गणेशोत्सव पर निबंध | Ganesh Utsav Essay In Hindi

Ganesh Utsav Essay In Hindi: नमस्कार दोस्तों गणेशोत्सव पर निबंध में आपका स्वागत हैं, हिन्दुओं के प्रमुख इष्ट देवों में गणेश जी प्रमुख हैं, इनके जन्म दिवस को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता हैं, स्कूल के बच्चों को गणेश चतुर्थी या गणेश उत्सव पर निबंध, भाषण, स्पीच, अनुच्छेद, लेख, आर्टिकल यहाँ सरल भाषा में उपलब्ध करवा रहे हैं.

Ganesh Utsav Essay In Hindi

Ganesh Utsav Essay In Hindi

हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक गणेश जी है, जिन्हें गौरी व शिव के पुत्र माने जाते हैं. एक हिन्दू कोई भी शुभ कार्य करने से पूर्व गणेश जी का स्मरण करता है, ऐसा कहा जाता है कि वे समस्त संकटों को दूर करने वाले है इस कारण उन्हें विघ्नहर्ता के नाम से भी जानते हैं. रिद्धि सिद्धि के स्वामी गणपति, गजानन, गौरीपुत्र आदि नामों से भी जाना जाता हैं. इन्हें बुद्धि व विद्या के देवता के रूप में याद किया जाता हैं.

गणेशोत्सव (गणेश + उत्सव) एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व हैं, वैसे तो इसे भारत समेत दुनियां के कई देशों में मनाया जाता हैं, मगर महाराष्ट्र का गणेशोत्सव विश्व विख्यात हैं. हिन्दू कलैंडर के मुताबिक़ यह भादों माह की कृष्ण चतुर्थी से अनन्त चतुर्दशी तक 11 दिनों तक मनाया जाता हैं. इस अनंत चतुर्दशी को एक अन्य नाम गणेश चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता हैं.

मंगलकारी देव के रूप में गणेश जी समस्त भारत में पूजे जाते हैं. दक्षिण भारत में मैसूर तथा तंजोर के गणेश मन्दिरों में नृत्य मुद्रा में गणपति की मूर्तियाँ बेहद आकर्षक हैं. यज्ञ, हवन, विवाह, सत्कार्य आदि की सफल फल के लिए पूर्व में गणपति की कामना की जाती हैं. महाराष्ट्र में सात वाहन, राष्ट्रकूट, चालुक्य शासकों ने बाद में महाराज शिवाजी एवं 20 वीं सदी में लोक मान्य तिलक ने गणेश उत्सव को नई दिशा प्रदान की.

गणेशोत्सव एक वर्षाऋतु पर्व है जो सुहावने एवं हरे भरे वातावरण में भक्ति एवं आस्था का मधुर स्वरूप भर देता हैं. व्यवस्थित रूप से गणेशोत्सव को स्थापित करने का श्रेय तिलक को जाता हैं. भादों कृष्ण चतुर्थी को साधक गणेश प्रतिमाएं अपने घर लाते हैं. गणेश स्थापना के इस अवसर पर शहर, गली हर ओर गणपति बप्पा मोरिया के गान से आसमान गूंज उठता हैं.

लोग अपने जीवन के सुख दुःख, विरह, बाधाओं को भूलकर गणपति के सम्मान में गीत, भजन गाने में व्यस्त नजर आते हैं. भक्ति गीत कीर्तन के कार्यक्रम रात भर गुजते हैं. चतुर्दशी तिथि के अवसर पर गणेश प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर नगर में भव्य गणपति यात्रा निकलती हैं. विभिन्न तरह के सजे धजे रथों पर आरूढ़ गणपति को जल स्रोत नदी, समुद्र आदि की तरफ ले जाया जाता हैं. इस तरह गणपति विसर्जन के साथ ही 11 दिनों का गणेशोत्सव समाप्त हो जाता हैं.

गणेशोत्सव का इतिहास (history of ganesh utsav in hindi)

महाराष्ट्र में गणेश उत्सव का अतीत चार सौ वर्ष प्राचीन माना जाता हैं. मराठा साम्राज्य के संस्थापक शिवाजी महाराज ने इस उत्सव की नींव रखी थी. एक लम्बे दौर तक यह पर्व केवल राजपरिवार के कुलदेवता के पर्व के रूप में पारिवारिक सीमा तक ही सिमित था. पेशवा शासकों के अंतिम समय बाद तक यह राजपरिवार तक ही सिमित रहा, मगर 1893 में बालगंगाधर तिलक ने इसे लोकपर्व के रूप में पुनः स्थापित किया.

शिवाजी की माताजी जीजाबाई ने गणपति नामक कस्बें की स्थापना की थी. मगर तिलक ने 1893 इसे जन आंदोलन और जन जागृति का एक माध्यम बनाया. हिन्दू समाज जातियों एवं कुनबों में विभक्त था, दलित, ब्राह्मण के भेद समय समय पर उभर आते थे. अतः गणेश जी को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित कर गणेशोत्सव को धार्मिक कर्मकांड से बाहर निकाल कर समाज में व्यापत छुआछूत, ऊंचनीच के भेदभाव को मिटाने तथा आम आदमी को संगठित करने का जरिया बनाया, इसका व्यापक उद्देश्य आमजन को ब्रिटिश हुकुमत के प्रति आंदोलित करना था.

गणेशोत्सव का महत्व (importance of ganesh utsav in hindi)

राष्ट्रीय आंदोलन के परिपेक्ष्य में तिलक का गणेश उत्सव महज एक धार्मिक पर्व न रहकर सामाजिक एवं सांस्कृतिक पर्व बन गया. जो सभी वर्गों के लोगों को एक करने में पूर्ण सफल रहा था. इसके उदाहरण आज भी देखने को मिलते हैं. मुंबई के गणेशो त्सव में जितनी श्राद्ध भक्ति से हिन्दू शामिल होते है उतने ही मुस्लिम, सिख, जैन भी होते हैं.

कवि गोविन्द गणेश उत्सव के कार्यक्रमों में राम रावण कथा एवं उनकी कविताओं को सुनकर वीर भाव से उठ खड़े होते थे, अंग्रेजों की मानसिकता पर इस पर्व का कितना व्यापक असर पड़ा इसे रोलेट कमिशन की रिपोर्ट में समझा जा सकता हैं वे कहते है कि गणेश उत्सव के कारण सरेआम युवा सड़कों पर अंग्रेज विरोधी गीत गाते है,

स्कूलों में पर्चे बांटे जाते हैं तथा शिवाजी की तरह विदेशों सत्ता को खदेड़ने के लिए हर युवक तैयार हो रहा हैं. गणेशोत्सव में क्रन्तिकारी भाषण देने वालों में वीर सावकर, लोकमान्य तिलक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बैरिस्टर जयकर, रेंगलर परांजपे, पंडित मदन मोहन मालवीय, मौलिकचंद्र शर्मा, बैरिस्ट चक्रवर्ती, दादासाहेब खापर्डे और सरोजनी नायडू जैसे क्रांतिकारी शामिल थे.

Ganesh chaturthi par Hindi mein nibandh।। गणेश चतुर्थी पर निबंध

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