अज्ञान पर सुविचार अनमोल वचन | Ignorance Quotes in Hindi

अज्ञान पर सुविचार अनमोल वचन | Ignorance Quotes in Hindi : अज्ञान इन्सान को अंधकार की ओर ले जाती हैं. संसार की अधिकतर बुराइयों और समस्याओं की जड़ अज्ञानता ही हैं. यानि किसी वस्तु के स्वरूप का ज्ञान न होना ही अज्ञान हैं. कई बार लोगों के कहे सुने को ही सच मान बैठते हैं. असल मैं अज्ञानता की मूल वजह यही हैं शिक्षा समाज से अज्ञानता का पर्दा उठाने में मददगार हो सकती हैं. मगर सम्पूर्ण ज्ञान किताबों में भी नही होता है मनुष्य को अपने वातावरण के अनुभव से भी ज्ञान की प्राप्ति होती है तथा यह भी अंधकार को दूर करने में सहायक होता हैं. आज के लेख  में हम अज्ञान पर उद्धरण अनमोल वचन सुविचार (Ignorance Quotes) में अज्ञानता के बारे में दार्शनिकों के थोट्स को जानेगे.

अज्ञान पर सुविचार अनमोल वचन | Ignorance Quotes in Hindi

अज्ञान पर सुविचार अनमोल वचन | Ignorance Quotes in Hindi

अपने अज्ञान के विषय में अज्ञानी का अज्ञान ही अज्ञानी का रोग होता हैं.


परन्तु समस्त कलंकों दोषों की अपेक्षा अधिक बुरा कलंक/ दोष है वह है अज्ञान, जो सबसे बड़ा कलंक हैं.


जानकारी होना विज्ञान हैं, जानकारी होने का केवल विश्वास करना अज्ञान हैं.


केवल एक ही अच्छाई है, ज्ञान एक ही बुराई है अज्ञान.


अज्ञान मस्तिष्क की रात है, ऐसी रात जिसमें न चन्द्रमा है और न एक भी तारा/ नक्षत्र.


अज्ञान और बुद्धिहीनता मानव जाति की बर्बादी के दो मुख्य सेतु हैं.


अज्ञान के सर्वाधिक सच्चे लक्षण है- मिथ्याभिमान, गर्व और घमंड.


जहाँ अज्ञान में परमसुख हो, वहां ज्ञान की बात करना मूर्खता हैं.


सबसे भले है मूढ़ जिन्हें न व्यापे जगत गति अथवा मूर्ख ह्रदय न चेत, जो गुरु मिले विरंच सम)


सक्रिय अज्ञान से अधिक भयंकर कोई वस्तु नही होती हैं.


अनेक बाते वस्तुएं ऐसी हो सकती है जिनके विषय में एक बुद्धिमान पुरुष अज्ञानी रहना चाहेगा.


अज्ञान व्यक्ति को संभावनाओं की एक लम्बी श्रंखला प्रदान कर देता हैं.


वह व्यक्ति असाधारण रूप से अज्ञानी होना चाहिए जो पूछे जाने वाले प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दे देता हैं.


जितना हम अधिक पढ़ते है उतना ही अधिक हमें अज्ञान की पहचान मिलती हैं.


जहाँ अज्ञानता का वास है दुखों का साया भी वहां रहेगा.


अज्ञान के सिवाय कोई शत्रु नही हैं.


अज्ञान उजाले को जाग्रत नही कर सकता मगर घ्रणा ज्ञान रुपी दीपक को बुझा सकती हैं.


एक अज्ञानी के लिए मौन से बढ़कर कुछ नही है, यदि वह इसका महत्व समझ लेगा तो वह अज्ञानी नही कहलायेगा.


स्वयं की अज्ञानता का परख होना बुद्धिमान की पहली निशानी हैं.


एक मूढ़ इन्सान का मन ज्ञान में नही अज्ञान में अधिक लगता हैं.


जो दुनियां को सुखसागर समझता है वह सबसे बड़ा अज्ञानी हैं.

अज्ञान पर सुविचार

अज्ञान मनुष्य को जीवन पथ से भटका देता है। अज्ञानी मनुष्य अपने लिए सही मार्ग नहीं ढूँढ़ पाते हैं।


अज्ञान मनुष्य को अंधकार की ओर धकेल देता है जिसे ज्ञान से प्रकाशित किया जा सकता है। अज्ञान सही गलत में फर्क नहीं कर पाता है।


अज्ञान जीवन की परिस्थितियों का सामना करने में असमर्थ महसूस करता है।


अज्ञान मनुष्य को कभी सफलता की ओर नहीं ले जाता है।


जीवन में अज्ञानता, ग्रहण की तरह जीवन को अंधकारमय कर देती है।


अज्ञान मनुष्य को संसार में सम्मान पाने से दूर कर देता है। 


अज्ञानता मनुष्य को उसके जीवन राहों को कठिन बना देती है।


अज्ञानता में पड़ा मनुष्य अपना अच्छा बुरा सोच नहीं पाता है।


अज्ञान जैसे अभिशाप से छुटकारा ज्ञान के माध्यम से पाया जा सकता है।


अज्ञानी मनुष्य से वाद विवाद करना व्यर्थ है मात्र समय की बर्बादी है।


अज्ञान के सामने अपने ज्ञान का प्रचार अपने ज्ञान का अपमान ही है क्योंकि ज्ञान ग्रहण नहीं किया जायेगा।


अज्ञान को अपनी बात कहने देना चाहिए हस्तक्षेप न करना ही समझदारी है।


अज्ञानी अक्सर अपने को ज्ञानी बताकर दूसरों को नीचा दिखाते हैं। जबकि ज्ञानी सीख देते हैं किसी को नीचा महसूस नहीं कराते हैं।


अज्ञानी  जीवन आनंद के हिसाब से आनंद की प्राप्ति कर सकता है क्योंकि जब कुछ ज्ञात ही नहीं होगा तो आनंद ही लेगा उसे किसी से कुछ लेना देना ही नहीं होगा।


अज्ञानी और ज्ञानी की बात में आंतरिक समझ ज्यादा मायने रखती है। किताबी अज्ञानता मात्र सांसारिक हकीकत है जो सिर्फ विषय अज्ञानता देती है, ज्ञान होने पर ज्ञानी कहलाती है।


अज्ञानी को जबरदस्ती ज्ञान नहीं दिया जा सकता है। ज्ञान स्वयं ग्रहण करने की सोच है।


समाज में व्याप्त अज्ञान के द्वारा देश को प्रगति के पथ पर नहीं ले जाया जा सकता है।


अज्ञानी और ज्ञानी एक रूप के दो पहलू हैं।


अच्छे कार्य के लिए ज्ञान होना ज़रूरी है। बुरे कार्य के लिए अज्ञान ही बेहतर है मनुष्य को न ज्ञान होगा ना बुरा करने का मन से सोच पाएगा क्योंकि बिना सही सोचे ज्ञान परवान नहीं चढ़ता है।


अगर मनुष्य का मन मलिन हो, ज्ञान अज्ञान की वजह से अँधेरे में डूब चुका हो, और सोच गलत हो तो मनुष्य का पतन निश्चित है।


कई रिश्तों में अज्ञानी बने रहना अच्छा है क्योंकि ज्ञान हो जाने पर हकीकत सामने आ जाती है फिर रिश्ता नहीं रहता है।


प्रेम में समझ ही ज्ञानी अज्ञानी का निश्चय करती है। शब्दों को न समझ पाए वो अज्ञानी समान है फिर मन की बात कैसे समझ पायेगा।


अगर मन की संतुष्टि नहीं मिलती तो ज्ञानी हो या अज्ञानी सच्ची खुशी नहीं मिलती है।


जब मन उदास और परेशान होता है और समाज से दिल टूट चुका हो तो वह  अज्ञान को समर्थन देता है क्योंकि ज्ञान होने पर वास्तविकता कष्ट पहुँचाती है।


अज्ञानी मनुष्य अपनी गलतियों पर पर्दा डालना चाहते हैं और खुद को महान साबित करते हैं। वह सबसे अपनी गलतियों को छुपाते हैं ताकि सबके सामने ऊँचा उठ सकें।


आधुनिक समाज में पैसे की करामात भी ज्ञानी और अज्ञानी के संदर्भ में पैसे की अधिकता को ज्ञानी और कमी को अज्ञानी साबित करती है। लोगों के पास अधिक पैसा हो तो अज्ञान भी सही लगता है और पैसे ना होने पर गरीब का ज्ञान भी अनेक सवाल उठा देता है।


बिना सच्चाई जाने मनुष्य अज्ञानी ही है वह तथ्यों को सही रूप से नहीं समझ सकता है।


बचपन का अज्ञान श्रेष्ठ होता है क्योंकि वह पाक, स्वच्छ, निर्मल होता है ईश्वर का आशीर्वाद बच्चा मन का सच्चा होता है।


अज्ञान कोई पाप नहीं है लेकिन गलत कार्य के प्रति जानबूझकर अज्ञान बने रहना पाप है। सब कुछ जानते हुए अज्ञानी बने रहना, गलत कार्य होते देखते रहना पाप का भागी बनाता है।


अज्ञान तो मात्र ज्ञान का अभाव है लेकिन अल्प ज्ञान, ज्ञान का मान खो देता है क्योंकि अल्प ज्ञान सही कार्य में बाधा ही है।


ये ज़रूरी नहीं कि मनुष्य जिसे अज्ञानी कहे वह अज्ञानी हो क्योंकि मनुष्य अपने अभिमान के वशीभूत दूसरों को कुछ समझते नहीं हैं, अज्ञानी की संज्ञा देते हैं।


जीवन में मनुष्य को कई बार सही शिक्षा उन लोगों से मिलती है जिन्हें अक्सर लोग अज्ञानी कहते हैं।


रावण इतना ज्ञानी होते हुए भी अपनी एक गलती की वजह से मारा गया लेकिन इस संसार में अज्ञानी की भीड़ है जहाँ नारी का अपमान होता है और दुखद कहानी का वास होता है, उनका परिणाम भी ज्ञान के दायरे से बाहर होता है।


अज्ञानी अपनी अज्ञानता में खुद ही फंस जाता है। जो सिर्फ ज्ञान के माध्यम से बाहर आ सकता है।


एक ज्ञानवादी अपने अहम् वश खुद को महाज्ञानी समझता है लेकिन उसका मिथ्या अभिमान की सामने वाला अज्ञानी है चूर ज़रूर होता है। किसी को अज्ञानी कहने से कोई अज्ञानी नहीं हो जाता है।


सही की पहचान न होना अज्ञान है जो ज्ञान के द्वारा एक मुकाम पर सकता है।


अज्ञानता मनुष्य के लिए शत्रु समान है।


बुराईयों में अज्ञान का वास होता है तभी वह अच्छाई से दूर होता है।


अज्ञानता जीवन में अंधकार समान है जिसे प्रकाश फैलाने के लिए ज्ञान की रोशनी की आवश्यकता होती है।


विषय अज्ञान की प्राप्ति की जा सकती है लेकिन स्वयं की बुराई का अज्ञान अच्छाई को विलुप्त कर देता है।


एक अभिमानी को अपना अज्ञान कभी नज़र नहीं आता है और दूसरों का ज्ञान कभी पता नहीं चलता है।


जिस मनुष्य को अपने अज्ञान का ज्ञान होता है वह ज्ञानी की श्रेणी में आ जाता है।


मनुष्य का अज्ञान ही है जो खुद को महाज्ञानी समझता है और दूसरों को खुद के आगे कुछ नहीं समझता है।


अज्ञान के द्वारा अपना जीवन सफल नहीं बनाया जा सकता है उसके लिए ज्ञान अवलोकन ज़रूरी है।


प्राचीन काल में महापुरुषों ने अपने ज्ञान से ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर महान की श्रेणी में अपना नाम अंकित कराया था।


अज्ञानवश मनुष्य कई कुकृत्य कर देता है जो उसके जीवन के लिए अभिशाप बन जाता है।


अज्ञान जीवन की सफलता भरे रास्तों की ओर से विमुख कर देता है जिसे ज्ञान के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।


अज्ञान किसी का मार्गदर्शन नहीं कर सकता है। किसी को सही पथ प्रदर्शन नहीं करा सकता है।


जीवन को खुशहाल बनाने के लिए अपने जीवन के अज्ञान को ज्ञान में बदलना पड़ता है।


जीवन का सबसे बड़ा अज्ञान ज्ञान को तुच्छ समझना है।


मनुष्य अज्ञान की वजह से दूसरे के समक्ष अपना सम्मान खो देते हैं।


अज्ञानता की बेड़ियों से छुटकारा सिर्फ ज्ञान की सकारात्मक चाबी दिला सकती है।


मनुष्य को अपने जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करना चाहिए तभी आगे बढ़ा जा सकता है।


अज्ञान की राह सिर्फ ठोकर देती है। राहों में पड़े काँटे हटाने के लिए ज्ञान की ज़रूरत होती है।


अज्ञानता मनुष्य को उसके लक्ष्य से दूर कर देती है।


अज्ञानता विनाश का द्योतक है जिसे ज्ञान से अवलोकित किया जा सकता है।


मनुष्य को अपने अज्ञान का अवलोकन होना ज्ञान की पहचान कराता है।


मनुष्य में अज्ञान को दूर किया जा सकता है बस अपनी अंतरात्मा की ज्ञान भरी बातों को अपनाना चाहिए।


अज्ञान के मायने हरेक  दृष्टिकोण में भिन्न-भिन्न होते हैं।


मनुष्य अपने अज्ञान के द्वारा अपना दृष्टिकोण दूषित कर देता है।


मनुष्य अज्ञान के द्वारा ही अपनी सांसारिक मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाता है और दुखों को आमंत्रित करता है।


मनुष्य का मिथ्या ज्ञान ही उसकी अज्ञानता की पहचान है।

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आशा करता हूँ फ्रेड्स आपकों Ignorance Quotes in Hindi का यह लेख अच्छा लगा होगा. आपकों अज्ञान पर सुविचार का यह लेख कैसा लगा कमेंट कर जरुर बताए. साथ ही यदि आपकों इग्नोरेंस हिंदी कोट्स पसंद आए हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे.

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