बेरोजगारी पर कविता – नौकरी की चाह में

बेरोजगारी पर कविता – नौकरी की चाह में: क्या होती है बेरोजगारी (Unemployment), एक बेरोजगार युवक का दर्द क्या होता हैं. इस संक्षिप्त poem on unemployment in hindi यानि बेरोजगार पर कविता में समाज और नौकरी की धारणा व लोगों की सोच का छोटा सा विश्लेष्ण हैं. यकीकन इस samajik samasya का कोई सम्भव हल तो नही हो सकता मगर लोगों को एक बेरोजगार के प्रति संवेदना का भाव में रखना चाहिए. बेरोजगारी की पीड़ा इस कविता में पढिए.

बेरोजगारी पर कविता – नौकरी की चाह में

नौकरी की चाह में, हमने,
घर बार सब त्यागा हैं।
माँ कहती है घर जाने पर,
क्या तू रात भर जागा हैं।
साँप सीढ़ी चयन प्रक्रिया की,
कैसे माँ को समझाऊ।
किस सांप ने कांटा कहाँ गिरा मैं,
कैसे उनकों बतलाऊ मैं।।
माँ मुझे समझने की कोशिश करती,
समाज उन्हें भड़काता हैं।क्या पढ़ता है,
बच्चा तेरा जो,
हर बार फेल हो जाता है।
सम्मान उसी का होता है,
जो जल्दी कुछ बन जाता हैं।
नही तो प्यारे इसी समाज मे,
चपरासी को अफसर से तोला जाता हैं।
महत्वपूर्ण है नोकरी पाना,
कुछ भी बनके दिखलाओ
घर के ताने बाद में मिलेंगे

बेरोजगारी पर कविता

पहले समाज के तुम
सुनते जाओ
हाल चाल लेने को कोई गांव से
फोन नही करता।
असफल हो जाओ तो
कहते है
फोन का पैसा अब नही लगता।
कितना समय और लगेगा
इतना तो भाई बतलादो
रात रात भर खूब पढ़ों तुम,
चाहे दो रोटी कम खाओं.
ऐसा समाज हैं मेरा भाई,
सोच लो हमारा क्या होगा
ताने मार मार डालेगे,
केवल शरीर जिन्दा होगा

बेरोजगारी की समस्या पर कविता

होके ma, ba पास रखकर दो दिन का उपवास
एजुकेशन को लगा शॉक बेरोजगार ढूढे जॉब
और वोट बैंक के भूखे लोग, लगा रहे डिग्री का भोग
जवानी चबा रहे, उम्रः साथ में बड़ा रहे
35 से ऊपर लड़का, लड़की 30 से ऊपर ब्याह रहे
ऐसे हो रहा युवाओं का विकास
होके ma, ba पास…
देश की अर्थव्यवस्था एक बात कहे सच्ची
भिखारियों की हालत, बेरोजगारों से अच्छी
डिग्री नहीं है हाथ में कटोरा, चाहे छोरी हो या छोरा
सबके पास कटोरे जितना ज्ञान, सरकार ने दी नई पहचान
अब योग्यता को कटोरे से आस
होके ma, ba पास..
नौकरी मिले ना छोकरी, कर रहे डिग्री की चाकरी
छोकरी करे ना शादी, उम्रः हो गई उसकी भी आधी
बच्चे कह रहे दादी, ऐसे शादी रोक रुके आबादी
ऐसा सरकार का विश्वास
होके ma, ba पास

haasya kavita source

रोजगार की चाहत बेरोजगार की कविता

खाली कंधों पर थोड़ा सा भार चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब रोजगार चाहिए

जेब में पैसे नहीं हैं डिग्री लिए फिरता हूँ
दिनोदिन अपनी नजरों में गिरता हूँ.
कामयाबी के घर में खुले किवाड़ चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए

टेलेंट की कमी नहीं हैं भारत की सड़कों पर
दुनिया बदल देगे भरोसा करो इन लड़कों पर
लिखते लिखते मेरी कलम तक घिस गई
नौकरी की प्रक्रिया में अब सुधार चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए

दिन रात करके मेहनत बहुत करता हूँ
सुखी रोटी खाकर ही चैन से पेट भरता हूँ
भ्रष्टाचार से लोग खूब नौकरी पा रहे हैं
रिश्वत की कमाई खूब मजे से खा रहे है.
नौकरी पाने के लिए यहाँ जुगाड़ चाहिए
बेरोजगार हूँ साहब मुझे रोजगार चाहिए

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