भारत के गाँव पर निबंध | Essay On Indian Village In Hindi

भारत के गाँव पर निबंध Essay On Indian Village In Hindi: दोस्तों आज हम भारतीय ग्रामीण जीवन (Indian rural life) पर निबंध यहाँ बता रहे हैं. स्कूल में गाँव पर अनुच्छेद भाषण निबंध लिखने को कहा जाए तो कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के बच्चें इस निबंध का उपयोग  कर सकते हैं.

भारत के गाँव पर निबंध Essay On Indian Village In Hindi

भारत के गाँव पर निबंध Essay On Indian Village In Hindi

नमस्कार फ्रेड्स आपका स्वागत हैं स्कूल स्टूडेंट्स के लिए भारतीय गाँव (Indian Village) पर आसान भाषा में 3 निबंध विभिन्न शब्द सीमा में दिए गये हैं. कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के छात्र छात्राओं के लिए अच्छा निबंध आपके लिए भी उपयोगी होगा.

भारत के गाँव पर निबंध – 1

गांधी जी कहते हैं अगर आपको भारत का असली दर्शन करना है तो आपको गांव जरूर जाना चाहिए! क्योंकि हमारे देश की आत्मा गांव में ही बसी हुई है। हमारे देश के अधिकतर जनसंख्या आज भी गांव में ही निवास करती है। भारत के गांव भारत के शहरों के मुकाबले छोटे तो जरूर है लेकिन जिंदगी का असली मजा वहीं आता है। क्योंकि प्रकृति का जो सौंदर्य हमें गांव में देखने को मिलता है वह और कहीं नहीं है। 

प्रकृति से गिरे हुए गांव में हरे भरे खेत खलियान, निर्मल जल लेकर बहती हुई नदियां, तालाब, कुएं, हमेशा कामकाजी और मेहनती औरतों की मुस्कान, गाय के पीछे भागते दौड़ते बच्चों की खिलखिलाहट, बूढ़े लोगों के होठों पर मुस्कान, खट्टे आम की मिठास देखने को मिलती है। 

भारत के गांव में स्वर्ग देखने को मिलता है जहां बूढ़े किसान दिनभर खेतों में काम करके शाम को अपने घर लौटते हैं तो उनके आंखों में जो गर्व और सुकून देखने को मिलता है वो कहीं और नहीं मिलता। गांव के घर घर में कुटीर उद्योग का चलन देखने को मिलता है।

 गांव की औरतें अपने हाथों से अलग-अलग तरह के सामान तैयार करती हैं। कुछ औरतें सिलाई बुनाई के काम में माहिर होती है तो कुछ मिट्टी के सामान बनाने में! गांव में एक से बढ़कर एक हुनर देखने को मिलता है। 

बच्चा हो या फिर बूढ़ा गांव में हर कोई हुनर की खान होता है क्योंकि सुख सुविधाओं के अभाव में वहां लोगों को अपने अधिकतर काम खुद ही करने पड़ते हैं। 

भारत के गाँव पर निबंध – 2

प्रस्तावना 

भारत देश को गांव का देश कहा जाता है क्योंकि इस देश में एक तिहाई जनसंख्या गांव में निवास करती है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था में भारत के गांवों का बहुत बड़ा योगदान है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और भारत के गांव में आज भी लोगों की जीविका का मुख्य स्त्रोत कृषि ही है। 

 गांव का विकास & स्थिति

 अब गांव की छवि बदल चुकी है अब हमारा गांव पहले वाला गांव नहीं रहा। शहरों के तरह अब गांव में भी पक्की सड़कें देखने को मिलती हैं सड़कों के दोनों तरफ चमचमाती लाइटें, दुकाने देखे को मिलती है। लेकिन हमारा गांव हमेशा से ऐसा नहीं था यह धीरे-धीरे विकसित हो रहा है। गांव के विकास में सरकार अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 

वर्तमान समय में गांव का आर्थिक ढांचा पूरी तरह से बदल गया है, अब लोग जब गांव से शहर आते हैं तो यह कहते हैं कि भाई, अब गांव वह गांव नहीं रहा! मतलब अब गांव में भी बिजली, चिकित्सा,  से लेकर पक्की रोड की भी सुविधा है। गांव के ढांचे को कायापलट करने में सरकार का विशेष हाथ है जो लगातार नई योजना लाकर देश को विकसित कर रही है।

आजादी के पहले और आजादी के बाद गांव की स्थिति

गांव में लोगों की कमाई का इकलौता जरिया कृषि होती है। लेकिन आजादी से पहले उसी जमीन पर अंग्रेजो का कब्जा था! अंग्रेज हमारी जमीन पर नील की खेती करते थे।

नील की खेती करने से किसानों को कोई लाभ नहीं मिलता था और उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान भी सहना पड़ता था। इतना ही नहीं दिन-रात खेतों में काम करने के बाद भी अंग्रेज कभी भी लगान वसूल करना नहीं भूलते थे। जिसके कारण दिन प्रतिदिन किसानों की हालत और भारत के गांव की हालत खराब होती जा रही थी। 

लेकिन जब हमारा देश आजाद हो गया तब कृषि व्यवस्था की जिम्मेदारी जमींदारों के पास चली गई। अब जमींदारों का जमीन पर कब्जा हो गया और किसान अब भी वैसे ही काम कर रहे थे। जमींदार किसानों को बहुत ज्यादा ब्याज पर रकम उधार देते थे। फसल अच्छी हो या ना हो जमींदार को अपना ब्याज वसूलना होता था। 

जिससे परेशान होकर देश के किसान अपना घर बार छोड़कर शहरों की ओर पलायन करना बेहतर समझते थे। परंतु वर्तमान में सरकारें विभिन्न योजनाओं का संचालन कर किसानों की स्थिति को बेहतर करने का कार्य कर रही है।

भारत के गाँव पर निबंध – 3

हमारा देश गाँवों के देश के रूप में जाना जाता हैं.  देश की 70 फीसदी आबादी गाँवों में बस्ती हैं  इसी कारण गाँवों को भारत का ह्रदय कहा गया हैं. अगर आप भारत के स्वरूप को देखना चाहते व इसकी आत्मा को समझना चाहते हैं तो  गाँवों की ओर जाना ही होगा.

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक़ भारत में तकरीबन 7 लाख छोटे बड़े गाँव हैं. जिनकी आबादी 3 से 7 हजार प्रति गाँव औसतन हैं. गाँवों का मुख्य रोजगार के साधन कृषि, पशुपालन और छोटे बड़े उद्योग धंधे होते हैं.

भागदौड़ की जिन्दगी से बहुत दूर शांत माहौल में भोले भाले चरित्र वाले लोग जिनके देशीपन मानवता की कद्र केवल अब गाँवों में ही बसकर रह गयी हैं. हरे भरे खेत, फलों के बगीचे और सुंदर प्राकृतिक दृश्य भारतीय गाँवों की विशेषताएं हैं. कही पहाड़ो की गोदी में अथवा नदियों के किनारे बसे गाँवों का मनोरम नजारा दिल को सुकून देने वाला होता हैं.

भारत की संस्कृति, त्यौहार एवं मान्यताओं को गाँवों में आज भी बड़ा महत्व दिया जाता है. हमारे परम्परागत त्योहारों का मूल स्वरूप केवल गाँवों में ही देखा जा सकता हैं.

तेजी से हो रहे नगरीकरण और औद्योगिकीकरण ने गाँव की संस्कृति पर भी प्रभाव छोड़ा हैं किन्तु फिर भी शहरों की तुलना में गाँवों ने अपनेपन को बचाए रखने में कामयाबी पाई हैं. यही वजह है कि कहते है भारत को देखना हैं तो गाँवों की तरफ जाओं.

इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि नगरीय जीवन की बजाय ग्रामीण जीवन हर पहलु से उच्च हैं. मगर इसका दूसरा पक्ष यह भी हैं कि आजादी के 75 सालों के बाद भी हमारे गाँव में बसने में किसान, कर्मकार मूलभूत भौतिक सुविधाओं से वचित रहे हैं.

गाँवों में शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, शिक्षा के क्षेत्र की तरफ जो ध्यान दिया जाना चाहिए था वह नहीं दिया गया. जिसका परिणाम यह हुआ कि आज आजीविका, शिक्षा स्वास्थ्य और उच्च जीवन स्तर की सुविधाओं के लिए करोड़ो लोग शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं.

गाँवों की समस्याओं को समाप्त करने की दिशा में सरकारे गम्भीरता से नहीं सोच रही हैं.  हालांकि 2022 तक  सभी गाँवों  को बिजली से जोड़ने की योजना से ग्रामीण क्षेत्र में लोग कृषि व अन्य कार्य आसानी से कर पाएगे.

वही शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार के लिए गाँवों में प्रबंध की निहायत कमी हैं. अशिक्षा, रूढ़िवादिता, अनियंत्रित जनसंख्या, बेरोजगारी आदि से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को गाँवों के विकास के लिए पहल करनी चाहिए.

भारत की अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से गाँवों पर टिकी हैं. कृषि प्रधान भारत देश की 60 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में बसती हैं उनका मुख्य कार्य कृषि और पशुपालन ही हैं. अतः आधे भारत की अनदेखी करके भारत प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता हैं.

समय समय पर केंद्र सरकार की ओर से गाँवों के चहुमुखी विकास के लिए कदम उठाएं गये हैं जिनमें ग्रामीण विकास मंत्रालय की स्थापना करना एक अहम निर्णय था.

बेरोजगारी व गरीबी निवारण, जवाहर ग्राम सम्रद्धि, प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना, मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, अटल आवास योजना, स्वच्छता कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, जननी सुरक्षा योजना, विद्युत् कनेक्शन योजना आदि सरकारी योजनाओं से गाँवों के स्तर को सुधारने में बड़ा लाभ हुआ हैं.

भारत के गाँवों की दशा सुधारने में किसान का अहम योगदान हैं. मगर विगत एक दशक से शहरीकरण में हुई वृद्धि ने गाँवों के विकास की यात्रा को बाधित करने का कार्य किया हैं.

रोजगार गाँवों की सबसे बड़ी समस्या हैं जिसके चलते नवयुवक काम की तलाश में शहरों की ओर आते हैं. युवाओं के पलायन को रोकने तथा गाँवों की स्थिति में सुधार के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे एवं लघु उद्योगों को स्थापित किये जाने की आवश्यकता हैं.

गाँवों के विकास के लिए गांधीजी के विचारों को अपनाने की आवश्यकता हैं. उन्होंने कहा था भारत की आत्मा गाँव में बसती हैं. गाँवों की समस्याओं को हल कर उन्हें खुशहाल करने की महत्ती आवश्यकता हैं.

मनुष्यता व भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए गाँव में अधिक से अधिक आधुनिक सुख सुविधाएँ एवं उद्योगों की स्थापना करके भारत को विकास के पथ पर तेजी से बढाया जा सकता हैं.

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