यदि मैं गांव का सरपंच होता निबंध If I Were A Sarpanch Essay In Hindi

यदि मैं गांव का सरपंच होता निबंध If I Were A Sarpanch Essay In Hindi: भारत एक लोकतंत्र देश हैं. जहाँ निम्न स्तर पर शासन के लिए स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था हैं. ग्राम पंचायत के मुखिया को सरपंच कहा जाता हैं. यदि मैं मेरे गाँव का सरपंच (sarpanch of village) होता हैं, तो किस तरह सरपंच के पॉवर का उपयोग करता, किस तरह के कार्यों को मेरी ग्राम पंचायत में सम्पन्न करवाता तथा किस तरह के नवीन कार्यक्रम के जरिये ग्राम पंचायत के कार्य करवाता.

यदि मैं गांव का सरपंच होता निबंध If I Were A Sarpanch Essay In Hindi

यदि मैं गांव का सरपंच होता निबंध If I Were A Sarpanch Essay In Hindi

सरपंच पर निबंध को आप कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 के स्टूडेंट्स के लिए 100, 200, 250, 300, 400, 500 शब्दों में छोटा बड़ा निबंध के रूप में उपयोग में ले सकते हैं.

सरपंच पर निबंध Sarpanch essay in hindi

जिस तरह हमारे देश का प्रधान, प्रधानमंत्री और राज्य के मुखिया मुख्यमंत्री होते हैं, उसी तरह शासन की त्रिस्तरीय व्यवस्था में गाँव का प्रधान सरपंच को बनाया जाता हैं.

प्राचीन समय में गाँव के बुजुर्ग व्यक्ति को यह पद दिया जाता था, आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था में गाँव के मुखिया का चयन मतदान से होता हैं.

गाँव की प्रशासनिक और कार्यपालिका की बॉडी का प्रतिनिधित्व करने वाला सरपंच का पद सम्मान का सूचक भी हैं. अनेक पंचों के बीच एक मुखिया का चुनाव किया जाता हैं. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इनका कार्यकाल पांच वर्ष का होता हैं तथा यह ग्राम पंचायत के प्रति उत्तरदायी होते हैं.

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गाँव के विकास से जुड़े कार्य सरपंच के माध्यम से ही सम्पन्न किये जाते हैं. हमारे गाँवों में आज भी रसूक रखने वाले खानदानी परिवारों की परम्परा हैं. अमूमन ऐसे परिवारों से ही सरपंच बनते हैं.

अगर महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलेगे जहाँ एक महिला सरपंच अपने कार्यभार को सम्भाल रही होती हैं.

ब्रिटिश हुकुमत और इससे पूर्व के गुलामी काल में भारत से गाँव के प्रधान की यह परम्परा लुप्त हो गई थी. उससे पहले गणराज्यों में गाँव का शासन संचालन प्रधान द्वारा होता था.

मगर कालान्तर में राजशाही ने इसे अपने हाथों में ले लिया था. स्वतंत्रता के पश्चात भारत में गाँवों के विकास और व्यवस्था का जिम्मा सरपंच को सौपा गया.

अपने लोगों के बीच रहकर एक ईमानदार सरपंच कई जन कल्याण के कार्य कर सकता हैं. जबकि इसके विपरीत ऊपरी शासन की व्यवस्था में उच्च अधिकारियों को न तो गाँव की आवश्यकताओ और समस्याओं के बारे में जानकारी हुआ करती थी, न ही उन्हें विकास कार्यों में दिलचस्पी हुआ करती थी.

मगर इस लोकतांत्रिक ढाँचे में एक बार सरपंच चुने जाने वाले व्यक्ति इस उम्मीद में ही सही कि जनता उन्हें दुबारा चुनेगी, वह जनता के विकास के विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करवाता हैं, उनकी समस्याओं की सुनवाई कर विधिक हल निकालने की कोशिश करता हैं.

यदि मैं गांव का सरपंच होता निबंध

भारत सदा से कृषि प्रधान देश रहा हैं. यहाँ की 80 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में निवास करती हैं. केन्द्रीय व प्रांतीय सरकारें गाँवों के सुधार के लिए अनेक योजनाएं बनाती हैं.

पर उनकी योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुचना कठिन होता हैं. गाँव गाँव में सम्रद्धि लाने का कार्य ग्राम पंचायत के योग्य सरपंच द्वारा ही संभव हो पाता हैं.

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सरपंच बनने के बाद मेरे कार्य-यदि मुझे ग्राम पंचायत का सरपंच बनने का मौका मिलता तो गांववालों से पूछकर भलीभांति समझकर उसकी हर समस्या को दूर कर गाँव को सम्रद्धशाली बनाने का प्रयत्न करने के साथ साथ निम्नलिखित कार्य करता.

  1. नियमानुसार ग्राम पंचायत की मीटिंग बुलाता. ग्राम की समस्याओं पर विचार करके वहां के स्थानीय लोगों के सहयोग से इन्हें सुलझाने की पूरी चेष्टा करता. पंचायत के मुख्य कार्य गाँव की सफाई, प्रकाश व्यवस्था, शिक्षा, भूमि के मामूली झगड़े का निवारण, स्वास्थ्य की देखभाल, गाँव के कच्चे रास्तों को पक्का करना, राहत कार्यों की देखभाल, बीज खाद वितरण व्यवस्था, खेती के रोगों की रोकथाम, तालाबों, नलकूपों की समय समय पर मरम्मत आदि को अपने सहयोगियों की मदद से अच्छी प्रकार करवाता ताकि गाँव में शीघ्र परिवर्तन दिखाई दे.
  2. इन सभी कार्यों को कराने हेतु पैसे की आवश्यकता होती हैं. ग्राम पंचायत के आय के साधन हैं. मवेशियों तथा घरों पर टैक्स, वाहनों पर टैक्स, आवासीय भूमि की बिक्री, मेला का टैक्स, चारागाह टैक्स, कृषि टैक्स, मवेशी पर लगे दंड द्वारा वसूला गया टैक्स. मैं इन सभी आय के साधनों को वसूल करवाने के लिए ईमानदार कर्मचारियों की नियुक्ति करता. समय समय पर स्वयं निरिक्षण करता ताकि किसी भी स्तर पर टैक्स की चोरी न हो. इसके लिए पंचायत की रोकड़ और रिकॉर्ड अनुभवी व शिक्षित व्यक्तियों से तैयार करवाता.
  3. मैं यह भी निगरानी करता कि आय से प्राप्त धन का दुरूपयोग न हो, इसकों जनता की सुविधा के लिए खर्च करने दिया जाए.
  4. अपने प्यारे गांववासियों को समय समय पर यह भी बताता कि वे दहेज़ न ले, न दे, दहेज की बुराइयों को खूब विस्तार से समझाता. यह भी सलाह देता कि किसी की मृत्यु पर व्यर्थ पानी की तरह पैसा न बहाएं बल्कि इसके धन से गाँव में अस्पताल व स्कूल खुलवाएं. ताकि कोई भी रोगी साधारण उपचार हेतु शहर की ओर न जाएं तथा शिक्षा के लिए हमारें बच्चे कही अन्यत्र न जाएं. कन्याओं के लिए भी कक्षा 10 तक स्कूल खुलवाने के लिए जनता तथा सरकार का सहयोग लेने के लिए भरसक प्रयत्न करता.
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उपसंहार– सरपंच के रूप में गाँवों का सम्पूर्ण विकास ही मेरा एकमात्र लक्ष्य रहता.

FAQ

सरपंच के क्या कार्य हैं?

सरकारी योजनाओं का लाभ गाँवों तक पहुचाना, मूलभूत सुविधाओं का विकास, पंचायत विकास कार्यक्रम तैयार करना.

सरपंच का कार्यकाल कितने वर्ष का होता हैं.?

5 वर्ष

गाँव के सरपंच के चुनाव कौनसी संस्था आयोजित करवाती हैं?

राज्य निर्वाचन आयोग

पंच सरपंच के पद हेतु चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र कितनी हैं.?

21 वर्ष

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