निरक्षरता एक अभिशाप पर निबंध | Essay On Illiteracy In Hindi

Essay On Illiteracy In Hindi प्रिय विद्यार्थियों आज हम निरक्षरता एक अभिशाप पर निबंध शेयर कर रहे हैं. निरक्षरता हिंदी निबंध लेखन का महत्वपूर्ण विषय हैं. स्टूडेंट्स अपने प्रोजेक्ट के लिए अथवा परीक्षा की तैयारी के उद्देश्य से निरक्षरता पर यहाँ दिए गये निबंध का उपयोग कर सकते हैं.

निरक्षरता एक अभिशाप पर निबंध Essay On Illiteracy In Hindi

निरक्षरता एक अभिशाप पर निबंध Essay On Illiteracy In Hindi

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निरक्षरता एक अभिशाप निबंध 1

भले ही हमारे देश को आजादी हुए 70 वर्ष से अधिक का समय हो गया हो गया हो, मगर देश में आज भी ऐसे बच्चों की संख्या सैकड़ों हजारों में नहीं बल्कि करोड़ों में हैं जिन्होंने कभी स्कूल नहीं देखा. ये बच्चें भी अन्य की तरह ही जीवन में कुछ बड़ा बनने का सपना रखते है मगर कमजोर सामाजिक आर्थिक प्रष्ठभूमि के चलते वे अपने स्वप्न को साकार नहीं कर पाते हैं.

ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के बच्चों की संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है. इन क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति भी दयनीय हैं. मात्र अल्पायु में ही इन्हें घर तथा खेत के काम में लगा दिया जाता हैं. लडकों की तुलना में लड़कियों के लिए शिक्षा के अवसर बेहद सीमित हैं.

निरक्षरता का शाब्दिक अर्थ होता है अक्षरों की पहचान न होना. एक अनपढ़ व्यक्ति के लिए हर लिखा गया काला अक्षर भैस के बराबर ही होता हैं. वह न तो संख्या को पहचान पाता हैं न शब्दों को. यहाँ तक कि वह अपना नाम भी लिखना नही जाता हैं. वह लिखने पढने की इस दुनियां से स्वयं को कटा सा महसूस करता हैं.

एक समय था जब निरक्षरों की तादाद बहुत अधिक थी. इक्के दुक्के ही लोग पढ़ी हुई सामग्री पढ़ पाते थे. जब कभी उनके लिए कोई चिट्टी या कागज आता तो वे गाँव के पंडित या किसी पढ़े लिखे व्यक्ति के पास बचवाने के लिए जाया करते थे.

मगर आज समय बहुत आगे बढ़ रहा हैं. लोग इंटरनेट की इस दुनियां में सब कुछ ऑनलाइन ही करते हैं. ऐसे दौर में अनपढ़ रहकर जीवन बिताना किसी अभिशाप से कम नही हैं. अब शिक्षा प्राप्ति के लिए तमाम रास्ते हर किसी के लिए खुले हैं. सरकार द्वारा बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही हैं. उनके समस्त खर्च का वहन सरकार द्वारा किया जाता हैं.

सुबह शाम की कक्षाओं में बच्चें अपनी सुविधा के अनुसार शिक्षा अर्जित कर सकते हैं. जीवन में निरक्षरता के बहुत से नुक्सान हैं. उन्हें समाज में आए दिन विषमताओं का सामना करना पड़ता हैं. हर समय किसी से ठगे जाने का भय उसे सताता रहता हैं. वही वह हर समय औरों पर निर्भर हो जाने की शुरुआत हो जाती हैं. यदि हम अपनी प्रगति तथा विकास के कार्यों अपने अधिकारों का समुचित उपभोग करना चाहते है तो हमें साक्षरता का स्तर बढ़ाना होगा तथा समाज के हर नागरिक को साक्षर बनाना होगा.

निरक्षरता निबंध 2

भारतीय दार्शनिकों ने अक्षर को साक्षात् ब्रह्मा कहा है और इसे शब्द रूप में समस्त सृष्टि में व्यास बतलाया है. सामान्य रूप से यह अक्षर ज्ञान का वाची और बौद्धिक विकास का सूचक है. मानव समाज में जो व्यक्ति ज्ञानवान तथा बौद्धिक विकास से वंचित रहता है उसे निरक्षर कहते है.

निरक्षर का आशय है कि वह पढ़ा लिखा नही होता है, उसे अक्षर ज्ञान नही रहता है और उसके लिए ”काला अक्षर भैस बराबर” कहावत चरितार्थ होती है. निरक्षर या अनपढ़ व्यक्ति में सामान्य लौकिक बुद्धि भले ही रहती हो, परन्तु पुस्तकीय राशि ज्ञान से वंचित रहता है.

इस कारण वह ज्ञान भंडार से अपरिचित, अनजान तथा अविगज्ञ रहता है. ऐसें लोग अपने व्यक्तित्व का उचित विकास नही कर पाते है. साथ ही वे सामाजिक एवं राष्ट्रीय विकास में भी उचित सहयोग नही दे पाते है. इसलिए निरक्षरता को व्यक्ति और समाज दोनों के लिए अभिशाप कहा गया है.

निरक्षरता के दुष्परिणाम (what are the bad effects of illiteracy)

हमारे देश में पराधीनता के काल में शिक्षण सुविधाओं का नितांत अभाव था. निरक्षरता के कारण उस समय बंधुआ मजदूर, जमीदारी प्रथा , शोषण उत्पीड़न, आर्थिक विषमता, अंधविश्वास एवं रूढ़ियों की अधिकता थी. देश का गुलामी में जकड़े रहना भी एक निरक्षरता का अहम कारण था. भारत के सामाजिक जीवन का समग्र विकास नही हो रहा था. फलस्वरूप आजादी मिलने पर साक्षरता के अनेक कार्यक्रम चलाए गये.

हमारे देश में निरक्षरता ग्रामीण क्षेत्र में अधिक है. स्त्रियों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों तथा गिरिजनों में निरक्षरता का प्रतिशत सबसे ज्यादा है. शहरी क्षेत्रों में निरक्षरता का प्रतिशत कम है. राजस्थान में लगभग 65 प्रतिशत लोग ही साक्षर है. शेष सभी निरक्षर है.

देखा जाए तो निरक्षरता की अधिकता के कारण ही हमारा राजस्थान अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक पिछड़ा हुआ है और यहाँ बेरोजगारी तथा विषमता इसी कारण अधिक है. यह निरक्षरता का एक दुष्परिणाम ही है.

निरक्षरता दूर करने के उपाय (how reduce illiteracy rates india)

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सन 1951 में जो जनगणना हुई, उनमे लगभग 18 प्रतिशत जनता ही साक्षर थी. इस तरह उस समय भारत में साक्षरता बहुत ही कम थी. इस कारण सरकारी स्तर पर निरक्षरता को दूर करने के प्रयास किये जाते रहे.

इस दृष्टि से शिक्षण संस्थाओं का विस्तार किया गया तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रौढ़ शिक्षा निति घोषित की गई. इस निति के अनुसार अनेक स्तरों पर साक्षरता कार्यक्रम चलाए गये.

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक विद्यालय खोले गये तथा प्राथमिक शिक्षा का खूब प्रचार किया गया. गाँवों में बेरोजगार शिक्षित युवकों को पंचायत स्तर पर साक्षरता अभियान में लगाया गया और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से साक्षरता अभियान को आगे बढ़ाया गया.

इस अभियान में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्रों एवं सेवानिवृत कर्मचारियों का भी सहयोग लिया गया. अब उच्च माद्यमिक शिक्षा के अंतर्गत सामाजिक सेवा के रूप में इस अभियान का समावेश किया गया है.

अब राजस्थान में राजीव गांधी पाठशाला योजना, लोक जुम्बिश परिषद् और संधान संस्थान के द्वारा पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय खोले जा रहे है.

आठ से पन्द्रह वर्ष के बालक बालिकाओं को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है. वर्तमान में प्रचलित सर्वशिक्षा अभियान के द्वारा साक्षरता के लक्ष्य के प्रति काफी आशाएं है.

निरक्षरता निवारण के लिए सुझाव (Suggestions for illiteracy prevention)

हमारे देश से निरक्षरता का कलंक तभी मिट सकता है. जब सारे देश में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य कर दी जाए और बालकों को अशिक्षित रखना कानूनी अपराध माना जाए.

इसके लिए जगह जगह पर विद्यालय खोले जाए और गरीब जनता के बालकों को हर तरह की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए.

वयस्कों के लिए प्रौढ़ शिक्षा के कार्यक्रम को प्रभावी बनाया जावे. सरकार भी इस दिशा में अधिक से अधिक धन खर्च करने का प्रावधान रखे.

सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान रखा जाए ताकि वे साक्षरता अभियान में अपना अधिकाधिक सहयोग दे सके.

वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित सर्वशिक्षा अभियान को अधिक प्रभावशाली बनाया जावे तथा प्रचार साधनों एवं दूरदर्शन का इसके लिए पूरा उपयोग किया जावे.

निरक्षरता की समस्या और समाधान (Hindi Essay on Niraksharta ek Abhishap)

निरक्षरता समाज में अज्ञान और अन्धकार का प्रतीक है. जो समाज और राष्ट्र निरक्षर नागरिकों से रहित है, जिनमे निरक्षरता नही है. और सर्वत्र ज्ञान का प्रकाश फैला हुआ है, वह समाज तथा राष्ट्र सभी प्रकार से उन्नत माना जाता है.

सुशिक्षित नागरिकों से ही सभ्य तथा सम्पन्न राष्ट्र का निर्माण होता है. परन्तु अशिक्षित नागरिकों वाला देश असभ्य माना जाता है.

निरक्षरता मानव समाज का एक कलंक है. यह मानवता के लिए एक अभिशाप है. इस कारण अभिशाप से मुक्ति आवश्यक है और यह कार्य साक्षरता के आलोक से ही हो सकता है.

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