मेरे विद्यालय का पुस्तकालय पर निबंध Essay On School Library In Hindi

प्रिय साथियो आपका स्वागत है Essay On School Library In Hindi में  हम आपके साथ मेरे विद्यालय का पुस्तकालय पर निबंध साझा कर रहे हैं. कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 तक के बच्चों को स्कूल लाइब्रेरी महत्व पर निबंध सरल भाषा में लिखे गये  हिन्दी निबंध (पुस्तकालय एस्से)  को परीक्षा के लिहाज से याद कर लिख सकते हैं.

Essay On School Library In Hindi मेरे विद्यालय पुस्तकालय पर निबंध

मेरे विद्यालय का पुस्तकालय पर निबंध Essay On School Library In Hindi

यहाँ स्टूडेंट्स के लिए हिंदी और अंग्रेजी में अलग अलग शब्द सीमा में स्कूल की लाइब्रेरी पर निबंध दिए गये हैं. आप अपनी आवश्यकता के अनुसार शब्द सीमा का चयन कर निबंध का चुनाव कर सकते हैं.

Short My / Our School Library Essay In English

Knowledge is power students should add to their knowledge by reading extra books from the school library.

our school library is housed in a big hall. there are 80,000 books on different subjects.

reading-room is its branch. it provides newspapers, dailies, monthlies in English and Hindi to equip up with up to date news.

there is a qualified librarian as well as a peon to conduct the school library. issue and return systems are based on a decimal system.

poor students can read in the library. books are our true friends. our school library remains open before and after the school hours also.

our worthy principal takes interest in the expansion of library for the good of students.

Our School Library Essay In Hindi (पुस्तकालय पर निबंध महत्व व लाभ)

ज्ञान ही सच्ची शक्ति है छात्रों को स्कूल पुस्तकालय से अतिरिक्त किताबें पढ़कर अपने ज्ञान में को बढ़ाना चाहिए, क्योंकि ज्ञान पढ़ने व बांटने से बढ़ता है।

हमारी स्कूल लाइब्रेरी एक बड़े हॉल में स्थित है। इस पुस्तकालय में विभिन्न विषयों पर 80,000 से अधिक अच्छी किताबें हैं।

अध्ययन कक्ष इसकी शाखा है। इस कमरे में समाचार पत्र, दैनिक समाचार पत्रों, अंग्रेजी और हिंदी में नवीनतम समाचारों की पत्र पत्रिकाएँ पढ़ने की सुविधा सभी छात्रों को निशुल्क उपलब्ध रहती है।

मेरे विद्यालय के पुस्तकालय की देखरेख तथा व्यवस्था करने में हमारे लाइब्रेरियन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ये पढ़ने के लिए छात्रों को पुस्तके वितरित करने व वापिस उनको जमा करने का सारा हिसाब किताब देखते हो।

मेरे सरकारी विद्यालय के पुस्तकालय में गरीब छात्र बिना पैसा खर्च किये अपनी रूचि की पुस्तकों का अध्ययन कर सकते है।

किताबें हमारी सच्चे दोस्त होती हैं। हमारी स्कूल लाइब्रेरी की सबसे मुख्य विशेषता यह है कि यह स्कूल के घंटों के पहले और बाद में भी खुला रहता है।

हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य महोदय, किताबों के अध्ययन में गहरी रूचि लेते है. उनकी यह रूचि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय के विस्तार में बेहद सहायक है. उनके सहयोग की बदौलत ही यह पुस्तकालय शहर के सबसे बड़े पुस्तकालयों में गिना जाता है.

मेरे विद्यालय का पुस्तकालय पर 500 शब्दों में निबंध

पुस्तकालय को हम लाइब्रेरी, पुस्तक घर या किताबलय के रूप में भी जानते हैं, प्रत्येक विद्यालय का अपना एक पुस्तकालय होता हैं. मेरे विद्यालय में भी एक मिनी पुस्तकालय हैं जिसमें विविध विषयों की हजारों पुस्तकें हैं. समसामयिक, इतिहास, भूगोल, राजनीति, साहित्य, भाषा के पुस्तकें हमारे पुस्तकालय में हैं.

पुस्तकालय शब्द पुस्तक और आलय इन दो शब्दों से मिलकर बना हैं. पुस्तक का अर्थ हम सभी जानते हैं आलय का आशय घर होता हैं इस तरह किताबों के घर को पुस्तकालय कहा जाता हैं जहाँ पाठ्यक्रम के अतिरिक्त ज्ञानवर्धक पुस्तकों का संग्रह होता हैं स्टूडेंट्स अपने खाली समय का उपयोग इन पुस्तकों को पढने में लगाते हैं.

हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में तकरीबन छः हजार पुस्तकें हैं नित्य हिन्दी अंग्रेजी के समाचार पत्र व पत्रिकाएँ भी आती हैं. इसके अलावा अर्द्धमासिक व मासिक पत्रिकाएँ भी हमें पढने के लिए उपलब्ध करवाई जाती हैं.

विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा प्रत्येक कक्षा के लिए सप्ताह में एक घंटा लाइब्रेरी के लिए रखा गया हैं, जिससे सभी छात्र इसका भरपूर लाभ उठा सके.

हमारे पुस्तकालय भवन का आकार काफी बड़ा हैं जिसमें 20 कुर्सियां व 8 बैंच रखी गई हैं. कुछ बड़ी बड़ी मजे रखी गयी हैं. किताबों से भरी यहाँ 10 बड़ी अलमारी हैं इस हॉल में दस बड़े पंखे भी हैं रौशनी की अच्छी व्यवस्था हैं.

इस लिहाज से मेरे विद्यालय का पुस्तकालय एक आदर्श लाइब्रेरी की श्रेणी में आता हैं. जहाँ न केवल मनचाही पुस्तकें संग्रह में मिल जाती है बल्कि पढ़ने के लिए उचित वातावरण भी हैं.

ज्ञान पिपाशु छात्रों के लिए पुस्तकालय बेहद लाभप्रद होते हैं, यहाँ उन्हें ऐसी पुस्तकें अध्ययन के लिए मिल जाया करती हैं जो बाजार में उपलब्ध नहीं रह जाती हैं.

साथ ही विगत वर्षो के समाचार पत्रों व पत्रिकाओं को भी वह आवश्यकतानुसार पढ़ सकते हैं. पुस्तकालय का कार्य किताबों के संग्रह, संरक्षण एवं उनका प्रसार के साथ ही मनोरंजन भी होता हैं.

मेरे विद्यालय का पुस्तकालय सार्वजनिक श्रेणी का पुस्तकालय हैं जिसमें न केवल स्कूल में पढने वाले छात्र छात्राएं पढ़ते हैं बल्कि स्कूल के समय के बाद ग्रामीण लोग, पूर्व विद्यार्थी तथा शिक्षक भी ज्ञान धन की प्राप्ति के लिए पढने आते हैं.

हमारे देश में पुस्तकालयों की स्थापना एवं उनके संचालन की व्यवस्था दयनीय हैं मगर मेरे विद्यालय की प्रबंधन समिति के अथक प्रयासों एवं निजी योगदान के चलते हम लाइब्रेरी के महत्व को समझ सकते हैं.

एक आदर्श पुस्तकालय से यह अपेक्षा की जाती हैं कि उनमें सभी स्तर के बच्चों के लिए पुस्तकें हो. प्राथमिक शाळा के बच्चों के लिए बाल पत्रिकाओं के लिए शोध कर्ताओं के लिए शोध पत्र तक की सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए.

साथ ही पुस्तकालय अध्यक्ष को ऐसी पुस्तकें कभी नहीं लानी चाहिए जो बालक के विकास में बाधक हो तथा उनके अपचरित्र का निर्माण करने वाली हो.

लाइब्रेरी में अश्लील ज्ञान व बातों की पुस्तकों का कोई स्थान नहीं होता हैं. साथ ही पुस्तकालय के लिए पुस्तकों का चयन करने से पूर्व अच्छी जिल्द, पुस्तक का पेपर अच्छा हो, पेज कटे फटे न हो तथा उसकी प्रिंटिंग सही तरीके से हो इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

एक पुस्तकालय न सिर्फ स्कूल व कॉलेज में पढने वाले बच्चों के लिए बल्कि साधारण व्यक्ति के लिए ज्ञान प्राप्ति के उद्देश्यों को साधने वाला होना संख्या हैं. हमारी व्यवस्था में पर्याप्त संख्या में पुस्तकालय तथा उनमें पढने वाले लोगों की अच्छी संख्या का होना बेहद आवश्यक हैं.

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