Sanskrit Slokas For Kids | बच्चों के लिए संस्कृत श्लोक सुभाषितानि

Sanskrit Slokas For Kids बच्चों के लिए संस्कृत श्लोक सुभाषितानि: बच्चों को हमारी देवभाषा संस्कृत के श्लोक बताने चाहिए. small sanskrit slokas for kids में संस्कृत की पाठ्यपुस्तकों से five shloka in sanskrit बता रहे हैं. नन्हे बच्चों को ये श्लोक सुनवाकर उन्हें याद करवा सकते हैं.

Sanskrit Slokas For Kids in sanskrit language

sanskrit shlok

subhasitani shloka in sanskrit

राष्ट्रं मम पिता माता प्राणाः स्वामी धनं सुखम
बन्धुराप्तः सखा भ्राता सर्वस्वं में स्वराष्ट्रकम ||


सत्यं ब्रूयात प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्
प्रियं च नानृत ब्रूयात् एषः धर्मः सनातनः ||


अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम
उदारचरितानान्तु वसुधैव कुटुम्बकम् ||


श्रोत श्रुतेनैव कुंडलेन, दानेन पाणिन्र तु कन्डकनेन
विभाति कायः करुणाप्राणान परोपकारेण न तु चन्देन ||


यथा होकेन चक्रेण न रथस्य गतिभ्रवेद
एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिद्धयति ||


विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषा परिपीडनाय
खलस्य साधोविपर्रितमेतत ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय ||


परोपकाराय फलन्ति वृक्षः परोपकाराय वदन्ति नध्य:
परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम ||


रूपयौवनसंपन्ना; विशालकुलसंभवाः
विद्याहीना न शोभन्ते निगर्न्धा इव किंशुकाः ||


शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे
साधवो नैव सर्वत्र चन्दनं न वने वने ||


धनधान्यप्रयोगेषु विधायाः सद्ग्राहे तथा
आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्ज: सुखी भवेत् ||

संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक अर्थ के साथ Sanskrit Mein Shlok With Hindi Meaning

श्वेतदेहाय रुद्राय श्वेतगंगाधराय च।
श्वेतभस्माङ्गरागाय श्वेतस्वरूपिणे नमः।।

अर्थ: “श्वेत देह वाले, श्वेत गंगा को मस्तक पर धारण करने वाले, श्वेत भस्म को शरीर पर धारण करने वाले, श्वेत स्वरूप भगवान् शिव को नमन करता हूँ”


मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं
न च श्रोत्रजिह्वे न च घ्रणनेत्रे।
न च व्योम भूमिर्न तेजो न वायु
श्चिदानन्दरूपः शिवोऽहं शिवोऽहम्॥

अर्थ :- “मैं न तो मन हूं, न बुद्धि, न अहंकार, न ही चित्त हूं, मैं न तो कान हूं, न जीभ, न नासिका, न ही नेत्र हूं, मैं न तो आकाश हूं, न धरती, न अग्नि, न ही वायु हूं, मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।”


न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम्।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो॥

अर्थ: “मैं न तो जप जानता हूँ, न तप और न ही पूजा। हे शम्भो(शिव), मैं तो सदा सर्वदा आपको ही नमन करता हूँ। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म के दु:ख समूहों से जलते हुए मुझ दुखी की दु:खों से रक्षा कीजिए। हे शम्भो, मैं आपको नमस्कार करता हूं।”


न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खं
न मन्त्रो न तीर्थं न वेदो न यज्ञः |
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता
चिदानन्द रूप: शिवोऽहं शिवोऽहम् ||

अर्थ: “न मैं पुण्य हूँ, न पाप, न सुख और न दुःख, न मन्त्र, न तीर्थ, न वेद और न यज्ञ, मैं न भोजन हूँ, न खाया जाने वाला हूँ और न खाने वाला हूँ, मैं चैतन्य रूप हूँ, आनंद हूँ, शिव हूँ, शिव हूँ”


अलसस्य कुतो विद्या अविद्यस्य कुतो धनम् ।
अधनस्य कुतो मित्रममित्रस्य कुतः सुखम् ॥

अर्थ: “आलसी इन्सान को विद्या कहाँ ? विद्याविहीन को धन कहाँ ? धनविहीन को मित्र कहाँ ? और मित्रविहीन को सुख कहाँ ? !! अथार्त जीवन में इंसान को कुछ प्राप्त करना है तो उसे सबसे पहले आलस वाली प्रवृति का त्याग करना होगा”

Geeta Shlok On Karma In Sanskrit

देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति॥

अर्थ: “जैसे इस देह में देही जीवात्मा की कुमार, युवा और वृद्धावस्था होती है वैसे ही उसको अन्य शरीर की प्राप्ति होती है। धीर पुरुष इसमें मोहित नहीं होता है।”


सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि॥

अर्थ: “सुख दुख, लाभ हानि और जय पराजय को समान करके युद्ध के लिये तैयार हो जाओ इस प्रकार तुमको पाप नहीं होगा।”


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

अर्थ: “कर्म करने मात्र में तुम्हारा अधिकार है, फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल के हेतु वाले मत होना और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।”

विद्या पर श्लोक Sanskrit Slokas With Meaning In Hindi On Vidya

विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। 
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

अर्थ: “विद्या से विनय (नम्रता) आती है, विनय से पात्रता (सजनता) आती है पात्रता से धन की प्राप्ति होती है, धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है ।”


दानानां च समस्तानां चत्वार्येतानि भूतले । 
श्रेष्ठानि कन्यागोभूमिविद्या दानानि सर्वदा ॥

अर्थ: “सब दानों में कन्यादान, गोदान, भूमिदान, और विद्यादान सर्वश्रेष्ठ है ।”


नास्ति विद्यासमो बन्धुर्नास्ति विद्यासमः सुहृत् ।
नास्ति विद्यासमं वित्तं नास्ति विद्यासमं सुखम् ॥

अर्थ: “विद्या जैसा बंधु नहीं, विद्या जैसा मित्र नहीं, (और) विद्या जैसा अन्य कोई धन या सुख नहीं ।”


ज्ञातिभि र्वण्टयते नैव चोरेणापि न नीयते ।
दाने नैव क्षयं याति विद्यारत्नं महाधनम् ॥

अर्थ: “यह विद्यारुपी रत्न महान धन है, जिसका वितरण ज्ञातिजनों द्वारा हो नहीं सकता, जिसे चोर ले जा नहीं सकते, और जिसका दान करने से क्षय नहीं होता”

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आशा करता हूँ दोस्तों Sanskrit Slokas For Kids में दी गई जानकारी आपकों पसंद आई होगी. संस्कृत श्लोक सुभाषितानि में हमने आपके साथ 10 sanskrit slogans साझा किये हैं. यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.

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