तनाव प्रबंधन क्या है अर्थ उपाय व टिप्स | Stress Management In Hindi

तनाव प्रबंधन क्या है अर्थ उपाय टिप्स Stress Management In Hindi: नमस्कार दोस्तों तनाव प्रबंधन लेख के माध्यम  से हम जानेंगे तनाव प्रबंधन क्या है। तनाव का अर्थ, परिभाषा ,कारण ,प्रकार तथा इसके परिणामों को जानने के साथ यह भी जानेंगे कि तनाव प्रबंधन की आवश्यकता क्यों हैं। तनाव का प्रबंधन कैसे करें अथवा  तनाव प्रबंधन की तकनीकों को जानेंगे

तनाव प्रबंधन क्या है अर्थ उपाय व टिप्स | Stress Management In Hindi

प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से तनाव से ग्रसित रहता है इसे डिप्रेशन तथा अवसाद की स्थिति भी कहा जाता है वर्तमान के दौर में तनाव कोई बड़ी बात नहीं है। क्योंकि हमारी जीवन शैली भागदौड़ वाली दुनिया में अंधाधुंध विकास के नाम पर येन केन प्रकारेण अचानक अमीर बनने तथा दुनिया को अपनी तरह से चलाने की प्रवृत्ति ने इसे आम बना दिया है।

इस दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के तनाव से ग्रसित है हालांकि इनके तनाव की वजह एकसमान नहीं है कोई अपने बिजनेस को लेकर परेशान हैं तो कोई फ्यूचर को लेकर किसी को दूसरों के व्यवहार से तो कोई अपने अनुसार सब कुछ ना होने की वजह से तो कोई अपने साथ हो रहे भेदभाव अथवा अत्याचार और इन सब के साथ भौतिकवादी जीवन व तकनीकी प्रगति ने तनावपूर्ण वातावरण बनाने में अपनी भूमिका निभाई है।

तनाव का अर्थ व परिभाषा (Stress Management Meaning In Hindi)

जीव के प्रमुख  लक्षणों में डर तथा सुरक्षा प्रमुख है तनाव भय तथा डर के बीच का विभेद है अर्थात हम दुनिया में उपस्थित प्रत्येक प्रकार के भय तथा उससे सुरक्षा के मध्य तालमेल स्थापित करने में विफल होते हैं तब तनाव उत्पन्न होता है.

इस प्रकार असुरक्षित मनुष्य सुरक्षित होने के लिए सदैव तत्पर रहता है, बेताब रहता है और यही मनोस्थिति तनाव है और  हमारा जटिल जीवन, सामाजिक ,राजनीतिक तथा प्रशासनिक व्यवस्था संतुलन स्थापित करने में नाकामयाब रहती है वह स्थिति तनाव कहलाती है।

हेंस-शैले ” तनाव शब्द शारीरिक तथा वैज्ञानिक आधार पर किसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए हार्मोन की प्रतिक्रिया है इन्होंने तनाव के दो प्रकार बताएं।

यूस्ट्रेस जो इच्छित तनाव है तथा यह खतरनाक नहीं होता बल्कि आवश्यक होता है।  जो व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रखता है। दूसरा डिस्ट्रेस जो अनैच्छिक  होता है। तथा इस पर व्यक्ति नियंत्रण नहीं रख सकता और कई परेशानियां खड़ी करता है इसे नेगेटिव स्ट्रेस भी कहा जा सकता है।

बीहर व न्यूमैन-” व्यक्ति तथा उसके कार्यों के पारस्परिक  असामंजस्य तथा कार्य के वातावरण से  उत्पन्न होता है। इस प्रकार तनाव किसी व्यक्ति की मानसिक व शारीरिक दशा है जो उसके वातावरण से तैयार होती है।

तनाव की विशेषताएं (Characteristics Of Stress In Hindi)

  1. तनाव व्यक्ति की मानसिक स्थिति का प्रकटीकरण है।
  2. तनाव बाह्य वातावरण का प्रत्युत्तर है।
  3. तनाव सदैव हानिकारक नहीं होता।
  4. तनाव का प्रभाव स्वयं  के साथ व्यक्तियों पर ही पड़ता है।
  5. यह चिंता से अलग है क्योंकि यह गहरी चिंता को दर्शाता है तनाव पहले  मानसिक होता है परंतु समय के साथ शारीरिक तनाव भी उत्पन्न होता  है।

तनाव के लक्षण (Symptoms Of Stress In Hindi)

तनाव से ग्रसित व्यक्ति के शारीरिक लक्षणों में हृदय गति का सामान्य से अधिक रहना तथा  पाचन संबंधी क्रियाओं का नियमित ना होना इसके साथ ही लंबे समय तक तनाव का बना रहना कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण भी बन सकता है ।मनोवैज्ञानिक लक्षणों में मन का और संतुष्ट होना तथा कार्य से मुखर जाना प्रमुख है।

तनाव से ग्रसित व्यक्ति का प्रमुख लक्षण उसके व्यवहार में दिखाई देता है। जब व्यक्ति तनाव में होता है तब वह अपने कार्य को नियमित तथा सामान्य तरीकों से नहीं कर पाता उसकी उत्पादकता में कमी आती है। तथा नशा वृत्ति की ओर बढ़ता है।इसके साथ-साथ ऐसे लोगों की आवाज भारी होने लगती हैं। जो कहना चाहते हैं वह कभी कह नहीं पाते धैर्य जल्दी खो देते हैं तथा सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में  कम ही दिखते हैं, और हमेशा बेचैन रहते हैं।

अब बात करते हैं कि तनाव की मूल जड़ क्या है प्रत्येक व्यक्ति अपने अपने कार्य में संलग्न रहता है जब उसके कार्य तथा विचारों या भावों में रुकावटें पैदा होती है। तो ये रुकावटें व्यक्ति को लगातार असंतुष्ट करती है। तथा जब असंतुष्टता चरमसीमा पर पहुंच जाती है। तब तनाव का आगमन होता है। तथा यह धीरे-धीरे समय के साथ बढ़ता जाता है। उस समय तीन प्रकार के मानसिक द्वंद्व की उत्पत्ति होती है। जिसमें प्रस्ताव प्रस्ताव द्वंद दूसरा प्रस्ताव परिहास द्वंद तथा तीसरा परिहार प्रस्ताव द्वंद है।

तनाव के प्रकार (Types Of Stress In Hindi)

तनाव की प्रभावशीलता के आधार पर तनाव को तीन भागों में बांटा जा सकता है पहले प्रकार के तनाव को अल्प तनाव कहा जाता है इसमें तनाव व्यक्ति के आसपास के वातावरण में अचानक हुए छोटे-छोटे परिवर्तनों से उत्पन्न होता है।

दूसरे प्रकार को दागी तनाव कहा जा सकता है। जो व्यक्ति के शरीर तथा मस्तिष्क को चोटें पहुंचाता है। इस प्रकार का तनाव व्यक्ति को अपने कैरियर में मिली असफलता के कारण उत्पन्न हो सकता है।

तीसरा तथा सबसे खतरनाक तनाव का प्रकार आघात तनाव होता है। इसमें व्यक्ति को बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। तथा धैर्य के साथ ही जिजीविषा को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है। इस तनाव की वजह में किसी अप्रिय घटना का घटित होना या भावनात्मक रूप से चोटे खाना शामिल है। यह तनाव व्यक्ति की मृत्यु की वजह भी बन सकता है।

तनाव के कारण (Reasons For Tension In Hindi)

जितने प्रकार के तनाव है उतने ही कारण हो सकते हैं या इससे अधिक भी꫰ तनाव पैदा करने  मे व्यक्ति स्वयं या  व्यक्ति के संबंध अथवा किसी संस्था की भूमिका हो सकती है।

वर्तमान समय में तनाव का प्रमुख कारण हमारी जीवन शैली है। तड़क-भड़क की संस्कृति दिखावे की संस्कृति बढ़ता हुआ शहरीकरण पाश्चात्य संस्कृति का अंधाधुंध करण करने के चक्कर में हम अपने भारतीय संस्कृति के नॉर्मल रहन सहन खानपान वसुदेव कुटुंबकम को भूल रहे हैं।

बढ़ती हुई तकनीकी ने भी तनाव में यकायक वृद्धि की है तकनीकी ने कार्य को आसान तो बनाया है। साथ ही साथ एक ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल को भी तैयार किया जिसमें व्यक्ति सुकून की सांस नहीं ले पा रहा।

संयुक्त परिवारों का पतन भी प्रमुख कारण है। क्योंकि व्यक्ति के प्रारंभिक मानवीय मूल्यों के विकास में परिवार का योगदान लगातार कम होता जा रहा है। पारिवारिक सदस्यों के स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में सहायता करना ना के बराबर देखा जा रहा है।

तनाव का सबसे प्रमुख कारण आर्थिक तत्वों में खोजा जा सकता है। लगातार कम हो रहे आर्थिक संसाधन व्यक्ति की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने में असमर्थ हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि वह भी दूसरे लोगों की तरह सुखी और संपन्न जीवन जिए तथा इसके लिए वह अपने आप की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में तनाव का शिकार होता जा रहा है।

सामाजिक  कारको में कम होते सामाजिक कार्यक्रम तथा विभिन्न आधारों पर किए जा रहे भेदभाव ने साथ ही सामाजिक कुरीतियां बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य के साथ सामंजस्य बैठाने में और सफल हो रही है। परिणाम स्वरूप तनाव जैसी अनेकों समस्याएं सामने आ रही है।

तनाव के संगठनात्मक कारणों पर नजर डालें तो इसमें प्रमुखता किसी संस्था के द्वारा किए गए नीतिगत बदलाव ,संगठन की संरचना का औपचारिकता पर बल देना, कार्य करने के लिए वातावरण का अशुद्ध होना तथा संगठन के द्वारा विभिन्न आधारों अथवा समय अंतराल में किए जा रहे बदलावों से  प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को तनाव में देखा जाता है। कर्मचारियों के तनाव का प्रभाव उसके अपने परिवार पर भी पड़ता है।

तनाव प्रबंधन सुझाव उपाय, (Stress Management Tips In Hindi)

तनाव हर परिस्थिति में हानिकारक नहीं होता और यह भी सत्य है। कि प्रत्येक व्यक्ति तनाव मुक्त रहना चाहता है। पूर्ण रूप से तनाव से मुक्त रहना ना तो स्वाभाविक है। और ना ही संभव क्योंकि ऐसी स्थिति में व्यक्ति निष्क्रिय हो जाएगा। परंतु कुछ तनाव ऐसे होते हैं जिन से बचकर रहना व्यक्ति के लिए अति लाभकारी सिद्ध होता है। कुछ ऐसी तकनीक या  विधियां या सरल शब्दों में तरीके हैं। जिनके द्वारा तनाव से बचा जा सकता है। अथवा अगर तनाव ग्रसित हैं। तो उसे कम किया जा सकता है।

तनाव को कम करने का मुख्य तरीका अपने समय का बेहतर प्रबंध करना है इसके अंतर्गत अपने दैनिक जीवनचर्या को सुव्यवस्थित करते हुए तनाव के लिए प्रमुख उत्तरदाई कार्यों को नजरअंदाज किया जा सकता है।

नियमित व्यायाम तथा योग के द्वारा सोचने की क्षमता तो बढ़ती ही है। साथ ही व्यक्ति उच्च स्तर पर पहुंच जाता है जहां से वह स्वयं अपने तनाव के कारणों का पता लगाने के साथ ही उसे दूर करने के रास्ते भी खोज सकता है।

इसके अंतर्गत ही चिंतन तथा ध्यान लगाना भी शामिल है जिसके द्वारा व्यक्ति खुद को तथा औरों को अच्छी तरह से समझने में सफल हो सकता है।

अपने कार्यों की प्राथमिकता का निर्धारण करें तथा उसका अनुसरण करें।

अपनी आवश्यकताओं को पहचाने तथा सामाजिक सरोकारों को शामिल करते हुए इन्हें प्राप्त करने हेतु व्यस्त रहें।

खुद का  आत्म निरीक्षण करते रहें तनाव के प्रमुख कारणों को चिन्हित करें तथा तनाव उत्पन्न करने वाली गतिविधियों का परहेज करें।

सामाजिक सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ाएं विचारों में खुलापन लाएं तथा अपनी परेशानियों को अपने दोस्तों के साथ शेयर करते रहें।

तनाव दूर करने का सबसे आसान तरीका यह भी हो सकता है। कि अपनी सोच को बदलें स्वयं को खुदा समझने से बचें अर्थात स्वयं को पहचाने अपनी कमजोरियों का पता लगाएं तथा इन्हें दूर करने का प्रयास करें।

संगठनात्मक स्तर पर तनाव को दूर करने के लिए उचित वातावरण प्रदान किया जा सकता है। साथ ही अनौपचारिक संप्रेक्षण को बढ़ाकर तथा सहभागी निर्णय प्रक्रिया के द्वारा कर्मचारियों के उत्साह को बढ़ाया जा सकता है। संगठन के प्रमुख स्तरों पर समूह भावना का विकास कर।

इनके अलावा कर्मचारियों को उचित प्रोत्साहन तथा उनके कार्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन करके भेदभाव रहित वातावरण तैयार किया जा सकता है। जो तनाव को दूर करने में सहायक होगा।

योग तनाव को दूर करने में इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि  शरीर तथा मन दोनों को स्वस्थ रखता है।  मन से भावना उत्पन्न होती है। और प्रत्येक तनाव  का बीजारोपण कहीं ना कहीं भावना से ही होता है। कलात्मक अभिव्यक्ति को निखारे तथा अपने शौक पर ध्यान दें पर्याप्त नींद लें।

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