पुस्तकों का महत्व निबंध | Essay on Importance of Books in Hindi

नमस्कार आज का निबंध, पुस्तकों का महत्व निबंध Essay on Importance of Books in Hindi पर दिया गया हैं. आज के निबंध में पुस्तक अथवा किताब मनुष्य की सच्ची मित्र क्यों कही जाती हैं. जीवन में पुस्तकों के महत्व पर आसान भाषा में स्टूडेंट्स के लिए निबंध दिया गया हैं. उम्मीद करते है आपको ये निबंध पसंद आएगा.

पुस्तकों का महत्व निबंध Essay on Importance of Books in Hindi

पुस्तकों का महत्व निबंध Essay on Importance of Books in Hindi

विश्व की अधिकांश प्रतिभाएं पुस्तकों से ही निकली हैं, पढ़ते तो सभी हैं, पर पढ़कर अपने जीवन को महान बनाने का जो अवसर सुभाषचंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, मैक्सिम गोर्की, मार्क्स स्टॅलिन, माइकल फैराडे, डार्विन, लूथरबर बैंक आदि ने प्राप्त किया हैं.

उस रहस्य को हम कहाँ जान पाए हैं. हम यदि इन्ही महामानवों की तरह पढ़े हुए आदर्शों को अपने जीवन में उतार सके, तो हमारी गणना भी गांधी, गोर्की जैसे महान प्रसूत पुत्रों में हो सकती हैं. पुस्तकों का महत्व पर निबंध में हम जानेगे कि किस तरह किताबें हमारी सच्ची दोस्त होती हैं.

संत इमर्सन से उनके एक मित्र से पूछा आपको स्वर्ग में जाने को कहा जाए तो आप क्या तैयारी करोगे?, सबसे पहले अपनी सारी पुस्तकें बाँध लेगे, इमर्सन बोले ताकि स्वर्ग में हमारा समय बेकार न जाए.

लोकमान्य तिलक से एक मित्र ने पूछा- आपकों नर्क में जाना पड़े तो आप क्या करोगे, अपने साथ पुस्तकें ले जाउगा, ताकि स्वाध्याय द्वारा नरक को भी स्वर्ग में बदलने वाले विचार इकट्ठा कर सकू, लोकमान्य बोले.

कही से भी, किसी प्रकार भी जीवन को समुन्नत बनाने वाले सुलझे हुए उत्कृष्ट विचारों को मस्तिष्क में भरने का साधन जुटाना चाहिए.

स्वाध्याय से, सत्संग से, मनन से, चिन्तन से जैसे भी बन पड़े वैसे यह व्यवस्था करनी चाहिए कि हमारा मस्तिष्क उच्च विचारधारा में निमग्न रहे.

यदि इस प्रकार के विचारों में मन लगने लगे, उसकी उपयोगिता समझ पड़ने लगे, उनको अपनाते हुए आनन्द का अनुभव होने लगे तो समझना चाहिए की आधी मंजिल पार कर ली हैं.

गीता में कहा गया हैं न हि ज्ञानेन सद्रश पवित्रमिह विद्यते अर्थात इस संसार में ज्ञान से बढ़कर कोई और श्रेष्ठ वस्तु नही हैं. यदि हम इस संसार में सर्वश्रेष्ठ वस्तु तलाश करना चाहते हैं तो अन्तः ज्ञान को ही वह श्रेष्ठता प्रदान करनी पड़ेगी.

इसे प्राप्त करना सामान्य श्रेणी की योग्यता एवं परिस्थितियों के व्यक्ति अत्यंत उच्च कोटि का स्थान प्राप्त करते हैं. ज्ञान को ही पारसमणि कहा गया हैं.

लोहा पारस को छूकर सोना बन जाता हैं या नहीं? पारस कहीं हैं या नही? ये बाते संदिग्ध हैं पर ज्ञान रूपी पारस स्पर्श कर तुच्छ श्रेणी के व्यक्ति ऊँचे से ऊँचे स्थान पर पहुच सकते हैं. यह निर्विवाद सत्य हैं.

किसी ने महात्मा जी से पूछा- महात्मा जी इस रामायण को सही माना जाए या गलत? महात्मा जी ने उत्तर दिया- जब रामायण की रचना की गई थी, तब मैं नही था.

तो मैं कैसे कहूँ कि यह सही है या गलत. मैं तो केवल इतना बता सकता हूँ कि उसके पढ़ने से ही मैं सही हो गया हूँ, चाहों तो यह क्रम तुम भी अपना सकते हो.

पढ़ने का कार्य स्वाध्याय नही हैं, स्वाध्याय वही कहा जाएगा जो हमारी जीवन की समस्याओं पर आंतरिक उलझनों पर प्रकाश डालता हैं और मानवता को उज्ज्वल करने वाली स्द्प्रव्रतियों को अपनाने की प्रेरणा देता हैं.

सच्चे निस्वार्थी आत्मीय मित्र मिलना बहुत अच्छा है लेकिन हममें से बहुतों को इस सम्बन्ध में निराश ही होना पड़ता हैं. लेकिन अच्छी पुस्तकें सहज ही हमारी सच्ची मित्र बन जाती हैं. वे हमें सही रास्ता दिखाती हैं.

जीवन पथ पर आगे बढ़ने में हमारा साथ देती हैं. महात्मा गांधी ने कहा हैं- अच्छी पुस्तकें पास होने पर हमें भले मित्रों की कमी नही खटकती वरन मैं जितना पुस्तकों का अध्ययन करता हूँ, उतनी ही वे मुझे उपयोगी मित्र मालुम होती हैं.

स्मरण रखिये पुस्तकें जागृत देवता हैं. उनके अध्ययन, मनन, चिन्तन के द्वारा पूजा करने पर तत्काल ही वरदान पाया जा सकता हैं. हमें नियमित रूप से सद्ग्रंथों का अवलोकन करना चाहिए. उत्तम पुस्तकों का स्वाध्याय जीवन का आवश्यक कर्तव्य बना लेना चाहिए.

पुस्तकों के अध्ययन के समय मनुष्य की गति एक सूक्ष्म विचारलोक में होने लगती हैं. द्रश्य जगत शरीर यहाँ के कई व्यापार, हो ह्ल्ल्ड भी मनुष्य उस समय भूल जाता हैं.

सूक्ष्म विचारलोक में भ्रमण करने का यह अनिर्वचनीय आनन्द योगियों की समाधि अवस्था के आनन्द जैसा होता हैं. इस स्थिति में मनुष्य द्रश्य जगत से उठकर अद्रश्य जगत में सुक्ष्मलोक में विचरण करने लगता हैं और वहां कई दिव्य विचारों का मानसिक स्पर्श प्राप्त करता हैं.

यह ठीक उसी तरह हैं. जैसे योगी दिव्य चेतना का सानिध्य प्राप्त करता हैं. ध्यानावस्था में पुस्तकों का अध्ययन एक ऐसी साधना हैं जिससे मनुष्य अपने अंतबाह्य जीवन का पर्याप्त विकास कर सकता हैं.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों पुस्तकों का महत्व निबंध Essay on Importance of Books in Hindi का यह निबंध आपको पसंद आया होगा. यदि आपको पुस्तक के महत्व पर दिया गया निबंध पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें.

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