सुनामी पर निबंध हिंदी में | Essay on Tsunami in Hindi

सुनामी पर निबंध हिंदी में Essay on Tsunami in Hindi: प्रिय विद्यार्थियों आज के निबंध लेख में आपका स्वागत हैं. यहाँ Essay on Tsunami दिया गया हैं. सुनामी विकराल प्राकृतिक आपदा हैं सुनामी लहरों की विनाशलीला 26  दिसम्बर  2004 को दक्षिण पूर्व एशिया के 11 देशों  में कहर बरफाया और इस हादसे में एक  लाख  पचास हजार  लोगों की जान गई थी.  सुनामी की परिभाषा घटनाएं विशेषता प्रोजेक्ट क्यों आती है बचने के १० उपाय हम इस निबंध में चर्चा करेगे.

Essay on Tsunami in Hindi

Essay on Tsunami in Hindi

हमने सुनामी पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए प्राकृतिक आपदा का निबंध लिखा हैं. विभिन्न शब्द सीमा में इस निबंध को सरल रूप में आपके लिए तैयार किया गया हैं. हम उम्मीद करते है यह आपकों पसंद आएगा.

सुनामी पर निबंध 300 शब्दों में Tsunami par nibandh

तेज समुद्री लहरों का उठा तूफ़ान सुनामी कहलाता है जिसका केंद्र बिंदु सागर के तल में होता हैं, तथा सागर में भूकम्प आने से सुनामी का जन्म होता हैं. समुद्र में आने वाले भयंकर भूकम्प की बदौलत लहरें तीव्र गति से धरातल की ओर बढती है तथा अपने क्षेत्र में आने वाली समस्त चीजों को तबाह कर देती हैं. एक जलीय प्रलय के रूप में सुनामी बड़ी प्राकृतिक आपदा हैं.

सबसे पहले सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदा के बारे में दुनिया को बताने वाले ग्रीक लोग थे. उनका मानना था कि ये एक भूकंप की तरह ही हैं. भूकम्प धरातल की हलचल को कहते है जबकि महासागरों में आने वाले भूकम्प सुनामी का रूप ले लेते हैं.

अब तक के ज्ञात इतिहास में सबसे भयानक सुनामी वर्ष 1958 में 9 जुलाई के दिन अलास्का के पास स्थित लिगुआ खाड़ी में आई थी. एक खतरनाक भूकंप के चलते एक पर्वत इस खाड़ी में गिर गया, जिसके चलते 524 मीटर ऊंची जल धारा का निर्माण हो गया. अमूमन सुनामी उन क्षेत्रों के लिए विनाशकारी होती है जो समुद्र तट पर बसे होते हैं.

वर्ष 2004 में भारत में आई सुनामी अब तक के इतिहास की सबसे विनाशकारी आपदा थी. इंडोनेशिया के पास इसका केंद्र बिंदु था. इस आपदा में करीब दो लाख लोगों ने अपनी जा गंवाई. हजारों किमी की यात्रा करके यह सुनामी थाईलैंड भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव के तटीय इलाकों को पूरी तरह तहस नहस कर गई.

सुनामी पर निबंध 600 शब्दों में Tsunami Essay

सूनामी जापानी भाषा का शब्द है जो दो शब्दों सू यानि बंदरगाह और नामी अर्थात लहर से बना हैं. सूनामी लहरें भूकम्पों ज्वाला मुखियों के फटने अथवा जलगत भूस्खलनों के कारण पैदा होती हैं. और इन लहरों की ऊंचाई 15 मीटर या उससे अधिक होती हैं. और ये तट के आस पास की बस्तियों को तबाह कर देती हैं.

इतिहास में दर्ज सूनामी लहरें मिनटों में ही तट पर पहुच जाती हैं. जब ये लहरें उथले पानी में प्रवेश करती हैं, तो भयानक शक्ति के साथ तट से टकराकर कई फुट या कभी कभी दसियों फुट ऊँची उठती हैं. किसी बड़े भूकम्प के आने  कई घंटों बाद तक सुनामी का खतरा बना रहता हैं.

दूर गहरे समुद्र में शक्तिशाली भूकम्प आने से भी सूनामी उत्पन्न होती हैं. इन भूकम्पों के कारण उत्पन्न लहरे कई सौ किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तट की ओर दौड़ती हैं और भूकम्प आने के कई घंटे बाद ही तट तक पहुचती हैं. साधारण ज्वार भाटे की लहरे छोटी होती हैं. और वे बार बार आती रहती हैं. तथा उनकी ऊँचाई भूमि की सतह के बराबर होती हैं. इसके विपरीत गहरे समुद्र में सुनामी लहरों की उत्पत्ति के समय समुद्र में कोई हलचल न होने के कारण ये दिखाई नहीं देगी.

उत्पत्ति के समय इन लहरों की लम्बाई 100 किमी तक होने के बावजूद बीच समुद्र में ये लहरे बहुत ऊँची नहीं उठती हैं. और कई सौ किमी की रफ्तार से दौड़ती हैं. यदि लोस एंजलिस में कोई भूकम्प आता हैं तो किसी जेट विमान को लोस एंजलिस से टोक्यों की दूरी पार करने में जितना समय लगता हैं उससे कम समय में सूनामी टोक्यो पहुच जाती हैं.

सूनामी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य (Fact About Tsunami in Hindi)

  • कुछ सूनामी लहरें वृहदाकार होती हैं. तटीय क्षेत्रों में इसकी ऊँचाई 10 मीटर अथवा उससे अधिक हो सकती है और मुख्य भूमि में कई सौ मीटर अंदर प्रवेश कर सकती हैं.
  • निचले तटीय इलाके सुनामी की चपेट में आ सकते हैं.
  • सूनामी लहरें एक के बाद एक आती रहती हैं. प्रायः पहली लहर सबसे विशाल नहीं होती हैं. पहली लहर आने के बाद कई घंटों तक बाद में आने वाली लहरों का खतरा बना रह सकता हैं.
  • तटवर्ती मैदानी इलाकों में सूनामी की रफ्तार 50 किमी प्रति घंटा हो सकती हैं यानि कि आदमी के दौड़ने की रफ्तार से भी तेज होती हैं.
  • कभी कभी सूनामी के कारण समुद्र तट का पानी घट जाता हैं और समुद्र तट नजर आने लगता हैं. इसे प्रकृति की ओर से सूनामी आने की चेतावनी के रूप में ले.
  • कुछ सूनामी लहरें अत्यधिक शक्तिशाली होती हैं. सूनामी लहरें अपनी भयावह शक्ति से कई टन वजन की विशाल चट्टानों, नौकाओं तथा अन्य प्रकार के मलबे को मुख्य भूमि में कई मीटर अंदर तक धकेल देती हैं. घर और अन्य इमारतें ध्वस्त हो जाती हैं.तैर रही सामग्री पानी में जबर्दस्त शक्ति के साथ बहने लगती हैं और इनकी चपेट में आकर लोगों की मृत्यु होसकती हैं.
  • सूनामी लहरें दिन या रात किसी भी समय आ सकती हैं.
  • सूनामी लहरें समुद्र से मिलने वाली नदियों और जलधाराओं में पहुचकर में पहुचकर उनमें उफान पैदा कर सकती हैं.

सूनामी का पता लगाना

उपग्रह प्रोद्योगिकी के प्रयोग से सूनामी संभावित भूकम्पों की तुरंत जानकारी देना संभव हो गया है.  चेतावनी का  समय  तट रेखा से अभिकेन्द्र की दूरी पर निर्भर करता हैं. उन तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाली चुनिन्दा समुदायों को जहाँ सूनामी कुछ घंटों तक आतंक फैला सकती हैं. सूनामी के अनुमानित समय के बारे में चेतावनी दे दी जाती हैं.

तटीय ज्वार जाली का निर्माण करने से सुनामियों को तट के निकट रोका जा सकता हैं किन्तु गहरे समुद्र में इसका उपयोग करना व्यर्थ होगा. सूनामी सतर्कता यंत्र समुद्री केबलों के जरिये भूमि से जोड़े जाते हैं और फिर उन्हें समुद्र में 50 किमी तक आड़े तिरछे लगाया जाता हैं. सूनामीटर समुद्र तल में होने वाली हलचल की चेतावनी भेजते हैं जिसे उपग्रहों के माध्यम से प्रसारित कर दिया जाता हैं.

सूनामी आने से पहले क्या करे

  • यह पता करे कि क्या आपका घर, स्कूल, कार्यस्थल या वह स्थान जहाँ आपका आना जाना लगा रहता हैं, सूनामी के संकट से प्रभावित क्षेत्र के तहत आता हैं या नहीं.
  • यह भी पता लगाइये कि जहाँ आपका घर हैं वहां की सडक की समुद्र तल से ऊँचाई कितनी हैं तथा उन संकट ग्रस्त जल क्षेत्रों से आपकी कितनी दूरी हैं.
  • यदि आपका निवास स्थान, ऑफिस अथवा आपकी स्कूल सूनामी के खतरे वाले क्षेत्र में आती हैं तो वहां से बचाव के रास्ते के सम्बन्ध में आपकों पूर्व योजना बना लेनी चाहिए.
  • बचाव के लिए रस्ते को निकलने का अभ्यास करावे.

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