैं तो हर माह चालीस हजार रूपये जमा होते हैं. अगर अब तीनों को ही एक ही महीने पैसे की जरूरत हो अथवा दोनों को हो तो बोली लगाई जाती हैं. जो सदस्य सबसे कम बोली लगाएगा माना सबसे कम बोली 25 हजार है तो उस सदस्य को पैसे दिए जाएगे.

फंड में शेष बचे 15 हजार रूपये सदस्यों के बीच नियत अवधि में वितरित कर दिए जाते हैं. अथवा उस धन को कही इन्वेस्ट कर दिया जाता हैं. छोटे शहरों और कस्बों में यह स्कीम बेहद लोकप्रिय हो रही हैं. बैंकों की तुलना में आसानी से कर्ज मिल जाता हैं.

चिटफंड कंपनी की भारत में उपयोगिता (chit fund company in india in hindi)

भारत में बचत की को बढ़ावा देने तथा लोगों को आसानी से ऋण उपलब्ध करवाने में चिटफंड कंपनियों का विशेष महत्व रहा है. चिटफंड भारत में चलने वाली विशेष बचत और ऋण की एक योजना है जो पारस्परिक लाभ प्रणाली पर आधारित है इसी कारण यह भारत में उपयोगी सिद्ध हो रही है.

हमारे देश में चिटफंड की सफलता बड़े पैमाने पर हैं. ये कम्पनियां एजेंट्स के माध्यम से सफल हो रही हैं. लोगों की अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच सम्पर्क के कारण आसानी से पैसे निवेश और कर्ज का विकल्प उपलब्ध हो जाता हैं.

कई बार शहरों में काम करने वाले एजेंट साल, महीने या दिनों में या मुनाफे का लालच देकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. शारदा चिटफंड जैसी कम्पनियां इस तरह के प्रचार के जरिये लाखों लोगों का नेटवर्क बनाने में सफल रही थी और बड़े घोटाले में तब्दील हो गई थी.

चिटफंड का इतिहास History of Chit Funds In Hindi

भारत में ही कुछ दशक पूर्व चिटफंड की अवधारणा ने जन्म लिया था. वर्तमान में विश्व भर में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी हैं. भारत के केरल राज्य के एक छोटे से गाँव के किसान परिवारों ने मिलकर एक अवधारणा को जन्म दिया जो चिटफंड कहलाई.

चिटफंड में किसानों का एक समूह अपने अनाज की एक निश्चित मात्रा एक चयनित ट्रस्टी को सुपर्द कर दिया करते थे, वह संस्था अपना एक हिस्सा रखने के पश्चात शेष अनाज को सदस्यों के मध्य एक नीलामी के द्वारा दे दिया जाता हैं.

स्थानीय भाषा में इस प्रणाली को मालाबार कुरी के नाम से जानते हैं जो प्राचीन द्रविड़ काल से विद्यमान हैं. यह प्रणाली काफी हद तक चीनी लोटरी से मिलती जुलती हैं. केरल में चिटफंड का इतिहास राजा राम वर्मा के समय से माना जाता हैं.

वर्तमान में भारत में करीब 15 हजार चिट फंड समूह या कम्पनियां कार्यरत हैं. केरल राज्य की अपनी एक सरकारी फंड कम्पनी भी हैं जिसे केरल राज्य वित्तीय उद्यम कम्पनी के नाम से जाना जाता हैं.

भारत में मुख्य रूप से शादी , संपत्ति और खरीदी, वाहन खरीदी, परिसंपत्तियों की खरीदी, उपभोक्ता अल्पजीवी वस्तुओं आदि के लिए निवेशक अपना पैसा लगाते हैं.

चिटफंड अमेंडमेंट बिल, 2019

चिटफंड अमेंडमेंट बिल, 2019 को ऐसे समय में लाया गया जब बड़ी संख्या में चिटफंड कम्पनियों के घोटाले उजागर होने लगे, सरकार ने चिटफंड स्कीम में अधिक पारदर्शिता लाने और इसमें निवेश करने वाले लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान किये हैं.

इससे पूर्व हमारे देश में चिट फंड एक्ट-1982 लागू था जिसकी परिभाषा के अनुसार कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति या समूह के साथ समझौता करे. उनके एग्रीमेंट में राशि, समय और समय समय पर क़िस्त जमा की जाए समय पूरा होने पर धन की नीलामी से जो लाभ हो सभी सदस्यों में बराबर बांटा जाए.

इन कानूनों के अनुसार रिश्तेदार या दोस्त मिलकर कोई चिटफंड ग्रुप चला सकते हैं. मगर लोगों ने इसे पब्लिक इन्वेस्टमेंट फील्ड में कम्पनी के रूप में चलाना शुरू कर दिया. खासकर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा में ऐसी हजारों कम्पनियां खुल गई.

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