हिंदी दिवस पर भाषण स्पीच – Hindi Diwas Speech In Hindi 2021

फ्रेड्स 14 सितम्बर को हिंदी दिवस आ रहा हैं. जरुर आप हिंदी दिवस पर भाषण – Hindi Diwas Speech In Hindi 2021 की तैयारी में लग गयें होंगे. यह हमारी जुबान हिंदी के सम्मान का दिन है, हम में से हर कोई को हिंदी दिवस पर स्पीच, भाषण, कविता, शायरी, निबंध आदि इस अवसर पर अवश्य ही बोलने चाहिए. अपनी मातृभाषा को भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में देखना हर हिन्दीभाषी का सपना हैं. ठीक ऐसा ही एक ड्रीम 14 अगस्त 1949 को पूरा हुआ था, जब इतिहास में पहली बार हिंदी को औपचारिक तौर पर भारत की राजभाषा बना दिया गया.

हिंदी दिवस पर भाषण – Hindi Diwas Speech In Hindi 2021

हिंदी दिवस पर स्पीच - Hindi Diwas Speech In Hindi 2021

स्वतंत्र भारत में हिंदी दिवस मनाने का इतिहास 14 सितम्बर 1953 से शुरू हुआ, जब पहली भारतीय गणतंत्र सरकार ने इसे हर वर्ष मनाने का निर्णय लिया था. देश की आजादी से पूर्व ही हर स्वतंत्रता सेनानी की यह तमन्ना थी, कि एक दिन ऐसा आए जब देश के हर कोने में हिंदी बोली जाए.

आजादी के बाद जिस तरह स्वतंत्रता का महत्व कम होता जा रहा है, उसी तरह हिंदी भाषा भी अपना महत्व खोती नजर आ रही हैं. कहने को भले ही हम हर साल 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मना लेते है, मगर यह एक औपचारिकता की तरह हो गया हैं, अगले दिन लोग फिर हिंदी को भूलने लगते हैं.

आज के इस लेख में आपके साथ हिंदी दिवस पर स्पीच साझा कर रहा हूँ, आप इन हिंदी भाषा के भाषण को अपने स्कूल के कार्यक्रम में बोल सकते हैं. अप्रत्यक्ष रूप से आपका यह स्पीच हिंदी के लिए संघर्षरत लोगों में आपकी गिनती जरुर कराएगा.

हिंदी दिवस का स्पीच – Speech On Hindi Diwas In Hindi 2021

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Best Hindi Diwas Speech In Hindi For Students

आप सभी को सुप्रभात, नमस्कार. जैसा की हम सभी जानते है आज का दिन हमारी मातृभाषा हिंदी को समर्पित है. इसे हिंदी दिवस कहा जाता हैं. मुझे गर्व है अपने हिंदी भाषी होने पर मैं उस भाषा को समझता हूँ जिसमें मेरे देश की सभ्यता एवं संस्कृति की झलक दिखती हैं.

हिंदी दिवस पर स्पीच के लिए मुझे आमंत्रित करने के लिए आप बहुत बहुत धन्यवाद्. हमारे साहित्य के पुरोधा भारतेंदु हरिश्चन्द्र जी ने कहा था ”निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिनु निज भाषा ज्ञान के मिटत न हिये का सूल.

इनके कहने का अर्थ था कि अपनी मातृभाषा की उन्नति से ही सबकी उन्नति यानी विकास संभव हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि निज भाषा के विकास के साथ समग्र विकास जुड़ा हैं. अपनी माँ की भाषा को समझे बिना ह्रदय की पीड़ा, दुःख, समस्या, कठिनाई का हल नही किया जा सकता हैं.

अतः हमें केवल और केवल अपनी मातृभाषा हिंदी को ही अपनाना चाहियें, देश के शिक्षा संस्थान, व्यापार, न्याय व्यवस्था, कला की भाषा के रूप में हमें अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को लाना होगा. इस विदेशी भाषा ने केवल हमारा शोषण किया है, बल्कि हमारे जन जन की भावनाओं को आहत किया हैं. हमारे शहीदों के सपनों को धूमिल किया हैं, हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेला हैं.

चलिए मेरे हिंदी दिवस पर स्पीच की एक बात पर ताली जरुर बजाइयेगा, बड़े यत्न से यह तथ्य खोज निकाला हैं. हम जिस अंग्रेजी के गौरवगान में पगला रहे हैं. वो शुरू होती है ए यानी एप्पल एक फल से और समाप्त होती है z यानी जेब्रा से. अच्छे खासे इंसान को पहाड़ी गधा बनाने वाली भाषा की तुलना मेरी निज हिंदी भाषा से करनी भी नही चाहिए. मगर हवा कुछ कम्पेयर करने की ही चल रही हैं.

आपकों हिंदी और अंग्रेजी में दूसरा फर्क बतलाता हूँ, मेरी मातृभाषा, मेरी राजभाषा, मेरी राष्ट्रभाषा, मेरी हिंदी शुरू होती है अ यानि अनपढ़ से और समाप्त होती हैं…….. बताइए भाई कख ग तो सभी को आते है. ज्ञ ज्ञानी से. यानी एक अनपढ़ को ग्यानी बना देती हैं.

भलें ही आप इसे संयोग माने मगर सच्चाई तो इसमें भी हैं. हिंदी भाषा देश को एक कर सकती हैं. बहुत से लोग यह सोचते होंगे देश तो पहले से ही एक है फिर कौनसे एक करने की बात कर रहा हैं. मित्रों मेरे कहने का मतलब है यह भावनात्मक रूप से एक करती हैं. आज आप पश्चिम बंगाल या चैन्नई चले जाइए.

वों इस देश के शहर है, मगर आपकों ऐसा लगेगा नही, क्योंकि जो भाषा वे लोग बोलते है आप समझोगे नही, जो आप बोलेगे वो कतई समझने वाले नही हैं. यदि यही पर आप बिहार या उत्तरप्रदेश के किसी भाग में घुमने जाओगे तो आपकों अलग ही नजारा देखने को मिलेगा. आप चाय मांगोगे तो चाय ही मिलेगी, कोई लाठी नही.

यह फर्क केवल हिंदी ही मिटा सकती हैं. जरुर इस दिशा में सरकारी एवं गैर सरकारी स्तर पर बड़े कार्य व निर्णय लेने की आवश्यकता तो पड़ेगी. मगर 3-4 सालों में भारत का स्वरूप बदला बदला सा लगेगा. हमारी विविधता तो हर क्षेत्र में हैं मगर एकता के क्षेत्र बेहद कम हैं, जिसे हिंदी भाषा पूरा कर सकती हैं.

जय हिंदी जय हिंदी !! इसी के साथ मैं अपना हिंदी दिवस पर स्पीच समाप्त करता हूँ. आशा करता हूँ मेरा यह शानदार भाषण आपके भी सोई सपने को जगाने में सफल हुआ होगा.

हिंदी दिवस पर स्पीच भाषण 2021

Speech On Hindi Diwas In Hindi Language: आप सभी को हिंदी दिवस 2021- Hindi Diwas की शुभकामनाएं. हर साल राष्ट्रभाषा हिंदी के उत्थान व प्रोत्साहन के लिए 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता हैं. Speech On Hindi Diwas & Hindi Diwas Speech In Hindi उन विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया हैं. जो अपनी स्कूल में आयोजित हिंदी डे पर भाषण देना चाहते हैं. आप हमारे इस लेख की मदद से एक बेहतरीन हिंदी दिवस पर भाषण को तैयार कर सकते हैं. सही मायनों में इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों द्वारा अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान दर्शाते हुए इसे स्वेच्छा के साथ  अपनाना हैं.

आज के समय में हिंदी भारत की राजभाषा हैं. राजभाषा का अर्थ हैं- राज्य के कामकाज में प्रयुक्त होने वाली भाषा. किसी भी राष्ट्र अथवा राज्य में सुचारू कामकाज के लिए उसकी राजभाषा का निर्धारण किया जाता हैं. भारतीय संविधान में राजभाषा से सम्बन्धित जितने भी उपबध बनाए गये हैं, उतने बहुत कम देशों के संविधान में देखने को मिलते हैं.

इसका कारण यह है कि हर देश में एक बड़े तबके की मुख्य भाषा को ही उस राष्ट्र की राष्ट्रभाषा स्वीकार कर लिया जाता हैं. वही भाषा उस देश के राजकाज की भाषा भी बन जाती हैं. इसलिए उन्हें अलग से राजभाषा का प्रावधान करने की आवश्यकता भी नही रहती हैं.

मगर जिस देश में एक से अधिक बड़े समुदाय हो अथवा कोई एक भाषा सर्वमान्य नही होती हैं उस स्थिति में वहां दो या दो से अधिक राजभाषाओं का प्रबंध किया जाता हैं, ताकि किसी तरह की समस्या का सामना नही करना पड़े. यही भारतीय संविधान की व्यवस्था भी हैं ह्मारे देश के संविधान ने 22 प्रांतीय भाषाओं को राजभाषा का दर्जा दिया हैं. तथा संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में एक अलग से अध्याय भी बनाया गया हैं.

भारत के संविधान निर्माण के समय जब राजभाषा का विषय आया तो अधिकतर लोग हिंदी को भारत की राजभाषा यानि एक ही राष्ट्रभाषा बनाने के पक्ष में थे. मगर इसका विरोध करने वालों की संख्या भी काफी थी. अतः निष्कर्ष के रूप में एक समन्वयित सूत्र को अपनाया गया.

भारत के संविधान में यह व्यवस्था की गई कि भारत के संघ की भाषा हिंदी होगी तथा इसकी देवनागरी लिपि होगी, साथ ही गणतन्त्र बनने के बाद यह घोषणा की गई कि आगामी 15 वर्षों तक हिंदी के साथ साथ अंगेजी भी भारत की राजभाषा रहेगी. इसके पश्चात सम्पूर्ण शासन तन्त्र को हिंदी में तब्दील कर दिया जाएगा.

किन्तु जब यह अवधि पूर्ण होने लगी तो भारत के कई राज्यों में हिंदी का विरोध होने लगा तथा सरकार द्वारा अंग्रेजी को फिर अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया जो आज तक चली आ रही हैं.

राजभाषा अधिनियम 1963 लाने के साथ ही सरकार की मंशा साफ़ हो गई कि वह हिंदी को सम्मान दिलाने की बजाय अंग्रेजी को इस तन्त्र की भाषा बनाना चाहती हैं. इस अधिनियम के द्वारा सभी राज कार्यों के लिए अंग्रेजी को अनिवार्य कर दिया तथा हिंदी को स्वेच्छा की श्रेणी में रख दिया. कि जो राज्य केंद्र के साथ पत्र व्यवहार हिंदी में करने के लिए बाध्य नही है यह उनकी स्वेच्छा है मगर अंग्रेजी अनिवार्य कर दी गई.

कई महत्वपूर्ण आदेश एवं लेख जैसे प्रस्ताव, सामान्य आदेश, अधिसूचना, नियम, प्रेस विज्ञप्ति, प्रशासकीय रिपोर्ट, लाइसेंस, परमिट एवं समझोते हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिए जाएगा.

Hindi Diwas Speech 2021 Importance of Hindi Language For Students

हिंदी भारत की राजभाषा, राष्ट्र भाषा एवं जन जन की भाषा हैं. हम इसे मातृभाषा भी कहते हैं. 14 सितम्बर को हर साल हिंदी दिवस (Hindi Diwas) मनाया जाता हैं. इसकी शुरुआत 1953 से हुई थी. जब 14 सितम्बर के दिन ही भारतीय संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राज भाषा के रूप में स्वीकार्यता प्रदान की इसके पश्चात हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता हैं. (Hindi Diwas Speech 2021) हिंदी दिवस भाषण में हम हिंदी भाषा के महत्व (Importance of Hindi Language) के बारे में आपकों छोटा भाषण उपलब्ध करवा रहे हैं. जिन्हें कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के स्टूडेंट्स अपने विद्यालय के हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता में प्रस्तुत कर सकते हैं.

मेरा नाम हिंदी हैं और मैं भारत की राजभाषा हूँ. परन्तु ऐसा लग रहा हैं कि मैं अपने ही देश में अपने ही लोगों के बिच आज के वातावरण में कमजोर, असहाय और लाचार हूँ तथा मुरझाने लगी हूँ.

हिंदी दिवस एक आशा हैं जिसके द्वारा विदेशों में बसे भारतीयों के बिच मैं फिर से जीना चाहती हूँ और नई उमंग के साथ उड़ना चाहती हूँ.

मैं आप सभी को आमंत्रित करती हूँ कि 14 सितम्बर 2018 को भारतीय उच्चायोग में आकर प्रतियोगिता में भाग लेकर आत्मसात करे एवं पुनर्जीवित करे.

हिंदी की काबिलियत एक भाषा से बढ़कर लोगों को आपस में जोड़ने, उनकी तरक्की में योगदान देने वाली मातृभाषा हैं. यह सत्य है आप अंग्रेजी जाने बगैर भी सारे काम आसानी से निकाल सकते हैं. कोई जरुरी नही जहाँ अंग्रेजी अनिवार्य हो हम वही कार्य करे. उदहारण के तौर पर हमारे विदेश मंत्री एवं प्रधानमंत्री विदेशों में भी हिंदी से काम चला सकते है तो फिर हम अपने घर में क्यों नही.

हिंदी की देवनागरी लिपि को 14 सितम्बर 1949 के दिन इस प्रावधान के साथ राजभाषा स्वीकार किया गया था. कि अगले 15 वर्षों तक अंग्रेजी सहभागी रहेगी. इसके पश्चात हिंदी भारत की एकमात्र राजभाषा होगी, जिसमें राजकाज से सम्पूर्ण प्रयोजन सम्पन्न होंगे.

मगर दुर्भाग्य की बात है जब 15 साल पूरे होने को ही थे, इससे पूर्व साउथ के कुछ भाषावाद की मानसिकता से ग्रसित राजनीतिज्ञों ने हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने का विरोध करना शुरू कर दिया. नतीजा यह निकला आज हिंदी अपने ही घर अपने ही लोगों के बिच पराई बनकर रह गई हैं.

एकदम सरल भाषा, जैसा लिखा जाता है वैसा ही बोला जाता हैं, लम्बा इतिहास, समृद्ध साहित्य एवं शब्दकोश के साथ साथ भविष्य में बदलाव के लिए लचीलापन वाली विशेषताओं की यह हिंदी भाषा भारतीयों के लिए टूटी फूटी अंग्रेजी से हजार गुणा बेहतरीन भाषा है. जिसे विश्व में भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता हैं.

14 सितम्बर 2018 को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर हमें शपथ लेनी होगी. आज से हम अपनी मातृभाषा हिंदी को ही अपने संवाद की भाषा बनाए रखेगे. इसका प्रचार प्रसार करेगे. तथा न सिर्फ एक दिन की औपचारिकता पूरी करने हेतु ऐसा करेगे बल्कि निरंतर रूप से इसे अपने ह्रदय में सहेजकर रखेगे.

हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नन्हा बच्चा यदि स्कूल नही जाता हैं तो भी वह अच्छी तरह हिंदी अपने घर एवं परिवेश में ही सीख सकता हैं. यह हिंदी की सरलता का गुण है जो आपकों अंग्रेजी या अन्य विदेशी भाषा में देखने को नही मिलेगा.

हिंदी दिवस का भाषण- 14th September Hindi Diwas Speech In Hindi

Speech On Hindi Diwas: आज सभी हिंदीभाषियों के लिए गर्व का दिन हैं. हमारी हिंदी ही इस देश की एकता और अखंडता का माध्यम हैं. हर प्राणी के लिए अपने विचारों की अभिव्यक्ति के लिए भाषा का विशेष महत्व होता हैं. यदि उस भाषा को बोलने वालों की आबादी 100 करोड़ के आकंडे से उपर हो तो आपस में अपनेपन का भाव ही हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूती प्रदान करता हैं. विविधता में एकता की थली कहे जाने वाले भारत के सभी राज्यों की संस्कृति, स्थानीय भाषा, पहनावा रीती रिवाज सब कुछ अलग होने के बाद ही हिंदी जबान होने के नाते हमें एकता का भाव महसूस होता हैं.

हिंदी दिवस-Hindi Diwas १४ सितम्बर के दिन मनाया जाता हैं. इस दिन भारत के विभिन्न सरकारी कार्यालयों, स्कूलों आदि में मातृभाषा हिंदी के इस सम्मान दिवस पर भाषण, निबंध एवं काव्य प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता हैं.  हिंदी दिवस हमारे देश में 1953 से मनाया जा रहा हैं. इसे १४ सितम्बर के दिन ही मनाने के पीछे कारण यह है कि १४ सितम्बर 1949 को भारतीय संविधान निर्माताओं ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्थापित किया था.

राष्ट्रीय हिंदी दिवस की यह कविता, मेरे भाषण का मूल संदेश अभिव्यक्त कर देती हैं. यदि हिंदी बोलने वालों की बात करे तो चीनी के बाद विश्व में सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा का नाम हैं बेचारी हिंदी हैं. यहाँ पर बेचारी शब्द कहने का मतलब यह है. कल्पना करिए एक देश 200 साल तक किसी मुल्क का गुलाम रहता है जिसकी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी हैं.

जिसका सम्बन्ध उस राष्ट्र के इतिहास से कही नही हैं. देश की कुल आबादी के 80 फीसदी लोग उस भाषा से अपरिचित हैं. आजादी मिलने के बाद भी भारत पर अंग्रेजी को थोपे रखना अपने आप में गुलामी का प्रतीक हैं. हमारे देश की जनता जिस भाषा की एबीसीडी तक नही जानती उन्हें हमारे सिस्टम की भाषा बनाने का औचित्य क्या हैं?

भारत के न्यायालयों की कार्यवाहियां अंग्रेजी में होती हैं. कुछ लोगों को छोड़ दे तो बाकी सब नेता अंग्रेजी में भाषण देते हैं. हिंदी फ़िल्में बनाकर पैसे ऐठने वाले अभिनेता खुद को डेढ़ साना दिखाने के लिए अंग्रेजी में बात करते हैं. देश में कई न्यूज चैनल अंग्रेजी में खबरों का प्रसारण करते हैं. सवाल आखिर यही है वो किसके लिए कर रहे हैं. यदि भारत की जनता के लिए तो यह उनका सफ़ेद झूठ हैं.

भारत का कोई भी नागरिक अंग्रेजी बोलकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस नही करता. बस इन लोगों के दोगले सिस्टम की वजह से स्कूलों में अंग्रेजी अनिवार्य रूप से पढाई जाती हैं. आगे बढने के लिए हर विषय में पकड़ अच्छी होना जरुरी हैं. लिहाजा लोगों को अंग्रेजी पढनी पडती हैं. मगर हमें व हमारे सिस्टम को अंग्रेजी चलाने के लिए मजबूर किसने किया?

अधिक भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति की उन्नति के रास्ते खोलता हैं. मगर अपनी मूल भाषा की कीमत पर किसी विदेशी भाषा को स्थापित करना, सरासर अन्याय हैं. हिंदी दिवस पर आज हम सब लोगों को प्रण करना चाहिए. अंग्रेजी भारत छोड़ो की मुहीम हमें ही आरम्भ करनी होगी. तभी सही मायनों में आजाद भारत के नागरिक कहला पाएगे.

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हमारे देश में हर साल 14 सितम्बर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता हैं. हिंदी भाषा व हिंदी भाषियों की भावना के सम्मान के इस दिन को सेलिब्रेट करने का मुख्य उद्देश्य आम लोगों तक हिंदी के महत्व को पहुचाना तथा उन्हें अपनी मातृभाषा से जोड़ना हैं.

तक़रीबन एक हजार साल पुरानी हिंदी भाषा आज दुनियां की तीसरी सबसे बड़ी एक भारत जैसे सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा के रूप में उभर कर सामने आई हैं. हिंदी भाषा को बोलने और समझने वालों की संख्या भारत में 80 करोड़ से अधिक हैं. कई लाख लोग विदेशों में भी हिंदी को समझते हैं.

विश्व के कई देशों में हिंदीभाषियों की संख्या लाखों में हैं. तथा इनके प्रशिक्षण एवं शिक्षण के लिए कई विश्वविद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं. साहित्य समाज का दर्पण होता है. यह कहावत हिंदी साहित्य ने चरितार्थ कर दिखाई हैं.

भक्तिकालीन साहित्य के कारण हिंदी आज इतने बड़े श्रोता वर्ग की भाषा बन पाई हैं. अंग्रेजी से बड़ा जिसका शब्दकोश, त्रुटीरहित व्याकरण, विस्तृत साहित्य, बोलने एवं समझने वालों की संख्या करोड़ों में इतनी सारी विलक्षण विशेषताओं के कारण भी आज हिंदी अपने ही घर अपने ही लोगों के बिच दम घुट कर जी रही हैं.

कबीर, तुलसीदास, रहीम, सूरदास, निराला, दिनकर, भारतेंदु, प्रेमचंद जैसे विराट व्यक्तित्व के धनी लोगों ने हिंदी में अपनी रचनाओं को लिखकर इस भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं. आजादी से पूर्व सम्पूर्ण भारत के क्रांतिकारियों की एक ही तमन्ना थी. कि आजाद भारत की सम्पर्क भाषा हिंदी ही बने.

क्योंकि यही एक मात्र ऐसी भाषा थी जिसे उत्तर से दक्षिण तथा पूर्व से पश्चिम तक सभी क्षेत्रों के लोग जानते थे. हमारे पूर्वज जानते थे कि जिस भाषाई समस्या के कारण हमारे अपने देश के लोगों से हम अलग थलग जी रहे हैं. इसकी वजह हमारी अलग अलग भाषाएँ एवं बोलियाँ हैं अतः स्वतंत्र भारत में सर्वप्रथम हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा घोषित कर देनी चाहिए.

जब भारत आजाद तो गया तो ये ही हिंदी का समर्थन करने वाले बुद्धिजीवी हिंदी के विरोध में आ गये तथा भारत पर राज करने वाली अंग्रेजी सत्ता की प्रतीक भाषा को समर्थन देने लगे. इन परिस्थियों में हमारे संविधान निर्माताओं ने हिंदी के साथ साथ अंग्रेजी को भी भारत की राजभाषा अगले 15 वर्षों के लिए बनाया.

तथा यह भी कहा गया कि इस अवधि तक सरकार का यह दायित्व हैं कि वो सरकारी तन्त्र को पूर्ण रूप से अंग्रेजी से आजाद कर हिंदी को स्थापित करे तथा देश के जिन हिस्सों में हिंदी बोलने व समझने की अधिक परेशानी हैं. उस दिशा में कार्य कर लोगों को हिंदी में शिक्षित करे. भारत सरकार आजादी के बाद भाषा विषय को बिलकुल भूल गई. जिसका नतीजा 1965 में देखने को मिला था.

जब अंग्रेजी को हटाकर हिंदी को भारत की राष्ट्र भाषा बनाने की बात आई तो दक्षिण के कुछ तथाकथित राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ की रोटियां सकने के लिए आम जनता में जहर भरकर उन्हें सडक पर ले आए.

नतीजा यह निकला कि तमिलनाडू में व्यापक स्तर पर हिंदी के विरोध में प्रदर्शन होने लगे. भूख हड़ताले की गई. हिंसा का माहौल देख सरकार ने अंग्रेजी की पिछली कार्य अवधि को अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया, जो आज भी अनवरत रूप से जारी हैं.

हिंदी दिवस के अवसर पर देशभर के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता हैं. आमजन तक हिंदी के महत्व को प्रचारित करने के लिए समाचार पत्रों एवं टेलीविजन में भी विज्ञापन दिए जाते हैं.

विद्यालयों में आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रमों में हिंदी दिवस भाषण, हिंदी दिवस निबंध, हिंदी दिवस कविता, हिंदी दिवस पर नारे, हिंदी दिवस पर शायरी, हिंदी पर स्पीच आदि बोलने के लिए स्टूडेंट्स को कहा जाता हैं. आप मातृभाषा हिंदी पर स्पीच के लिए हमारे इस लेख की मदद ले सकते हैं.

अब वक्त आ गया हैं. मात्र हिंदी दिवस के आयोजनों एक दिन हिंदी प्रयोग करने की शपथ पर्याप्त नही हैं. राष्ट्र की एकता अखंडता एवं सम्मान के लिए हिंदी को अब भारत की राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित करना होगा. यह निर्णय अहिन्दी भाषियों पर थोपने का सवाल नही हैं.

उन्हें यह समझना होगा कि हम जिस अंग्रेजी को अपनी राज-काज की भाषा बनाए बैठे हैं. वो 75 साल बाद भी आज भी हमारी गुलामी की प्रतीक बनी हुई हैं. हमें अपनी सोच को बदलना होगा. हमारे पास हिंदी के सिवाय को विकल्प भी नही हैं. बांगला, तमिल, तेलगू, मराठी आदि भारत की बड़ी स्थानीय भाषाएँ हैं, मगर इनकों समझने वाले एक या दो राज्यों से अधिक नही हैं.

हिंदी ही एकमात्र भाषा हैं, जिन्हें देश के 15 से अधिक राज्यों में बोली और समझी जाती हैं. सरकार भी इस दिशा में प्रयास कर अहिन्दी भाषी राज्यों में हिंदी के प्रचार का प्रबंध कर इस विरोध को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. ऐसा होने पर ही सर्वसम्मति से हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा बनने का सपना पूरा कर सकती हैं.

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