मेरा आदर्श गाँव पर निबंध Essay on my ideal village in hindi

Essay on my ideal village in hindi नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत हैं. आज का निबंध मेरे गाँव (my village) और मेरे आदर्श गाँव पर दिया गया हैं. स्कूल स्टूडेंट्स इस निबंध, भाषण, अनुच्छेद पैराग्राफ का उपयोग करते हुए अपने गृह कार्य या परीक्षा के लिए अच्छा निबंध तैयार कर सकते हैं.

मेरा गाँव पर निबंध Essay On My Village in Hindi

मेरा आदर्श गाँव पर निबंध Essay on my ideal village in hindi

my village Essay in hindi मेरा गाँव निबंध : मेरा भारत सोने की चिड़ियाँ कहलाता था, जब देश का मतलब मेरे हरे भरे गाँव तथा वहां के सुखी सम्पन्न लोग थे. भारत की 80 फीसदी आबादी इन्ही गांवों में वास करती थी, मगर आज 60 प्रतिशत लोग ही गाँवों में रहते है भारत का मूल स्वरूप अब गाँवों को छोड़कर मिलियन स्मार्ट सिटी में देखा जा रहा है तभी हम पिछड़े हैं आज मैं अपने आदर्श गाँव पर भाषण निबंध आपकों बता रहा हूँ.

मेरा गाँव पर निबंध 250 शब्दों में Short Essay on my village in 250 words in hindi

मेरे गाँव का नाम सीतापुर हैं. गाँव की आबादी लगभग पांच हजार लोगों की हैं. मेरे गाँव में सबसे ज्यादा बस्ती किसानों की हैं. मेरे गाँव में अनाज व्यापारी, लुहार, बढ़ई, धोबी, दर्जी आदि लोग भी रहते हैं. कुछ वर्ष पहले गाँव के लोगों ने मिलकर सैकड़ों पौधे लगाए थे. आज वे बड़े हो गये हैं. उनके कारण पूरा गाँव हरा भरा और सुंदर दिखाई देता हैं.

हमारे गाँव की दुकानों में जरूरी चीजे मिलती हैं. गाँव में एक पाठशाला हैं, इसमें बाहरवीं कक्षा तक पढ़ाई होती हैं. गाँव में एक दवाखाना और डाकघर भी हैं. डाकघर के पास ग्राम पंचायत का भवन हैं.

मेरे गाँव का शिवालय बहुत प्रसिद्ध हैं. वहां हर साल शिवरात्रि के अवसर पर मेला भरता हैं. मेरे गाँव के लोग बहुत मेहनती हैं. वे सब मिल जुलकर रहते हैं और जरूरत के समय एक दूसरे की सहायता करते हैं. सचमुच मेरा गाँव एक आदर्श गाँव हैं.

मेरा गाँव निबंध 300 शब्दों में, Short Essay on my village in 300 words in hindi

हमारा गाँव एक बहुत ही छोटा सा गाँव हैं. जो भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित हैं. मेरे गाँव का नाम सालवन हैं जहाँ पर हिंदी और भोजपुरी भाषा बोली जाती हैं. मेरा गाँव चारो तरफ से खेतों से घिरा हुआ हैं.

मेरे गाँव में सुबह के समय बहुत शान्ति होती है और सुबह में पक्षियों की चहचहाट बहुत ही मधुर लगती हैं. मेरे गाँव के सभी लोग मिलजुलकर रहते हैं. यहाँ अधिकतर संयुक्त परिवार हैं. यहाँ के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन हैं.

मेरे गाँव में मंदिर और मस्जिद दोनों हैं, मेरे गाँव में जात पात ऊंच नींच का भेदभाव नहीं हैं. मेरे गाँव के लोग सुलझे हुए और बहुत ही समझदार लोग हैं. मेरे गाँव की सड़कों पर रोजाना सुबह साफ़ सफाई की जाती हैं.

हमारा गाँव गंदगी मुक्त स्वच्छ गाँव हैं यहाँ 18-20 घंटे लाइट रहती हैं. मेरे गाँव में एक सरकारी व एक निजी विद्यालय हैं. मेरे गाँव की मिट्टी में एक अलग ही खूशबू है.  मैं बड़ा होकर शिक्षक बनना चाहता हूँ और मैं अपने गाँव के गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहता हूँ. मैं अपने गाँव से बहुत प्रेम करता हूँ और मेरा गाँव सबसे प्यारा हैं.

मेरा गाँव निबंध 350 शब्दों में, Short Essay on my village in 350 Words In hindi

सबसे प्यारा मेरा गाँव राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित हैं, मेरे गाँव का नाम रामपुर हैं. वैसे सभी को अपना अपना गाँव बहुत प्रिय लगता हैं. मुझे भी कई कारणों की वजह से अपना गाँव प्रिय हैं. यह उदयपुर जिला मुख्यालय से महज 15 किमी दूरी पर बसा पांच हजार की आबादी का छोटा सा गाँव हैं.

मेरे गाँव में एक छोटा सा पोखर और एक नदी है जो हमारे पीने योग्य जल का मुख्य स्रोत हैं. गाँव के प्रत्येक घर में बरसाती जल को एकत्र करने का भूमिगत जल स्रोत भी बना हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में टांका कहते हैं. सुबह सवेरे और सांझ के समय गाँव का नजारा बेहद मनमोहक और शांत होता हैं. अन्य भारतीय गाँवों की भांति मेरे गाँव का वातावरण भी बेहद स्वच्छ हैं.

सुबह सुबह कोयल के गानें की मीठी वाणी और पक्षियों की चहचहाट दिल को छू लेने वाली होती हैं. आज भी मुझे अपने गाँव की बहुत याद आती हैं. घंटो घंटो अपने गाँव के वातावरण में खो जाता हैं. ऐसा लगता है कि शहर छोडकर अपने प्रिय गाँव भाग जाऊ.

मेरे जीवन की बहुत सी यादे या यूँ कहू मेरा समूचा बचपन कही गाँव की गलियों में खो सा गया हैं. जब वे पल याद आते हैं तो पुनः बालपन के दिनों में लौट आता हूँ. अपने दोस्तों के संग खेल मस्ती भरे वो गाँव के दिन कभी नहीं भूल पाउगां.

तेज गर्मी, ठंड या फिर बरसात गाँव का मौसम हमेशा की तरह सुहावना ही रहता हैं. बरसात के दिनों में जानवरों को चराते लोग खेतों की हरियाली के बीच काम करते किसानों का दृश्य बहुत आकर्षित करता हैं. ठंड के दिनों में घर के बाहर खाट पर रजाई ओढ़े धूप सेकते बुजुर्गों की बहुत याद आती हैं. इस शहर के जीवन से तो हजार गुना बेहतर मेरा अपना गाँव हैं.

गंदगी मुक्त मेरा गाँव पर निबंध 400 शब्दों में

मेरे गाँव का नाम रामपुर है। मेरा गाँव छोटा है लेकिन एक आदर्श गाँव है। मेरा गाँव अब एक गंदगी मुक्त गाँव है। हमारे गाँव के लोगों ने गाँव को गंदगी मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गाँव के लोगों ने गाँव की स्वच्छता पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। गाँव के निवासियों ने मुख्य रूप से गाँव को गंदगी मुक्त बनाने के लिए 4 काम किए, जो गाँव को गंदगी मुक्त बनाने में सफल रहे।

यह मुख्य 4 काम थे: – 1. शौचालय का निर्माण 2. नालियां बनाना 3. कचरा पात्र रखना 4. पेड़ लगाना।

शौचालय का निर्माण: जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गाँव में पहले शौचालय के बारे में ज्यादा जागरूकता नहीं थी, लेकिन भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे शौचालय अभियान के तहत, ग्रामीणों ने शौचालय के महत्व और गाँव के सभी निवासियों को समझा – उनके घरों में शौचालय बनाया। अब हमारे गाँव के किसी भी निवासी को शौच के लिए खुले में या खेतों आदि में नहीं जाना पड़ता है।

नालियां बनाना: सभी ने अपने घरों के सामने कंक्रीट की नालियों का निर्माण किया, ताकि किसी भी घर का गंदा पानी सड़क पर न बहे और न जमा हो। यहां तक ​​कि बारिश का पानी भी एक जगह जमा नहीं होता है।

कचरापात्र रखना: हमारे गांव में 100-200 मीटर की दूरी पर एक डस्टबिन जरूर मिलेगा। अब कोई भी गाँव का व्यक्ति अपना कचरा सड़क पर या कहीं भी नहीं डालता है।

पेड़ लगाना: गाँव के लोग, खासकर गाँव के स्कूली बच्चों ने सड़क के किनारे पेड़ लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गाँव के लोगों ने अपने घर के सामने एक पेड़ भी लगाया है।

मेरे गाँव के मुखिया और अन्य लोग बहुत अच्छे हैं, उन्होंने गाँव को बेहतर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और समय – समय पर ग्रामीणों की मदद भी की।

अब हमारे गाँव में गंदगी नहीं है। अब पूरे गाँव में चारों तरफ हरियाली है, शुद्ध वातावरण है। गाँव में गंदगी खत्म होने के कारण अब हमारे गाँव में कोई भी जल्दी बीमार नहीं होता है। इस गांव के ज्यादातर लोग स्वस्थ हैं। इस तरह मेरा गाँव गंदगी मुक्त  और एक आदर्श गाँव है।

मेरा आदर्श गाँव पर निबंध 500 शब्दों में, Essay on my ideal village in 500 Words In hindi

मेरा गाँव कुछ ही घरों से बनी एक छोटी बस्ती हैं. जहाँ के घर मिट्टी के है जिनकी छतों पर खपरोल ही ठंड, गर्मी व बरसात से बचाव करते हैं. घर के आँगन में बँधी एक बैलों की जोड़ी, कुछ बकरियां व मुरगियां तथा घर के ठीक सामने लहलहाते हरे भरे खेत खलिहान, ये मेरा आदर्श एवं प्रिय गाँव है जहाँ मेरा जन्म हुआ बचपन की यादे इसी धरा में रसी बसी हैं.

ये मेरे गाँव का दृश्य है जहाँ सवेरे की शुरुआत पक्षियों की चहचाहट से होती हैं. सूर्य की लालिमा हर रोज नयें सवेरे का कुंकुम थाल लेकर स्वागत करती प्रतीत होती हैं. पेड़ों की डाल पर पंछी भौर का सत्कार करते हैं. सूरज की किरण धरती पर पड़ते ही जनजीवन अपने क्रियाकलापों में लग जाता हैं.

कृषक अपने बैलों के संग कंधे पर हल उठाए खेतों की ओर चल निकलते हैं. बैलों के गले की घंटियाँ तथा पैरों के घुंघरू एक विचित्र सरगम की तान छेड़ते हैं जो कर्णप्रिय होने के साथ साथ अपनेपन का एहसास दिलाती हैं. ऐसा सुंदर प्यारा सा हैं मेरा गाँव.

मेरे गाँव के वे सपूत तो दिन भर कड़ी धुप में अपने सुखों का नौछावर कर मिट्टी से सने शरीर के साथ खेती कर धन उपजाते है व धरा को हरी भरी बनाते हैं. उनके पसीने की सुगंध के रूप में चावल, गेहूं देशवासियों के पेट भरता हैं. गाँव के बूढ़े किसान के परि श्रम से भूखों का पेट भरता हैं, युवा शरीरो में नया रक्त प्रवाहित होता है तथा देश के प्रबुद्ध जनों के मन मस्तिष्क में नई सोच व ऊर्जा प्रदान करते हैं.

यह वर्ग देश के लोगों के लिए नई योजनाएं, नीतियाँ व समस्याओं के समाधान की राह सुझाते हैं. जिसकी बदौलत देश दुनियां में भारत की ख्याति बढ़ती हैं. इस तरह देश की तरक्की विकास तथा सम्रद्धि के साथ गाँव एवं गाँव के लोग केंद्र में होते हैं.

राजस्थान के पश्चिम इलाके में बसा मेरा गाँव फसल के लिए इंद्र देव की मेहरबानी पर ही निर्भर रहता हैं. मगर भारत सरकार तथा राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से हमारे गाँव तक नहर के पानी को पहचाने के कार्य ने ग्रामीण कृषकों को नया जीवन दिया हैं. वर्षों से सूखे पड़े खेतों में अब लहलहाती फसलें उगाई जा रही हैं. बंजर भूमि में सोना बरस रहा हैं.

ईश्वर स्वयं मानों मेरे गाँव को तरक्की के रास्ते पर लाने का जिम्मा ले चुके हैं. मुझे याद हैं कुछ वर्ष पूर्व जब गाँव में बिजली का पहला पोल लगा तो सभी ने उस दिन को दिवाली की तरह मनाया, अब हर घर रौशनी से न सिर्फ नहलाया हैं बल्कि कृषि कार्य में भी विद्युत् सहायक बनी हैं. बिजली से चलने वाली पानी की मशीनों ने इंद्र देव की निर्भरता को कुछ कम किया हैं.

गाँव के कामगार व युवा छोटा मोटा काम यही रहकर कर लेते हैं इससे बेरोजगारी कम हुई हैं. गाँव की महिलाओं को पहले पूरा दिन कई कोस दूर से पानी लाने में बिताना पड़ता था, अब तो घर के द्वार जल का नल लग चूका हैं.

हम जब कभी अपनी गाँव से दूर किसी दूसरे स्थान पर काम या नौकरी कर रहे होते हैं तब भी हमारे साथ गाँव की यादे रसी बसी रहती हैं. आदर्श गाँव का मेरा सपना हमेशा दिल में बसा रहता हैं. हर क्षण अपने गाँव अपने लोगों की कामयाबी उनकी यात्रा को लेकर मन उद्देलित हो उठता हैं. मेरी जन्मदायिनी मातृभूमि ही मेरे लिए स्वर्ग की धरा हैं जो मुझे अगाध प्रेम करती है, तथा मेरा दिल भी पूर्ण रूप से उसकी सेवा में समर्पित रहता हैं.

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आशा करता हूँ दोस्तों मेरे गाँव पर निबंध Essay on my ideal village in hindi का यह निबंध भाषण स्पीच अनुच्छेद आपकों पसंद आया होगा, यदि आपकों इस लेख में मेरे प्रिय आदर्श गाँव ग्राम की दी गई जानकारी पसंद आई हो तो प्लीज इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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