राजस्थान विधानसभा का इतिहास | History Of Rajasthan Vidhan Sabha In Hindi

राजस्थान विधानसभा का इतिहास History Of Rajasthan Vidhan Sabha In Hindi: राजस्थान वर्तमान में एक सदनीय विधानमंडल यानि विधानसभा का स्वरूप है. जयपुर के महाराजा मानसिंह द्वितीय द्वारा सितम्बर 1945 में राजस्थान की द्विसदनीय विधानमंडल का गठन किया था. जिसका पहला सदन धारा सभा तथा दूसरा सदन प्रतिनिधि सभा था. वर्तमान में केवल एक सदन (विधानसभा) है.

राजस्थान विधानसभा का इतिहास History Of Rajasthan Vidhan Sabha In Hindi

राजस्थान विधानसभा का इतिहास | History Of Rajasthan Vidhan Sabha In Hindi

राज्य में 160 सदस्यों वाली प्रथम विधानसभा के लिए पहले आम चुनाव 4 से 24 जनवरी 1952 तक हुए. और इसका गठन 29 फरवरी 1952 को हुआ.

इसकी प्रथम बैठक 29 मार्च 1952 के दिन जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में सम्पन्न हुई थी. बाद में इसी हॉल को राजस्थान विधानसभा का रूप दे दिया गया.

झुंझुनूं विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित नरोत्तम लाल जोशी को इस पहली विधानसभा के लिए अध्यक्ष एवं श्री लालसिंह शक्तावत को इसका उपाध्यक्ष चुना गया था.

विधानसभा का नया भवन वर्ष 2001 में ज्योतिनगर जयपुर में तैयार करवाया गया. जिसका लोकार्पण 6 नवम्बर 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति श्री आर के नारायणन ने किया.

राजस्थान विधानसभा भवन जयपुर का उत्तरी द्वार जयपुर शैली, दक्षिणी द्वार मारवाड़ी शैली, पूर्वी प्रवेश द्वार शेखावटी शैली तथा पश्चिमी शैली एवं मध्य के बरामदे में मेवाड़ की स्थापत्य शैली के अनुसार उत्कीर्णित किये गये है.

राजस्थान गठन के समय अजमेर मेरवाड़ा का राज्य विलय न होने के कारण वहां 30 सदस्यीय पृथक विधानसभा हुआ करती थी, जिसे धारा सभा कहा जाता था.

1 नवम्बर 1956 को अजमेर मेरवाड़ा का राजस्थान के साथ विलय हो जाने पर राज्य विधानसभा सदस्य संख्या 190 हो गई थी.

1977 में हुए परिसीमन में राज्य विधानसभा सदस्यों की संख्या 200 कर दी गई. वर्तमान में यही संख्या है. पहली बार छठी विधानसभा के चुनाव 200 सीटों पर हुए थे.

सर्वाधिक विधानसभा सीटें जयपुर से 19 तथा अलवर से 11 है. जबकि सबसे कम विधानसभा सदस्य प्रतापगढ़ से 2 एवं उतने ही जैसलमेर से है. जिले के हिसाब से जयपुर जिले में मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या व जैसलमेर से सबसे कम है.

कांग्रेस के हरिदेव जोशी देश के ऐसे पहले विधायक है जो दस विधानसभा चुनावों में लगातार जीतें है. राज्य में 12 वीं विधानसभा में पहली बार पूरे राजस्थान में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन से मतदान कराया गया था.

क्षेत्रफल की दृष्टि से जैसलमेर राजस्थान का सबसे बड़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है. राज्य में अब तक 14 विधानसभा का गठन हो चूका है.

2018-19 में आगामी 15 वीं विधानसभा के लिए चुनाव होने है. राजस्थान में विधानपरिषद् के गठन हेतु विधानसभा द्वारा प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है.

यदि राजस्थान की विधानमंडल में एक और सदन यानि विधानपरिषद् होता है, तो उसके 66 सदस्य होंगे. फिलहाल केंद्र द्वारा इस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है.

Rajasthan Legislative Assembly Vidhan Sabha Information in Hindi

  • राजस्थान में प्रथम विधानसभा का गठन 29 मार्च 1952 को किया गया था.
  • प्रथम विधानसभा के गठन के समय 160 सदस्य थे. जिनमें कोई भी महिला विधायक नही थी. लेकिन 1953 में हुए विधानसभा उपचुनाव में पहली महिला विधायक यशोदा देवी बाँसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से प्रजा समाजवादी पार्टी की तरह से विजयी बनी. सर्वाधिक 17 बार उपचुनाव पहली विधानसभा के कार्यकाल (1952-1957) के दौरान ही हुए.
  • राज्य विधानसभा में सदस्यों की संख्या दूसरी विधानसभा में 176 थी, जो चतुर्थ में बढ़कर 184 एवं 6 वीं विधानसभा में 200 हो गई, जो वर्तमान में भी कायम है.
  • चतुर्थ विधानसभा (1 मार्च 1967 से 15 मार्च 1972) में पहली बार किसू दल को स्पष्ट बहुमत नही मिलने के कारण 13 मार्च 1967 से 26 अप्रैल 1967 तक राष्ट्रपति शासन रहा तथा विधानसभा निलंबित रही.
  • पांचवीं विधानसभा (15 मार्च 1972 से 29 अप्रैल 1977) सर्वाधिक लम्बे कार्यकाल वाली विधानसभा थी. सबसे कम कार्यकाल (2 वर्ष 7 माह) 6 वी विधानसभा का रहा.
  • छठी विधानसभा में सदस्य संख्या बढ़कर 200 हो गई तथा पहली बार भैरोसिंह शेखावत के नेतृत्व में गैर कांग्रेसी सरकार (जनता पार्टी) बनी. इस विधानसभा को तीसरी बार राष्ट्रपति शासन लागू करके भंग किया तथा पहली बार मध्यावधि चुनाव हुए.
  • बाहरवीं विधानसभा में पहली बार महिला विधानसभा अध्यक्ष (सुमित्रा सिंह) तथा पहली बार महिला मुख्यमंत्री (वसुंधरा राजे सिंधिया) बनी.
  • राज्य विधानसभा में कुल 200 सीटें है. इनमें से 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए तथा 25 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है.
  • वर्तमान में 13 विधानसभा में सर्वाधिक मतों से महेंद्रजीत सिंह जीते जबकि सबसे कम मतों से कल्याण सिंह जी जीते.
  • 14 विधानसभा के गठन की अधिसूचना 11 दिसम्बर 2013 को जारी हुई. चुनावों के बाद वसुंधरा राजे ने 20 वीं मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की.
  • 14 वीं विधानसभा का पहला स्तर 21 जनवरी 2014 को शुरू हुआ. प्रध्युमन सिंह प्रोटेम स्पीकर बनाए गये. कैलाश मेघवाल 22 जनवरी 2014 को हुए विधानसभा अध्यक्ष चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित किये गये.

राजस्थान विधानसभा के पदाधिकारी (अध्यक्ष-उपाध्यक्ष) (Assembly Secretariat Officers)

राज्य विधानसभा की कार्यवाहियों का संचालन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाता है. तथा इनकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा किया जाता है.

दोनों की अनुपस्थिति में विधानसभा का संचालन विधानसभा सदस्यों में से ही बनाए गये पैनल के विरिष्ट सदस्य द्वारा किया जाता है.

विधानसभा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष विधायक के रूप में ही शपथ लेते है. पदाधिकारी के रूप में अलग से शपथ नही ली जाती है. विधानसभा अध्यक्ष का कार्यकाल अगली नई विधानसभा के गठन तक होता है.

विधानसभा अध्यक्ष ही विधानसभा का प्रमुख होता है. जो विधानसभा की कार्यवाहियों का संचालन नियंत्रण व समन्वयन करता है. विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा का प्रमुख होता है. जो विधानसभा की कार्यवाहियों का संचालन, नियंत्रण एवं समन्वय करता है.

इसके अतिरिक्त विधानसभा की कार्यवाही स्थगन व सदस्यों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही, दल बदल का निर्धारण, सदस्यों का स्थान निर्धारण, धन विधेयकों का निर्धारण, विभिन्न विधानसभा समितियों के सदस्यों की नियुक्ति तथा संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता इत्यादि कार्य भी विधानसभा अध्यक्ष करता है.

राजस्थान की प्रथम विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरोतम लाल जोशी थे. श्रीमती सुमित्रा सिंह राज्य की प्रथम महिला विधानसभा अध्यक्ष थी. देश की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा की सन्नो देवी थी.

सर्वाधिक कार्यकाल वाले विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास मिर्धा थे, जो दूसरी व तीसरी विधानसभा के अध्यक्ष रहे.

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