जनगणना 2021 पर निबंध | Essay On Census 2021 In Hindi

जनगणना 2021 पर निबंध Essay On Census 2021 In Hindi: नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं, आज हम आगामी 2021 की जनगणना पर सरल भाषा में निबंध, भाषण, अनुच्छेद साझा कर रहे हैं. आजादी के बाद 10 वर्षीय जनगणना का यह आठवां संस्करण हैं. अप्रैल 2020 से इसकी प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी हैं. जनगणना  वह प्रक्रिया है जिसमें देश के नागरिकों के एक निर्धारित समय पश्चात सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक जीवन से संबंधित आंकड़ों को इकट्ठा कर उनका अध्ययन एवं प्रकाशन किया जाता है।

जनगणना 2021 पर निबंध Essay On Census 2021 In Hindi

जनगणना 2021 पर निबंध | Essay On Census 2021 In Hindi

भारत विश्व में उन लोकतांत्रिक देशों में शामिल है जिनमें जनगणना जैसे महापर्व की प्रथा है। जनगणना न केवल आंकड़ों का संग्रह है बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक, अनुसंधान और नवाचारों का भी का भी महत्वपूर्ण आधार है। जनगणना समाज के आर्थिक या सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है क्योंकि जनगणना से प्राप्त नागरिकों की संख्या के सही आंकड़े और उनके पास उपलब्ध संसाधनों के सही आंकड़ों की जानकारी देश के विकास एवं बेहतर भविष्य का रास्ता उपलब्ध कराती है।

विश्व स्तर पर अलग-अलग देशों के स्थिति जानने के लिए भी देश की पूर्व एवम आगामी जनगणनाओं पर ध्यान केंद्रित रहता है और अन्य देशों के साथ आने हेतु विभिन्न पहलुओं को देखते हुए संगठन के द्वारा संबंधित देश को उचित दिशा-निर्देश भी दिए जाते है। जनगणना करवाना किसी भी व्यवस्था के एक चुनौती जरूर होती है परन्तु उसका सफलता से समापन करा दिया जाना भविष्य के लिए जरूरी है।

भारत मेंं जनगणना की परम्परा ब्रिटिश राज मे सन 1872 से लेकर आज तक नियमित रूप से समयानुसार होती चली आ रही है और समय के अनुसार इस प्रक्रिया में लगातार काफी बदलाव भी देखने को मिल रहे है। भारत में होने वाली 2021 कि यह जनगणना आजादी के बाद की आठवीं जनगणना होगी और देश की सोहलवी जनगणना होगी।

इस जनगणना की थीम है जनभागीदारी से जनकल्याण

जनगणना का इतिहास (History of census)

प्राचीन काल में ऋग्वेद में कौटिल्य के अर्थशास्त्र से लेकर मध्यकाल में अकबर के शासन काल के समय आईन-ए-अकबरी तक अलग-अलग तरह की जनगणना होती रही है, जिनकी जानकारी ऐतिहासिक संदर्भों में है। अर्थात जनगणना समाज के विकास के लिए और समाज की स्थिति जानने के लिए व्यवस्थाओं हेतु एक महत्वपूर्ण रास्ता रही है। और समय के साथ जनगणना कार्य में नयी जानकारियों की सूची, सहूलियत और चुनौतियां बढ़ती-घटती रही है। जनगणना ब्रिटिश राज के दौरान 1872 में लॉर्ड मेयो के द्वारा संपन्न करवाई गई थी। हालांकि यह जनगणना व्यवस्थित तरीके से नहीं की गई थी। जिससे कि समाज एवम देश के नागरिकों की सही-सही आर्थिक-सामाजिक स्थिति का पता नहीं चल पाया।

इसके बाद सन 1881 में नियमित रूप से लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में जनगणना की शुरुआत हुई। यह पहली जनगणना थी जो व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से शुरू हुई। इसी जनगणना के साथ 1881 में ही जनगणना के लिए एक अलग विभाग बनाया गया जिसका काम जनगणना का व्यवस्थित रूप से शुरू किया जाना, उसका आधार तैयार करना एवं प्राप्त आंकड़ों पर विश्लेषण करना था। इसके बाद जनगणना की प्रक्रिया में काफी बड़े सुधार किए गए जिनकी मदद से जनगणना कर्मी के लिए जनगणना करना आसान होता चला गया।

जनगणना का दायित्व सेंसेक्स कमिश्नर को था। लेकिन 1941 के बाद सेंसेक्स कमिश्नर पद का नाम बदलकर रजिस्ट्रार जनरल एंड सेंसेक्स कमिश्नर (महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्तत) कर दिया गया। वर्तमान में रजिस्टार जनरल एंड सेंसस कमिश्नर विवेक जोशी है। तत्पश्चात 1949 में जनगणना विभाग को केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कर दिया गया।

सन 1872 से लेकर 1951 से पहले तक भारत में जाति आधारित जनगणना होती थी और होने वाली सभी जनगणनाओ में नागरिकों से जाति से संबंधित आंकड़े पूछे जाते थे परंतु 1941 की जनगणना के आंकड़े द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण एकत्रित नहीं किए जा सके।

स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र के पंथनिरपेक्षता के परिपेक्ष्य में सरकार ने जनगणना में जाति से संबंधित आंकड़े एकत्र करना गलत बताया क्योंकि स्वतंत्र भारत की राजनीति के लिए जातिवाद को समाप्त करना एक बड़ा सपना था। ताकि देश के भविष्य में जातिवाद से कोई भी समस्या उत्पन्न न हो और भारत की छवि सम्पूर्ण विश्व में एक पंथनिरेक्ष राष्ट्र के रूप में उभरे।

जनगणना का संवैधानिक / कानूनी आधार (Constitutional / legal basis of census)

2011 की जनगणना जो स्वतंत्र भारत की सातवीं जनगणना थी, में पहली बार नागरिकों से जाति आधारित आंकड़े एकत्रित किए गए। जनगणना कानून 1948 एवं जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए फ्रेमवर्क उपलब्ध करवाता है। वहीं नागरिकता कानून 1955 एवं नागरिकता नियम 2003 के तहत 2010 में पहली बार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को मंजूरी दी गई।

सोलहवीं जनगणना (Sixteenth census)

24 दिसंबर 2019 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2021 एवं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने की मंजूरी दे दी थी। जिसकी थीम जनभागीदारी से जन कल्याण (पीपल्स पार्टिसिपेशन फॉर पीपल्स वेलफेयर)

सोलहवीं जनगणना के लिए सरकार के द्वारा दो चरण तैयार किए गए। जिन का कार्य देश के तकरीबन 30 लाख कर्मियों की मदद से संपूर्ण किया जाएगाा।  इस पूरी प्रक्रिया में जनगणना के लिए 8754 करोड़ 23 लाख रुपए का खर्च आएगा जबकि एनपीआर (नेशनल रजिस्टर फॉर पॉपुलेशन) के लिए 3941 करोड़ 35 लाख रुपए का खर्चा होगा।

सोलहवीं जनगणना के दोनों चरणों की कार्य योजना योजना –

  • 24 दिसंबर 2019 को केंद्र सरकार के द्वारा  सोलहवींं जनगणना की अनुमति प्रदान की गई।
  • केंद्र सरकार के द्वारा पहले चरण की अवधि 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तय की गई।
    पहले चरण मैं मुख्य कार्य हाउसलिस्टिंग तथा हाउस सेंसस का का होगा जिसमें देश में घरों की संख्या एवम घर में रहने वाले सदस्यों की संख्या का पता लगाया जाएगा।
  • तत्पश्चात दूसरे चरण की अवधि 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तय की गई और इसी चरण की समाप्ति के साथ सोलहवीं जनगणना समाप्त होगी।

सोलहवीं जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. सोलहवी जनगणना जनगणना में केंद्र सरकार ने 31 प्रश्नों की सूची तैयार की है। जो जनगणना के समय जनगणना कर्मी के द्वारा भारत के प्रत्येक नागरिक से पूछे जाएंगे।
  2. संचार माध्यम (रेडियो टेलीविजन मोबाइल स्मार्टफोन ट्रांजिस्टर)
  3. पीने के पानी का मुख्य स्रोत
  4. पानी की उपलब्धता
  5. मकान की ओनरशिप/मकान नंबर /मकान में कमरों की संख्या
  6. वॉशरूम की व्यवस्था
  7. घर का मुखिया (लिंग)
  8. रसोई उपलब्धता
  9. रसोई का इंधन (एलपीजी/CNG)
  10. मकान उपयोग का मकसद
  11. मकान की स्थिति (मटेरियल इत्यादि की जानकारी सीलिंग)
  12. डिजिटल पहुंच
  13. परिवार में विवाहित युगलों की संख्या
  14. परिवार का किस जाति वर्ग से संबंध

उपरोक्त प्रश्न जनगणना कर्मियों के द्वारा जनगणना के दौरान पूछे जाएंगेे।

सोलहवीं जनगणना की विशेषताएं (Sixteenth Census Features)

भारत की यह सोलहवीं (आजादी के बाद की आठवीं) जनगणना कई मायनों में विशेष रहेगी। यह जनगणना पूर्व की सभी जनगणनाओ से कई माइनों में अलग होगी और नए तरीके से होगी।

इस जनगणना का शुभंकर महिला एन्यूमैरेटर है। इस बार की जनगणना पूरी तरह से पेपर लेस होगी यानी डिजिटल जनगणना होगी जो कि मानवी त्रुटि रहित अर्थात लिपि की त्रुटि नहीं होगी।

जनगणना के डिजिटल होने के कारण समय और श्रम की बचत होगी। सोलहवीं जनगणना में भारत में बोली जाने वाली 16 भाषाओं का उपयोग किया जाएगा। इस बार किसी भी क्षेत्र में होने वाली डिजिटल जनगणना के आंकड़े बटन प्रेस करते ही सीधे दिल्ली पहुंच जाएंगे।

जनगणना में सभी आंकड़े डिजिटल रूप में एकत्रित किए जाएंगे। डिजिटल रूप से जनगणना करने के लिए सरकार के द्वारा एक विशेष मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा ।जिसकी सहायता से मोबाइल, टैब, कंप्यूटर इत्यादि पर डिजिटल रूप से जनगणना संभव होगी।

जनगणना के आंकड़े देश की सभी सरकारों को, विधायकों को, सांसदों को, डीएम अथवा एसडीएम को एवं सरपंच अथवा ग्राम प्रधानों को प्रेषित भी किए जाएंगे ताकि वे अपने क्षेत्र के कमजोर समुदायों की बेहतरी के लिए प्रभावी नीतियां बना सके।

डिजिटल रूप से एकत्रित किए गए आंकड़ों के प्रबंधन एवं गुणवत्ता हेतु केंद्रीय निगरानी एवं प्रबंधन पोर्टल की व्यवस्था की जाएगी। डिजिटल जनगणना के चलते भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।

जनगणना का महत्व (Importance of census)

किसी भी देश के लिए जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है जो देश के भूतकाल एवं वर्तमान के आधार पर एक सुनहरे भविष्य के लिए योजनाएं बनाने हेतु एक मजबूत आधार का कार्य करती हैै। उच्च स्तर से लेकर निम्न स्तर के वर्ग तक की कल्याणकारी एवं विकास की योजनाएं बनाने हेतु रूपरेखा उपलब्ध करवाना।

पूर्व में बनाई गई योजना एवं नीतियों की सफलता एवं असफलता के आंकड़े उपलब्ध करवाना यानी पूर्व में बनाई गई किसी विशेष वर्ग हेतु, विशेष योजनाएं कितनी प्रभावी रही, उन से कितना लाभ हुआ तथा वह कितनी सफल रही इत्यादि की जानकारी जनगणना के माध्यम से सटीकता से प्राप्त होती है।

नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था के मूल्यांकन के लिए जनगणना एक महत्वपूर्ण पक्ष हैै। सामाजिक, शैक्षणिक, अनुसंधानिक तथा वैज्ञानिक कार्यों हेतु सटीक आंकड़े उपलब्ध करवाना जनगणना के माध्यम से संभव हैै। प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रोजगार सर्जन में भी जनगणना महत्वपूर्ण है। इस बार करीब  2 करोड़ 40 लाख मानव दिवस के रोजगार सृजन की संभावना है।

निजी एवं व्यवसाय की योजनाओं के सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव की तुलना। विधानसभा एवं स्थानीय निकायों के निर्वाचन हेतु परिसीमन। जनगणना से प्राप्त है नागरिकों के आंकड़ों के आधार पर वित्त आयोग के द्वारा अनुदान का निर्धारण।

चुनौतियां (The challenges)

जनगणना जैसे कार्यों में में कार्यों में आंकड़ों को एकत्रित करने एवं प्रबंधन करने में मुख्यतः दो बड़ी चुनौतियां उभर कर आती है। कवरेज एवं आंकड़ों से सबंधित। कई बार भ्रष्टाचार अथवा आर्थिक आधार पर लागू की जाने वाली सरकारी नीतियों का लाभ न मिलने के डर से नागरिक सही आंकड़े छुपाते हैं ।

भारत जैसे बड़े जनसंख्या वाले देश में जनगणना हेतु लाखों की संख्या में जनगणना कर्मी लगाने पड़ते हैं जिस कारण सरकार को हजारों करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। डिजीटल माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों की सुरक्षा, उनके बैकअप तथा उनके गलत उपयोग को लेकर हमेशा शंका बनी रहती है जो एक बड़ी चुनौती है। एकत्र किए गए सामाजिक, आर्थिक आंकड़े अथवा किसी निजी संस्था के द्वारा लीक किए जा सकते हैं।

क्षेत्रीय या प्रशासनिक इकाइयों के द्वारा संवेदनशील आंकड़ों का दुरुपयोग किए जाने का भी डर बना रहता है। देश के सभी नागरिक पढ़े-लिखे नहीं है जिस कारण जनगणना कर्मी के द्वारा पूछे गए कुछ प्रश्नों की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती ।जनगणना कर्मी के कुछ सवालों के प्रति नागरिक पूरी तरह से आश्वासित नहीं होते जिसके कारण वे जानबूझकर सटीक जानकारी नहीं देते है। जो जनगणना की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है

समाधान (Solution)

क्योंकि जनगणना देश के बेहतर भविष्य के लिए, नई नीतियों एवं योजनाओं के लिए आधार प्रदान करती है तथा पूर्व की नीतियों एवं योजनाओं की खामियों की सटीक जानकारी देती है, तो जनगणना प्रक्रिया का सटीक रहना भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है ताकि उसकी सफलता का आश्वासन हमेशा बना रहे। भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले देश में जनगणना के कार्य में जो विभिन्न पहलुओं पर कई प्रकार की चुनौतियां सरकार एवं जनगणना कर्मी के सामने रहती है उनका समाधान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हर बार की जनगणना पूर्व की जनगणना से कुछ मायनों में बेहतर जरूर रहती है लेकिन समय के साथ नागरिकों की मानसिकता, सरकारी नीतियों इत्यादि के चलते कुछ नई चुनौतियां भी पैदा होती चली जाती है। जनगणना कार्य में आने वाली चुनौतियों का समाधान करना भी व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। निम्न कुछ पहलुओं पर विशेष ध्यान दे कर इन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। जिससे कि जनगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रथा सफलता से पूरी हो सके और व्यवस्था को भी इसके सटीक आंकड़ों के आधार पर सरकारी नीतियां बनाने में मदद मिल सके।

जनगणना कार्य में शामिल होने वाले उच्च स्तर से लेकर नियम स्तर तक सभी अधिकारियों एवं जनगणना कर्मियों का उचित प्रशिक्षण जनगणना की सफलता के लिए पहली सीढ़ी है। जनगणना के लिए अधिक वित्त व्यक्त किया जाना चाहिए। सभी जनगणना कर्मियों का सामाजिक रूप से उत्साहवर्धन एवं समय पर वेतन दिया जाना चाहिए।

नागरिकों को जनगणना के प्रति गंभीर होने एवं जनगणना नागरिकों के बेहतर भविष्य का आधार है, के प्रति सजग करना चाहिए । जनगणना में सही एवं सटीक जानकारी देने हेतु सार्वजनिक रूप से नागरिकों के लिए सरकार को टीवी, रेडियो, अखबार इत्यादि के माध्यम से विशेष कार्यक्रमों की शुरुआत की जानी चाहिए। जनगणना कार्य में अधिकारियों एवं जनगणना कर्मी को पर्याप्त मात्रा में उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

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One comment

  1. जनगणना पर निबंध, बहुत ही अच्छी और सटीक जानकारी दी है आपने। आपने जनगणनना का महत्त्व उसकी चुनौतियाँ और समाधान सब कुछ बताने कि अच्छी कोशिश कि है। मुझे आपका लेख अच्छा लगा ,कृपया ऐसी ही जानकारी शेयर करते रहें। धन्यवाद

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