Hindi Poems For Class 1 To 8 | पहली कक्षा से आठवीं के लिए हिंदी कविता

Hindi Poems For Class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 | पहली कक्षा से आठवीं के लिए हिंदी कविता: मित्रों एक बार फिर हाजिर हैं आपके साथ इस बार आपके लिए जो हिंदी कविता संग्रह लेकर आए हैं इनमे आप पहली कक्षा से आठवीं क्लास तक के प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल के स्टूडेंट्स लिए हिंदी कविता पढेगे. इस क्लास के विद्यार्थियों के मानसिक स्तर के अनुरूप बेहद सरल और सीधी भाषा में रचित ये कविताएँ पढ़िए और आनन्द उठाइये.

Hindi Poems For Class 1 To 8 पहली कक्षा से आठवीं के लिए हिंदी कविता

विषय सूची

Hindi Poems For Class 1 To 8  पहली कक्षा से आठवीं के लिए हिंदी कविता

छोटे से बड़े हिंदी कविता

एक दिन बोली मुझसे डे नानी,
मै कहती तुम सुनों कहानी |
एक खेत बिनु जुता पड़ा था,
उबड़ खाबड़ बहुत बड़ा था ||

कोई चिड़िया बिज उठाकर,
उड़ती उड़ती गई डालकर |
हवा डराती, धुप जलाती,
मिटटी उसको खूब दबाती ||

मिटटी की गोदी में रहकर,
सूरज की किरणों में जलकर |
कहा बीज ने हाय अकेला,
पर न डरूंगा भले अकेला ||

कुछ दिन बीते, अंकुर फूटे,
कोमल-कोमल पत्ते फूटे,
बीज बन गया पौधा प्यारा,
हरा-भरा लहराता, प्यारा ||

पौधे से बढ़, पेड़ कहाया,
दूर-दूर तक फैली छाया |
बस, जितने भी बने बड़े हैं,
छोटे से बढ़, बड़े बने हैं ||

Hindi Poems For Class 1  वर्षा कविता

काले मेघा पानी दे
पानी दे गुड़धानी दे |
बरसो खूब झमा-झम-झम
नाचे मोर छमा-छम-छम ||
खेतो से खलिहानों तक
पर्वत से मैदानों तक |
धरती को रंग धानी दे
काले मेघा पानी दे ||
भर से सारे ताल-तलैया
नाचे ! सब मिल छम्मक-छैया |
हमको नई कहानी दे
सबको दाना-पानी दे |
पानी दे जिंदगानी दे |
काले मेघा पानी दे ||

Hindi Poems For Class 1 अबलक घोड़ी

अबलक घोड़ी लाल लगाम |
तीन लाख हैं इसके दाम ||
आभूषण भी कई कमाल |
छमछम नाचे सरपट चाल ||
जैसे हुआ ठंड का अंत |
आया झटपट यहाँ बंसत ||
उसके ऊपर एक सवार |
बैठे हर क्षण एनक धार ||
और फटाफट चढ़ा किशोर |
साथ घुमने चारों ओर ||
त्रषभ श्रवण हैं, ज्ञानी मित्र |
यहाँ-वहा के लेते चित्र ||

Hindi Poems For Class 1 साफ़ हाथ में हैं दम

सबसे पहले होता हैं हाथ गीला,
फिर हाथ पे नाचे साबुन रंगीला |

हाथ से होता हैं फिर हाथ का साथ
फिर घूम के आगे पीछे साबुन से खेले हाथ |

खेलों अब उंगलियों में घुसकर,
फिर चलाओ हथेलियों पर नाख़ून का चक्कर |

हाथ करे फिर पानी में छम-छम,
क्युकि, साफ़ हाथ में ही हैं दम |
खाने से पहले और शौच के बाद,
हम सब धोए साबुन से हाथ |

Hindi Poems For Class 1 रेल का खेल

आओ आओ खेले खेल|
छू छूककर बन जाएं रेल ||

तू तो इंजन बन जा कालू |
गार्ड बनेगा लल्ला बालू ||

चाहे जीतनी भी हो दुरी |
टिकट खरीदो बहुत जरुरी ||

वरना टी -टी देगा ठेल |
छुक -छुक कर बन जाए रेल ||

पीछे डिब्बे आगे इंजन |
जिनमे है, महमूद, निरंजन ||

जोर्ज,पदमजी,कीटटी ,लीला |
रेखा, सिमरनकौर, जमीला ||

भीड़ भड़क्का धक्कमपेल |
छुक-छुक कर बन जाए रेल ||

कार मोटरे पीछे छोड़े |
पकड़ न पाए हाथी घोड़े ||

पटरी-पटरी दौड़ी आती |
रोज मुसाफिर भरकर लाती ||

अपनों से करवाती मेल |
आओ-आओ खेले खेल ||

पटरी पर तेजी से दौड़े |
बड़े-बड़े नगरो को जोड़े ||

और ऊंट के पड़ी नकेल |
छुक छुक कर बन जाए रेल ||

सिग्नल का यह आदर पाती |
टिकट जहा का हो, पहुचाती ||

छुक-छुक्कर बन जाए रेल |
आओ आओ खेले खेल ||

Hindi Poems For Class 1 चिडकली

फुर्र फुर्र करती एक चिडकली
म्हारी चाल मांय आई
घपो जतन सु चुच मायने
दाब तिनकला लाई
ओलातर सी रख्या तिनकला
आलो एक बण्यो
घने छाव सु
घास-पूस सू
आले ने सजायो
बनियों आलो छिड़ी बनी माँ
अंडा लाई तीन
कई दिन सैया अंडा ने
आँख न लीनी नीद
फूट्या अंडा बचिया
निकलया
जद चिड़ि हरकाई
चि चि करता बछिया ने
ल्या ल्या चुण चुगाई
निकली पाख्या बचिया रे
तद उड्नो चिड़ि सिखाई
साल सु बारे री दुनिया री
उंच नीच समझाई
कर हुसियार उड़ाया बा नै
ऊँचा आभा माई
फुदक फुदककर फुर्र फुर्र करता
रुंखा माथै जीवण गीत सुनाई ||

Hindi Poems For Class 1 चार चने

पैसे पास होते तो चार चने लाते
चार में से एक चना तोते को खिलाते
तोते को खिलाते तो टाय टाय गाता
टाय टाय गाता तो बड़ा मजा आता

पैसे पास होते तो चार चने लाते
चार में से एक चना घोड़े को खिलाते
घोड़े को खिलाते तो पीठ पर बिठाता
पीठ पर बिठाता तो बड़ा मजा आता

पैसा पास होता तो चार चने लाते
चार में से एक चना चूहे को खिलाते
चूहे को खिलाते तो दांत टूट जाता
दांत टूट जाता तो बड़ा मजा आता

Hindi Poems For Class 1 चाँद का कुरता

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, |
सिलवा दो माँ मुझे ऊन का, मोटा एक झिंगोला ||
सन सन करती हवा रात भर, जाड़े में मरता हु |
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह, यात्रा पूरी करता हु ||
आसमान का सफर और यह मौसम हैं जाड़े का |
अगर तो ला दो कुरता ही, कोई भाड़े का ||
बच्चे की सुन बात कहा माँ अरे सलोने |
कुशल करे भगवान्, लगे न तुझको जादू टोने ||
जाड़े की बात यह तो ठीक हैं पर मै तो डरती हु |

एक नाप में कभी नही, तुमको देखा करती हु ||
कभी एक अगुलभर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा |
बड़ा किसी दिन हो जाता हैं और किसी दिन छोटा ||
घटता बढ़ता रोज , किसी दिन ऐसा भी करता |
नही किसी की आखो को तू दिखलाई पड़ता हैं ||
अब तू ही यह बता नाप, तेरा किस रोज लिवाए |
सी दे एक झगोला जो, हर रोज बदन में आए ||

हिन्दी कविता – मेरे गाँव के खेत में

मेरे गाँव के खेत में शीर्षक की यह हिन्दी कविता ग्रामीण जीवन शैली और इसके प्रति कवि के लगाव की काव्यात्मक अभिव्यक्ति हैं. गाँव के कुए रहट सुबह के माहौल और वर्षा के मौसम में किसानों के हल जोतने का इस कविता में सुंदर वर्णन किया गया हैं. यदि आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं तो उम्मीद करते हैं. ग्रामीण प्रेम पर आधारित यह कविता आपकों पसंद आएगी. लीजिए बढ़ते हैं इस Hindi Poem पर..

खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |
पायल संग कुदाली चलती,
मेरे गाँव के खेत में |

पानीदार कुओ पर चलते,
रहटो की आवाज जहा |
धानी-धरती के कणकण को,
धोरों की सौगात वहा
हरियाली ले फसल खड़ी हैं,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

बैलो ने कन्धो ने खिची,
हल की फाल जहाँ हर बार |
भर-भर छकड़े धान के लाए,
मुस्काए जिनसे घर द्वार |
रुनझुनकर रमझोले बजे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

जहाँ नीम की डाली बैठी,
चिड़ियाँ चहक-चहक कर गाती |
कभी धुल में नहां-नहां कर,
बादलों का संदेश सुनाती |
बया घास के महल बनाती,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

काली पिली, दोमट मिट्टी,
फसले कई उगाती हैं |
बिन बोए ही घास के रूप में,
अपना प्यार लुटाती हैं |
सन-सन हवा बहे मतवाली,
मेरे गाँव के खेत में |
खुशहाली के गीत लिखे हैं,
मेरे गाँव के खेत में |

हम जंग न होने देंगे | Hum Jung Na Hone Denge | Hindi Kavita

Hindi Kavita पूर्व प्रधानमन्त्री और हिंदी में अपनी लेखनी से सवेदनशील मानवीय मुद्दों और राष्ट्रिय एकता सहित प्राकृतिक मनोरम को लेकर पूज्य श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कई कवितायेँ लिखी.

अटल जी की प्रमुख रचनाओं में मृत्यु या हत्या अमर बलिदान, कैदी कविराय की कुण्डलियाँ, संसद में तीन दशक, अमर आग है, कुछ लेख: कुछ भाषण, सेक्युलर वाद, राजनीति की रपटीली राहें, बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि।,

मेरी इक्यावन कविताएँ. हम जंग न होने देंगे शीर्षक से यहाँ दी गई कविता विश्व शांति के अग्रदूत के रूप में इन्होने रूस और अमेरिका के दो धुर्वो के बिच बटे विश्व से शांति और भाईचारे का आह्वान करते हुए.

हिरोशिमा और नागासाकी की घटना की पुराव्रती न होने की प्रतिबद्धता दिखाते हुए भारत पाक को भाई भाई की तरह रहने का संदेश देती यह कविता किस तरह द्विपक्षीय देशों के सम्बन्ध होने चाहिए. इसी विषय पर महान कवि की यह Hindi Kavita 

हम जंग न होने देंगे!
विश्व शांति के हम साधक हैं, जंग न होने देंगे!
कभी न खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी,
खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,
आसमान फिर कभी न अंगारे उगलेगा,
एटम से नागासाकी फिर नहीं जलेगी,
युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

हथियारों के ढेरों पर जिनका है डेरा,
मुँह में शांति, बगल में बम, धोखे का फेरा,
कफन बेचने वालों से कह दो चिल्लाकर,
दुनिया जान गई है उनका असली चेहरा,
कामयाब हो उनकी चालें, ढंग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

हमें चाहिए शांति, जिंदगी हमको प्यारी,हमें चाहिए शांति, सृजन की है तैयारी,
हमने छेड़ी जंग भूख से, बीमारी से,
आगे आकर हाथ बटाए दुनिया सारी।
हरी-भरी धरती को खूनी रंग न लेने देंगे
जंग न होने देंगे।

भारत-पाकिस्तान पड़ोसी, साथ-साथ रहना है,
प्यार करें या वार करें, दोनों को ही सहना है,तीन बार लड़ चुके लड़ाई, कितना महँगा सौदा,
रूसी बम हो या अमेरिकी, खून एक बहना है।
जो हम पर गुजरी, बच्चों के संग न होने देंगे।
जंग न होने देंगे।

मै चला तुम्हे भी चलना है | Mai Chala Tumhe Bhi Chalna Hai | Hindi Kavita

मै चला तुम्हे भी चलना है|
सर काट हथेली पर लेकर बढ़ आओ तो
इस युग को नूतन स्वर तुमको ही देना है.
अपनी क्षमता को आज जरा आजमाओ तो
दे रहा चुनोती समय अभी नवयुवको को
मै किसी तरह मंजिल तक पहले पहुचुगा
इस महाशांति के लिए हवन वेदी पर मै
हँसते हंसते अपने प्राणों की बलि दे जाउगा
तुम बना सकोगे भूतल का इतिहास नया
मै गिरे हुए लोगों को गले लगाउगा
क्यों उंच नीच कुल जाति रंग का भेद भाव
मै रूढ़ीवाद का कल्याण महल ढहाउगा ||

आम की थी डाल हरियल | Aam Ki Thi Daal Hariyal | Hindi Kavita

आम की थी डाल हरियल, मैं मगनगम झूमता था
कई पल्लव और भी थे, उन्हें जीर भर चूमता था।
देख मेरा हरा यौवन मुस्कुराती नित्य डाली
गीत से मन जीत लेते कभी कोयल, कभी माली
बाग बस्ती में अचानक हुआ मेरा रंग पीला
खिलखिलाना बन्द, बजना बन्द, यह तन पड़ा ढीला।
हवा ने ऐसा हिलाया डाल का भी साथ छूटा
रह गया परिवार पीछे, एक पल्लव हाय! टूटा।।
जब हवा की गोद में कुछ दूर बगिया से बहा
देवता हो तुम पवन मेरी सुनो मैंने कहा।
जन्मभूमि बाग मेरी मूल माँ के चरण चूमूँ
खाद बनकर करूँ सेवा फिर किसी डाली पै झूमूँ
पवन की करूणा-कृपा से बाग में उड़ लौट आया
वृक्ष के चरणों में पल्लव खाद बनकर मुस्कुराया।

रवि जग में शोभा सरसाता | Ravi Jag Me Sobha Sarsaata | Hindi Kavita

रवि जग में शोभा सरसाता, सोम सुधा बरसाता
सब लगे है क्रम में, कोई निष्क्रिय द्रष्टि नही आता.
है उद्देश्य नितांत तुच्छ त्रण के भी लघु जीवन का
उसी पूर्ति में लगा रहता है अंत कर्ममय तन का
तुम मनुष्य हो, अमित बुद्धि बल विलसित जन्म तुम्हारा
क्या उद्देश्य रहित हो जग में, तुमने कभी विचारा
बुरा न मानो एक बार सोचो तुम अपने मन में
क्या कृतव्य समाप्त कर लिया तुमने निज जीवन में
जिस पर गिरकर उदर दरी से तुमने जन्म लिया है
जिसका खाकर अन्न सुधासम नीर समीर पिया है,
वही स्नेह की मूर्ति दयामयी माता तुल्य मही है,
उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नही है ?

तुम भारत, हम भारतीय हैं | Tum Bharat, Hum Bhartiya Hai | Hindi Kavita

तुम भारत, हम भारतीय हैं, तुम माता, हम बेटे,
किसकी हिम्मत है कि तुम्हें दुष्टता-दृष्टि से देखे |
ओ माता, तुम एक अरब से अधिक भुजाओं वाली,
सबकी रक्षा में तुम सक्षम, हो अदम्य बलशाली |
भाषा, वेश, प्रदेश भिन्न हैं, फिर भी भाई-भाई,
भारत की साझी संस्कृति में पलते भारतवासी |
सुदिनों में हम एक साथ हँसते, गाते, सोते हैं,
दुर्दिन में भी साथ-साथ जागते, पौरुष धोते हैं |
तुम हो शस्य-श्यामला, खेतों में तुम लहराती हो,
प्रकृति प्राणमयी, साम-गानमयी, तुम न किसे भाती हो |
तुम न अगर होती तो धरती वसुधा क्यों कहलाती ?
गंगा कहाँ बहा करती, गीता क्यों गाई जाती ?

एक उड़ान है चिड़िया के बहाने | Ek Udaan Hai Cidiya Ke Bahane | Hindi Kavita

एक उड़ान है चिड़िया के बहाने
कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने
बाहर भीतर
इस घर, उस घर
कविता के पंख लगा उड़ने के माने
चिड़िया क्या जाने?
कविता एक खिलना है फूलों के बहाने
कविता का खिलना भला फूल क्या जाने!
बाहर भीतर
इस घर, उस घर
बिना मुरझाए महकने के माने
फूल क्या जाने?
कविता एक खेल है बच्चों के बहाने
बाहर भीतर
यह घर, वह घर
सब घर एक कर देने के माने
बच्चा ही जाने।

आँसू ये भाग्य पसीजा | Aasu Se Bhagaya Pasija | Hindi Kavita

आँसू ये भाग्य पसीजा, हे मित्र, कहाँ इस जग में।
नित यहाँ शक्ति के आगे, दीपक जलते मग-मग में।
कुछ तनिक ध्यान से सोचो, धरती किसकी हो पाई?
बोलो युग-युग तक किसने, किसकी विरूदावलि गाई?
मधुमास मधु रूचिकर है, पर पतझर भी आता है
जग रंगमंच का अभिनय, जो आता सो जाता है।
सचमुच वह ही जीवित है, जिसमें कुछ बल-विक्रम है
पल-पल घुड़दौड़ यहाँ है, बल-पोरूष का संगम है।
दुर्बल को सहज मिटाकर, चुपचाप समय खा जाता
वीरों के ही गीतों को, इतिहास सदा दोहराता।
फिर क्या विषाद, भय, चिन्ता जो होगा सब सह लेंगे
परिवर्तन की लहरों में, जैसे होगा बह लेंगे।

थका हारा सोचता मन सोचता मन | Thaka Haraa Sochta Man Sochta Man | Hindi Kavita

थका हारा सोचता मन सोचता मन
उलझती ही जा रही है एक उलझन
अँधेरे में अँधेरे से कब तलक लड़ते रहे
सामने जो दिख रहा है, वह सच्चाई भी कहे
भीड़ अन्धो की खड़ी खुश रेवड़ी खाती
अँधेरे के इशारे पर नाचती गाती
थका हाँसा सोचता मन सोचता मन
भूख प्यासी कानाफूसी दे उठी दस्तक
अँधा बन जा झुका दे तम द्वार पर मस्तक
रेवड़ी की बाट में तू रेवड़ी बन जा
तिमिर के दरबार में दरबान सा तन जा
थका हारा, उठा गर्दन जूझता मन
दूर उलझन | दूर उलझन | दूर उलझन
चल खड़ा हो पैर में यदि लग गई ठोकर
खड़ा हो संघर्ष में फिर रोशनी होकर
मृत्यु भी वरदान है संघर्ष के प्यारे
सत्य के संघर्ष में क्यों रोशनी हारे
देखते ही देखते तम तोड़ता है दम
और सूरज की तरह हम ठोकते है खम

रंगीला बिल्ला | छोटी हिंदी कविता पहली दूसरी के विद्यार्थियों के लिए

short hindi poems रंगीला बिल्ला एक छोटी हिंदी कविता हैं, जो कक्षा 1 और 2 के विद्यार्थियों के लिए मनोरंजक और जल्दी समझ आने वाली कविताओं में से हैं. ये चंद लाइनें नन्हे बालक-बालिकओं के लिए जल्दी से याद करने और उन्हें प्रस्तुत करने में मददगार होगी.

दिल्ली से आया एक बिल्ला

नाम हैं, उसका रंगीला |

मंद-मंद मुस्कान हैं उसकी

चश्मा हैं उसका चमकीला|

पंजाबी कुर्ता हैं, उसका

और दुप्पट्टा हल्का पीला|

 

चप्पल उसकी जापानी हैं

पर्स हैं उसका गहरा नीला|

भूख लगी हैं उसको भारी

मचा रहा हैं, चिल्लम-चिल्ला|

मै बोली, मेरे प्यारे बिल्लू

मत कर इतना हल्ला गुल्ला|

 

लम्बी काली पूछ हैं उसकी

भाती हैं उसको दूध की प्याली|

खेल का हैं, अजब खिलाड़ी

क्रिकेट का शौकीन हैं वो भारी|

खाने को करता हैं हर शाम मारा-मारी|

 

दिल्ली से आया एक बिल्ला

नाम हैं उसका रंगीला|

hindi poems on life 

पहले कभी एक गाँव था,
उस गाँव में भी छांव था,
उस छाँव से छन कर यहाँ,
जीवन का नन्हा पाँव था.
एक रौशनी थी धूप की,
बिखरे हुए एक रूप की,
विश्वास का पलना लिए,
शीतलता भरे एक कूप की.
उस गाँव से गुजरा करें थे,
आम भी और ख़ास भी,
फैले हुए से खेत थे,
पत्ते भी थे और घास भी.
अगनित कहानी थीं बिखरी,
किस तरह मेला लगा था,
हौले-हौले चल के घर से,
खुशियों का वो रेला सजा था.
फूस और खपरैल भी था,
लेपने को मिट्टिया भी,
मोहने को कोयल की कू-कू,
झूलने को रस्सियाँ भी.
रोज़ करता था मैं श्रम और,
रोज़ सोता था मज़े से,
थक ना जाऊं ये ना होता,
ना कोई था चोंचला.
फिर ना जाने किस घडी में,
गाँव मेरा खो गया,
बन गयी अट्टालिकाएं,
घर हमारा ना रहा.

hindi rhymes for kids 

एक मै छोटी कठपुतली
रोना मुझको आता नही
लड्डू पेडे खाऊ मजे से
खाना बनाना आता नही
लिम्का पेप्सी पियु मजे से
शर्बत बनाना आता नही
चनिया चोली पहनू मजे से
कपड़े सीना आता नही
मै एक छोटी कटपुतली
रोना मुझको आता नही||

पथिक कविता और इसका अर्थ | pathik kavita aur isaka arth

सुनने को अति नम्र भाव से स्थित हो उत्सुक मन से
पथिक देखने लगा साधू को श्रद्धा सिक्त नयन से
बोले मुनि हे पुत्र जगत को तुमने त्याग दिया है
प्रेम स्वाद चख मोहित हो वन में विश्राम लिया है.

जग में सचर जितने है सारे कर्म निरत है
धुन में एक न एक सभी को निश्चित व्रत है
जीवन भर आतप सह वसुधा पर छाया करता है
तुच्छ पत्र की भी सवकर्म में कैसी तत्परता है.

रवि जग में शोभा सरसाता सोम सुधा बरसाता
सब है लगे कर्म में कोई निष्क्रिय द्रष्टि न आता
है उद्देश्य नितांत तुच्छ तरण के भी लघु जीवन का
उसी पूर्ति में वह करता है अंत कर्ममय तन का

तुम मनुष्य को, अमित बुद्धिबल बल विलसित जन्म तुम्हारा
क्या उद्देश्यरहित है जग में तुमने कभी विचारा
बुरा न मानों, एक बार सोचो तुम अपने मन में
क्या कर्तव्य समाप्त कर दिए तुमने निज जीवन में

जिस पर गिरकर उदर दरी से तुमने जन्म लिया है
जिसका खाकर अन्न सुधा सम नीर समीर पिया है
जिस पर खड़े हुए खेले है घर बना बसे सुख पाए
जिसका रूप विलोक तुम्हारे दर्ग मन प्राण जडाये

वह सनेह की मूर्ति द्यामही माँ तुल्य मही है
उसके प्रति कर्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नही है
हाथ पकड़कर जिन्होंने तुम्हे चलना सिखाया
भाषा सीखा ह्रद्य का अद्भुत रूप स्वरूप दिखाया

बर्फ क्यों नहीं पिघलती | हिंदी कविता संग्रह

बर्फ क्यों नही पिघलती
जमीन की सतह के नीचे
इतनी गर्मी इतना लावा
फिर भी बर्फ क्यों नहीं पिघलती
हवा के मन में
इतनी बैचेनी
इतना तनाव/इतनी घुटन
फिर भी बदली क्यों नही बरसती
हर ओर
धोखा/झूठ/फरेब
हर आदमी टटोलता है
दूसरे की जेब
फिर भी रोशनी की किरण क्यों नही निकलती
सोचता हूँ
तो आँखों में
रेत का किरकिरापण उभर आता है
और मन
किसी अतल में डूब जाता है.

धूप का ऊन हिंदी कविता

बज रहे ठंडी सुबह के आठ
दिन भी चढ़ गया है
उतरती आती छतो से
सर्दियों की धूप
उजले ऊन की मृदु शाल पहिने
वह मुंडेरो पर ठहर कर
झांकती है झंझरीयों से
रात को धोये हुए आंगन में
और अलसाए हुए
कम्बल, लिफाफों बिस्तरों पर
जो उठाए जा रहे है
रात को मीठी कथा के
पृष्ट पलटें जा रहा है
धुले मुख सी धूप यह गृहणी सरीखी
मंद पग धर आ गई है
चाय की लघु टेबिलों पर
कभी बनती केतली की
प्यालियों की भाप मीठी
कभी बनती स्वयं ही
रसधार ताजे दूध की
या ढाल कर निज प्यार
वह हर वस्तु की बनती
समस्त मिठास की अधरों पर पिया के
सुबह के अखबार की वह नई खबर
अब पुरानी हो गई
सुर्खियों के रंग मद्दिम पड़ गये है
गुलभरी सिगरेट के अंतिम धुंए से
उड़ गई वे पताका सी सूचनाएँ

नौजवानों आज का युगधर्म शक्ति उपासना है | Naujavano Ajj Ka Yugdharma shakti Upasana Hai | Hindi Kavita

नौजवानों आज का युगधर्म शक्ति उपासना है।
चीर कर तम सूर्य का प्रकटी करण हो, कामना है।

बस बहुत अब हो चुकी है, शांति की चर्चा यहाँ पर,
हो चुकी अति ही, अहिंसा तत्व की चर्चा यहाँ पर ।
ये मधुर सिद्धांत, रक्षा देश की पर कर न पाए,
ऐतिहासिक सत्य है, यह सत्य अब पहिचानना है।
नौजवानों आज का युगधर्म शक्ति उपासना है।

हम चले थे विश्वभर को, शांति का संदेश देने,
किन्तु जिसको बंधु समझा, आ गया वह प्राण लेने।
शक्ति की हमने उपेक्षा की, उसी का दंड पाया,
यह प्रकृति का ही नियम है,
यह प्रकृति का ही नियम है,अब हमें यह जानना है।
नौजवानों आज का युग धर्म शक्ति उपासना है।

जग नहीं सुनता कभी, दुर्बल जनों का शांति प्रवचन,
सिर झुकाता है उसे, जो कर सके रिपु मान मर्दन ।
ह्रदय में हो प्रेम, लेकिन शक्ति भी कर में प्रबल हो ,
यह सफलता मंत्र है, करना इसी की साधना है ।
नौजवानों आज का युग धर्म शक्ति उपासना है।

यह न भूलो इस जगत में, सब नहीं हैं संत मानव,
व्यक्ति भी हैं, राष्ट्र भी हैं, जो प्रकृति के घोर दानव।
दुष्ट दानव दमनकारी शक्ति, का संचय करें हम,
आज पीड़ित मातृभूमि की यही आराधना है।

नौजवानों आज का युग धर्म शक्ति उपासना है,
चीर कर तम, सूर्य का प्रकटीकरण हो, कामना है।

चल पड़े पैर जिस ओर पथिक | Chal Pade Pair Jis Or Pathik | Hindi Kavita

चल पड़े पैर जिस ओर पथिक, उस पथ से फिर डरना कैसा
यह रुक-रुक कर बढ़ना कैसा

हो कर चलने को उद्यम तुम, ना तोड़ सके बंधन घर के
सपने सुख वैभव के राही, ना छोड़ सके अपने उर के ।
जब शोलों पर ही चलना है पग फूँक- फूँक रखना कैसा

पहले ही तुम पहचान चुके, यह पथ तो काँटो वाला है।
पग-पग पर पड़ी शिलाएँ हैं, कंकड़ मय काँटो वाला है।
दुर्गम पथ अँधियारा छाया फिर मखमल का सपना कैसा

होता है प्रेम फकीरी से, इस पथ पर चलने वालों को
पथ पर बिछ जाना पड़ता है, पथ पर बढ़ने वालों को
यह राह भिखारी बनने की सुख वैभव का सपना कैसा

इस पथ पर बढ़ने वालों को, बढ़ना ही है केवल आता
आती जो पग में बाधायें, उनसे बस लड़ना ही आता।
तुम भी जब चलते उस पथ पर, फिर रुकना और झुकना कैसा।

शांति नही तब तक | Shanti Nhi Tab Tak | Hindi Kavita

शांति नही तब तक, जब तक
सुख-भाग न सबका सम हो |
नही किसी को बहुत अधिक हो
नही किसी को कम हो
स्वत्व मांगने से न मिले
संघात पाप हो जाए
बोलो धर्मराज, शोषित वे
जिएँ या मिट जाए ?
न्यायोचित अधिकार मांगने
से न मिले, तो लड़ के.
तेजस्वी छींनते समर को,
जीत, या कि खुद मर के.
किसने कहा, पाप है समुचित.
स्वत्व प्राप्ति हित लड़ना?
उठा न्याय का खड्ग समर में
अभय मारना मरना?
यह समर तो और भी अपवाद है
चाहता कोई नही इसको, मगर
जूझना पड़ता सभी को, शत्रु जब
आ गया हो द्वार पर ललकारता,
छीनता हो स्वत्व कोई, और तू
त्याग तप से काम ले, यह पाप है.
पुण्य है विच्छिन कर देना उसे
बढ़ा रहा तेरी तरफ जो हाथ हो
युद्ध को तुम निध कहते हो मगर
जब तलक है उठ रही चिंगारियाँ
भिन्न स्वार्थो के कुलिश संघर्ष की,
युद्ध जब तक विश्व में अनिवार्य है.
और जो अनिवार्य है, उसके लिए
खिन्न या परितप्त होना व्यर्थ है
तू नही लड़ता, न लड़ता, यह आग
फूटती निश्चय, किसी भी ब्याज से

छोटी कविता कक्षा 8 के बच्चों के लिए : सोने री चिडकली रै

नमस्कार दोस्तों hihindi.कॉम हिंदी भाषा की सबसे तेजी से बढती और विस्तृत जानकारी देने वाली वेबसाइट हैं, यहाँ आपकों रोजाना नई-नई हिंदी कविताएँ मौलिक और सग्रहित दोनों रूपों में उपलब्ध करवाई जाती हैं. आज के छोटी कविता विषय में आपकों कक्षा 8 के बच्चों के लिए छोटी प्रस्तुत की जा रही हैं. कविता पढने के बाद आपकों अच्छी लगे तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे-छोटी कविता हिंदी में,बच्चों की कविताएँ,छोटी हास्य कविताएँ

छोटी कविता (फॉर 8th क्लास ) छोटी कविता हिंदी में,बच्चों की कविताएँ,छोटी हास्य कविताएँ

सोने री चिडकली रै, प्यारो म्हारो देसड़ो,
नर वीरां री खान जगत अगवानी रै ||
दूध दही री अठै नदियाँ बहती, रिध सिद्ध साथै नव निध रहती,
होती अठै मौकली गाया, रहती फलफुला री छाया,
करसा अन्न घंणों निपजाता, बानै देख देव हरषाता,
सस्य श्यामला रै भारत भोम हैं,

ई रो अन्नपूर्णा रूप, दुनियाँ जाणी रै || सौने री ||
आ घरती नाहर जाया, नारया भी रण में हाथ दिखाया,
सूरा लड़ता सीस कटयुड़ा, देख्या पीछे नही हटयुड़ा,
रण में सदा विजय ही पाई, सारै धर्म ध्वजा फहराई,
आ’ तो करम भौम हैं रै, श्री भगवान् री,
लियो बार-बार अवतार, अमर कहानी रै || सौने री|
आ धरती हैं ऋषि मुनिया री, चिंता करती सब दुनिया री,
गूंजी अठै वेद री वाणी, गीता रण में पड़ी सुनाणी,
विकस्यो हो विज्ञान अठै ही, जलमी सारी कला अठै ही ?
आ’ तौ जगत गुरु ही रै, भारत-भारती,
अब तन मन जीवण वार, बा’ छवि ल्याणी रै | सौने री |

छोटी कविता (बूढी पृथ्वी का दुःख )

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क्या तुमने सुना हैं
सपनो में चमकती कुल्हाडियो के भय से
पेड़ो की चीत्कार?
कुल्हाडियो के वार सहते
किसी पेड़ की हिलती टहनियों में
दिखाई पड़े हैं तुम्हे
बचाव के लिए पुकारते हजारो-हजारो हाथ?
क्या होती हैं, तुम्हारे भीतर घमस
कटकर गिरता हैं जब कोई पेड़ धरती पर?
सुना हैं कभी
रात के सन्नाटे में अँधेरे से मुह ढाप
किस कदर रोती हैं, नदियाँ?
इस घाट अपने कपड़े और मवेशियाँ धोते
सोचा हैं कभी कि उस घाट
पी रहा हैं, कोई प्यासा पानी

या कोई स्त्री चढ़ा रही होगी किसी देवता को अर्ध्य?
कभी महसूस किया हैं कि किस कदर दहलता हैं
मौन समाधि लिए बैठा पहाड़ का सीना
विस्फोट से टूटकर बिखरते पत्थरों की चीख?
खून की उल्टियाँ करते
छेदे हैं कभी हवा को, अपने घर के पिछवाड़े?
थोड़ा सा वक्त चुराकर बतिया या हैं कभी
कभी शिकायत न करने वाली
गुमसुम बूढी पृथ्वी से उसका दुःख?
अगर नही, तो क्षमा करना!
मुझे तुम्हारे आदमी होने पर संदेह हैं !!

मित्रों यहाँ पर दी गईं दो छोटी कविता आपकों कैसी लगी, कमेंट कर जरुर बताएँ. साथ आपके पास छोटी कविता हिंदी में, बच्चों की कविताएँ, छोटी हास्य कविताएँ, माँ पर छोटी कविताएँ, परिश्रम पर कविताएं, छोटी छोटी कविता, देशभक्ति कविताएँ, पेड़ पौधों पर कविता इन विषयों पर कोई छोटी कविता हो तो हमे जरुर भेजे.

Small English Poems For Kids & Children Class 1 To 6th

Hello Guys If You Searching Small English Poems Then U Landed Perfect Place. Here We’re Provided short love & romantic poems In English For Kids & Children. Low Standard Classes Boys Nd Girls He/She Reads In Class 1,2,3,4,5,6 Must Read It And Take Interest. By The Way, We Are Not English Content Writer But Collect Inpairing Poems For Our English Reader. Let’s Read And Enjoy Them.

poem on birds in English

a little child saw a little bird
in the heart, singing was heard.
I wish to fly as you can
you a bird but I’m a man.

poem on a river in English

a river gives life to all
on the way, many hurdles fall
dancing like a maiden
heading to meet an ocean.

poems about God

God Is Here.
God is there.
in water and air.
find him everywhere.
through the prayer.

Five Little Soldiers

standing in a row.
three stood straight.
and two stand so.
along came the caption.
and what do you think?
they all stood straight,
as quick as a wink.

The Moon And The Sun

the moon shines clear as silver.
the sun shines bright as gold,
and both are very very lovely
and very, very old.
God hung them up as lanterns.
for all beneath the sky
and no body can blow them out.
for they are up too high.

We Love India

I am a soldier.
guarding my country.
I am a sailor,
guarding ocean and sea
I am a pilot
protecting the blue sky.
”we love India”
all the people cry.

Prayers For Children

Goddess of knowledge,
worshipped in school and college,
give me light
to fight for right.
let us pray
night and day.

Words Never Die

a word can never be recalled.
it remains forever said.
as long as there is a memory,
no word is ever dead.

now careless words once spoken,
can bring grief to a heart,
and often times in memory,
these words can never depart.

to make the world a sadder,
or a happier place each day,
is within the power of each of us,
by just the things we say,

since words live for ever,
it’s up to you and me,
to see that what we say each day,
makes the world a better place to be.

thinking poem

Is hope alive, when coming through your past?
Can you transfer love from the future, alive, to your present?
My present will be the continuity of life, the awareness of feelings, the Apollo’s golden gifts!
Light is everywhere!
Unexpected gifts are ahead!
We signed treats with the Gods! Fortune, hope, consent is here!
Someone might crumble the wall, leading me to freedom!
Today was a happy day!

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