वायु पर निबंध Essay On Air In Hindi

Essay On Air In Hindi नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत करता हूँ आज के लेख में हम वायु पर निबंध अनुच्छेद पैराग्राफ पढेगे. जीवन के लिए आवश्यक तत्वों में से वायु एक है जिसकें बिना जीवन सम्भव नहीं हैं. आज के निबंध में हम जानेगे कि वायु क्या है अर्थ परिभाषा, विशेषताएं, परतें, महत्व आदि को समझने का प्रयत्न करेंगे.

Essay On Air In Hindi वायु पर निबंध

Essay On Air In Hindi वायु पर निबंध

10 Lines on Air Pollution for Children and Students In Hindi

1) वायु प्रदूषण के लिए हानिकारक गैसों, विषैले तत्वों, एलर्जी आदि का वायु में प्रवेश उत्तरदायी है।

2) वायु प्रदूषण वायु की गुणवत्ता को अत्यधिक प्रभावित करता है, जिससे यह मानव अस्तित्व के लिए खतरनाक हो जाता है।

3) औद्योगिक, वाहन उत्सर्जन और ज्वालामुखी विस्फोट वायु प्रदूषण के कुछ कारण हैं।

4) अत्यधिक प्रदूषित हवा क्षेत्र के पौधे और वनस्पति को भी प्रभावित कर सकती है।

5) २०१२ में वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में ६ मिलियन से अधिक लोगों की मृत्यु हुई।

6) वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण मानव निर्मित गतिविधियाँ हैं।

7) स्मॉग एक प्रकार का वायु प्रदूषक है जो आंखों और गले में जलन पैदा कर सकता है, फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और यहां तक ​​कि अस्थमा के हमलों को भी जन्म दे सकता है।

8) उद्योगों और वाहनों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों ने वायु प्रदूषण को जन्म दिया।

9) जीवाश्म ईंधन के जलने में कमी, इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग, पुनर्वनीकरण आदि वायु प्रदूषण को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

10) ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करने से पर्यावरण को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।

Essay On Air In 300 Words In Hindi, हवा पर लघु निबंध

हमारी पृथ्वी के चारों ओर एक गैसीय पदार्थ उपस्थित है इस गैसीय पदार्थ को वायु कहते हैं. कोई भी सजीव बिना वायु के जीवित नहीं रह सकता. वायु का आवरण जो पृथ्वी को चारों ओर से घेरे हुए हैं वायुमंडल कहलाता हैं. पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण वायु का यह घेरा पृथ्वी को जकड़े हुए हैं.

वायु की विशेषताएं

  • वायु सभी जगह व्याप्त है, किन्तु हम इसे देख नहीं पाते. हम केवल वायु का अनुभव ही कर सकते हैं.
  • वायु एक पदार्थ हैं.
  • इसमें भार होता हैं,
  • इसमें कोई रंग नहीं होता अर्थात वायु रंगहीन हैं.
  • इसके आर पार देखा जा सकता है, अतः वायु पारदर्शक होती हैं.
  • वायु अनेक भारी व हल्की गैसों का मिश्रण है वायुमंडल में 78 प्रतिशत नाइट्रोजन, 21 प्रतिशत ऑक्सीजन, 0.093 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड, 0.90 प्रतिशत आर्गन तथा शेष अन्य गैसें व कण पाए जाते हैं. इस प्रकार वायु में सर्वाधिक मात्रा में नाइट्रोजन गैस पाई जाती है. यह गैस अपेक्षाकृत कम क्रियाशील होती हैं.
  • धरातल के समीप वायु का घनत्व अधिक पाया जाता है तथा ज्यों ज्यों हम धरातल से ऊपर उठाते हैं घनत्व कम होता जाता हैं.
  • सामान्यतः भारी गैसें वायु मंडल के निचले भाग में तथा हल्की गैसें वायुमंडल के ऊपरी भाग में पाई जाती हैं.
  • वायु में कोई गंध या स्वाद नहीं है.
  • वायु में जलवाष्प होती है, यही जलवाष्प गिलास की ठंडी सतह के सम्पर्क में आने पर वहां बूंदों के रूप में परिवर्तित होकर जमा हो जाती हैं.
  • जिस प्रकार सभी सजीवों को साँस लेने के लिए वायु आवश्यक है उसी प्रकार किसी वस्तु के जलने के लिए वायु भी जरुरी हैं.
  • वायु पर गर्मी और सर्दी का असर पड़ता है गर्मी पाकर वायु फैलती है गर्मियों में साइकिल के ट्यूब के फटने का भी यही कारण है सर्दी पाकर वायु सिकुड़ती हैं.
  • वायु गर्म होकर ऊपर उठती है गर्मियों में तेज हवा और आंधी चलने का यही कारण हैं.
  • हर खाली और रन्ध्रदार वस्तु में वायु होती हैं.
  • जलवाष्प व धुल के कण भी वायु का अवयव हैं.
  • यदि वायु का तापमान बढ़ता है तो उसका आयतन भी बढ़ता हैं.
  • वायु दवाब डालती हैं.
  • बंद पात्र में दाब बढ़ाने पर वायु संपीडित हो जाती हैं जैसे जैसे दाब बढाते है वायु और अधिक संपीडित होती हैं संपीडित वायु का दाब अधिक होता हैं.
  • वायु दाब में अंतर होने पर वायु का प्रवाह होता है मौसम परिवर्तन में वायुदाब की प्रमुख भूमिका होती हैं.
  • वायु का भार और दाब इसके तापमान के अनुसार बदलते रहते हैं.
  • वायु के विभिन्न गैसों का प्राकृतिक रूप से सन्तुलन बना रहता हैं.

वायुमंडल की परतें

क्षोभमंडल (Troposphere): वायुमंडल का सबसे निचला संस्तर 8 से 14.5 किमी तक. मुख्यतः नाइट्रोजन व ऑक्सीजन उपलब्ध. मौसमी परिवर्तन इसी मंडल में होते हैं. यह दिन में सूर्य की तेज गर्मी से हमारी रक्षा करता है तथा रात्रि में धरातल को ठंडा होने से बचाता हैं.

1920 में रूसी वैज्ञानिक मौलेशनौफ ने क्षोभमंडल की खोज की. इसकी उपरी सीमा क्षोभ सीमा कहलाती हैं. जिसकी चौड़ाई लगभग 1.5 से 2 किमी तक हैं. वायुमंडल का यह सबसे घना मंडल हैं.

वायु प्रदूषण

पृथ्वी के वायुमंडल को आधुनिक समय में वायु, जल और मिट्टी के प्रदूषण के गम्भीर खतरे का सामना करना पड़ रहा हैं. मानव की अनुचित गतिविधियों के चलते वायु की मूल प्रकृति में बदलाव आना प्रदूषण कहलाता हैं.

यातायात के साधनों, फैक्ट्रियों संयंत्रों से निकलने वाली विषैली गैसे प्रमुख रूप से वायु प्रदूषण की जिम्मेदार हैं. लोगों को वायु प्रदूषण इसके नुक्सान के बारे में जागरूक करके इसके स्तर को सिमित किया जा सकता हैं.

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