भास्कराचार्य प्रथम की जीवनी | Bhaskaracharya Biography In Hindi

भास्कराचार्य प्रथम की जीवनी Bhaskaracharya Biography In Hindi: भारतीय गणितज्ञों में भास्कराचार्य का नाम प्रमुखता से लिया जाता हैं. भास्कर प्रथम जो छठी सदीं के मराठी गणितज्ञ इन्होने महाभास्करीय और लघुभास्करीय दो बड़े ग्रंथों की रचना कर हिंदी दशमलव प्रणाली को जन्म दिया. आज हम भास्कर प्रथम अथवा भास्कराचार्य I (1) की जीवनी इतिहास को पढ़ेगे.

भास्कराचार्य प्रथम की जीवनी Bhaskaracharya Biography In Hindi

भास्कराचार्य प्रथम की जीवनी Bhaskaracharya Biography In Hindi

 प्रथम भास्कराचार्य (600-680) भास्कर के जीवन के बारे में बहुत कुछ पता नहीं है। वह शायद एक मराठी खगोलविद था। उनका जन्म 7 वीं शताब्दी में भारत के महाराष्ट्र राज्य के परभानी जिले में बोरी में हुआ था ।

उनकी खगोलीय शिक्षा उनके पिता ने दी थी। भास्कर को आर्यभट्ट के खगोलीय विद्यालय का सबसे महत्वपूर्ण विद्वान माना जाता है । वह और ब्रह्मगुप्त दो सबसे प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ हैं जिन्होंने अंशों के अध्ययन में काफी योगदान दिया है।

भास्कर की जीवनी इस महान भारतीय गणितज्ञ के जीवन परिचय, इतिहास में इनके गणित में योगदान एवं जीवन यात्रा पर विस्तार से जानेगे.

भास्कराचार्य प्रथम की व्यक्तिगत जानकारी तथ्य व इतिहास (Bhaskaracharya-I Biography, History, Lifestory In Hindi)

जीवन परिचय बिंदु भास्कराचार्य प्रथम
पूरा नाम भास्कराचार्य प्रथम
जन्म 600 ई
धर्म हिन्दू
राष्ट्रीयता भारतीय
व्यवसाय गणितज्ञ
सम्मान लघुभास्करीय, महाभास्करीय रचयिता, sin x का मान
निधन 680 ईसवी

गणितज्ञ भास्कराचार्य प्रथम का इतिहास – Bhaskaracharya History in Hindi

भास्कराचार्य प्रथम का जन्म महाराष्ट्र राज्य के परभानी जिला के बोरी गाँव में सातवीं शताब्दी में हुआ. भास्कराचार्य प्रथम, पहले गणितज्ञ थे जिन्होंने हिन्दू दाशमिक पद्दति में लिखना आरम्भ किया. संख्याओं को अंको के स्थान पर शब्द व प्रतीक से समझाया एवं दर्शाया.

जैसे संख्या एक के लिए चन्द्रमा, संख्या 2 के लिए जुड़वाँ पंख, आँखे क्योंकि ये सदा युगल में होती है. संख्या पांच के लिए 5 ज्ञानेन्द्रियों आदि के रूप में दर्शाया.

सबसे पुराना ज्ञात साहित्य के रूप में गणित एवं खगोल शास्त्र संस्कृत गद्य के रूप में लिखी गईं. सबसे पुरानी पुस्तक आर्यभट्टीय भाष्य है. यह 629 ईसवीं में लिखी गयी थी. भास्कराचार्य प्रथम ने महाभास्करीय एवं लघु भास्करीय नामक दो ग्रन्थ लिखें. बाद में इनका अरबी अनुवाद भी किया गया.

महाभास्करीय ग्रंथ में त्रिकोंमीति फलन ज्या य (sin x) का मान निकालने का एक परिमेय व्यजंक दिया है यह सूत्र सुंदर एवं सहज है तथा Sin x का पर्याप्त शुद्ध मान प्राप्त होता है.

{\displaystyle \sin x\approx {\frac {16x(\pi -x)}{5\pi ^{2}-4x(\pi -x)}},\qquad (0\leq x\leq {\frac {\pi }{2}})}

इस सूत्र को आर्यभट्ट द्वारा दिया गया बताया है. इसमें sin x के मानों की सापेक्षिक त्रुटि 1.9% से कम है. (अधिकतम विचलन  जो  पर होता है।)

भास्कराचार्य प्रथम ने अभाज्य संख्या P के लिए एक संबंध 1+(p-1) दिया जो अभाज्य संख्या P से भाज्य है. इसे बाद में अल-हेक्षम, फाइबोनेली ने भी सत्यापित किया. अब इसे विलसन प्रमेय के रूप में जानते है.

गणितज्ञ भास्कराचार्य प्रथम एक प्रमेय दिया जिसे आजकल पेल समीकरण 8x²-1=y² के रूप में कहते है. भास्कराचार्य प्रथम ने एक प्रश्न खड़ा किया, कि वों संख्याएँ बताइए, जिसके वर्ग को 8 से गुणा कर एक जोड़ने पर दूसरी संख्या का वर्ग प्राप्त होता है.

जैसे 8x²-1=y² में x=1 एवं y=3 है, इसे सक्षेप में (x,y)= (1,3) लिखते है. इससे अन्य हल भी निकाले जा सकते है. जैसे (x,y)=(6,17).

प्राचीन भारत में ऐसे अनेक महान वैज्ञानिक दार्शनिक एवं गणितज्ञ हुए है. जिनके अनेंको शोध वर्तमान संसार रचना के लिए महत्वपूर्ण है एवं मील के पत्थर साबित हो रहे है.

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