पौराणिक हिन्दू धर्म की विशेषताएं | Chief Characteristic Of Hinduism In Hindi

पौराणिक हिन्दू धर्म की विशेषताएं Chief Characteristic Of Hinduism In Hindi: जब हम सनातन, वैदिक, हिन्दू धर्म अर्थात हिंदुत्व की बात करते हैं तो इसकी तुलना आज के रिलिजन शब्द से जोडकर अन्य पंथों व मजहबों से करते है जो कि गलत हैं. हिन्दू धर्म एक विचारधारा है जीवन जीने का तरीका है सिन्धु नदी के पास रहने वाले भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों की जीवन पद्धति हैं चाहे वो जैन, बौद्ध, सिक्ख, इस्लाम किसी भी मत को मानने वाले हो वे हिन्दू ही हैं. आज हम प्राचीन काल के हिन्दू धर्म की विशेषताएं आपकों बताएगे.

Chief Characteristic Of Hinduism In Hindi हिन्दू धर्म की विशेषताएं

Chief Characteristic Of Hinduism In Hindi हिन्दू धर्म की विशेषताएं

हिंदू धर्म क्या है?

हिंदू धर्म सबसे प्राचीन घर्मों में से एक माना जाता है। इस धर्म की उत्पत्ति भारत और भारत के आसपास के देशों से हुई है। भारत के साथ-साथ विश्व के अन्य देशों में भी हिंदू धर्म के बहुत से अनुयायी हैं।

हिंदू धर्म को अक्सर लोग सनातन धर्म भी कहते हैं हालांकि इसे वैष्णव वाद, शक्ति वाद, भक्ति मार्ग आदि भी कहा जाता है।

हिंदू धर्म की विशेषता क्या है?

विश्व में हिंदू के साथ-साथ बहुत से अनुयाई हैं और इन सभी धर्मों की कुछ ना कुछ विशेषता जरूर होती है, ज्यादातर लोग हिंदू धर्म को इसकी विशेषताओं के कारण पसंद करते हैं और हिंदू धर्म की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं –

हिंदू धर्म ज्ञान का स्वरूप है

हिंदू धर्म में ज्ञान को बहुत महत्व दिया जाता है और माना जाता है कि हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों तथा वेदों में ब्रह्मा विद्यमान रहते हैं, हिंदू धर्म का निर्माण भी अध्ययन और साधना करने के कारण ही हुआ है।

84,00000 योनियां

हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि जीव की 84 लाख योनियों होती हैं और प्रत्येक जीव इन 84 लाख योनियों में भ्रमण करता है, अगर कोई जीव पुण्य के काम करता है तो उसे मनुष्य योनि मिलती है।

धर्म ही मनुष्य का साथी है

हिंदू धर्म के अनुसार धर्म ही मनुष्य का साथी है और इस संसार में धर्म और कर्म के कारण ही आप अच्छा जीवन जी पाएंगे।

ईश्वर की प्राप्ति के अनेकों मार्ग हैं।

हिंदू धर्म में ईश्वर को प्राप्त करने के अनेकों मार्गों के बारे में बताया गया है, हिंदू धर्म में कर्म मार्ग, भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग और योग मार्ग की मदद से ईश्वर की प्राप्ति की जा सकती है और माना जाता है कि किसी भी मार्ग को चुनने के बाद मंजिल एक ही होती है।

ईश्वर समय-समय पर अवतार लेते हैं।

हिंदू धर्म की विशेषताओं में एक विशेष बात यह भी है कि हिंदू धर्म मानने वाले लोग यह मानते हैं कि ईश्वर समय-समय पर अवतार लेते हैं।

माना जाता है कि ईश्वर अवतार तब लेते हैं जब उन्हें अपने भक्तों को दर्शन देने होते हैं या फिर जब अधर्मियों का नाश करना होता है।

दुनिया में हिंदू की आबादी कितनी है?

हिंदू धर्म की उत्पत्ति मध्य एशिया के आसपास से हुई थी हालांकि अब इस धर्म के लोग लगभग दुनिया के हर देश में मौजूद हैं, इंटरनेट पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में लगभग 1.35 अरब हिंदू लोग रहते हैं।

दुनिया की पूरी आबादी में से लगभग 15 से 16 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म के लोगों की है।

दुनिया में कितने हिंदू देश हैं?

वैसे तो दुनिया में कोई भी देश पूरी तरह हिंदू राष्ट्र नहीं है हालांकि कुछ समय तक नेपाल में लोकतंत्र ना होने के कारण नेपाल एक हिंदू राष्ट्र माना जाता था।

हालांकि फिलहाल नेपाल एक हिंदू देश नहीं है, हिंदू धर्म के लोग वैसे तो हर देश में फैले हुए हैं लेकिन नीचे कुछ ऐसे देशों की सूची दी गई है जिनमें हिंदू आबादी सबसे ज्यादा पाई जाती है –

  • India – 1,093,780,000
  • Nepal – 28,600,000
  • Bangladesh – 13,790,000
  • Indonesia – 4,210,000
  • Pakistan – 3,990,000
  • Sri Lanka – 3,090,000
  • United States – 2,510,000
  • Malaysia – 1,940,000
  • United Kingdom – 1,030,000
  • Myanmar (Burma) – 890,000

हिंदू धर्म का मूल मंत्र क्या है?

हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें 33 कोटि देवी देवताओं को माना जाता है और यह एक ऐसा धर्म है जिसमें अलग-अलग देवताओं के अलग-अलग मूल मंत्र होते हैं।  हिंदू धर्म के कुछ प्रमुख देवी देवताओं के मूल मंत्र नीचे दिए गए हैं-

भगवान गणेश का मूल मंत्र –

॥ ॐ गण गणपतए नमः ॥

भगवान शंकर  का मूल मंत्र –

॥ ॐ नमः शिवाय ॥

माँ सरस्वती  का मूल मंत्र –

।। ॐ श्रीम ह्रीम सरस्वतेय नमः ।।

माँ दुर्गा का मूल मंत्र –

।। ॐ ह्रीम दम दुर्गाए नमः ।।

भगवान विष्णु के मूल मंत्र –

।। ॐ नमो भगवती वासुदेवाय ।। और ॥ ॐ नमो नारायणाय ।।

माँ पार्वती  का मूल मंत्र –

॥ ॐ ओम हीम उमाई नमः ॥

हिंदुत्व क्या है

अक्सर आपने हिंदुत्व शब्द सुना होगा और इस शब्द को परिभाषित करने के लोगों के अपने अपने तरीके होते हैं, हालांकि हिंदुत्व का असली मतलब हिंदू धर्म का पालन करने वाले लोगों से जुड़ा हुआ है और यह शब्द हिंदू धर्म का पालन करने वाले लोगों के इतिहास, रहन सहन, धार्मिकता, हिंदुओं के जीवन उद्देश्य, आदि से जुड़ा हुआ है।

chief characteristic of hinduism- हिन्दू धर्म की विशेषता

जब हिन्दू धर्म का नाम आता है तो लोगों का ध्यान मन्दिर पाठ, पूजा और मान्यताओं की तरफ चला जाता हैं जैसे टीका लगाने चोटी रखने और मंदिर जाने वाला ही हिन्दू होता हैं,

यह हिंदुत्व की विशेषताएं नहीं हैं बल्कि यह धर्म का छोटा सा हिस्सा हैं जिसमें देवी देवता और मान्यताएं आती हैं. यहाँ धर्म का अर्थ भी स्पष्ट किया गया हैं धर्म इति धार्यते यानी जिसे धारण (आचरण/व्यवहार) में लाया जा सके वही धर्म हैं.

पौराणिक हिन्दू धर्म में दो परम्पराएं शामिल थी- वैष्णव और शैव. वैष्णव परम्परा में विष्णु को सबसे महत्वपूर्ण देवता माना जाता हैं और शैव परम्परा में शैव यानी शिव ही परमेश्वर हैं.

इस प्रकार की आराधना में उपासना और ईश्वर के बीच का संबंध प्रेम और समर्पण का सम्बन्ध माना जाता हैं जिसे हम भक्ति कहते हैं. अब मुख्य हिन्दू धर्म की विशेषता जानते हैं.

पौराणिक हिन्दू धर्म का उदय (The rise of mythical Hindu religion)

पौराणिक हिन्दू धर्म में भी मुक्तिदाता की कल्पना विकसित हो रही थी. इस पौराणिक हिन्दू धर्म में दो परम्पराएँ प्रमुख थी, पहली वैष्णववाद और दूसरी शैववाद. वैष्णववाद में विष्णु को सबसे प्रमुख देवता माना गया हैं. और शैववाद में शिव परमेश्वर माने गये हैं.

इन परम्पराओं के अंतर्गत एक विशेष देवता की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता था. इस प्रकार आराधना में उपासना और ईश्वर की भक्ति के बीच का सम्बन्ध प्रेम और समर्पण का माना जाता था जिसे भक्ति कहा जाता हैं.

अवतारवाद (Avatarism)

यह पौराणिक हिन्दू धर्म की दूसरी मुख्य विशेषता हैं. वैष्णववाद में कई अवतारों के चारों ओर पूजा पद्धतियाँ विकसित हुई. इस परम्परा के अंदर दस अवतारों की कल्पना की गई हैं. लोगों में यह मान्यता भी प्रचलित थी कि पापियों के बढ़ते प्रभाव के कारण जब संसार में अराजकता, अव्यवस्था और विनाश की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी, तब संसार की रक्षा के लिए भगवान अलग अलग रूपों में अवतार लेते थे.

संभवतः अलग अलग अवतार भारत के भिन्न भिन्न भागों में लोकप्रिय थे. इन सभी स्थानीय देवताओं को विष्णु का रूप मान लिया गया जो एकीकृत धार्मिक परम्परा के निर्माण का एक महत्वपूर्ण तरीका था.

अवतारों को मूर्तियों में दिखाना (Show avatars statues)

कई अवतारों को मूर्तियों के रूप में दिखाया गया हैं. अन्य देवताओं की मूर्तियों का भी निर्माण किया गया. शिव को उनके प्रतीक लिंग के रूप में बनाया जाता था. परन्तु उन्हें कई बार मनुष्य के रूप में भी दर्शाया गया हैं.

ये समस्त चित्रण देवताओं से सम्बन्धित मिश्रित अवधारणाओं पर आधारित थे. उनकी विशेषताओं और प्रतीकों को उनके शिरो वस्त्र, आभूषण, आयुधों (हथियार और हाथ में धारण किये गये अन्य शुभ अस्त्र) और बैठने की शैली से दर्शाया जाता था.

पुराणों की कहानियाँ (hindu mythological stories)

इन मूर्तियों के उत्कीर्णन का अर्थ समझने के लिए इतिहासकारों को इससे जुडी कहानियों से परिचित होना पड़ता हैं. कई कहानियां प्रथम सहस्त्रशताब्दी के मध्य से ब्राह्मणों द्वारा रचित पुराणों में पाई जाती हैं. जिनमें देवी देवताओं की कहानियाँ भी हैं.

प्रायः इन्हें संस्कृत श्लोकों में लिखा जाता था. इन्हें ऊँची आवाज में पढ़ा जाता था. जिसे कोई भी सुन सकता थायदपि महिलाओं और शूद्रों को वैदिक साहित्य पढ़ने सुनने की अनुमति नहीं थी. परन्तु वे पुराणों को सुन सकते थे.

पुराणों की अधिकांश कहानियाँ लोगों के आपसी मेल मिलाप से विकसित हुई.पुजारी व्यापारी और सामान्य स्त्री पुरुष एकस्थान से दूसरे स्थान पर आते जाते हुए, अपने विश्वासों और विचारों का आदान प्रदान करते थे. उदहारण के लिए वासुदेव कृष्ण मथुरा क्षेत्र के महत्वपूर्ण देवता थे. कई शताब्दियों के दौरान उनकी पूजा देश के दूसरें प्रदेशों में भी प्रचलित हो गई.

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