खजाइन उल फुतूह | Khazain Ul Futuh In Hindi | Amir Khusro Books

खजाइन उल फुतूह Khazain Ul Futuh In Hindi Amir Khusro Books: दिल्ली सल्तनत काल के इतिहास के लेखकों में अमीर खुसरो का नाम विशेष रूप से लिया जाता हैं. वे राजदरबार में श्य पाने वाले परिवार से सम्बन्ध रखते थे. कैकूबाद,जला लुद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, मुबारकशाह व गयासुद्दीन तुगलक के दरबार में खुसरो काफ़ी करीब रहा उसने खजाइन उल फुतूह नामक प्रसिद्ध किताब की रचना भी की. आज के लेख में हम amir khusro books के बारें में विशेष रूप से जानेगे.

Khazain Ul Futuh In Hindi

खजाइन उल फुतूह | Khazain Ul Futuh In Hindi | Amir Khusro Books

books written by ameer khusro kalam books list pdf works खजाइन उल फुतूह (तारीखे अलाई):  इसका लेखक भारत के फ़ारसी कवियों में सर्वश्रेष्ठ अमीर खुसरों था. वह सुल्तान जलालुद्दीन खिलजी से मुहम्मद बिन तुगलक   तक सभी दिल्ली सुल्तानों का समकालीन था. १२९० ई से १३२५ ई तक उसने राजकवि का पद धारण किया. अमीर खुसरों  ने गुरात उल कमालमिफताह उल फुतूह, तुगलकनामा, नुहुसिपिहर, देवलरानी आदि अनेक ग्रंथों की रचना भी की.

खजाइन उल फुतूह जिसे तारीखे अलाई भी कहा जाता हैं. की रचना १३११ ई में की थी. और इसमें सुलतान अलाउद्दीन की विजयों के साथ साथ उनके आर्थिक सुधारों और बाजार भाव नियंत्रण का उल्लेख भी किया हैं. परन्तु खुसरो ने उन घटनाओं की तरफ ध्यान नहीं दिया जो उसके संरक्षक के विरुद्ध थी. जैसे कि जलालुद्दीन की हत्या.

खुसरो ने कही कही पर अत्यधिक अलंकृत फ़ारसी का प्रयोग किया हैं जिसकी वजह से रहस्य का पर्दा उठ नहीं पाता हैं. उसने कई हिंदी शब्दों का प्रयोग भी किया हैं. इस ग्रंथ में तिथि कर्म की कमी खटकती हैं, फिर भी यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ हैं. डॉ इश्वरीप्रसाद ने इस ग्रंथ के बारे में लिखा हैं कि खजायन दक्षिणी अभियानों का इतिहास हैं.

यह तिथि एवं वृतांत दोनों ही दृष्टियों से सही हैं और इससे हमें अलाउद्दीन के शासन काल की उपयुक्त तिथिक्रम के निश्चय करने में सहायता मिलती हैं. इसमें कतिपय प्रशासकीय सुधारों का भी वर्णन हैं. परन्तु यह वर्णन अत्यंत संक्षिप्त हैं. यह खेद की बात हैं कि इस युग की प्रवृत्तियों के अनुसार खुसरो भी एक कट्टर मुसलमान था और जिन लोगों को वह काफिर समझता था उनके विषय में विचार प्रकट करते हुए उसने धर्मान्धता का परिचय दिया.

खुसरो की काव्य रचनाओं से भी कुछ ऐतिहासिक सामग्री प्राप्त होती हैं. तूहफतूह रिगार से बलवन के सम्बन्ध में वस्तुल हयात से निजामुद्दीन औलिया, मलिकछज्जु आदि के बारे में गुरात उल कमाल से निजामुद्दीन औलिया, कैकूबाद आदि के बारे में तथा देवलरानी से खिज्र खां एवं देवलरानी के बारे में जानकारी मिलती हैं.

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Amir Khusro Books Khazain Ul Futuh

अमीर खुसरो की रचनाओं को सत्यापित इतिहास स्रोत के रूप में नहीं लिया जा सकता इसकी वजह यह हैं कि उसकी रचनाएँ इतिहास को ध्यान में रखकर नहीं लिखी गई बल्कि अपने शासकों की प्रशंसा में लिखी गई. उसकी कविता शायरी में भी शासक के एक ही पक्ष पर प्रकाश डाला गया हैं, हालांकि ऐतिहासिक तथ्यों तथा घटनाओं के क्रम को जानने में खुसरो की पुस्तकें मदद गार साबित हो सकती हैं.

अमीर खुसरो की किताबों के नाम इस प्रकार हैं- किरान-उस-सादेन, मिफता-उल-फुतूह, खजाइन-उल-फुतूह, आशिका, नूह सिपि हर, तुगलकनामा आदि अपनी अंतिम पुस्तक तुगलकनामा में खुसरो गयासुद्दीन तुगलक की खुसरोशाह पर युद्ध में मिली विजय का वर्णन करता हैं. खुसरो तथा अल बरुनी के इतिहास लेखन में खुसरो को ही अधिक प्रमाणिक माना गया हैं  इसका कारण यह हैं कि अन्य सल्तनत काल के लेखकों की तुलना में इसने तिथियों तथा घटनाओं के क्रम को अधिक महत्व दिया.

अमीर खुसरो की रचनाएँ – Amir Khusro Books In Hindi

सल्तनत काल की अवधि के शीर्ष रचनाकार दरबारियों में अमीर खुसरो भी एक था, 1253 ई में जन्मे खुसरो का पारिवारिक सम्बन्ध हमेशा से शाही घरानों से रहा, खुसरो ने भी जीवन के अधिकाँश समय खिलजी और तुगलक वंश के शासकों के दरबार में बिताएं. एक इतिहास लेखक की बजाय कविता लेखन के लिए इन्हें याद किया जाता हैं. इनका जुड़ाव निजामुद्दीन औलिया के साथ काफी गहरा था.

बात करे इनके कवि जीवन की तो इन्होने 1289-1325 की अवधि के मध्य ही कई कृतियाँ लिखी. कविताओं का विषय उस समय के चरित्र और घटनाओं पर केन्द्रित थी. अपने शाही संरक्षक को प्रसन्न करने के उद्देश्य से भी इन्होने लेखनी की. इनकी लिखित पुस्तकों का विवरण इस प्रकार हैं.

किरान-उस-सादेन

यह अमीर खुसरो की पहली रचना है जिसे 1289 में लिखा गया था. इसमें बुगरा खां और उसके बेटे के मिल्न का रोचक वर्णन किया गया हैं. पुस्तक के शेष विवरण में तत्कालीन दिल्ली शहर की आधारभूत संरचना जैसे भवनों, राजदरबार और सरकारी अधिकारियों के जीवन तथा सामाजिक जीवन के विषय में लिखा गया हैं, साथ ही इस रचना में खुसरो की मंगोलों के प्रति नफरत के भाव भी देखे जा सकते हैं.

मिफता-उल-फुतूह

वर्ष 1291 ई में अमीर खुसरो द्वारा मिफता-उल-फुतूह नामक किताब की गई. इस किताब में खिलजी वंश के शासक जलालुद्दीन खिलजी के शासन, मालिक छज्जू के विद्रोह तथा रणथम्भौर दुर्ग पर खिलजी की चढ़ाई तथा देश के अन्य हिस्सों में किये गये सैन्य अभियानों का वर्णन किया गया हैं.

खजाइन-उल-फुतूह

अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल के प्रथम पन्द्रह वर्षों के काल की महत्वपूर्ण घटनाओं को अमीर खुसरो ने अपनी किताब खजाइन उल फुतूह में लिखा है इसे तारीख ए अलाई भी कहा जाता हैं. वैसे तो यह एक साहित्यिक रचना है मगर खिलजी के जीवन उनके मालवा, चित्तौड और गुजरात अभियानों के बारे में भी जानकारी मिलती हैं. हालांकि इसमें तटस्था का अभाव व चाटुकारिता स्पष्ट देखी जा सकती हैं.

आशिका

यह एक प्रेमगाथा है जिसके पात्र खिलजी का पुत्र खिज्र खां और गुजरात के राजा राजकरन की बेटी देवलरानी हैं. इसमे अल्लाउदीन की गुजरात और मालवा की जीत और खुद को मंगोलों द्वारा कैद किये जाने की घटना के बारे में भी लिखते है. इसके साथ ही कई विशेष क्षेत्रो के बारे में लिखा गया है.

नूह सिपिहर

नूह सिपिहर एक ऐसी पुस्तक है. जहा हिन्दुस्तानी लोगो और उनके जीवन चरित्र के बारे में अच्छा और वास्तविक वर्णन किया गया है. इस पुस्तक में मुबारक खिलजी का वर्णन भी देखने को मिलता है. इसमे खिलजी के समय के जीवन दर्शन का वर्णन किया गया है. इसमे उस समय की भाषा शैली खान-पान और अध्ययन के बारे में लिखा गया है. यह पुस्तक उस समय की जीवंतता का वर्णन करता है.

तुगलकनामा

तुगलकनामा यह खुसरो द्वारा लिखित अंतिम मसनवी थी. जिसमे खुशारोशाह के सामने तुगलक की जीत के बारे में मार्मिक वर्णन किया गया है. इसे एक कहानी के रूप में प्रस्तुत कर धार्मिकता के साथ प्रस्तुत की गई है. इस मसनवी में असत तत्वों का शुसरोशाह के साथ किये गए संघर्ष की कहानी को दर्शाया गया है.

अमीर खुसरो के समय भी बहुत से इतिहासकार हुए पर अमीर खुसरो अपनी कालक्रम की विश्वसनीय रचनाओ और सामाजिक जीवन में और जीवन की स्थिति में बदलाव करने वाली खुसरो की रचनाए सामाजिकता पर गौर करती थी.

FAQ

Q. खजाइन उल फुतूह के लेखक कौन हैं?

Ans: अमीर खुसरो

Q. खजाइन उल फुतूह का दूसरा नाम क्या हैं?

Ans: तारीख ए अलाई

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