भारतीय राज्यों का पुनर्गठन | Reorganization of Indian States In Hindi

भारतीय राज्यों का पुनर्गठन | Reorganization of Indian States In Hindi भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद राज्यों के पुनर्गठन की मांग एक प्रमुख आंदोलन बनकर उभरी. विशेषकर भाषा के आधार पर राज्यों की मांग तेजी से होने लगी. वास्तव में स्वतंत्रता से बहुत पहले सनः 1917 में ही कांग्रेस पार्टी ने ही यह स्वीकार किया था कि आजादी मिलने के बाद वह भाषाई आधार पर राज्यों के गठन का समर्थन करेगी.

भारतीय राज्यों का पुनर्गठन | Reorganization of Indian States In Hindi

भारतीय राज्यों का पुनर्गठन | Reorganization of Indian States In Hindi

लेकिन स्वतंत्रता के बाद पंडित नेहरु आदि भाषाई आधार पर राज्यों के निर्माण के लिए तैयार नही थे. परिणामस्वरूप कन्नड़ भाषियों के लिए कर्नाटक, मराठी भाषी लोगों के लिए संयुक्त महाराष्ट्र, पंजाबी भाषा के लिए पंजाब आदि राज्यों की मांग उठने लगी.

नए राज्‍यों का गठनगठन वर्ष
आंध्र प्रदेश1953
महाराष्‍ट्र1960
गुजरात1960
नागालैंड1963
हरियाणा1966
हिमाचल प्रदेश1971
मेघालय1972
मणिपुर, त्रिपुरा1972
सिक्किम1975
मिजोरम1987
छत्तीसगढ़, उत्तराखंड एवं झारखंड2000
तेलंगाना2014

भारतीय राज्यों का पुनर्गठन की प्रक्रिया एवं बने राज्य (first linguistic state in india)

भारत में नए राज्य गठन की मांग सबसे अधिक आक्रामक आंदोलन आंध्र इलाकों में तेलगु भाषी लोगों ने प्रारम्भ किया. यह अपने को मद्रास राज्य से अलग कर आंध्रप्रदेश की मांग कर रहे थे. इस मांग को लेकर श्रीरामोलू नाम के व्यक्ति ने अक्टूबर 1952 में आमरण अनशन आरम्भ कर दिया.

58 दिन की भूख हड़ताल के बाद श्रीरामोलू की मृत्यु हो गई, जिसकी खबर सुनकर पूरा आंध्र का इलाका अराजकता में डूब गया. उसकी मृत्यु के दो दिन बाद सरकार ने घोषणा की कि वह आंध्रप्रदेश राज्य के निर्माण के लिए तैयार है.

अक्टूबर 1953 में आंध्र प्रदेश राज्य की स्थापना कर दी गई. इस तरह भाषा के आधार पर गठित होने वाला आंध्रप्रदेश भारत का पहला राज्य बना.

राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना (Establishment of State Reorganization Commission)

आंध्रप्रदेश के गठन के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों से राज्य निर्माण की मांग बलवती होती गई. अतः भारत सरकार ने 1953 ई. में राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया. जस्टिस फजल अली को आयोग का अध्यक्ष तथा के एम पन्निकर व एच एन कुंजरू को इसका सदस्य बनाया गया.

सन 1955 में आयोग ने अपना प्रतिवेदन सौपा, जिसके आधार पर भारत की संसद द्वारा 1956 में राज्य पुनर्गठन विधेयक पास कर दिया गया. चौदह राज्यों व छ केन्द्रशासित प्रदेशों की व्यवस्था की गई. लेकिन राज्यों की मांग को लेकर देश के विभिन्न भागों में आंदोलन जारी रहे.

भाषा के आधार पर बने राज्य (language based state formation in india)

आंध्रप्रदेश की मांग स्वीकार करने के बाद सबसे बड़ा आंदोलन महाराष्ट्र में प्रारम्भ हुआ. जिसके आधार पर 1960 में भारत सरकार ने बम्बई राज्य को बांटकर महाराष्ट्र व गुजरात राज्यों का निर्माण किया. इसके बाद भारत के पूर्वोतर क्षेत्र में पुनर्गठन का सवाल पैदा हुआ.

इस क्षेत्र में मुख्यत जनजाति समुदाय के लोग रहते है. जहाँ ईसाई मशीनरी सक्रिय हो गई. इसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में अनेक अलगाववादी गतिविधियाँ प्रारम्भ होने लगी, जिसमे नागा जनजाति आंदोलन प्रमुख है. जो फीजो के नेतृत्व में प्रारम्भ हुआ.

पूर्वोत्तर राज्यों में नये राज्य गठन की मांग (Demand for new state formation in North-Eastern states)

अततः 1963 में नागाओ के लिए नागालैंड राज्य अस्तित्व में आया, जहाँ लाल डेंगा के नेतृत्व में मीजों नेशनल फ्रंट का गठन कर अलगाववादी आंदोलन प्रारम्भ किया गया. एक समझौते के द्वारा इस समस्या का अंत किया गया. और 1987 में मिजोरम नामक नए राज्य का गठन किया गया.

1987 में ही अरुणाचल प्रदेश व गोवा को भी केंद्र शासित प्रदेशों से पूर्ण राज्य बनाया गया. तथा मणीपुर, त्रिपुरा व अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया.

पंजाब-हरियाणा राज्य का गठन (Constitution of Punjab-Haryana State)

पंजाबी भाषी लोगों के लिए अलग पंजाब राज्य की मांग का नेतृत्व मास्टर तारासिंह के नेतृत्व में लम्बे समय तक जारी रही. अततः 1966 में पंजाब का पुनर्गठन कर हरियाणा राज्य का गठन किया गया. व चण्डीगढ़ को केन्द्रशासित प्रदेश बनाकर पंजाब व हरियाणा दोनों की राजधानी बनाया गया.

पहाड़ी क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को संघ शासित प्रदेश बनाया गया, जिसे 1971 में राज्य का दर्जा दिया गया. सिक्किम में 1975 तक राजाशाही चोग्याल का शासन था. जनमत द्वारा सिक्किम ने भारत में विलय की इच्छा जताई, जिसके परिणामस्वरूप 36 वें संविधान संशोधन 1975 द्वारा सिक्किम को राज्य बनाया गया.

सन् 2000 में बने भारतीय राज्य (Indian state built in 2000)

सनः 2000 में मध्यप्रदेश से अलग कर छतीसगढ़ (भारत का 26 वाँ राज्य), उत्तर प्रदेश से अलग कर उतराखंड (भारत का 27 वाँ राज्य) तथा बिहार से अलग कर झारखंड (भारत का 28 वाँ राज्य) की स्थापना की गई.

झारखंड के लिए स्वतंत्रता के बाद से ही निरंतर आंदोलन चल रहा था. आंध्रप्रदेश राज्य से तेलंगाना राज्य की मांग भी लम्बे समय से थी, जिसके बाद उग्र एवं हिंसक रूप प्राप्त कर लिया. अततः 2014 में आंध्रप्रदेश से अलग नये तेलंगाना राज्य की स्थापना की गई.

5 अगस्त 2019 के भारतीय संसद के द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 की बर्खाश्त करने एवं राज्य के स्टेटस को रद्द किये जाने के बाद अब भारत में राज्यों की संख्या 28 एवं जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख दो नयें केन्द्रशासित प्रदेशों के साथ यूटी की संख्या 9 हो गई हैं.

FAQ

आजादी के समय भारत में कितने राज्य थे?

स्वतंत्रता के समय देश में 565 छोटे मोटे राज्य थे?

भाषाई आधार पर बना देश का पहला राज्य कौनसा था?

आंध्रप्रदेश

भाषाई आधार पर बना देश का अंतिम राज्य कौनसा हैं?

तेलंगाना

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