पंचतत्व क्या है इनका महत्व five Elements Panchtatva Kya hai In Hindi

पंचतत्व क्या है इनका महत्व five Elements Panchtatva Kya hai In Hindi केवल अग्नि ही पंचतत्व में प्रमुख है जो भय उत्पन्न करती है. हम सांस लेते है, पृथ्वी पर पैर रखते, जल में स्नान करते है. हम केवल अग्नि के निकट सम्मानपूर्वक जाते है. यही एक ऐसा तत्व है जो सदा जागरूक रहता है. और दूर से देखने में सदा सुखकारी लगता है. कभी कभी शीतप्रधान देशों को छोड़कर हम जिस वायु में सांस लेते है, उस वायु को देख नही पाते है और कौन कहेगा ऐसा द्रश्य मनोहर होता है.

पंचतत्व क्या है महत्व five Elements Panchtatva Kya hai In Hindi

पंचतत्व क्या है इनका महत्व five Elements Panchtatva Kya hai In Hindi

छिती जल पावक गगन समीरा, पंचतत्व रचित अधम सरीरा” यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से हमारी काया बनी हुई हैं. इन पाँचों के संयोग से ही हमारा शरीर बनता है इसका पालन पोषण होता है और अंत में इन्ही में समाहित हो जाता हैं.

हम पृथ्वी को घूमते हुए देख नही पाते है. उसके भीतर से ही जन्म लेने वाले वृक्ष या अन्यान्य वनस्पतियाँ इतने धीरे धीरे बाहर निकलती है.कि उन्हें देखने पर आनन्द नही आता है.

पृथ्वी को देखने पर किसी का धैर्य छुट सकता है. क्युकि वह तो अनंत विशाल अग्रिशिखाओं की एक पतली पपड़ी जैसी है. जिसका निर्माण अपेक्षाकृत अवर्चिन है. इन द्रश्यो के पीछे लालायित रहना धैर्य का धौतक नही है.

नदी के रूप में बहने वाला जल एकाध क्षण के लिए देखते समय अवश्य ही रमणीय प्रतीत होता है. फिर उसके बाद जल की अनियमित गतिशीलता थकान वाली हो जाती है.

विविधता तथा रमणीयता की द्रष्टि से केवल सम्पूर्ण समुद्र का जल ही अग्नि की प्रतिस्पर्धा कर सकता है. किन्तु एक इमारत के प्रज्वलित होते समय जिस प्रकार का द्रश्य दिखाई देता है, उसकी तुलना में कम रोमांचित प्रतीत होता है. जहाँ तक अन्य बातों का सम्बन्ध है.

समुद्र की नीरसता तथा उकलाहट के अलग अलग अवसर होते है. भले ही वह पूर्ण रूप से प्रशांत लगता हो. किसी जाली या झंझरी के भीतर रखी हुई थोड़ी सी अग्नि तब तक मनोरंजक और प्रेरक लगती है.

जब आप उसे बाहर न निकाले इस प्रकार की अग्नि एक मुट्ठी भर मिटटी अथवा गिलाश भरे जल के समान है. जो आँखों के लिए आनन्द का विषय तो बनता ही है. वह किसी गौरवपूर्णत महता का संकेत भी करती है.

अन्य रूपों में भले ही वे प्रचुर नमूनों के रूप में विद्यमान हो. अग्नि की पवित्रता की अपेक्षा हमे कम प्रभावित करते है.पौराणिक आख्यान के मुताबिक़ केवल अग्नि को ही स्वर्ग से पृथ्वी पर उतारा गया था. अन्य पंचतत्व शुरुआत से ही यही पर विद्यमान थे.

What are the five elements of the body ?

हमारे ऋषि मनीषियों और ग्रंथों में पञ्चतत्व अर्थात पांच तत्वों के बारे में बताया गया हैं जो है भूमि अथवा धरती, आकाश या गगन, वायु, अग्नि और जल. मानव जीवन की उत्पत्ति सम्पूर्ण जीवन का पालन इन्ही तत्वों पर आधारित हैं.

न केवल जीवन के लिए इन पांच तत्वों का होना जरूरी हैं, बल्कि जीवनोपरांत भी हमारी देह इन पंचतत्वों में विलीन हो जाती हैं. मुनियों ने पंचतत्वों को सरल शब्दों से समझाने के लिए इन्हें भगवान कहा हैं. यानी भ से भूमि, ग से गगन, वा से वायु अ से अग्नि और न से नीर या जल.

पंचतत्वों के गुणधर्म

  • पृथ्वी– धैर्य और सहन शक्ति की पर्याय धरती की सतह पर करोड़ो जीवों का जीवन हैं. इसे से उत्पन्न अन्न से हम अपना पेट भरते हैं. पीने योग्य जल और वायु भी इसी के वातावरण में मिलती हैं.
  • जल – जीवन के महत्वपूर्ण तत्वों में जल भी एक हैं, इसके बिना महज कुछ घंटे या दिनों में ही जीवन लीला समाप्त हो जाएगी. मंगल आदि ग्रहों पर जीवन इसलिए नहीं हैं क्योंकि वहां जल नहीं हैं. इसीलिए तो कहा जाता है जल ही जीवन हैं, बिन जल सब सून.
  • अग्नि – यहाँ अग्नि का आशय ऊर्जा और शक्ति से हैं. ऊर्जा जो हमें भोजन और सूर्य से प्राप्त होती हैं. पृथ्वी पर विद्यमान जल और वायु को पाकर स्वयं को उर्जावान महसूस करते हैं. सजीवों और निर्जीवों में मूल अंतर उर्जा का ही हैं. हमारे लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य हैं.
  • वायु तत्व- सांस लेने के लिए प्राणवायु जरूरी हैं, इसकी अल्पमात्रा में दम घुटने लगता हैं. यह हमारे जीवन के लिए आवश्यक पंचभूतो में एक हैं. वायुमंडल में उपलब्ध कुल गैसों में केवल ऑक्सीजन ही जीवनदायिनी है इसे प्राणवायु भी कहते हैं.
  • आकाश तत्व– पंचतत्वों में अंतिम तत्व आकाश या गगन हैं जो सभी तत्वों में संतुलनकारी माना जाता हैं. यह हमारे वायुमंडल और ब्रह्मांड को स्थायित्व देता हैं.

आचार्य चरक ने इन पांच तत्वों के संगम से सभी स्वादों का निर्माण भी बताया हैं. उनके ग्रन्थ चरक संहिता में प्रमुख तत्वों के मिलन से बने स्वादों के निम्न सूत्र बताये गये हैं.

  1. मीठा-पृथ्वी+जल
  2. खारा- पृथ्वी+अग्नि
  3. खट्टा- जल+अग्नि
  4. तीखा-वायु+अग्नि
  5. कसैला-वायु+जल
  6. कड़वा-वायु+आकाश

पंचतत्वों का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व Effect and importance of Panchatatva on human body

जब हम देह शरीर या काया की बात करते है तो यह पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि इन चारों के समागम का रूप हैं. हमारा शरीर रस, रक्त, मांस, भेद, अस्थि, मज्जा, एवं शुक्र इन सात धातुओं का संयोग है जिसे हम भौतिक अथवा स्थूल शरीर कहते हैं.

आकाश, वायु, अग्नि, जल और अग्नि इन्हें सूक्ष्म भूत या तत्व कहा जाता है. प्रकृति में विद्यमान इन्ही तत्वों से शरीर बनता हैं अल्प मात्रा में इनकी उपस्थिति के उपरान्त ये बेहद शक्तिशाली होते हैं. इन पंचभूतों का प्रकृति के साथ सही सामजस्य बिठाया जाए तो व्यक्ति में बड़ी आंतरिक शक्ति पैदा की जा सकती हैं.

अब हम इन सभी पांच तत्वों के हमारे मानव शरीर के बनने से लेकर इस पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानेगे.

आकाश तत्व का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व:- Effect and importance of sky element on human body

हमारे हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति हुई हैं. आकाश एक अणु विहीन तत्व हैं. इसकी अनुपस्थिति में मानव शरीर ठीक वैसा ही हो जब हम उपवास रखते हैं आमाशय को अन्न न मिले तो सारी ऊर्जा क्षीण हो जाती हैं. इस तरह जीवन में शक्ति का संचार का श्रेय आकाश को जाता हैं.

यह हमारे शरीर को निर्मल कर शेष चार तत्वों को उनके यथास्थान और स्थिति को बनाए रखने में भी मदद करता हैं. आकाश को सभी तत्वों को जन्म देने वाला और अंत में सभी को अपने में समा देने वाला कहा गया हैं. आकाश का आशय शून्य होता हैं अर्थात एक खालीपन जहाँ किसी की उपस्थिति नहीं हैं.

जिन व्यक्तियों में आकाश तत्व की प्रधानता होती है वे सदैव प्रसन्नचित, स्फूर्त, उर्जावान, और हल्के फुल्के प्रतीत होते हैं जबकि इसकी कमी वाले व्यक्ति थके हारे नाखुश, ऊर्जा विहीन और आलस्य में रहते हैं.

धार्मिक ग्रंथों में देवताओं और ऋषि मुनियों की अलौकिक शक्तियों के बारे में हम सभी ने पढ़ा हैं. कहते है वे उपवास/ तपस्या आदि से अपनी देह में आकाश तत्व में वृद्धि करते थे.

इसकी मदद से ही वे मनचाहे स्थान पर क्षणभर में आ जा सकते थे, उड़ सकते थे क्षमता से अधिक भारी चीज उठा लेते थे किसी की देह में प्रविष्ट हो जाया करते थे. इसलिए कहा जाता है जो मानव आकाश तत्व की प्रधानता को बढ़ा लेता है वह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से अजेय हो जाता हैं.

वैसे देखने में आकाश सभी पंचतत्वों में विस्तृत हैं मगर इसकी एक विशेषता यह भी है कि यह बेहद सूक्ष्म से सूक्ष्म स्थान में भी प्रवेश कर सकता हैं.

आकाश तत्व की मात्रा अपने शरीर में बढ़ाने के लिए ढीले ढाले सूती वस्त्र पहनना चाहिए साथ ही अधिक समय तक खुले गगन में विचरण करना, स्वच्छ वातावरण में अधिक समय व्यतीत करना, नियत अवधि में व्रत रखना और अपने भोजन को शुद्ध व सात्विक रखकर इस तत्व की वृद्धि की जा सकती हैं.

वायु तत्व का मानव शरीर पर प्रभाव व महत्व- Effect and importance of air element on human body

इससे पूर्व हमने प्रमुख पंचतत्व आकाश के बारे में जाना हैं, अब हम वायु अर्थात हवा के विषय में जानेगे. यह आकाश के उद्भव के साथ ही स्वयं प्रतिस्थापित होने वाला तत्व भी हैं.

वायु अन्य तत्वों अग्नि, जल और पृथ्वी की निर्माणकर्ता भी हैं. मानव जीवन अन्य तत्वों जैसे अन्न, जल, धूप के बगैर कुछ समय के लिए जीवित रह सकता हैं मगर वायु के अभाव में जीवन असम्भव हैं.

वायु तत्व से जीवन में शक्ति और स्फूर्ति मिलती हैं इसके लिए जरूरी है मिलने वाली वायु शुद्ध हो. दूषित वातावरण मे रहने वाले लोगों के साथ अक्सर स्वास्थ्य समस्याएं देखी जाती हैं कई भयानक बीमारियाँ प्रदूषित वायु के कारण मनुष्य को अस्वस्थ बना रही हैं.

आज भी गाँवों में बसने वाले लोग सुविधासम्पन्न शहरों में बसने वाले लोगों से अधिक लम्बी आयु जीते हैं, क्योंकि वे अपना अधिकतर जीवन खुले प्राकृतिक माहौल में बिताते हैं स्वच्छ भोजन और स्वच्छ भोजन दीर्घायु प्रदान करते हैं.

अग्नि तत्व का शरीर पर प्रभाव व महत्व :- Effect and importance of fire element on body

अग्नि या ऊष्मा हमें कई स्रोतों से मिलती हैं जैसे पके फल, अनाज, जल आदि से भी इस तत्व की पूर्ति हो जाती हैं. सूर्य की धूप में इन फलों और अनाजों के पकने के कारण इनमें बड़ी मात्रा में ऊर्जा का भंडार होता हैं. पंचतत्वों में वायु के पश्चात अग्नि तत्व आता हैं जो समान रूप से अन्य तत्वों की तरह महत्वपूर्ण हैं.

संसार का अस्तित्व अग्नि पर ही टिका हैं इसके विभिन्न रूपों में हम ऊर्जा पाते हैं. सूर्य से धूप से मिलने वाली विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाने में कारगर हैं. साथ ही धूप के कारण शरीर में विभिन्न रोगाणु और कीटाणुओं से भी बचाव हो पाता हैं.

नित्य सूर्य की रोशनी से शरीर में वात पित्त और कफ की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता हैं. सूर्य के इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए हमारे ऋषि मुनियों ने सुबह के समय योग और सूर्य नमस्कार की पद्धति खोजी.

जल तत्व का शरीर पर प्रभाव व महत्व- Effect and importance of water element on the body

हमारा शरीर 70 प्रतिशत जल से ही बना हैं, साथ ही हम पानी पीकर, फल सब्जियों आदि से भी शरीर में जलापूर्ति करते हैं. पंचतत्व में जल का चौथा स्थान है यह पृथ्वी पर मानव समेत अधिकांश जीवों का हेतु भी हैं. शरीर की आवश्यकता से लेकर इसकी स्वच्छता तक जल हमारे लिए उपयोगी हैं.

शरीर में विद्यमान जल वांछित उपयोग के पश्चात पसीने, श्वास और पेशाब के जरिये निष्कासित कर दिया जाता हैं. सवेरे जल्दी उठकर पानी पीने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं. साथ ही स्वस्थ रहने के लिए ठंडे जल से नहाना लाभकारी हैं.

हमारा जीवन प्रत्येक दृष्टिकोण से जल पर ही आश्रित हैं. अपनी भूख मिटाने के लिए जिन अनाज का भक्षण हम करते हैं वह जल के बिना उगाया जाना सम्भव नहीं हैं. मनुष्य को स्वस्थ और सुखी जीवन जीने के लिए पंचतत्व के इस शरीर को प्राकृतिक वातावरण के मध्य संतुलित रूप से जीवन बिताना चाहिए.

पृथ्वी तत्व का शरीर पर प्रभाव व महत्व- Influence and importance of the earth element on the body

धरा धरती पृथ्वी जिसे हम अपनी माँ कहकर पुकारते हैं पंचतत्व का पांचवा और आखिरी तत्व हैं. हम इसी धरती माँ की गोद में जन्म लेते हैं पलते बड़े होते हैं और आखिर में इसी की गोदी में समा जाते हैं. हमारे समस्त क्रियाकलाप यही सम्पन्न होते हैं.

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