आदिमानव का इतिहास | Aadimanav History In Hindi

आदिमानव का इतिहास Aadimanav History In Hindi मानव का इतिहास करीब चालीस हजार लाख साल पुराना हैं. जब हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति हुई तब से ही मानव यहाँ रहता आया हैं. हाल के के अनुसंधानों से यह जाहिर हो चूका है कि करोड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी अस्तित्व में आई तथा लगभग 40 हजार लाख वर्ष पहले आदिमानव का जन्म हुआ था.

आदिमानव का इतिहास Aadimanav History In Hindi

आज हम जिस समाज में रहते है, उसके परिवेश की हमे आदत पड़ जाती है. हम यह मान लेते है, दुनियाँ हमेशा से ऐसी ही रही होगी. हम यह भूल जाते है, कि जीवन हमेशा वैसा नही था, जैसा आज दिखता है.

क्या आदिमानव के समय की दुनिया कल्पना कर सकते है. जहाँ आग न हो, खेती-बाड़ी आविष्कार न हुआ हो?, आदिमानव का जीवन कैसा रहा होगा.

उस समय लोग यात्राएँ तो कर लेते थे. पर सड़के नही थी. यातायात के आधुनिक साधन नही थे. आदिमानव के समय के जीवन की परिस्थतियाँ की जानकारी प्राप्त करना ही हमारे अतीत को पहचानना है.

हमारे अतीत में जो ज्ञान के भंडार है, उसका पता हमें पुरातन सामग्री, शिलालेख आदि से पता चलता है. हमारे देश में विकसित नदी घाटी सभ्यताओं की जानकारी भी हमे वहां खुदाई से प्राप्त टूटे भवनों, सिक्कों, बर्तनों, धातु, के ओजार व ऐसी अनेकों वस्तुएं मिलती है. जिनका उपयोग आदि मानव किया करते थे.

हजारों वर्ष पूर्व अनेक प्राचीन नगर गाँव नष्ट हो गये अथवा उनके मकान धरती में समा गये.उनकी खुदाई में वे सभी चीजे निकली जो उनके काम आती थी.

यही चीजें इतिहास के स्रोत के रूप में जानी जाने लगी. मनुष्य के जन्म से लेकर लिपि के विकास तक का काल प्रागैतिहासिक काल अथवा पुरा ऐतिहासिक काल कहा जाता है.

वैज्ञानिकों का कहना है, कि करोड़ो वर्ष पूर्व पृथ्वी की उत्पत्ति हुई है, और मानव की उत्पत्ति लगभग 40 लाख वर्ष पूर्व हुई होगी. विश्व के अनेक स्थानों पर मानव की खोपड़ियाँ व हड्डियाँ प्राप्त हुई है. वे लग्भग डेढ़ लाख वर्ष पुरानी है. आज से दस हजार वर्ष पूर्व तक का काल पुरा ऐतिहासिक काल माना जाता है.

इस काल में आदि मानव झुण्ड बनाकर जंगलों में भोजन की तलाश में घूमता रहता था. जानवरों का शिकार करके खाना, गुफाओं में रहना, यही उनकी दिनचर्या  हुआ करती थी.

वह जंगली जानवरों के भय से गुफा के बाहर दरवाजे पर आग जलाकर अपनी रक्षा करता था. पत्थर से ही आग जलाता था. पत्थर के ही बर्तन एवं औजारों का उपयोग करता था. इसलिए आदिमानव काल को पाषण काल या प्रस्तर का काल भी कहते है.

इस काल में आदिमानव घुमक्कड़ जीवन बीताता था. वह छोटे छोटे समूहों में रहता था. समूह के नेता या मुखिया के साथ भोजन की तलाश में इधर उधर घूमता रहता था और जब एक स्थान पर भोजन समाप्त हो जाता तब वह दूसरे स्थान पर चला जाता था.

वह पत्थरों के छोटे छोटे टुकड़े काटकर पतली धार वाले हथियार, आरी, चाक़ू बनाकर उसका प्रयोग करने लगा. बड़े टुकड़ो से कुल्हाड़ी, हथौड़ी, वसूला आदि बनाकर लकड़ी काटने एवं अन्य उपयोग करने लगा. बाद में धीरे धीरे इन्ही पत्थरों के औजारों म लकड़ी का हत्था डालकर और अच्छी तरह से उपयोग करने लगा.

जैसे जैसे मानव को अपने आस-पास की वस्तुओं का ज्ञान होता गया, वैसे वैसे वह अपने लिए और सुविधाएं जुटाने लगा. प्रारम्भ में मनुष्य को कपड़े पहनने का ज्ञान नही था. वह पेड़ की छाल, बड़े बड़े पत्तों एवं जानवरों की खाल से ठंड के समय अपना बचाव करता था.

बाद में वह जानवरों को पालना, पौधे उगाना, अन्न पैदा करना आदि सीख गया, जिससे उसका घुमक्कड़ जीवन समाप्त हो गया और एक स्थान पर झौपड़ी बनाकर रहने लगा और खेती करने लगा. उसने कुत्तें, बकरी, भेड़ आदि जानवरों को पालतू बना दिया और उनसे अपने कार्य में सहयोग लेने लगा.

धीरे धीरे मानव ने धातु की खोज की. पहले तांबा बाद में जस्ता फिर सीसा खोजा गया. कुछ स्थानों पर तांबे की कुल्हाड़ियाँ मिलने से पता चला है, कि पत्थर के बाद मनुष्य ने सर्वप्रथम तांबे धातु की खोज की.

स्थायी जीवन जीते हुए उसने पेड़ के मोटे तने को लुढ़कते हुए देखकर पहिया बनाना सीखा, जिससे गाड़ी बनाकर उपयोग करने लगा. पत्थर की चाक बनाकर मिट्टी के बर्तन बनाने लगा.

गेहूं, जौ और कपास की खेती करना, झौपड़ी बनाकर रहना, जानवर पालना आदि कार्य सीखकर वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने लगा.

जैसे जैसे मानव समझदार होने लगा, वैसे वैसे प्रकृति की उपासना, कपड़े बुनना आदि कार्य करने लगा. इस प्रकार पूर्व पाषाण काल से ताम्रकाल तक आते आते मानव विकास क्रम में आदिमानव का रहन सहन आदि पूर्व अवस्था से काफी आगे बढ़ गया.

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