नवरात्रि पर निबंध Essay On Navratri In Hindi

नवरात्रि पर निबंध Essay On Navratri In Hindi: नमस्कार दोस्तों, आपकों मातृ शक्ति पूजन पर्व एवं सनातन परम्परा के शक्ति एवं पवित्र पर्व नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हैं. आज के निबंध भाषण (स्पीच) में हम हिन्दुओं के इस पर्व के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेगे. हमारे इस निबंध में जानेगे कि नवरात्र/ नवरात्रि का पर्व क्या हैं, इसका अर्थ महत्व, धार्मिक कथाएँ, पौराणिक मान्यताएं, नवरात्रि कब मनाया जाता हैं इसमें शक्ति की देवी दुर्गा के किन 9 रूपों की पूजा अर्चना की जाती हैं. नवरात्रि मनाने के तरीके आदि पर्व से जुड़ी समस्त प्रकार की जानकारी को हम इस निबंध में कवर करने का प्रयास करेगे. स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को नवरात्रि त्यौहार के बारे में विस्तृत जानकारी चाहते है इस निबंध को पढ़ने के बाद सब कुछ जान पाएगे, चलिए आरम्भ करते हैं.

Essay On Navratri In Hindi

नवरात्रि पर निबंध Essay On Navratri In Hindi

भारत में वर्ष के बारह महीने निरंतर पर्व त्यौहार मनाए जाते रहे हैं इस कारण भारत को त्यौहारों का देश भी कहा जाता हैं. नव रात्रि नौ दिनों तक निरंतर चलने वाला उत्सव हैं. यह वर्ष में दो बार मनाया जाता हैं. पहला चैत्र नवरात्र जिन्हें बासन्तीय नवरात्र भी कहते हैं. जो अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार मार्च अथवा अप्रैल माह में पड़ते हैं. ये केवल साधू संतों के लिए ही होते हैं. जबकि आश्विन माह में पड़ने वाले शारदीय नवरात्र अत्यधिक धार्मिक महत्व के हैं. ये अंग्रेजी कलैंडर के अनुसार सितम्बर या अक्टूबर माह में आते हैं. आश्विन प्रतिपदा को घट स्थापना के साथ ही नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो जाती हैं. अगले 9 दिनों तक देवी दुर्गा के 9 रूपों की पूजा अराधना की जाती हैं.

नवरात्रि का अर्थ होता हैं 9 राते. इसी कारण इस उत्सव का नाम भी नवरात्रि रखा गया हैं. हरेक दिन माँ दुर्गा के एक स्वरूप को समर्पित हैं. दशहरा या विजयादशमी के दिन नवरात्र की समाप्ति हो जाती हैं. अधिकतर सनातनी इन नवरात्र पर्व के दौरान व्रत रखते हैं. माँ दुर्गा की उपासना करते हैं. देवी के मन्दिरों में भजन कीर्तन चलते रहते हैं. यह त्यौहार शक्ति की पूजा का पर्व हैं, वो शक्ति जो हम सभी की पालनकर्ता है हम सभी में उनका अंश हैं. हिन्दू धर्म में नवरात्रि बेहद धूमधाम से मनाते हैं. गुजरात में इस अवसर पर गरबा नृत्य व रामायण का पाठ किया जाता हैं.

नवरात्रि के 9 दिन (Name Of Nine Days Of Navratri)

9 दिनों में माँ दुर्गा के किन रूपों की पूजा की जाती है तथा उन्हें किस नाम से जाना जाता हैं. इसे हम यहाँ दिन के हिसाब से समझने का प्रयास करेगे. पहले से नवमें दिन तक क्रमश: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री आदि देवियों की पूजा अर्चना की जाती हैं. यहाँ हम दिन प्रथम से नवम तक दिनों तथा देवी के नाम को जानेगे.

नवरात्रि का पहला दिन: पर्व का पहला दिन माँ शैलपुत्री को समर्पित हैं. इस दिन उन्ही की पूजा की जाती हैं. माँ दुर्गा की रूप शैल पुत्री को पर्वतों की पुत्री भी कहते हैं. नवरात्रि के प्रथम दिन विधिवत् इनकी पूजा अर्चना एवं व्रत रखने से विशिष्ट प्रकार की ऊर्जा का संचार होता हैं. जो हमारे मन मस्तिष्क के नकारात्मक विचारों एवं विकारों को दूर किया जा सकता हैं.

दूसरा दिन: नवरात्र का दूसरा दिन ब्रह्मचारिणी को समर्पित हैं.यह नवदुर्गा का ही एक रूप हैं. इस दिन इनकी पूजा अर्चना की जाती हैं. भक्त उपवास रखकर माँ के अनंत स्वरूप को जानने का यत्न करते हैं. संसार में कामयाबी तथा अपनी पहचान बनाने के लिए माँ ब्रह्मचारिणी का वरदान अहम माना जाता हैं.

तीसरा दिन: माँ दुर्गा के नवरात्रि पर्व का तीसरा दिन माँ चन्द्रघटा को समर्पित हैं. देवी को चन्द्रमा का स्वरूप माना जाता हैं. ये चन्द्र की चमकने के कारण इन्हें चन्द्रघंटा का नाम दिया गया हैं. मन में व्याप्त नकारात्मक विचारों जैसे घ्रणा, द्वेष, इर्ष्या आदि पर विजय पाने के लिए माँ चन्द्रघंटा से साहस मिलता हैं. इन बुरी प्रवृत्तियों से छुटकारा पाने के लिए इस दिन उपवास भी रखा जाता हैं.

चौथा दिन: नवरात्रि के चौथे दिन कुष्माण्डा देवी माँ को समर्पित हैं. इस दिन व्रत रखने से भक्त का मन अनाहत चक्र में रहता हैं. मन की पवित्रता तथा चंचलता से मुक्ति के लिए देवी की पूजा की जाती हैं. ऐसा कहा जाता हैं कि कुष्माण्डा देवी द्वारा ही सृष्टि का निर्माण किया गया था. इस कारण इन्हें आदि शक्ति भी कहा जाता हैं. आठ भुजाओं के कारण इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से भी जानते हैं. देवी के अष्ट हस्त में सभी सिद्धियों और निधियों की जपमाला हैं. इनका वाहन शेर हैं.

पांचवां दिन: भगवान स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता को माँ दुर्गा का पंचम रूप माना जाता हैं. नवरात्रि पर्व का पांचवा दिन इन्ही को समर्पित हैं. इनकी गोद में भगवान स्कंद विराजित हैं. देवी की पूजा अर्चना और व्रत रखने से भगवान कार्तिकेय भी प्रसन्न हो जाते है. कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासन देवी भी कहते हैं, इनका वाहन भी सिंह हैं, इन्हें कल्याण की अधिष्ठात्री देवी भी कहा जाता हैं. इनकी पूजा में छः मूर्तियों को सजाना जरुरी माना गया हैं.

नवरात्रि का छठा दिन: यह कात्यायनी देवी को समर्पित हैं. यह देवी पार्वती का भी नाम हैं. शक्ति के छठे स्वरूप के रूप में इनकी पूजा अर्चना की जाती हैं. इनका उल्लेख पाणिनि के महाभाष्य में भी मिलता हैं. इनका लाल रंग के साथ गहरा जुड़ाव हैं. ऐसा कहा जाता हैं देवी की पूजा से भक्त का मन आज्ञा चक्र में अवस्थित होता हैं. योग में आज्ञा चक्र का अहम स्थान हैं. इस चक्र में अवस्थित मन वाला भक्त देवी के चरणों में सब कुछ अर्पित कर देता हैं. पूर्ण आत्मदान करने वाले भक्तों को देवी साक्षात दर्शन देती हैं.

सातवाँ दिन: नवरात्र का सातवाँ दिन कालरात्रि के रूप में जाना जाता हैं. इस दिन माँ शक्ति के सातवें अवतार कालरात्रि की पूजा आराधना की जाती हैं. काल अर्थात मृत्यु का नाश करने वाली देवी के रूप में इनका ध्यान किया जाता हैं. साधक यश, वैभव और वैराग्य की प्राप्ति के लिए नवरात्र में कालरात्रि का व्रत रखकर विधि विधान से पूजा करते हैं.

नवरात्र का आठवां दिन: यह दिन देवी दुर्गा के आठवें अवतार माँ महागौरी को समर्पित हैं. इस दिन महागौरी की पूजा अर्चना की जाती हैं. शास्त्रों में इन्हें श्वेत रंग की देवी के रूप में जाना जाता हैं. साधकों को इस दिन व्रत रखकर पूजा करने से माँ महागौरी का आशीर्वाद मिलता हैं इससे मन की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

नौवा दिन: नवरात्र के अंतिम दिन माँ दुर्गा के नौवे रूप की पूजा की जाती हैं. सिद्धिदात्री देवी को यह दिन समर्पित हैं. इस दिन इन्ही के नाम का व्रत रखकर पूजा की जाती हैं. माँ के आशीर्वाद से साधक किसी भी इच्छित कर्म को कर सकते हैं. भक्तों में ऐसी शक्ति का संचार होता हैं जो कार्य करने की अभूतपूर्व क्षमता को जन्म देती हैं, इससे असम्भव लगने वाले कार्यों को भी पूर्ण किया जा सकता हैं.

नवरात्रि त्यौहार की प्रमुख कथाएं इतिहास हिस्ट्री (Major stories of Navratri festival)

भारत के साथ साथ उन देशों में भी नवरात्रि का पर्व सदियों से मनाया जाता हैं, जहाँ भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं. हमारे भारत में हजारो वर्ष से बड़े हर्ष एवं उल्लास के साथ नवरात्रि को मनाते हैं. इस पर्व को मनाने के पीछे कई धार्मिक कथाएँ और मान्यताएं जुडी हुई हैं. हिन्दू धर्म को मानने वालों की आस्था व विश्वास के मुताबिक़ दो पौराणिक कथाओं को नवरात्रि के संदर्भ के साथ जोड़कर देखा जाता हैं, ये स्टोरी शोर्ट में इस प्रकार हैं.

भगवान राम की कहानी: नवरात्रि उत्सव को मनाने को लेकर पहली कहानी प्रभु श्रीराम से जुड़ी हुई हैं. ऐसा कहा जाता हैं कि जब भगवान श्री रामचन्द्र जी भाई लक्षमण, हनुमान जी सहित वानर सेना के साथ लंका गये थे. तब आश्विन नवरात्र का समय था, रावण पर विजय पाने के उपलक्ष्य में राम में शक्ति की देवी दुर्गा की नौ दिनों तक कठोर तपस्या कर विजय होने का आशीर्वाद लिया था. तब जाकर उन्होंने दसवें दिन रावण के साथ युद्ध करते हुए उसे मार गिराया था. इस तरह आज भी उसी मान्यता के अनुसार आश्विन नवरात्र में देवी दुर्गा की पूजा आराधना की जाती हैं. तत्पश्चात रावण वध के दिन को दशहरा के रूप में मनाते हैं.

महिषासुर वध कथा: एक पौराणिक कथा के अनुसार किसी समय में महिषासुर नामक एक राक्षस हुआ करता था. उसने कठोर तपस्या से अजेय रहने का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया. तपस्या पूर्ण होने के बाद उन्होंने तीनो लोको पर अधिकार कर लिया और देवलोक पर आक्रमण कर बारी बारी से सभी देवताओं को पराजित करने लगा. दैत्य के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए सभी देव माँ दुर्गा के चरणों में जाकर उनकी स्तुति करने लगे. देवताओं की विनती पर माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और उसे मार गिराया. इसी कारण आज भी नवरात्रि के नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना कर माँ से अच्छाई की जीत की कामना की जाती हैं.

वडोदरा में नवरात्रि Navratri festival in Vadodara

भारत में अलग अलग क्षेत्रीय मान्यताओं एवं रीती रिवाजों के चलते नवरात्रि पर्व के अलग अलग रूप देखने को मिलते हैं. जिस तरह दुर्गा पूजा का उत्सव सबसे अधिक धूमधाम से पश्चिम बंगाल में मनाया जाता हैं. उसी तरह गुजरात में नवरात्रि के दिनों में गरबा नृत्य का अनूठा स्वरूप देखने को मिलता हैं. गुजरात के बड़ोदरा में नवरात्रि गरबा का सुंदर रूप हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करने वाला होता हैं. यहाँ हर दिन लाखों की संख्या में भक्त गरबा नृत्य देखने के लिए आते हैं.

लिम्का बुक्स ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी यहाँ आयोजित होने वाला गरबा कार्यक्रम उल्लेखित हैं. यहाँ एक कम्पीटीशन के रूप में गरबा नृत्य किया जाता हैं. जहाँ बेहतरीन परफोर्म करने वाले कलाकारों को पुरुस्कृत भी किया जाता हैं. गुजरात और इसके आस पास के क्षेत्रों में नवरात्रि के दिनों में गरबा और रामलीला के कार्यक्रमों की रौनक देखते ही बनती हैं. हमारे माननीय प्रधानमंत्री भी इसी शहर से आते हैं. वे भी बेहद धार्मिक स्वभाव के इंसान हैं. प्रत्येक वर्ष वे माँ दुर्गा के नवरात्र को उपवास रखते है तथा विधि विधान के अनुसार पूजा पाठ भी करवाते हैं.

निष्कर्ष/ उपसंहार (Essay On Navratri Celebration)

भक्ति और शक्ति का अनूठा संगम वर्ष में एक बार नवरात्रि के अवसर पर देखने को मिलता हैं. धर्म और आध्यात्म में विशवास करने वाले प्रत्येक भारतीय नर नारी माँ दुर्गा के उपवास रखते हैं. कुछ एक वक्त के भोजन के साथ व्रत तोड़ते हैं तो कुछ सभी 9 दिनों तक केवल जल के सहारे ही माँ का व्रत रखते हैं. भारत में नवरात्रि के दिनों में चारो और पवित्रता एवं भक्ति का मनोरम नजारा देखने को मिलता हैं.

इन नौ दिनों महानवमी भी एक बड़ा पर्व हैं. उत्तर भारत में इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता हैं. नौ कन्याओं को माँ दुर्गा के 9 रूपों का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता हैं. उन्हें भोजन कराया जाता हैं. पूर्वी भारत में नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा के लिए पंडाल सजाएं जाते हैं. जहाँ भक्त नित्य दर्शन करने आते हैं, माँ की पूजा अर्चना करते हैं तथा सुख सम्राद्धि की कामना करते हैं.

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