परिपक्वता पर सुविचार अनमोल वचन | Maturity Quotes In Hindi

परिपक्वता पर सुविचार अनमोल वचन | Maturity Quotes In Hindi : क्या आप परिपक्वता की परिभाषा व अर्थ जानते है. यह एक आयुवर्ग के साथ जुड़ा हुआ शब्द हैं. एक ऐसे स्टेज का बोध करवाता है जहाँ से व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम हो जाता हैं. यानि वे स्वयं के पावों से चलने का सामर्थ्य रखते हैं. वयस्कता या परिक्वता की आयु 18 वर्ष के बाद ही आरम्भ होती हैं. यदि आप इस आयु में भी किसी के सहारे जीवन जीते है तो आपमें अभी तक परिपक्वता नही हैं. आज हम परिपक्वता पर सुविचार (Maturity Quotes) में दार्शनिकों के थोट्स स्टेटस जानेगे.

परिपक्वता पर सुविचार अनमोल वचन | Maturity Quotes In Hindi

परिपक्वता पर सुविचार अनमोल वचन | Maturity Quotes In Hindi

कोई भी आदमी तब तक वृद्ध नही होता है जब तक उसकी माता उसके लिए चिंता करना बंद न कर दे.


एक परिपक्व व्यक्ति वह होता है जो एकांत या निरपेक्ष भाव से चिन्तन नही करता, जो भावात्मक रूप से विचलित किये जाने पर भी विषयगत बना रह सकता है, जिसने यह जान लिया है कि समस्त व्यक्तियों एवं वस्तुओं में अच्छाईयाँ एवं बुराइयां दोनों होती हैं, जो विनम्र होकर चलता है और जीवन की परिस्थितियों के प्रति उदारतापूर्वक व्यवहार करता है- यह जानकर कि इस विश्व में कोई भी व्यक्ति सर्वज्ञ नही हैं, वह यह समझता है कि हम सबको प्रेम और उदारता दोनों की आवश्यकता रहती हैं.


परिपक्वता/ वयस्कता वह योग्यता है जिसके द्वारा हम अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते है तथा अपने मतभेदों को हिंसा एवं विनाश के मार्ग पर चले बिना सुलझा देते हैं.


परिपक्वता हमकों धैर्य एवं इच्छा प्रदान करती है जिसके द्वारा हम भविष्य में प्राप्त होने वाले कामों की दृष्टि से तात्कालिक सुखों को भी छोड़ देते हैं.


मनुष्य की सबसे बड़ी दुर्बला सद्गुण का दुरुपयोग हैं.

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वयस्कता/ परिपक्वता वह योग्यता है जिसके द्वारा हम कोई निर्णय करते है और उस पर डटे रहते हैं.


परिपक्वता की परिभाषा व अर्थ (maturity meaning in hindi)

वयस्कता/ परिपक्वता की दस सूत्रीय कसौटी, एक परिपक्व व्यक्ति वह हैं-

  1. जो अपने कार्य को अत्यधिक गम्भीरता से ग्रहण नहीं करता हैं.
  2. जो मस्तिष्क को सदैव चौकन्ना रखता हैं.
  3. जो प्रत्येक प्रतिकूल परिस्थिति को खतरे की घंटी के रूप में नही देखता हैं.
  4. जो तुच्छ होने के लिए अत्यधिक महान होता है, वह इतना महान होता है कि तुच्छ बन ही नहीं सकता हैं.
  5. जिसकों अपनें में विश्वास होता है और यह विश्वास त्यों त्यों अधिक शक्तिशाली बनता जाता है, ज्यों ज्यों भगवान के प्रति विश्वास द्वारा व्यक्ति अपने को अधिकाधिक सुरक्षित समझता जाता हैं.
  6. छोटे काम करते हुए यह अनुभव नही करता है कि मैं इसके लिए अत्यधिक बड़ा हूँ. और न वह विनम्रतापूर्वक कार्य करते हुए गर्व का अनुभव करता हैं.
  7. जो सफलता और असफलता को स्वयं में स्थायी समझता हैं.
  8. जो अपने मनोवेगों को नियंत्रित करने में सक्षम होता हैं.
  9. जो किसी के बारे में अपनी पसंद अथवा नापसंद को स्थायी नहीं मानता हैं.
  10. जो गलतियाँ करते हुए डरता नहीं हैं.

परिपक्वता कोट्स Maturity Quotes in Hindi Status Shayari

मनुष्य के जीवन में परिपक्वता आने पर मनुष्य हर परिस्थिति में मुस्कुराना सीख जाता है।


कठिन से कठिन परिस्थितियों में घबराता नहीं है बल्कि समझदारी से शांतिपूर्वक उन परिस्थितियों का सामना करता है और चेहरे पर मुस्कान बनाए रखता है।


परिपक्व मनुष्य आत्मविश्वास से भर जाता है जिससे उसका जीवन निखर जाता है।


दुनिया से ज्यादा वह खुद पर भरोसा करता है और अपनी मंज़िल की राहों में अपने दम पर आगे बढ़ता है।


परिपक्वता मनुष्य में समझदारी का गुण बढ़ाती है जिससे मनुष्य जीवन में सही फैसले लेने में सक्षम हो पाता है।


परिपक्वता मनुष्य को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनाती है।


एक परिपक्व मनुष्य अपनी ज़िम्मेदारियों से घबराता नहीं है बल्कि अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाता है।


परिपक्व मनुष्य जीवन के फैसले सोच समझ कर लेता है जो उसे जीवन की राहों में मुसीबतों से बचाते हैं।


परिपक्वता मनुष्य को संतोष स्वरूप अपनी इच्छाओं के पूर्ण न होने पर भी सहजता प्रदान करती है। परिपक्वता मनुष्य को अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने की क्षमता के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए प्रेरित करती है।


मनुष्य में परिपक्वता का संचार होने से मनुष्य में सक्षमता में वृद्धि होती है जिससे उसकी कमियाँ उसकी शक्ति बन जाती हैं जिस वजह से सभी उसके चहेते बन जाते हैं।


परिपक्वता मनुष्य में अपने दोस्तों के चुनाव के प्रति सही समझ देती है जिससे वह मतलबी लोगों को दोस्त बनाने से बचे रहते हैं। परिपक्व मनुष्य नुकसान पहुँचाने वाले शत्रुओं से भी दूर रहते है।


कठिन परिस्थितियों का सामना जो मनुष्य सोच समझकर करता है और जीवन पथ पर सही निर्णय लेता है वह परिपक्वता से पूर्ण रूप से भरा हुआ होता है।


हर मनुष्य की अपने जिम्मेदारियाँ होती हैं जिन्हें निभाने वाला मनुष्य अनेक बातें सीखता है जो उसे अनुभवी बनाते हैं और जब मनुष्य को सही ज्ञान होता है और व्यवहारिक रूप से अनुभव होता है तो वह सही निर्णय ले पाता है। ऐसा मनुष्य परिपक्व रूप में जीवन को खुशी पूर्वक जीता है।


दूसरों पर निर्भर रहने वाला मनुष्य परिपक्व मनुष्य नहीं कहलाता है। आत्मनिर्भर मनुष्य में ही परिपक्वता का गुण विद्यमान होता है।


परिपक्व मनुष्य में विनम्रता के गुण दिखाई देते हैं। वह कठिन परिस्थितियों में विचलित नहीं होते हैं। उनका व्यवहार सहजता, नम्रता से पूर्ण होता है जो जीवन की परिस्थितियों के अच्छे बुरे संदर्भ से वाकिफ होते है। उसमें हर मनुष्य को समझने की समझ विकसित होती है।


एक परिपक्व मनुष्य क्रोध और अहंकार से नहीं भरता है बल्कि जीवन में इन पर नियंत्रण रख जीवन में उदारता, प्यार का प्रसार करता है और आपसी मतभेदों को अपनी सूझता से सुलझाता है।


एक परिपक्व इंसान अपनी शक्ति का सही प्रयोग करता है और सतगुणों को सकारात्मक रूप में अपनाता है।


परिपक्वता मनुष्य को जीवन में सही मार्ग के चुनाव की क्षमता प्राप्त कराती है। जिसके ज़रिए मनुष्य अपने निर्णय सही रूप से लेकर उसका पालन करता है।


परिपक्वता मनुष्य का ऐसा गुण है जो रिश्तों को सुचारू पूर्वक निभाने की क्षमता प्रदान करती है।


जीवन के फैसले लेना हो या अपने कार्य को अंजाम देना हो परिपक्व इंसान सोच समझकर गंभीरता से निर्णय लेते हैं।


परिपक्व इंसान हमेशा सचेत रहते हैं जो भी कार्य करते हैं उसे सजगता के साथ करते हैं। बिना सोचे समझे कोई कदम नहीं उठाते हैं।


जीवन में परेशानियाँ आना स्वभाविक है लेकिन एक परिपक्व मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में कभी विचलित नहीं होते बल्कि शांति स्वरूप परेशानियों का समाधान निकालते हैं।


एक परिपक्व मनुष्य यह जानता है कि इंसान से जीवन में गलतियाँ भी होती है जिसके डर से वह जीना नहीं छोड़ता। डर को मन से निकाल कर उन गलतियों को सुधारने की कोशिश करता है।


एक परिपक्व मनुष्य अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर सकता है जिसकी वजह से वह अपनी नकारात्मक सोच से दूर रहता है।


एक परिपक्व मनुष्य जानता है कि जीवन में सफलता असफलता मिलती रहती है इनमें स्थायित्वता नहीं होती है और असफल भी अगर हुए तो सफलता की प्राप्ति भी होती है।


परिपक्व इन्सान जीवन के आदर्शों के महत्व को जानता समझता है और पालन करता है।


परिपक्वता मनुष्य को एक समझपूर्ण सोच देती है जो किसी सही कार्य को छोटा नहीं समझता और ना ही छोटे कार्य करने पर छोटा महसूस करता है। उसके व्यवहार में नम्रता दिखती है और वह घमंड से दूर रहता है।


परिपक्वता मनुष्य में स्वयं के प्रति विश्वास को मजबूती देती है। परिपक्व मनुष्य खुद पर विश्वास करता है साथ ही ईश्वरीय आस्था में भी विश्वास रखता है। स्वयं और ईश्वर के प्रति विश्वास मनुष्य को सुरक्षा प्रदान करते हैं।


परिपक्व मनुष्य सोच समझकर किसी बात का निर्णय अच्छे से सुन कर लेता है।


परिपक्व मनुष्य परेशानियों से घबराने की बजाय उसका हल ढूँढ़ता है और बिना परेशान हुए समाधान निकाल लेता है।


किसी से प्रतिशोध न लेना एक परिपक्व मस्तिष्क की सोच होती है। वह प्रतिशोध की बजाय उससे दूर होता है अपना कीमती समय व्यर्थ नहीं करता है।


परिपक्वता हमें सही गलत निर्णय लेने की सही समझ देती है।


एक परिपक्व मनुष्य की पहचान विपरीत परिस्थितियों में होती है जब वह इन परिस्थितियों में भी शांति स्वरूप अपने जीवन पथ पर अग्रसर रहता है।


परिपक्व मनुष्य हर बात के बहाने नहीं बनाता बल्कि हर काम को करने की कोशिश करता है।


परिपक्व मनुष्य आपसी दुश्मनी में अपना समय नहीं गँवाते बल्कि समय का सदुपयोग करते हैं।


परिपक्व मनुष्य कभी आलसी नहीं होते और ना ही गैरज़िम्मेदार होते हैं।


परिपक्वता सच्चे रिश्तों की पहचान कराती है। कुछ लोग और वस्तुएँ त्याग कर जीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है।


एक परिपक्व इंसान परेशानी से ज्यादा उसके समाधान के प्रति अधिक सोचता है।


परिपक्व मनुष्य में धैर्य का गुण अधिक रूप से दर्शित होता है जिसके स्वरूप मनुष्य अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर लेता है।


मनुष्य की परिपक्वता कहती है कि ज़रूरी नहीं मनुष्य विश्वास लायक हो या हर किसी में परिपक्वता मिलेगी।


परिपक्व मनुष्य दूसरों को बदलने की बजाए स्वयं में निखार लाता है।


समाज में परिपक्व मनुष्य सही रास्तों का चुनाव करता है।


जीवन में मनुष्य की परिपक्वता ही रिश्तों को बनाए रखती है। परिवार में घर के प्रधान अगर परिपक्व हैं तो परिवार सफल एवम् खुशहाल होता है।


इन्सान अपनी परिस्थितियों से और समय के अनुसार ही परिपक्व होते हैं।


परिपक्व मनुष्य अपने ध्येय पर पूर्ण ध्यान देते हैं। किसी अन्य से उलझने में अपना समय गँवाते नहीं हैं।


परिपक्वता मनुष्य को सहनशील बनाती है एवम् गलत के प्रति सजग करती है।


परिपक्वता मनुष्य को विभिन्न फैसलों में सही सूझ बूझ से निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाती है।


परिपक्व मनुष्य अपने परिवार को अच्छे से संभाल सकता है।


परिपक्वता जीवन में आदर्श स्वरूप प्रस्तुत करते हुए किसके साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए उसकी समझ विकसित करती है।


परिपक्वता मनुष्य को भविष्य की उज्जवलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होती है।


जीवन में परिपक्वता मनुष्य को मान देती है क्योंकि परिपक्व मनुष्य नैतिक मूल्यों का पालन कर दुनिया में अपने व्यवहार से लोगों के बीच लोकप्रिय होता है।


जीवन में खुशहाली लाने के लिए परिपक्वता सोने पर सुहागा का काम करती है। जीवन पथ को नई दिशा देती है।

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