कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का जीवन परिचय | Kanaiyalal Maneklal Munshi Biography in Hindi

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का जीवन परिचय Kanaiyalal Maneklal Munshi Biography in Hindi के  एम मुंशी पेशे से एक वकील थे. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने से पहले वह क्रांतिकारी समूह के प्रति विशेष रूप से प्रभावित व आकर्षित थे. उन्होंने नमक सत्याग्रह व सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया इनकी जीवनी व उनके  जीवन इतिहास को विस्तार से जानते हैं.

कन्हैयालाल मुंशी का जीवन परिचय Kanaiyalal Maneklal Munshi Biography in Hindi

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का जीवन परिचय Kanaiyalal Maneklal Munshi Biography in Hindi

श्री मुंशी (Kanaiyalal Maneklal Munshi) का जन्म 30 दिसम्बर 1887 गुजरात राज्य के भड़ूच जिले में हुआ था. इन्होने अपनी शिक्षा स्थानीय विद्यालय से प्राप्त करने के बाद ये बडौदा कॉलेज पढ़ने के लिए गये.  जहाँ  उन्हें  अरविन्द  घोष  जैसे स्वतंत्रता प्रेमी प्रशिक्षक मिले.

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का व्यक्तिगत परिचय

पूरा नामकन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी
जन्म29 दिसंबर, 1887
जन्म भूमिभरुच (गुजरात)
मृत्यु8 फरवरी, 1971
मृत्यु स्थानमुम्बई
नागरिकताभारतीय
प्रोफेशनस्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, क़ानून विशेषज्ञ, साहित्यकार तथा शिक्षाविद
धर्महिन्दू
आंदोलनहोम रूल, बारदोली सत्याग्रह, नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा
यूनिवर्सिटीमुंबई यूनिवर्सिटी
पॉलीटिकल पार्टीस्वराज पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जन संघ, स्वतंत्र पार्टी
शैक्षिक योग्यताएलएलबी
पदराज्यपाल (उत्तर प्रदेश)
जातिब्राह्मण
राशिकर्क
मृत्यु स्थानमुंबई

स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इन्होने कानून को अपना विषय चुना. एक वकील के रूप में इनको काफी ख्याति मिली. इन्होने हिन्दू वैदिक साहित्य का गहन अध्ययन किया. ये वे गुजराती और अंग्रेजी के अति रिक्त फ्रेंच और जर्मन भाषा के अच्छे जानकार थे.

1937 में वह बम्बई में गृहमंत्री के रूप में नियुक्त किये गये. 1940 में नवयुवकों व देशवासियों का व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए आह्वान किया जिसके जिसके चलते कन्हैयालाल माखनलाल मुंशी को गिरफ्तार कर लिया गया.

उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में लिप्त आंदोलनकारियों के सम्बन्ध में उनके मुकदमें की बहुत महत्वपूर्ण ढंग से वकालत की.

स्वाधीनता प्राप्ति के बाद के एम मुंशी भिन्न भिन्न सार्वजनिक कार्यालयों का कार्यभार सम्भालते रहे. 1948 में वह हैदराबाद सरकार के एजेंट जनरल पद पर नियुक्त किये गये तथा हैदराबाद स्टेट को भारतीय संघ में मिलाने में महत्वपूर्ण प्रमाणिक उत्तरदायित्व को निभाया.

1952 में वह केंद्रीय मंत्रीमंडल में खाद्य मंत्री बनाए गये. 1953 से 1958 तक उत्तरप्रदेश के राज्यपाल के पद पर रहे. 1960 में वह स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गये. के एम मुंशी एक सफल राजनीतिज्ञ के साथ साथ एक प्रसिद्ध लेखक, शिक्षा शास्त्री तथा समाज सुधारक भी थे.

1938 में उन्होंने भारतीय विद्या भवन की स्थापना की. उनका नाम साहित्य समसाद, गुजराती साहित्य समसाद तथा हिंदी साहित्य सम्मेलन आदि संस्थाओं से जुड़ा रहा.

उन्होंने अनेक पत्र पत्रिकाओं का भी संपादन किया जैसे भार्गव, गुजरात, सामाजिक कल्याण तथा भारतीय विद्या भवन पत्रिका आदि. उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं आई फालो द महात्मा, द क्रिएटिव आर्ट ऑफ़ लाइफ, अखंड हिंदुस्तान, पिलग्रिमेज टू फ्रीडम तथा जय सोमनाथ आदि.

संविधान-निर्माण में योगदान (Kanaiyalal Maneklal Munshi Biography)

भारत की स्वतंत्रता के बाद संविधान निर्माण पहली चुनौती थी. संविधान में आदर्शवाद व यथार्थवाद दोनों विचारो के एक गूढ़ मिश्रण को लाने की अहम आवश्यकता थी. कुशाग्र कानूनी बुद्धि से परिपूर्ण कन्हैयालाल मुंशी इस कार्य में हस्तसिद्ध माने गये तथा इनको संविधान निर्माण समिति के मुख्य ग्यारह सदस्यों में शामिल किया गया.

भीमराव आम्बेडकर के साथ सामजस्य से कार्य करते हुए मुंशी ने हर व्यक्ति को समान संरक्षण के विषय व भारतीय संघ की राजभाषा में हिंदी को स्थान दिलाने में मुंशी का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में

15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता की घोषणा के साथ ही सभी देशी रियासतों को पूर्ण स्वतंत्रता दी गई कि वे चाहे तो भारत के साथ रहे या पाकिस्तान के साथ अथवा अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखे.

हैदराबाद रियासत का निजाम अपनी रियासत को पाकिस्तान से मिलाना चाहता था, जबकि जनता भारत के साथ रहना चाहती थी. हैदराबाद के विलय की समस्या भारत के लिए बड़ी समस्या थी, इसे सुलझाने का कार्य सरदार पटेल को दिया गया था. भारत सरकार ने अपने प्रतिनिधि के रूप में कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी को हैदराबाद भेजा.

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने अपने कौशल से पटेल के साथ मीलकर हैदराबाद को भारत में मिलाने में सफलता अर्जित की, उन्होंने इस पर एक संस्मरण भी लिखा जो द ऐंड ऑफ़ ऐन इरा के नाम से प्रकाशित हुआ.

वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किये गये तथा कृषि एवं खाद्य विभाग इन्हें दिया गया. पर्यावरण तथा वानिकी के संरक्षण के क्षेत्र में मुंशी ने महत्वपूर्ण कार्य किये हर साल जुलाई में वन महोत्सव उन्ही के प्रयासों से शुरू हुआ.

जवाहरलाल नेहरू और मुंशी के बिच विवाद जब पैदा हुआ जब उन्होंने सोमनाथ मन्दिर के पुनः निर्माण के लिए कार्य आरम्भ कर दिया. नेहरू ने साफ शब्दों में कहा कि आप जो कर रहे हैं मुझे पसंद नहीं हैं.

1952 से 1957 तक कन्हैयालाल मुंशी उत्तर प्रदेश राज्य के राज्यपाल रहे बाद में ये कुछ समय के लिए स्वतंत्र पार्टी में रहे और अंत में भारतीय जनसंघ की सदस्यता ले ली.

कन्हैयालाल मुंशी द्वारा भारतीय विद्या भवन की स्थापना 

साल 1938 का वह समय था जब कन्हैयालाल मुंशी को इस बात का एहसास हुआ कि विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए एक ऐसे भवन की स्थापना की जाए,

जहां पर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हासिल हो और इसीलिए कन्हैयालाल मुंशी ने अपने 3 दोस्तों के साथ मिलकर के कुछ पैसे इकट्ठे किए और उसी के जरिए उन्होंने भारतीय विद्या भवन की स्थापना की और आपको यह जानकर काफी प्रसन्नता होगी कि वर्तमान के समय में भारतीय विद्या भवन से दुनिया भर के तकरीबन 120 से भी अधिक सेंटर जुड़े हुए हैं।

इसके अलावा इंडिया में ही 350 से भी ज्यादा ऐसे एजुकेशनल इंस्टिट्यूट है, जो विद्या भवन से किसी ना किसी प्रकार से संबंध है। इसमें विद्यार्थियों को इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म, साइंस, आर्ट तथा इकोनामिक की पढ़ाई करवाई जाती है।

परिवार 

  • माता: ज्ञात नहीं 
  • पिता: ज्ञात नहीं 
  • पत्नी: लीलावती मुंशी
  • भाई: ज्ञात नहीं 
  • बहन: ज्ञात नहीं 
  • बच्चे: जगदीश मुंशी, सरला सेठ, उषा रघुपति, लता मुंशी, गिरीश मुंशी

शारीरिक संरचना

  • लंबाई: 5 फुट 3 इंच 
  • वजन: 62 किलो 
  • आंखों का रंग: काला 
  • बालों का रंग: हल्का सफेद 
  • चेहरे का रंग: सावला 

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की पसंद

  • पसंदीदा अभिनेता: ज्ञात नहीं 
  • पसंदीदा अभिनेत्री: ज्ञात नहीं 
  • पसंदीदा कलर: ज्ञात नहीं 
  • पसंदीदा खाना: शाकाहारी
  • पसंदीदा गायक: ज्ञात नहीं 
  • पसंदीदा घूमने की जगह: ज्ञात नहीं

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की साहित्यिक रचनाएं

  • गुजरातनो नाथ
  • पाटणनी प्रभुता
  • पृथिवीवल्लभ
  • लोमहर्षिणी
  • भगवान परशुराम
  • वेरनी वसुलात
  • कोनो वांक
  • स्वप्नद्रष्टा
  • तपस्विनी
  • ब्रह्मचर्याश्रम
  • मारी बिनजवाबदार कहाणी
  • गुजरातनी 
  • कृष्णावतार 
  • राजाधिराज
  • जय सोमनाथ
  • भगवान कौटिल्य
  • भग्न पादुका
  • लोपामुद्रा
  • अडधे रस्ते
  • सीधां चढाण
  • स्वप्नसिद्धिनी शोधमां
  • पुरन्दर पराजय
  • अविभक्त आत्मा
  • तर्पण
  • पुत्रसमोवडी
  • वावा शेठनुं स्वातंत्र्य
  • बे खराब जण
  • आज्ञांकित
  • ध्रुवसंवामिनीदेवी
  • स्नेहसंभ्रम
  • डॉ॰ मधुरिका
  • काकानी शशी
  • छीए ते ज ठीक

कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी की अंग्रेजी रचनाएं

  • Gujarat & its Literature
  • Follow the Mahatma
  • Early Aryans in Gujarat
  • Akhand Hindustan
  • The Aryans of the West Coast
  • The Indian Deadlock
  • The Imperial Gurjars
  • Ruin that Britain Wrought
  • Bhagavad Gita and Modern Life
  • The Changing Shape of Indian Politics
  • The Creative Art of LIfe
  • Linguistic Provinces & Future of Bombay
  • Gandhi : The Master
  • Bhagavad Gita – An Approach
  • The Gospel of the Dirty Hand
  • Glory that was Gurjaradesh
  • Our Greatest Need
  • Saga of Indian Sculpture
  • The End of an Era (Hyderabad Memories)
  • Foundation of Indian Culture
  • Reconstruction of Society through Trusteeship
  • The World We Saw
  • Warnings of History
  • Gandhiji’s Philosophy in Life and Action

FAQ:

Q: विद्या भवन की स्थापना किसने की थी?

Ans: कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने

Q: भारतीय विद्या भवन की स्थापना कब हुई?

Ans: 7 नवंबर 1938

Q: कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी कौन थे?

Ans: यह गुजराती और हिंदी भाषा के बहुत ही फेमस लेखक थे, जिन्होंने हिंदी और गुजराती भाषा के अलावा अंग्रेजी भाषा में भी कई रचनाएं तैयार की थी।

Q: कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी को किस में महारत हासिल थी?

Ans: हिंदू कानूनों में

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