बाल गंगाधर तिलक पर कविता Poems On Bal Gangadhar Tilak In Hindi

Poems On Bal Gangadhar Tilak In Hindi बाल गंगाधर तिलक पर कविता: लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का नाम हर भारतीय बड़े सम्मान के साथ लेता हैं. अपना सम्पूर्ण वतन भक्ति के अभियान में अर्पित कर देने वालों को इस देश ने अपना ताज माना हैं. 23 जुलाई ऐसा दिन हैं जब भारत के दो अमूल्य रत्नों ने जन्म लिया जी हाँ आज आजाद जयंती व तिलक जयंती मना रहे हैं. हिन्दू ह्रदय सम्राट व राष्ट्रवाद के पुरोधा पुरुष तिलक पर कविता पॉएम शायरी आज   के आर्टिकल में हम साझा कर रहे हैं. लोकमान्य टिळक यांच्यावर कविता मराठी के माध्यम से हम उनके महान विचारों स्लोगन आदि को यहाँ समझेगे.

बाल गंगाधर तिलक कविता Poems On Bal Gangadhar Tilak In Hindi

बाल गंगाधर तिलक पर कविता Poems On Bal Gangadhar Tilak In Hindi

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जिसने वतन के लिए जीवन जिया
वतन के लिए सब कुछ किया
समाज की बुराइयो को दूर करके
वतन मे आगे बढ़ने का रास्ता हमे दिया

लोकमान्य तिलक नाम है जिनका
गीता सार जिसने समझाया
ना भूलेगे महान इस देश भक्त को
इन्होंने वतन के लिए जीवन त्याग किया

कई बार जेल की यातनाए सही
वतन के लिए उन्होंने सब कुछ किया
एकता के सदेश को हम तक पहुचाया
जिसने वतन के लिए जीवन जिया
वतन के लिए सब कुछ किया

Bal Gangadhar Tilak Poem in Hindi

प्रतीक था आजादी अभियान का,
जिसको मिला ‘लोकमान्य’ का उपनाम था,
तिलक उसका नाम था।
बाल-विवाह विध्वशक वो,
राष्ट्रवाद का प्रतीक पुरुष वो,
खगोल और गणित का ज्ञानी भी वो,
भविष्य दृष्टा और प्रतिभावान चितक वो।
जन्मसिद्ध अधिकार कहा जिसने स्वराज को,
जिसका उद्देश्य समाज का उत्थान था,
तिलक उसका नाम था।
वो उठा था, विधवाओ के अधिकार के लिए,
वो अडिग था, कुरीतियो के सहार के लिए,
उसके आगे आए असख्य विरोधी लेकिन,
वो लड़ा समाज से, समाज मे सुधार के लिए,
वेतज्ञ, सस्कृतज्ञानी वो गंगाधर विद्वान था,
इस भारत भूमि का अद्विक वरदान था ,
लोकमान्य तिलक उनका नाम था।

बाल गंगाधर तिलक जयंती 2021 पर कविता

तिलक बाल गंगाधर! तुमको,
शत-शत बार प्रणाम हमारा।
पराधीनता के बंधन में,
बंदी थी जब भारतमाता।
तुमने तन-मन-धन अर्पित कर,
देश-प्रेम से जोड़ा नाता।।

स्वतंत्रता अधिकार जन्म से,
दिया यही जन-जन को नारा।
तिलक बाल गंगाधर! तुमको,
शत-शत बार प्रणाम हमारा।।

आजादी के घोर युद्ध में,
बने एक अविचल सेनानी।
लड़े अनय अत्याचारों से,
हार नहीं जीवन में मानी।।

सुन सन्देश क्रांति का तुमसे,
जाग उठा था भारत सारा।
तिलक बाल गंगाधर! तुमको,
शत-शत बार प्रणाम हमारा।। 

तुमने गीता का रहस्य भी,
बड़ी सरलता से समझाया।
मिटा अविद्या-अंधकार को, 
नवल ज्ञान का दीप जलाया।। 

युग-युग तक सारी दुनिया में,
अमर रहेगा नाम तुम्हारा।
तिलक बाल गंगाधर! तुमको,
शत-शत बार प्रणाम हमारा।।

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